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Business Business Best Practices

Coke और Pepsi की प्रतिद्वंद्विता ने कैसे मार्केटिंग को दिया नया आयाम

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Coke और Pepsi की प्रतिद्वंद्विता ने कैसे मार्केटिंग को दिया नया आयाम

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Post Highlights

ब्रांडों के बीच प्रतिस्पर्धा (Competition) स्वाभाविक है, लेकिन कुछ प्रतिद्वंद्विताएं (rivalries) इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हैं। ये बात हम सभी जानते हैं कि कोका-कोला और पेप्सी के बीच लंबे समय से प्रतिद्वंद्विता चली आ रही है। "आप क्या लेंगे कोक या पेप्सी?" यह एक ऐसा प्रश्न है जो अक्सर पूछा जाता है, और जो कोक (Coke) और पेप्सी (Pepsi) के महत्व को भी रेखांकित करता है। हालांकि कोक और पेप्सी काफी हद तक समान ही हैं। आज इस ब्लॉग में हम जानेगे कि किस तरह कोक और पेप्सी की प्रतिद्वंद्विता ने मार्केटिंग को नया आयाम दिया। 

आजकल हर दूसरा इंसान Coca-Cola और Pepsi पीता है, इसकी वजह इन कोलड्रिंकस (Cold drinks) का दिलचस्प होना है, और ये दिलचस्प हो भी क्यों ना, आखिरकार ये सॉफ्ट ड्रिंक्स (Soft drinks) के क्षेत्र में काफी पुरानी और विश्वास पात्र कंपनियां हैं। हालांकि इनके टेस्ट के साथ इनकी राइवल कंपनियों की लड़ाई भी उतनी ही पुरानी हैं। ये दोनों कंपनियां हमेशा से आपस में टकराईं हैं और ये लड़ाई आज भी जारी है।

कोक और पेप्सी ने आधुनिक विज्ञापन (modern advertising) की रूपरेखा को आकार देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और यह परिभाषित किया है कि एक ब्रांड (Brand) होने का क्या अर्थ है। हालांकि, कोक और पेप्सी के मार्केटिंग विवादों ने अक्सर व्यापक सामाजिक परिवर्तन और व्यवधान (social change and disruption) को भी प्रतिबिंबित किया है, जो शुरुआती दौर में औद्योगिक विस्तार (industrial expansion), और आज की दुनिया में ब्रांड के उद्देश्य की अवधारणा को भी दर्शाता है। 

जेसी लुइस और हार्वे याज़ीजियन (J.C. Louis and Harvey Yazijian) ने अपनी 1980 की पुस्तक “द कोला वार्स” (The Cola Wars) में दो सॉफ्ट ड्रिंक एम्पायर और उनके कुछ सबसे प्रतिष्ठित और यादगार कोल्ड वॉर के बारे में बहुत विस्तार में लिखा है।

उन्होंने लिखा ‘आधुनिक सभ्यता में दो प्रमुख उपभोक्ता उत्पादों के रूप में, कोक और पेप्सी शायद सभी विज्ञापनों की केंद्रीय विशेषता का प्रतीक बन गए हैं, जो अपने सामान, सेवाओं और पैसों के लेन-देन में सामाजिक मूल्यों (social values) के दृष्टिकोणों को भी शामिल करते हैं। 

कोला वॉर का इतिहास (History of Cola war):

इन दोनों राइवल कंपनियों के बीच लड़ाई  70 के दशक से ही शुरू हो गई थी, जिसे ‘कोला वॉर’ (Cola war) कहा जाता है। कोला वॉर दिलचस्प इसलिए भी थी क्योंकि इन दोनों कंपनियों ने एक दूसरे को मात देने के लिए नई-नई  मार्किट स्ट्रेटजी पर काम किया और मार्केटिंग जगत (Marketing world) को एक नया आयाम दिया। 

आपको बता दें कि कोका-कोला पेप्सिको (PepsiCo) से पहले मार्केट में आई थी और लोगों की पहली पसंद भी थी, इसलिए पेप्सिको को बाजार में पैर जमाने के लिए अपनी मार्केटिंग रणनीति (marketing strategy) में कई बड़े बदलाव करने की आवश्यकता थी। कुछ समय बाद यह नौबत आ गई कि पेप्सी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था, ऐसा पेप्सी के साथ दो बार हुआ जिसके परिणामस्वरूप कंपनी बेचने के हालात हो गए थे। 

आपको बता दें कि रॉय मेगरगेल (Roy Megargel) ने कालेब ब्राधम (Caleb Bradham) से पेप्सी को खरीदा था। लेकिन पेप्सी को भारी नुकसान होता देखकर उस समय, Roy Megargel ने पेप्सी को कोका-कोला को बेचने का निर्णय ले लिया था। लेकिन राइवल कंपनी Coca-Cola ने पेप्सी को खरीदने से मना कर दिया। 

उसके बाद चार्ल्स गुथ (Charles Guth) ने पेप्सी को नई पहचान दी। चार्ल्स गुथ की एक कैंडी की दुकान थी और पेप्सी को बेचने के लिए उन्होंने Coca-Cola से मार्किटिंग प्लेटफॉर्म (marketing platform) के लिए बात की, लेकिन कोका- कोला ने साफ मना कर दिया इस बात से नाराज होकर उन्होंने अपनी दुकान पर कोका-कोला की बोतल रखना बंद कर दिया। हालांकि यह उनके लिए काफी बड़ा रिस्क था। क्योंकि लोगों की जुवान पर कोका-कोला का टेस्ट (taste of coca-cola) था और दूसरी वजह कोका- कोला का शानदार विज्ञापन भी था। चार्ल्स गुथ ने रॉय मेगरगेल के साथ मिलकर पेप्सी के टेस्ट में कुछ बदलाव किए और कैंडी स्टोर पर पेप्सी के कंटेनर भरवा दिए। लोगों को पेप्सी का टेस्ट खूब पसंद आया, लेकिन कोका- कोला को बड़ा झटका तो तब लगा जब पेप्सी ने अपना शानदार प्रोमोशन किया। उन्होंने पेप्सी के विज्ञापन में  कुछ लाइन लिखी थीं जो खूब पसंद की गई थीं। ये लाइन वाल्टर मैक (Walter Mack) ने दी थी और इसके बाद पेप्सिको तेज गति से चल पड़ी। इस बात का अंदाजा शायद उस वक़्त कोका-कोला को नहीं होगा कि बैंगक्रप्ट होने के बाद भी पेप्सी एक दिन उसकी बड़ी प्रतिद्वंद्वी साबित होगी। 

पेप्सी के शानदार और प्रभावी विज्ञापन  

अपने प्रोडक्ट को ग्रो (Grow) करने या मुनाफा बढ़ाने के लिए पेप्सी को मार्केट में अपनी जगह बनानी थी इसीलिए पेप्सी ने बिना देर किए “पेप्सी चैलेंज” कैंपेन की शुरुआत कर दी इस विज्ञापन से पेप्सी को बड़ा मुनाफा हुआ। दरअसल इस विज्ञापन में पेप्सी को लेने वालों की भीड़ दिखाई गई थी, जहां ग्राहकों के सामने दो ड्रिंक पेप्सी और कोका- कोला को पेश किया था। परिणाम यह निकला कि पेप्सी को लोगों ने कोका-कोला से ज्यादा श्रेष्ठता दे दी। इससे Coca-Cola कंपनी में हलचल मच गई और कंपनी को बड़ा नुकसान भी उठाना पड़ा था।

अंतरिक्ष में भी सफलता की जंग 

80 के दशक में दोनों कंपनियां Coca-Cola और Pepsi अंतरिक्ष तक में अपना नाम करना चाहती थीं।  आपको बता दें कि, 1985 में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) को अंतरिक्ष में स्पेस शटल चैलेंजर (Space Shuttle Challenger) भेजना था और इसके अंतरिक्ष यात्रियों के लिए दोनों कंपनियों ने अपने-अपने प्रोडक्ट में बदलाव किए। उन्होंने अपनी सॉफ्ट ड्रिंक्स को जीरो ग्रेविटी या भारहीनता प्रभाव में भी पिये जा सकने के काबिल बनाया। इसके साथ ही, दोनों ही कंपनियों ने अपना बखान करना शुरू कर दिया। Coca-Cola ने दावा किया कि उन्हें ढाई लाख अमेरिकी डॉलर इस पर खर्च किए हैं, जबकि, Pepsico ने दावा किया कि उन्होंने इस पर डेढ़ करोड़ अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं। हालांकि, परिणाम यह निकला कि अंतरिक्ष यात्रियों ने दोनों के ड्रिंक्स को नकार दिया। 

क्रिकेट के मैदान भी कोल्ड वार 

साल 1996 में पहली बार पेप्सी ने क्रिकेट से जुड़कर ऐड निकाला था, जोकि काफी पॉपुलर भी हुआ। क्रिकेट वर्ल्डकप में मशहूर हुई पेप्सी के बाद कोक भी इसमें उतरा और यहीं से दोनों के बीच ऐड वॉर  शुरू हो गया। ऐड वॉर के इस दौर में दोनों ने एक-दूसरे को मात देने की पूरी कोशिश की। 

साल 1996 में भारतीय उपमहाद्वीप में क्रिकेट के वर्ल्ड कप सीरीज में कोक के पास आधिकारिक स्पॉन्सर थी, और उसने शानदार विज्ञापनों की सीरीज भी बनाई थी। कोक को पीछे छोड़ने के लिए पेप्सी ने मार्किट स्ट्रेटेजी बनाई और टैगलाइन दी ‘नथिंग ऑफिसियल अबाउट इट’ (Nothing Official about it.) 

हालांकि, BCCI ने कोक को यह मौका दिया। pepsico ने ठीक इसके बाद एक ऐड निकाला जिसमें उसने क्रिकेटर्स को शामिल किया। इस ऐड वॉर का दूसरा विज्ञापन 1998 में कोक ने एक बार फिर इंडियन मार्केट में अपना नया विज्ञापन पेश किया। इसकी टैगलाइन दी गई ‘ईट, स्लीप, ड्रिंक’ (Eat, Sleep, Drink) यानी ईट क्रिकेट, स्लीप क्रिकेट, ड्रिंक ओनली कोका कोला (eat cricket, sleep cricket, drink only coca cola)। इसके ठीक बाद पेप्सी ने कोक के इस ऐड को फिर काउंटर किया और अपना नया ऐड निकाला। पेप्सी ने इस बार कोक की टैगलाइन को विजुअलाइज करके दिखाया। Coca-Cola ने भी इसे काउंटर किया और 1998 में ही एक प्रिंट ऐड निकाला, जिसमें टैगलाइन दी गई, ‘चलो खा लिया’। 

लेकिन इस ऐड वॉर की जंग में पेप्सी से पिछड़ने के बाद कोका कोला ने अपनी स्ट्रैटजी बदली और कोक की जगह थम्स अप (Thums-Up) को आगे लेकर आया। इसमें Coca-Cola ने पेप्सी के उसी ऐड को टारगेट किया, जिसमें एक बंदर को पेप्सी पीते दिखाया गया था। कोका कोला ने Thums-Up को आगे कर टैगलाइन दी ओये & डॉन्ट बी बंदर टेस्ट द थंडर (Don’t be Bandar (monkey), taste the thunder)। इसके बाद Pepsi ने सचिन तेंडुलकर को लेकर एक ऐड बनाया, जिसकी टैगलाइन दी गई ‘सचिन आला रे’, इसे काउंटर करने के लिए कोक ने लगभग उसी टैगलाइन पर ऐड निकाला ‘कोक आला रे’। 

पेप्सी ने इसके खिलाफ एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Advertising Agencies Association of India) के पास कोक की शिकायत दी। 

भारतीय बाजार का चैलेंज 

भारत के बाजार में उस समय कैम्पा कोला, थम्स अप, लिम्का और गोल्ड स्पॉट जैसे लोकल प्लेयर्स का होल्ड था। पेप्सी और कोक के लिए यहां जगह बनाना बेहद मुश्किल था, लेकिन कोक ने इन ब्रांड को खरीद कर मार्केट में जगह बना ली। लोकल प्लेयर्स के साथ जुड़ने से कोका कोला मजबूत स्थिति में पहुंच गया। Pepsi को यह खटकने लगा, लेकिन उसने यूथ  को टारगेट करके क्रिकेट प्रेमियों के बीच अपनी जगह बना ली। 

आपको बता दें कि कोका कोला के सिर्फ ड्रिंक प्रोडक्टस ही बाजार में हैं जबकि पेप्सी ने फूड चेन बना ली। कोका कोला का टर्नओवर करीब पौने तीन लाख करोड़ रुपए है जबकि पेप्सी का चार लाख करोड़ है। साल 2006 में, इंदिरा नूई पेप्सिको की CEO घोषित की गईं वह समझ गयीं कि आने वाले समय में बाजार में हेल्थ ड्रिंक ज्यादा चलेंगी इसलिए उन्होंने जूस, पानी और चाय पर काम करना शुरू कर दिया। स्टॉक मार्किट की बात करें तो Pepsi का Coca-Cola से बेहतर स्टॉक है।

हालांकि इस कोल्ड वॉर में पेप्सिको Coca-Cola से पीछे ही रहा। दुनियाभर में कोक की हिस्सेदारी 42% थी जबकि पेप्सी की 30%. 

आजकल तमाम ब्रांड्स मार्केटिंग रणनीतियों का उपयोग करके मार्किट में अपनी जगह बना रहे हैं। बिज़नेस में एडवरटाइजिंग और मार्केटिंग का कैसे इस्तेमाल करते हैं ये पेप्सी और कोका-कोला ने प्रस्तुत किया और तभी से लगभग सभी ब्रांड्स अपनी मार्केटिंग नीतियों पर बहुत अधिक खर्च करते हैं जिससे उनकी ब्रांड वैल्यू (Brand Value) बढ़े। 

Think with Niche पर आपके लिए और रोचक विषयों पर लेख उपलब्ध हैं एक अन्य लेख को पढ़ने के लिए कृपया नीचे  दिए लिंक पर क्लिक करे-

एन चंद्रशेखरन - इंटर्न से TATA Sons के चेयरमैन बनने तक का महान सफर

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आजकल हर दूसरा इंसान Coca-Cola और Pepsi पीता है, इसकी वजह इन कोलड्रिंकस (Cold drinks) का दिलचस्प होना है, और ये दिलचस्प हो भी क्यों ना, आखिरकार ये सॉफ्ट ड्रिंक्स (Soft drinks) के क्षेत्र में काफी पुरानी और विश्वास पात्र कंपनियां हैं। हालांकि इनके टेस्ट के साथ इनकी राइवल कंपनियों की लड़ाई भी उतनी ही पुरानी हैं। ये दोनों कंपनियां हमेशा से आपस में टकराईं हैं और ये लड़ाई आज भी जारी है।

कोक और पेप्सी ने आधुनिक विज्ञापन (modern advertising) की रूपरेखा को आकार देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और यह परिभाषित किया है कि एक ब्रांड (Brand) होने का क्या अर्थ है। हालांकि, कोक और पेप्सी के मार्केटिंग विवादों ने अक्सर व्यापक सामाजिक परिवर्तन और व्यवधान (social change and disruption) को भी प्रतिबिंबित किया है, जो शुरुआती दौर में औद्योगिक विस्तार (industrial expansion), और आज की दुनिया में ब्रांड के उद्देश्य की अवधारणा को भी दर्शाता है। 

जेसी लुइस और हार्वे याज़ीजियन (J.C. Louis and Harvey Yazijian) ने अपनी 1980 की पुस्तक “द कोला वार्स” (The Cola Wars) में दो सॉफ्ट ड्रिंक एम्पायर और उनके कुछ सबसे प्रतिष्ठित और यादगार कोल्ड वॉर के बारे में बहुत विस्तार में लिखा है।

उन्होंने लिखा ‘आधुनिक सभ्यता में दो प्रमुख उपभोक्ता उत्पादों के रूप में, कोक और पेप्सी शायद सभी विज्ञापनों की केंद्रीय विशेषता का प्रतीक बन गए हैं, जो अपने सामान, सेवाओं और पैसों के लेन-देन में सामाजिक मूल्यों (social values) के दृष्टिकोणों को भी शामिल करते हैं। 

कोला वॉर का इतिहास (History of Cola war):

इन दोनों राइवल कंपनियों के बीच लड़ाई  70 के दशक से ही शुरू हो गई थी, जिसे ‘कोला वॉर’ (Cola war) कहा जाता है। कोला वॉर दिलचस्प इसलिए भी थी क्योंकि इन दोनों कंपनियों ने एक दूसरे को मात देने के लिए नई-नई  मार्किट स्ट्रेटजी पर काम किया और मार्केटिंग जगत (Marketing world) को एक नया आयाम दिया। 

आपको बता दें कि कोका-कोला पेप्सिको (PepsiCo) से पहले मार्केट में आई थी और लोगों की पहली पसंद भी थी, इसलिए पेप्सिको को बाजार में पैर जमाने के लिए अपनी मार्केटिंग रणनीति (marketing strategy) में कई बड़े बदलाव करने की आवश्यकता थी। कुछ समय बाद यह नौबत आ गई कि पेप्सी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था, ऐसा पेप्सी के साथ दो बार हुआ जिसके परिणामस्वरूप कंपनी बेचने के हालात हो गए थे। 

आपको बता दें कि रॉय मेगरगेल (Roy Megargel) ने कालेब ब्राधम (Caleb Bradham) से पेप्सी को खरीदा था। लेकिन पेप्सी को भारी नुकसान होता देखकर उस समय, Roy Megargel ने पेप्सी को कोका-कोला को बेचने का निर्णय ले लिया था। लेकिन राइवल कंपनी Coca-Cola ने पेप्सी को खरीदने से मना कर दिया। 

उसके बाद चार्ल्स गुथ (Charles Guth) ने पेप्सी को नई पहचान दी। चार्ल्स गुथ की एक कैंडी की दुकान थी और पेप्सी को बेचने के लिए उन्होंने Coca-Cola से मार्किटिंग प्लेटफॉर्म (marketing platform) के लिए बात की, लेकिन कोका- कोला ने साफ मना कर दिया इस बात से नाराज होकर उन्होंने अपनी दुकान पर कोका-कोला की बोतल रखना बंद कर दिया। हालांकि यह उनके लिए काफी बड़ा रिस्क था। क्योंकि लोगों की जुवान पर कोका-कोला का टेस्ट (taste of coca-cola) था और दूसरी वजह कोका- कोला का शानदार विज्ञापन भी था। चार्ल्स गुथ ने रॉय मेगरगेल के साथ मिलकर पेप्सी के टेस्ट में कुछ बदलाव किए और कैंडी स्टोर पर पेप्सी के कंटेनर भरवा दिए। लोगों को पेप्सी का टेस्ट खूब पसंद आया, लेकिन कोका- कोला को बड़ा झटका तो तब लगा जब पेप्सी ने अपना शानदार प्रोमोशन किया। उन्होंने पेप्सी के विज्ञापन में  कुछ लाइन लिखी थीं जो खूब पसंद की गई थीं। ये लाइन वाल्टर मैक (Walter Mack) ने दी थी और इसके बाद पेप्सिको तेज गति से चल पड़ी। इस बात का अंदाजा शायद उस वक़्त कोका-कोला को नहीं होगा कि बैंगक्रप्ट होने के बाद भी पेप्सी एक दिन उसकी बड़ी प्रतिद्वंद्वी साबित होगी। 

पेप्सी के शानदार और प्रभावी विज्ञापन  

अपने प्रोडक्ट को ग्रो (Grow) करने या मुनाफा बढ़ाने के लिए पेप्सी को मार्केट में अपनी जगह बनानी थी इसीलिए पेप्सी ने बिना देर किए “पेप्सी चैलेंज” कैंपेन की शुरुआत कर दी इस विज्ञापन से पेप्सी को बड़ा मुनाफा हुआ। दरअसल इस विज्ञापन में पेप्सी को लेने वालों की भीड़ दिखाई गई थी, जहां ग्राहकों के सामने दो ड्रिंक पेप्सी और कोका- कोला को पेश किया था। परिणाम यह निकला कि पेप्सी को लोगों ने कोका-कोला से ज्यादा श्रेष्ठता दे दी। इससे Coca-Cola कंपनी में हलचल मच गई और कंपनी को बड़ा नुकसान भी उठाना पड़ा था।

अंतरिक्ष में भी सफलता की जंग 

80 के दशक में दोनों कंपनियां Coca-Cola और Pepsi अंतरिक्ष तक में अपना नाम करना चाहती थीं।  आपको बता दें कि, 1985 में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) को अंतरिक्ष में स्पेस शटल चैलेंजर (Space Shuttle Challenger) भेजना था और इसके अंतरिक्ष यात्रियों के लिए दोनों कंपनियों ने अपने-अपने प्रोडक्ट में बदलाव किए। उन्होंने अपनी सॉफ्ट ड्रिंक्स को जीरो ग्रेविटी या भारहीनता प्रभाव में भी पिये जा सकने के काबिल बनाया। इसके साथ ही, दोनों ही कंपनियों ने अपना बखान करना शुरू कर दिया। Coca-Cola ने दावा किया कि उन्हें ढाई लाख अमेरिकी डॉलर इस पर खर्च किए हैं, जबकि, Pepsico ने दावा किया कि उन्होंने इस पर डेढ़ करोड़ अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं। हालांकि, परिणाम यह निकला कि अंतरिक्ष यात्रियों ने दोनों के ड्रिंक्स को नकार दिया। 

क्रिकेट के मैदान भी कोल्ड वार 

साल 1996 में पहली बार पेप्सी ने क्रिकेट से जुड़कर ऐड निकाला था, जोकि काफी पॉपुलर भी हुआ। क्रिकेट वर्ल्डकप में मशहूर हुई पेप्सी के बाद कोक भी इसमें उतरा और यहीं से दोनों के बीच ऐड वॉर  शुरू हो गया। ऐड वॉर के इस दौर में दोनों ने एक-दूसरे को मात देने की पूरी कोशिश की। 

साल 1996 में भारतीय उपमहाद्वीप में क्रिकेट के वर्ल्ड कप सीरीज में कोक के पास आधिकारिक स्पॉन्सर थी, और उसने शानदार विज्ञापनों की सीरीज भी बनाई थी। कोक को पीछे छोड़ने के लिए पेप्सी ने मार्किट स्ट्रेटेजी बनाई और टैगलाइन दी ‘नथिंग ऑफिसियल अबाउट इट’ (Nothing Official about it.) 

हालांकि, BCCI ने कोक को यह मौका दिया। pepsico ने ठीक इसके बाद एक ऐड निकाला जिसमें उसने क्रिकेटर्स को शामिल किया। इस ऐड वॉर का दूसरा विज्ञापन 1998 में कोक ने एक बार फिर इंडियन मार्केट में अपना नया विज्ञापन पेश किया। इसकी टैगलाइन दी गई ‘ईट, स्लीप, ड्रिंक’ (Eat, Sleep, Drink) यानी ईट क्रिकेट, स्लीप क्रिकेट, ड्रिंक ओनली कोका कोला (eat cricket, sleep cricket, drink only coca cola)। इसके ठीक बाद पेप्सी ने कोक के इस ऐड को फिर काउंटर किया और अपना नया ऐड निकाला। पेप्सी ने इस बार कोक की टैगलाइन को विजुअलाइज करके दिखाया। Coca-Cola ने भी इसे काउंटर किया और 1998 में ही एक प्रिंट ऐड निकाला, जिसमें टैगलाइन दी गई, ‘चलो खा लिया’। 

लेकिन इस ऐड वॉर की जंग में पेप्सी से पिछड़ने के बाद कोका कोला ने अपनी स्ट्रैटजी बदली और कोक की जगह थम्स अप (Thums-Up) को आगे लेकर आया। इसमें Coca-Cola ने पेप्सी के उसी ऐड को टारगेट किया, जिसमें एक बंदर को पेप्सी पीते दिखाया गया था। कोका कोला ने Thums-Up को आगे कर टैगलाइन दी ओये & डॉन्ट बी बंदर टेस्ट द थंडर (Don’t be Bandar (monkey), taste the thunder)। इसके बाद Pepsi ने सचिन तेंडुलकर को लेकर एक ऐड बनाया, जिसकी टैगलाइन दी गई ‘सचिन आला रे’, इसे काउंटर करने के लिए कोक ने लगभग उसी टैगलाइन पर ऐड निकाला ‘कोक आला रे’। 

पेप्सी ने इसके खिलाफ एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Advertising Agencies Association of India) के पास कोक की शिकायत दी। 

भारतीय बाजार का चैलेंज 

भारत के बाजार में उस समय कैम्पा कोला, थम्स अप, लिम्का और गोल्ड स्पॉट जैसे लोकल प्लेयर्स का होल्ड था। पेप्सी और कोक के लिए यहां जगह बनाना बेहद मुश्किल था, लेकिन कोक ने इन ब्रांड को खरीद कर मार्केट में जगह बना ली। लोकल प्लेयर्स के साथ जुड़ने से कोका कोला मजबूत स्थिति में पहुंच गया। Pepsi को यह खटकने लगा, लेकिन उसने यूथ  को टारगेट करके क्रिकेट प्रेमियों के बीच अपनी जगह बना ली। 

आपको बता दें कि कोका कोला के सिर्फ ड्रिंक प्रोडक्टस ही बाजार में हैं जबकि पेप्सी ने फूड चेन बना ली। कोका कोला का टर्नओवर करीब पौने तीन लाख करोड़ रुपए है जबकि पेप्सी का चार लाख करोड़ है। साल 2006 में, इंदिरा नूई पेप्सिको की CEO घोषित की गईं वह समझ गयीं कि आने वाले समय में बाजार में हेल्थ ड्रिंक ज्यादा चलेंगी इसलिए उन्होंने जूस, पानी और चाय पर काम करना शुरू कर दिया। स्टॉक मार्किट की बात करें तो Pepsi का Coca-Cola से बेहतर स्टॉक है।

हालांकि इस कोल्ड वॉर में पेप्सिको Coca-Cola से पीछे ही रहा। दुनियाभर में कोक की हिस्सेदारी 42% थी जबकि पेप्सी की 30%. 

आजकल तमाम ब्रांड्स मार्केटिंग रणनीतियों का उपयोग करके मार्किट में अपनी जगह बना रहे हैं। बिज़नेस में एडवरटाइजिंग और मार्केटिंग का कैसे इस्तेमाल करते हैं ये पेप्सी और कोका-कोला ने प्रस्तुत किया और तभी से लगभग सभी ब्रांड्स अपनी मार्केटिंग नीतियों पर बहुत अधिक खर्च करते हैं जिससे उनकी ब्रांड वैल्यू (Brand Value) बढ़े। 

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एन चंद्रशेखरन - इंटर्न से TATA Sons के चेयरमैन बनने तक का महान सफर

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