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Entrepreneurship Mentorship

महिलाओं की भूमिका ने बदला व्यवसाय का रूप

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महिलाओं की भूमिका ने बदला व्यवसाय का रूप

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Post Highlights

देश और समाज आज उस दौर में आ गया है जहाँ पर किसी भी पद पर, किसी भी काम के लिए किसी व्यक्ति की नियुक्ति करने से पहले यह नहीं सोचना पड़ता है कि इस पद के लिए महिलाएं उचित होंगी या नहीं। कोई भी काम हो उसके लिए अब केवल काबिलियत को ही देखा जाता है। महिलाओं के कार्य और मार्गदर्शन करने की क्षमता ने दुनिया को नया रूप दिया और समाज में महिलाओं की ज़रूरत को मजबूत आधार दिया।       

एक अकेली लकड़ी को कोई भी आसानी से तोड़ सकता है। परन्तु यदि कई लकड़ियां एक साथ गठ्ठर के रूप में हो तो उसे तोड़ पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। यह कहावत हम सबने सुनी है और कभी न कभी इसका प्रयोग भी अवश्य किया है। यह तथ्य प्रत्येक परिपेक्ष में सही साबित होता है। बात परिवार की हो या बाहर के किसी काम की वह तभी मजबूती से लम्बे समय तक टिका रहता है जब उसमें मौजूद प्रत्येक व्यक्ति साथ मिलकर काम करता है और एक साथ आगे बढ़ने की कोशिश करता है। कोई भी परिवार सुचारू रूप से तभी चल पता है जब महिला और पुरुष दोनों ही साथ में मिलकर काम करते हैं और उसे सजोते हैं। यदि हम व्यवसाय की बात करें तो देश में हमेशा से पुरूष प्रधान रहे इस क्षेत्र ने एक अभूतपूर्व बदलाव देखा। भारत सफलता की सीढ़ियों पर और ऊपर चढ़ता गया, जब व्यवसाय की दुनिया में महिलाओं ने अधिकाधिक हिस्सा लेना शुरू किया। महिलाओं ने व्यवसाय के क्षेत्र में अपना योगदान देते हुए नयी बुलंदियों को हांसिल किया और समाज को व्यवसाय में महिलाओं के होने की ज़रूरत को बताया। महिलाओं की अधिकाधिक हिस्सेदारी ने देश की अर्थव्यवस्था और व्यवसाय का नया चित्र बनाया है, जो पहले की अपेक्षा अधिक दृढ होकर देश को आगे ले जा रहा है।        

उच्च पदों पर कार्यरत महिलाएं 

आज देश की बड़ी से बड़ी कंपनियां ऐसी हैं, जो महिलाओं को उच्च पदों पर नियुक्त करने के लिए उत्साहित रहती हैं। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि महिलाओं ने यह साबित किया कि उनके अंदर भी व्यवसायिक दुनिया में कुछ कर दिखाने का और लोगों का मार्गदर्शन करने का हुनर है। महिलाओं के मार्गदर्शन ने अनेक कंपनियों को नयी पहचान दिलायी और उसे सफल कंपनी के तौर पर स्थापित किया।    

महिला शख्सियतों ने बदला समाज का नज़रिया 

फाल्गुनी नायर, सुचि मुखर्जी, इन्दु जैन, शहनाज़ हुसैन, नैनालाल किदवई, इंदिरी जैन जैसी कई महिला शख्सियतों ने अपनी मेहनत और कला से ना केवल कई कंपनियों को नयी उपलब्धियां दिलाई, बल्कि खुद भी नए व्यवसाय को शुरू किया और उसे एक पहचान दी। आज इनके द्वारा शुरू की गयी कम्पनियां न केवल देश में बल्कि अन्य मुल्कों में भी अपनी मांग रखती हैं। जिसने भारत की अर्थव्यवस्था पर अच्छा प्रभाव डाला है। इनके मार्गदर्शन ने देश की जीडीपी ग्रोथ को और बढ़ाया है। पर दुर्भाग्यवश अभी भी इनकी उतनी साझेदारी नहीं हो पा रही है, जितने की इनकी साझेदारी होनी चाहिए।  

महिलाओं ने बढ़ाया अर्थव्यवस्था की दर  

कुछ स्थानों पर एक ही कंपनी में महिला और पुरूष के साथ दोहरे व्यवहार ने कई महिलाओं को अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया। भारत सरकार ने महिला उद्यमियों को उन उद्यमियों में शामिल किया है जो देश की 51% अर्थव्यवस्था को सुनिश्चित करती हैं और देश की 51% महिलाओं के लिए व्यवसाय और रोजगार के अवसर दे रही हैं। वूमेन इन बिज़नेस एंड मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक 57% प्रतिवादियों ने इस बात पर सहमति जताई है कि महिलाओं को समान रूप से मौका मिलने के कारण व्यवसाय में मुनाफे की दर बढ़ी है। उन कंपनियों के 5-20% के बीच मुनाफे की दर में वृद्धि हुई जिन्होंने इस पहलु पर ध्यान देकर काम किया।       

ग्रामीण महिलायें भी उद्योग क्षेत्र में कर रहीं योगदान 

व्यवसाय का यह रूप केवल उन महिलाओं के लिए ही नहीं जो शहरी क्षेत्र में काम करती हैं, ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं ने भी खुद को आत्मनिर्भर करने के लिए व्यवसाय का रास्ता चुना और आज वो देश की अर्थव्यवस्था में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। महिलाओं के औद्यगिक क्षेत्र में ज्यादा योगदान से देश को व्यवसाय में फायदा तो हो ही रहा है, इसके साथ ही व्यवसाय करने के तरीके में भी बदलाव आया है।

आखिर क्यों बदला व्यवसाय का रूप

महिलाओं के अंदर किसी और कंपनी, पार्टनर और शेयरहोल्डर से अच्छे व्यावसायिक रिश्ते स्थापित करने में ज्यादा सक्षमता होती हैं। यह गुण किसी भी नेतृत्व करने वाले व्यक्ति के अंदर होना आवश्यक होता है। इससे किसी भी व्यवसाय में फायदा होता है क्योंकि वो उन तथ्यों को भी आसानी से हल कर ले जाती हैं जो उन्हें पीछे की ओर धकेलता है। यह स्वभाव दूसरी आर्गेनाईजेशन को कंपनी की तरफ आकर्षित करता है। महिलाओं के अंदर व्यक्ति को समान रूप से व्यवहार करने की ख़ासियत होती है, यह किसी आर्गेनाईजेशन में लिंग-भेदों को पूरी तरह से ख़त्म करता है, जो किसी भी कंपनी में सामंजस्य बना कर चलने के लिए आवश्यक होता है। महिलाओं के नरम स्वभाव की प्रवृत्ति किसी भी कंपनी की मुखिया के लिए उचित गुण होता है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह गुण अधिक होने के कारण कंपनी के अंदर और बाहर दोनों ही जगह लोग किसी प्रोजेक्ट को अपना काम समझ कर कार्य करते हैं। यही कारण है कि महिलाओं की भागेदारी से कोई भी व्यवसाय सफलता की बुलंदियों को छू रहा है।            

        

 

 

एक अकेली लकड़ी को कोई भी आसानी से तोड़ सकता है। परन्तु यदि कई लकड़ियां एक साथ गठ्ठर के रूप में हो तो उसे तोड़ पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। यह कहावत हम सबने सुनी है और कभी न कभी इसका प्रयोग भी अवश्य किया है। यह तथ्य प्रत्येक परिपेक्ष में सही साबित होता है। बात परिवार की हो या बाहर के किसी काम की वह तभी मजबूती से लम्बे समय तक टिका रहता है जब उसमें मौजूद प्रत्येक व्यक्ति साथ मिलकर काम करता है और एक साथ आगे बढ़ने की कोशिश करता है। कोई भी परिवार सुचारू रूप से तभी चल पता है जब महिला और पुरुष दोनों ही साथ में मिलकर काम करते हैं और उसे सजोते हैं। यदि हम व्यवसाय की बात करें तो देश में हमेशा से पुरूष प्रधान रहे इस क्षेत्र ने एक अभूतपूर्व बदलाव देखा। भारत सफलता की सीढ़ियों पर और ऊपर चढ़ता गया, जब व्यवसाय की दुनिया में महिलाओं ने अधिकाधिक हिस्सा लेना शुरू किया। महिलाओं ने व्यवसाय के क्षेत्र में अपना योगदान देते हुए नयी बुलंदियों को हांसिल किया और समाज को व्यवसाय में महिलाओं के होने की ज़रूरत को बताया। महिलाओं की अधिकाधिक हिस्सेदारी ने देश की अर्थव्यवस्था और व्यवसाय का नया चित्र बनाया है, जो पहले की अपेक्षा अधिक दृढ होकर देश को आगे ले जा रहा है।        

उच्च पदों पर कार्यरत महिलाएं 

आज देश की बड़ी से बड़ी कंपनियां ऐसी हैं, जो महिलाओं को उच्च पदों पर नियुक्त करने के लिए उत्साहित रहती हैं। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि महिलाओं ने यह साबित किया कि उनके अंदर भी व्यवसायिक दुनिया में कुछ कर दिखाने का और लोगों का मार्गदर्शन करने का हुनर है। महिलाओं के मार्गदर्शन ने अनेक कंपनियों को नयी पहचान दिलायी और उसे सफल कंपनी के तौर पर स्थापित किया।    

महिला शख्सियतों ने बदला समाज का नज़रिया 

फाल्गुनी नायर, सुचि मुखर्जी, इन्दु जैन, शहनाज़ हुसैन, नैनालाल किदवई, इंदिरी जैन जैसी कई महिला शख्सियतों ने अपनी मेहनत और कला से ना केवल कई कंपनियों को नयी उपलब्धियां दिलाई, बल्कि खुद भी नए व्यवसाय को शुरू किया और उसे एक पहचान दी। आज इनके द्वारा शुरू की गयी कम्पनियां न केवल देश में बल्कि अन्य मुल्कों में भी अपनी मांग रखती हैं। जिसने भारत की अर्थव्यवस्था पर अच्छा प्रभाव डाला है। इनके मार्गदर्शन ने देश की जीडीपी ग्रोथ को और बढ़ाया है। पर दुर्भाग्यवश अभी भी इनकी उतनी साझेदारी नहीं हो पा रही है, जितने की इनकी साझेदारी होनी चाहिए।  

महिलाओं ने बढ़ाया अर्थव्यवस्था की दर  

कुछ स्थानों पर एक ही कंपनी में महिला और पुरूष के साथ दोहरे व्यवहार ने कई महिलाओं को अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया। भारत सरकार ने महिला उद्यमियों को उन उद्यमियों में शामिल किया है जो देश की 51% अर्थव्यवस्था को सुनिश्चित करती हैं और देश की 51% महिलाओं के लिए व्यवसाय और रोजगार के अवसर दे रही हैं। वूमेन इन बिज़नेस एंड मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक 57% प्रतिवादियों ने इस बात पर सहमति जताई है कि महिलाओं को समान रूप से मौका मिलने के कारण व्यवसाय में मुनाफे की दर बढ़ी है। उन कंपनियों के 5-20% के बीच मुनाफे की दर में वृद्धि हुई जिन्होंने इस पहलु पर ध्यान देकर काम किया।       

ग्रामीण महिलायें भी उद्योग क्षेत्र में कर रहीं योगदान 

व्यवसाय का यह रूप केवल उन महिलाओं के लिए ही नहीं जो शहरी क्षेत्र में काम करती हैं, ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं ने भी खुद को आत्मनिर्भर करने के लिए व्यवसाय का रास्ता चुना और आज वो देश की अर्थव्यवस्था में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। महिलाओं के औद्यगिक क्षेत्र में ज्यादा योगदान से देश को व्यवसाय में फायदा तो हो ही रहा है, इसके साथ ही व्यवसाय करने के तरीके में भी बदलाव आया है।

आखिर क्यों बदला व्यवसाय का रूप

महिलाओं के अंदर किसी और कंपनी, पार्टनर और शेयरहोल्डर से अच्छे व्यावसायिक रिश्ते स्थापित करने में ज्यादा सक्षमता होती हैं। यह गुण किसी भी नेतृत्व करने वाले व्यक्ति के अंदर होना आवश्यक होता है। इससे किसी भी व्यवसाय में फायदा होता है क्योंकि वो उन तथ्यों को भी आसानी से हल कर ले जाती हैं जो उन्हें पीछे की ओर धकेलता है। यह स्वभाव दूसरी आर्गेनाईजेशन को कंपनी की तरफ आकर्षित करता है। महिलाओं के अंदर व्यक्ति को समान रूप से व्यवहार करने की ख़ासियत होती है, यह किसी आर्गेनाईजेशन में लिंग-भेदों को पूरी तरह से ख़त्म करता है, जो किसी भी कंपनी में सामंजस्य बना कर चलने के लिए आवश्यक होता है। महिलाओं के नरम स्वभाव की प्रवृत्ति किसी भी कंपनी की मुखिया के लिए उचित गुण होता है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह गुण अधिक होने के कारण कंपनी के अंदर और बाहर दोनों ही जगह लोग किसी प्रोजेक्ट को अपना काम समझ कर कार्य करते हैं। यही कारण है कि महिलाओं की भागेदारी से कोई भी व्यवसाय सफलता की बुलंदियों को छू रहा है।            

        

 

 




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