वैश्विक व्यवसायों में ESG का बढ़ता महत्व: नियमों से परिणामों तक
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हाल के वर्षों में पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस (ESG) रणनीतियाँ Environmental, Social, and Governance (ESG) strategies केवल औपचारिक नियमों का पालन भर नहीं रह गई हैं, बल्कि वैश्विक व्यवसायों की मुख्य रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।
पहले ESG को स्वैच्छिक सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब यह सख्त ढाँचों, अनिवार्य मानकों, निवेशकों के आकलन और ऐसे मापने योग्य परिणामों तक पहुँच चुका है, जो कंपनियों के मूल्यांकन और दीर्घकालिक सफलता को सीधे प्रभावित करते हैं।
आज तकनीक, वित्त, मैन्युफैक्चरिंग और परिवहन जैसे लगभग सभी क्षेत्रों में कंपनियों से अपेक्षा की जाती है कि वे ESG को अपने हर फैसले में शामिल करें। इसमें बोर्डरूम में होने वाले निर्णय, सप्लाई चेन प्रबंधन और नए उत्पादों में नवाचार तक सब कुछ शामिल है। ESG अब सिर्फ एक रिपोर्ट नहीं, बल्कि बिज़नेस चलाने का तरीका बनता जा रहा है।
इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं। सरकारों और नियामकों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। निवेशक ज्यादा पारदर्शिता चाहते हैं और यह जानना चाहते हैं कि कंपनियाँ पर्यावरण, समाज और गवर्नेंस से जुड़े जोखिमों को कैसे संभाल रही हैं। साथ ही, आम लोग और अन्य हितधारक भी जलवायु परिवर्तन, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक संचालन को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो चुके हैं।
Samsung, Toyota और Maersk जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियों ने ESG को लेकर महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। वहीं CSRD, ISSB, GRI और TCFD जैसे मानक तय करने वाले संगठन यह तय कर रहे हैं कि कंपनियाँ अपनी ESG जानकारी किस तरह से साझा करें और उसका मूल्यांकन कैसे किया जाए। इससे ESG रिपोर्टिंग ज्यादा व्यवस्थित और भरोसेमंद बन रही है।
इसके साथ ही तकनीकी प्रगति ने ESG को और मजबूत किया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डिजिटल डेटा प्लेटफॉर्म की मदद से कंपनियाँ अब पारंपरिक ESG रिपोर्टिंग से आगे बढ़कर रियल-टाइम डेटा और सटीक आंकड़ों के जरिए अपने प्रदर्शन को माप पा रही हैं। इससे ESG केवल कागज़ी प्रक्रिया न रहकर एक सक्रिय और परिणाम-आधारित प्रणाली बनती जा रही है।
यह लेख ESG रणनीतियों ESG strategies में आए इसी बदलाव को विस्तार से समझाता है। इसमें पुराने रिपोर्टिंग तरीकों से लेकर आज के परिणाम-केंद्रित दृष्टिकोण तक की पूरी यात्रा को बताया गया है। साथ ही, इसमें प्रमुख ढाँचों, मौजूदा रुझानों, चुनौतियों, अहम मेट्रिक्स, कंपनियों के उदाहरणों और भविष्य की दिशा पर भी चर्चा की गई है, जो ESG के अगले दौर को आकार दे रहे हैं।
ग्लोबल कंपनियों में नतीजे-आधारित ESG रणनीतियों का उदय The rise of results-oriented ESG strategies in global companies
1. ESG की शुरुआत और शुरुआती रिपोर्टिंग (2015 से पहले) (The Origin of ESG and Early Reporting – Pre-2015)
ESG यानी पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस की अवधारणा की जड़ें कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR), नैतिक निवेश और सामाजिक रूप से जिम्मेदार व्यावसायिक तरीकों में हैं, जो 20वीं सदी के अंत में लोकप्रिय हुए थे। उस समय कंपनियाँ मुख्य रूप से दान, सामुदायिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और नैतिक आचरण पर ध्यान देती थीं। इसका उद्देश्य बिज़नेस जोखिम कम करना या मूल्य निर्माण नहीं, बल्कि ब्रांड की छवि सुधारना और हितधारकों का भरोसा जीतना होता था।
इस दौर में ESG रिपोर्टिंग पूरी तरह स्वैच्छिक थी और ज्यादातर विवरणात्मक भाषा में होती थी। कंपनियाँ अपनी सस्टेनेबिलिटी या CSR रिपोर्ट में कार्बन उत्सर्जन कम करने के वादे, कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े कार्यक्रम, विविधता को बढ़ावा देने के प्रयास और दान गतिविधियों का ज़िक्र करती थीं। हालांकि, इन रिपोर्टों में मानकीकृत आंकड़े, बाहरी सत्यापन और वित्तीय प्रदर्शन से सीधा संबंध अक्सर नहीं होता था।
इसी कारण ESG रिपोर्टिंग उस समय प्रदर्शन को मापने का साधन नहीं, बल्कि एक संचार गतिविधि बनकर रह गई थी। अलग-अलग कंपनियों की रिपोर्टों की तुलना करना भी मुश्किल था।
इस चरण में दो अहम पहलें सामने आईं।
पहली, ग्लोबल रिपोर्टिंग इनिशिएटिव (GRI), जिसने कंपनियों को पर्यावरणीय प्रभाव, श्रम प्रथाओं, मानवाधिकार और गवर्नेंस से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए दिशा-निर्देश दिए।
दूसरी, संयुक्त राष्ट्र के जिम्मेदार निवेश सिद्धांत (UNPRI) United Nations Principles for Responsible Investment (UNPRI), जिसका उद्देश्य निवेशकों को अपने निवेश निर्णयों में ESG कारकों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करना था।
इन प्रयासों के बावजूद, शुरुआती ESG खुलासे असंगत और व्यक्तिपरक बने रहे। ESG प्रदर्शन को न तो कॉरपोरेट रणनीति में शामिल किया गया और न ही पूंजी आवंटन के फैसलों से जोड़ा गया। अधिकतर ध्यान इरादों पर था, न कि ठोस नतीजों पर।
फिर भी, इस दौर ने ESG को एक मान्यता प्राप्त व्यावसायिक अवधारणा के रूप में स्थापित किया और आगे चलकर मानकीकरण की नींव रखी।
2. मानकीकरण और फ्रेमवर्क का विकास (2015–2022) (Standardization and Framework Development – 2015 to 2022)
2015 से 2022 के बीच का समय ESG के विकास में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। जलवायु परिवर्तन, सामाजिक असमानता, कॉरपोरेट गड़बड़ियों और बड़े जोखिमों को लेकर जागरूकता बढ़ने लगी। निवेशकों, नियामकों और समाज ने कंपनियों से ज्यादा भरोसेमंद और तुलनात्मक ESG जानकारी की मांग शुरू कर दी।
इस दौर में ESG स्वैच्छिक कहानी-कहानी से निकलकर एक संरचित और डेटा-आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली बनने लगा। कई वैश्विक फ्रेमवर्क सामने आए या बड़े पैमाने पर अपनाए गए।
ग्लोबल रिपोर्टिंग इनिशिएटिव (GRI) ने सस्टेनेबिलिटी प्रभाव और हितधारकों के लिए पारदर्शिता पर जोर दिया।
सस्टेनेबिलिटी अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स बोर्ड (SASB) ने अलग-अलग उद्योगों के लिए खास ESG मेट्रिक्स तय किए, ताकि वित्तीय रूप से महत्वपूर्ण जोखिम और अवसर पहचाने जा सकें।
क्लाइमेट-रिलेटेड फाइनेंशियल डिस्क्लोजर टास्क फोर्स (TCFD) ने कंपनियों को जलवायु जोखिम, भविष्य के परिदृश्य और गवर्नेंस ढांचे पर रिपोर्ट करने की दिशा दिखाई।
कार्बन डिस्क्लोजर प्रोजेक्ट (CDP) ने उत्सर्जन, जल उपयोग और वनों की कटाई से जुड़े पर्यावरणीय डेटा साझा करने का मंच दिया।
इन फ्रेमवर्क्स की वजह से ESG डेटा ज्यादा तुलनात्मक, भरोसेमंद और उपयोगी बनने लगा। कंपनियाँ अब ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, ऊर्जा दक्षता, कचरा प्रबंधन, कर्मचारियों के छोड़ने की दर और बोर्ड की संरचना जैसे ठोस आंकड़ों को ट्रैक करने लगीं।
धीरे-धीरे ESG मेट्रिक्स कॉरपोरेट जोखिम मूल्यांकन, सप्लाई चेन रणनीति और दीर्घकालिक वित्तीय योजना का हिस्सा बन गए। 2020 के शुरुआती वर्षों तक ESG रिपोर्टिंग बड़ी कंपनियों के लिए आम बात बन चुकी थी।
2023 तक लगभग 90 प्रतिशत S&P 500 कंपनियाँ ESG या सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट प्रकाशित करने लगी थीं। यह दर्शाता है कि ESG अब स्वैच्छिक पहल नहीं, बल्कि एक अपेक्षित कॉरपोरेट अभ्यास बन चुका था। सबसे अहम बात यह रही कि ESG डेटा का असर अब क्रेडिट रेटिंग, पूंजी की लागत और शेयरधारकों के फैसलों पर भी दिखने लगा, जिससे इसका सीधा संबंध वित्तीय प्रदर्शन से जुड़ गया।
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3. नियामकीय बदलाव और अनिवार्य ESG खुलासे (2023–वर्तमान) (Regulatory Shifts and Mandatory Disclosure – 2023 to Present)
2023 के बाद से ESG एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है, जहाँ इसका मुख्य आधार नियामकीय सख्ती और अनिवार्य रिपोर्टिंग बन गई है। अब सरकारें और नियामक ESG से जुड़े जोखिमों को वित्तीय रूप से महत्वपूर्ण मानने लगी हैं। इसी कारण कंपनियों से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे मानकीकृत, ऑडिट योग्य और लागू किए जा सकने वाले ESG खुलासे करें।
यूरोपीय संघ का कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग डायरेक्टिव (CSRD) (EU’s Corporate Sustainability Reporting Directive – CSRD)
CSRD को दुनिया के सबसे व्यापक ESG नियामकीय ढाँचों में से एक माना जाता है। इसके तहत लगभग 50,000 कंपनियों के लिए ESG रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है, जिनमें वे गैर-यूरोपीय कंपनियाँ भी शामिल हैं जिनका यूरोप में बड़ा कारोबार है। इस नियम के तहत कंपनियों को मानकीकृत ESG डेटा साझा करना होता है, डबल मैटेरियलिटी असेसमेंट करना पड़ता है और रिपोर्ट को बाहरी ऑडिट से सत्यापित कराना होता है।
इसने यूरोप में ESG को केवल अनुपालन की प्रक्रिया न रखकर कॉरपोरेट गवर्नेंस और जोखिम प्रबंधन की मुख्य प्राथमिकता बना दिया है। अब कंपनियों के लिए ESG बोर्ड स्तर का मुद्दा बन चुका है।
इंटरनेशनल सस्टेनेबिलिटी स्टैंडर्ड्स बोर्ड (ISSB) (International Sustainability Standards Board – ISSB)
ISSB का उद्देश्य दुनिया भर में सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग के लिए एक समान आधार तैयार करना है। यह TCFD और SASB जैसे मौजूदा फ्रेमवर्क्स की बेहतरीन प्रक्रियाओं को एक साथ लाता है। इसके मानक ESG रिपोर्टिंग को वित्तीय रिपोर्टिंग से जोड़ते हैं, ताकि निवेशक सस्टेनेबिलिटी जोखिमों को वित्तीय आंकड़ों के साथ समझ सकें।
एशिया-पैसिफिक, मिडिल ईस्ट और लैटिन अमेरिका के कई देशों ने ISSB मानकों को अपनाने या उनके अनुरूप अपने नियम बनाने की घोषणा की है। इससे वैश्विक स्तर पर ESG रिपोर्टिंग में एकरूपता आने की उम्मीद है।
संयुक्त राज्य अमेरिका में क्लाइमेट डिस्क्लोजर की स्थिति (United States Climate Disclosure Landscape)
अमेरिका में सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा प्रस्तावित जलवायु से जुड़े खुलासे के नियमों पर काफी बहस हुई है। निवेशक जलवायु पारदर्शिता की मजबूत मांग कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों के कारण इन नियमों को लागू करने की प्रक्रिया धीमी रही है।
इस स्थिति से यह साफ होता है कि ESG रणनीतियाँ अब क्षेत्रीय नियमों और राजनीतिक माहौल से काफी हद तक प्रभावित हो रही हैं। इसी वजह से बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अलग-अलग देशों के हिसाब से लचीली ESG रणनीतियाँ अपना रही हैं।
भारत का ESG रेटिंग और अनुपालन ढांचा (India’s ESG Rating and Compliance Framework)
भारत में ESG को लेकर नियामकीय निगरानी को मजबूत किया गया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ऐसे नियम लागू किए हैं, जिनके तहत यदि कंपनियाँ अनिवार्य सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट, जैसे बिज़नेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (BRSR), समय पर जमा नहीं करतीं तो उनकी ESG रेटिंग वापस ली जा सकती है।
यह कदम खासतौर पर सूचीबद्ध कंपनियों के लिए जवाबदेही, डेटा की शुद्धता और पारदर्शिता पर भारत के बढ़ते फोकस को दर्शाता है।
यह चरण क्यों महत्वपूर्ण है (Why This Phase Matters)
स्वैच्छिक ESG रिपोर्टिंग से अनिवार्य, ऑडिटेड और तुलनात्मक खुलासों की ओर बढ़ने से कंपनियों का व्यवहार पूरी तरह बदल गया है। अब ESG केवल इरादों या ब्रांडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि ठोस नतीजों, नियामकीय अनुपालन और दीर्घकालिक मूल्य निर्माण से जुड़ चुका है।
जो कंपनियाँ इस बदलाव के साथ खुद को नहीं ढाल पातीं, उन्हें ज्यादा अनुपालन लागत, छवि को नुकसान और वैश्विक पूंजी बाजारों तक सीमित पहुंच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
4. ESG का मुख्य बिज़नेस रणनीति में एकीकरण (Integration of ESG into Core Business Strategy)
शुरुआती दौर में ESG गतिविधियाँ अधिकतर अलग-थलग रिपोर्टिंग तक सीमित थीं और उनका सीधा संबंध वित्तीय प्रदर्शन से नहीं होता था। आज स्थिति बदल चुकी है। कंपनियाँ ESG को अपनी रणनीतिक योजना, जोखिम प्रबंधन और विकास लक्ष्यों का हिस्सा बना रही हैं। इस चरण को अक्सर ESG 2.0 कहा जाता है।
अब कंपनियाँ ESG लक्ष्यों को रोज़मर्रा के ऑपरेशनल संकेतकों से जोड़ रही हैं। वरिष्ठ प्रबंधन और शीर्ष अधिकारियों के वेतन और प्रोत्साहन को भी सस्टेनेबिलिटी के नतीजों से जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा, पूंजी निवेश और फंडिंग के फैसलों में भी ESG को अहम मानदंड बनाया जा रहा है।
ग्रीन बॉन्ड, सस्टेनेबल बॉन्ड और सस्टेनेबिलिटी-लिंक्ड लोन जैसे साधनों का इस्तेमाल अब रणनीतिक रूप से किया जा रहा है। KPMG की एक स्टडी के अनुसार, उभरते बाजारों में लगभग 51 प्रतिशत कंपनियाँ ग्रीन बॉन्ड जैसे सस्टेनेबल फाइनेंस इंस्ट्रूमेंट्स का उपयोग कर रही हैं। इससे साफ है कि ESG अब सिर्फ रिपोर्टिंग का विषय नहीं, बल्कि बिज़नेस ग्रोथ और वित्तीय फैसलों का अहम हिस्सा बन चुका है।
5. मापने योग्य परिणाम और ESG के नतीजे (Measurable Outcomes and ESG Results)
अब ESG रिपोर्टिंग एक ऐसे चरण में पहुँच चुकी है, जहाँ इसका सीधा संबंध बिज़नेस के वास्तविक नतीजों से जुड़ गया है। कंपनियाँ केवल जानकारी साझा नहीं कर रहीं, बल्कि ESG से जुड़े प्रदर्शन को अपने संचालन और वित्तीय परिणामों से जोड़कर देख रही हैं।
5.1 पर्यावरण से जुड़े परिणाम (Environmental Results)
आज कंपनियाँ पर्यावरण से जुड़े ऐसे नतीजों को माप रही हैं, जिन्हें स्पष्ट रूप से आंकड़ों में दिखाया जा सकता है। इनमें प्रमुख रूप से कार्बन उत्सर्जन में कमी, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, कचरे के पुनर्चक्रण की दर और पानी के कुशल इस्तेमाल जैसे संकेतक शामिल हैं।
इन मेट्रिक्स को अक्सर बाहरी एजेंसियों द्वारा सत्यापित किया जाता है और इन्हें वैज्ञानिक आधार पर तय किए गए लक्ष्यों से जोड़ा जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि कंपनियों के पर्यावरणीय दावे सिर्फ कागज़ी न होकर वास्तविक हों।
5.2 सामाजिक प्रदर्शन (Social Performance)
ESG के सामाजिक पहलू में भी अब ठोस मापदंडों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें कार्यबल में विविधता और समावेशन, कर्मचारियों की सुरक्षा और प्रशिक्षण, समुदायों पर पड़ने वाला प्रभाव और मानवाधिकारों का पालन शामिल है।
इसके साथ ही, हितधारकों के साथ संवाद और सामाजिक प्रभाव को मापना भी कंपनियों की प्राथमिकता बनता जा रहा है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कंपनी की गतिविधियाँ समाज पर किस तरह का असर डाल रही हैं।
5.3 गवर्नेंस से जुड़े परिणाम (Governance Results)
गवर्नेंस से जुड़े नतीजों में बोर्ड की विविधता, भ्रष्टाचार रोकने की नीतियाँ, नैतिक सप्लाई चेन प्रथाएँ और डेटा तथा साइबर सुरक्षा नीतियाँ शामिल होती हैं।
इनका सीधा असर कंपनी के जोखिम प्रबंधन और निवेशकों के भरोसे पर पड़ता है। मजबूत गवर्नेंस ढांचा कंपनियों को लंबे समय में अधिक स्थिर और विश्वसनीय बनाता है।
6. निवेशक व्यवहार और ESG के प्रभाव (Investor Dynamics and ESG Outcomes)
6.1 पूंजी प्रवाह पर प्रभाव (Impact on Capital Flows)
अब निवेशक केवल ESG रिपोर्ट देखने तक सीमित नहीं हैं। वे उन कंपनियों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जिनके ESG नतीजे विश्वसनीय और ठोस हैं। करीब 93 प्रतिशत संस्थागत निवेशक ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता देते हैं, जो ESG को अपनी वित्तीय रिपोर्टिंग में भी शामिल करती हैं।
इससे साफ है कि ESG प्रदर्शन अब पूंजी तक पहुंच और निवेश के फैसलों में अहम भूमिका निभा रहा है।
6.2 विरोध और चुनौतियाँ (Backlash and Challenges)
हालाँकि ESG को बड़े पैमाने पर अपनाया गया है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में इसके खिलाफ प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है। खासकर अमेरिका में ESG से जुड़े निवेशक प्रस्तावों को समर्थन 2024 में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया।
इसके अलावा, ग्रीनवॉशिंग यानी झूठे या बढ़ा-चढ़ाकर किए गए पर्यावरणीय दावों को लेकर चिंताओं के कारण ESG फंड्स की आय वृद्धि भी धीमी पड़ गई है। इससे सस्टेनेबल निवेश में पहले दिखा तेज उछाल अब कुछ हद तक ठहर गया है।
7. तकनीक, डेटा और भविष्य के समाधान (Technology, Data and Future Solutions)
तकनीकी नवाचार ESG रिपोर्टिंग और उसके नतीजों को पूरी तरह बदल रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से कंपनियाँ अब रियल-टाइम डेटा इकट्ठा कर पा रही हैं और भविष्य के जोखिमों का अनुमान लगा पा रही हैं।
ब्लॉकचेन तकनीक सप्लाई चेन से जुड़े आंकड़ों में पारदर्शिता और सत्यापन सुनिश्चित करने में मदद कर रही है। वहीं क्लाउड-आधारित ESG प्लेटफॉर्म डेटा को अपने आप एकत्र करते हैं और अलग-अलग फ्रेमवर्क्स के अनुसार रिपोर्टिंग को आसान बनाते हैं।
इसके अलावा, जेनरेटिव AI जैसी उन्नत तकनीकें जटिल डेटा का तेजी से विश्लेषण कर कंपनियों के ESG प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद कर रही हैं। डिजिटल नवाचार और सस्टेनेबिलिटी के बीच यह जुड़ाव भविष्य में ESG को और प्रभावी बनाने वाला है।
8. वास्तविक दुनिया के कॉरपोरेट ESG उदाहरण (Real-World Corporate ESG Examples)
आज कई बड़ी वैश्विक कंपनियाँ ESG को केवल रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं रख रही हैं, बल्कि इसे अपने वास्तविक बिज़नेस प्रदर्शन से जोड़ रही हैं।
Samsung
Samsung जलवायु कार्रवाई, रीसाइक्लिंग और सामाजिक जिम्मेदारियों पर विशेष ध्यान देता है। कंपनी ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और संसाधनों के दोबारा उपयोग यानी सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करती है।
Toyota
Toyota अपने ESG प्रयासों में जल संरक्षण, स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ाव और कचरा प्रबंधन पर काम कर रही है। कंपनी का फोकस पर्यावरण के साथ-साथ समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने पर भी है।
Maersk
Maersk 14 अलग-अलग ESG श्रेणियों पर निगरानी रखती है और 2040 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी डी-कार्बनाइजेशन को अपनी दीर्घकालिक रणनीति का मुख्य हिस्सा मानती है।
ये उदाहरण दिखाते हैं कि ESG रणनीतियाँ अब केवल रिपोर्ट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मापने योग्य प्रदर्शन और लंबे समय के बिज़नेस बदलाव का जरिया बन चुकी हैं।
9. ESG को लागू करने में चुनौतियाँ (Challenges in ESG Implementation)
ESG में काफी प्रगति के बावजूद कंपनियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अलग-अलग फ्रेमवर्क्स में एकरूपता की कमी के कारण रिपोर्टिंग जटिल हो जाती है। ESG से जुड़ा डेटा इकट्ठा करना और उसे अलग-अलग प्रणालियों से जोड़ना समय और संसाधन दोनों की मांग करता है।
इसके अलावा, राजनीतिक और नियामकीय बदलाव भी निवेशकों और कंपनियों की प्रतिबद्धता को प्रभावित करते हैं। ये चुनौतियाँ यह साफ करती हैं कि ESG भले ही एक जरूरी रणनीतिक लक्ष्य बन चुका हो, लेकिन इसे सफलतापूर्वक लागू करने के लिए अलग-अलग विभागों और प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
10. ESG रणनीति का भविष्य (The Future of ESG Strategy)
आने वाले समय में ESG रिपोर्टिंग और भी ज्यादा रियल-टाइम और गतिशील होती जाएगी। वित्तीय खुलासों के साथ ESG का गहरा एकीकरण होगा, जिससे कंपनियों के प्रदर्शन की एक समग्र तस्वीर सामने आएगी।
सामाजिक प्रभाव और समुदायों पर पड़ने वाले असर को मापने पर भी पहले से ज्यादा जोर दिया जाएगा। जैसे-जैसे ESG विकसित हो रहा है, वे कंपनियाँ आगे निकलेंगी जो केवल नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि परिणाम-आधारित रणनीतियाँ अपनाएँगी। ऐसी कंपनियाँ निवेशकों का भरोसा और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दोनों हासिल करेंगी।
केस स्टडी: 2026 के ESG लीडर्स (Case Studies: The Leaders of 2026)
उदाहरण 1: Patagonia का सर्कुलर मॉडल
(Example 1: Patagonia’s Circular Model)
2026 तक Patagonia लगभग पूरी तरह “रीसेल और रिपेयर” मॉडल पर काम कर रही है। कंपनी अब सिर्फ जैकेट नहीं बेचती, बल्कि उनके पूरे जीवन-चक्र से जुड़ी सेवाएँ देती है। इससे कंपनी की कमाई को प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग से अलग किया जा सका है।
उदाहरण 2: Microsoft का वाटर पॉजिटिव लक्ष्य (Example 2: Microsoft’s Water Positive Goal)
Microsoft 2030 तक “वाटर पॉजिटिव” बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2026 में कंपनी अपने डेटा सेंटर्स में AI आधारित कूलिंग सिस्टम का उपयोग कर रही है, जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत कम पानी का इस्तेमाल करते हैं। यह साबित करता है कि सस्टेनेबिलिटी और हाई-टेक विकास साथ-साथ संभव हैं।
उदाहरण 3: SMEs की भागीदारी – ग्रीन रिपल (Example 3: SME Integration – The Green Ripple)
छोटे और मध्यम उद्यमों यानी SMEs को भी अब ESG सिस्टम का हिस्सा बनाया जा रहा है। चूँकि ये कंपनियाँ बड़ी कंपनियों की सप्लाई चेन का हिस्सा हैं, इसलिए ये Salesforce Net Zero Cloud जैसे टूल्स का उपयोग करके अपने ESG डेटा को अपने बड़े ग्राहकों के साथ ऑटोमैटिक रूप से साझा कर रही हैं। इससे ये वैश्विक सप्लाई चेन से बाहर होने से बच रही हैं।
निष्कर्ष: एकीकृत भविष्य (Conclusion: The Integrated Future)
ESG का रिपोर्टिंग से परिणामों की ओर बढ़ना सिर्फ एक कॉरपोरेट ट्रेंड नहीं है, बल्कि यह वैश्विक पूंजीवाद में एक बुनियादी बदलाव को दर्शाता है। 2026 तक सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट अलग दस्तावेज़ नहीं रह गई हैं, बल्कि वे इंटीग्रेटेड एनुअल रिपोर्ट का हिस्सा बन चुकी हैं।
जो कंपनियाँ आगे बढ़ी हैं, उन्होंने ESG को एक बोझ नहीं, बल्कि प्रदर्शन बढ़ाने वाला इंजन माना है। उन्होंने AI के जरिए पारदर्शिता हासिल की, डबल मैटेरियलिटी से बेहतर रणनीति बनाई और ट्रांज़िशन फाइनेंस के जरिए पूंजी तक पहुँच बनाई।
जैसे-जैसे हम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के लिए तय 2030 की समय-सीमा के करीब पहुँच रहे हैं, “विजेताओं” और “हारने वालों” के बीच का फर्क इस बात से तय होगा कि कौन कंपनियाँ अपने दावों को ठोस और सत्यापित नतीजों में बदल पाती हैं। ग्रीन वादों का दौर अब खत्म हो चुका है और ग्रीन प्रमाण का युग शुरू हो गया है।
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