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क्या चेहरे भी बताते हैं कि कौन दयालु

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क्या चेहरे भी बताते हैं कि कौन दयालु
16 Nov 2021
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धरती पर रहने वाले प्रत्येक जीव अनेक भावों से घिरे होते हैं। चाहे वह मनुष्य हो, कोई जानवर या कोई अन्य जीव भावनाओं का प्रवाह तो उसके मन में अवश्य ही होता है। कभी भाव प्रेम का, कभी क्रोध का, कभी हताशा का तो कभी दया का, कोई न कोई भाव उनके भीतर हर क्षण अपना स्थान बनाए रखता है।

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धरती पर रहने वाले प्रत्येक जीव अनेक भावों से घिरे होते हैं। चाहे वह मनुष्य हो, कोई जानवर या कोई अन्य जीव भावनाओं का प्रवाह तो उसके मन में अवश्य ही होता है। कभी भाव प्रेम का, कभी क्रोध का, कभी हताशा का तो कभी दया का, कोई न कोई भाव उनके भीतर हर क्षण अपना स्थान बनाए रखता है। बनाने वाले ने शरीर की संरचना को न जाने कितने रूप दिए हैं। यहां तक कि एक ही योनि के जीवन भी कई विभिन्नताएं लिए रहते हैं। हम मनुष्य के भाव इस परिपेक्ष में भी बदलते हैं कि सामने वाले की शारीरिक संरचना कैसी है। शारीरिक संरचना मनुष्य का व्यवहार कैसा होगा, इस मायने में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। हालांकि यह कहना अनुचित होगा कि केवल शारीरिक संरचना से ही भावार्थ बदलते हैं। हमारे भीतर एक भाव ऐसा भी उत्पन्न होता है, जो दूसरों के और समाज के हित के लिए सदैव उत्तरदायी होता है। जब हमारे भीतर दया का भाव हमेशा दूसरों का भला करता है। कभी-कभी हमें कोई चीज़ देखने में बहुत पसंद आ जाती है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उसकी संरचना हमें आकर्षित करती हैं। क्या इसी प्रकार हम किसी व्यक्ति के चेहरे भी उसके अंदर पनपे दया के भाव को प्रदर्शित करते हैं? क्या हम किसी को भी देखकर यह बता सकते हैं कि वह कितना दयालु है?

दयालु होना किसी व्यक्ति के भीतर सबसे बड़ा और ख़ुबसूरत गुण होता है। यह उसके मन की सुंदरता को दिखाता है। यह विचार बताता है कि हम केवल अपने लिए ही नहीं औरों के लिए भी जी सकते हैं। दूसरों के हित में कार्य करके भी स्वयं को प्रसन्न रख सकते हैं। यह ख़ुशी हम सबने अपने जीवन में एक न एक बार तो अवश्य ही महसूस किया होगा। 

हम चेहरों को भी देखकर आकर्षित होते हैं। हम लोगों के चेहरे को देख कर भी यह आंकलन करते हैं कि सामने वाले का कैसा व्यक्तित्व होगा तथा यह करना स्वाभिक होगा। यहां तक कि हम जानवरों के प्रति भी उनकी संरचना के आधार पर विचारधारा बनाते हैं कि वे खूंखार होंगे या सीधे-साधे। हालांकि यह आंकलन कभी-कभी या फिर हम कह सकते हैं कि ज़्यादातर मामलों में गलत साबित हो जाता है। स्वभाव एक आंतरिक प्रक्रिया है, जिसका शारीरिक संरचना से प्रत्यक्ष कोई संबंध नहीं होता है। 

हम मनुष्य कई बार चेहरे को देखकर यह निर्णय लेते हैं कि सामने वाला व्यक्ति दयालु है और वह हर एक परिपेक्ष में जब भी हमें ज़रूरत होगी, हमारी मदद करेगा। हम कुछ लोगों से दया की उम्मीद इसलिए नहीं रखते क्योंकि उनके चेहरे से वे हमें दयालु नहीं लगते, हमें वह उन व्यक्तियों में से एक नहीं लगते, जो दूसरों की सहायता करेंगे। कई मामलों में यह कहानी उलटी पड़ जाती है। जिनसे उम्मीद ना हो वही संग खड़े पाए जाते हैं तथा जिनसे इस होती है वे दया भाव नहीं दिखाते। 

हम यह अवश्य कह सकते हैं कि मनुष्य जब अपने भीतर दया भाव समाहित रखता है तो उसके चेहरे पर सदैव एक तेज, एक चमक विद्यमान रहता है। वह प्रत्येक परिस्थिति में ख़ुश होता है और दूसरों को परेशानियों को अपना समझता है। परन्तु यह कहना ग़लत होगा कि चेहरे से पता चलने भाव ही उसका वास्तविक भाव हो। दया भाव मन में स्थित वह प्रतिमा है, जो स्वयं प्रत्येक ज़रूरतमंद की निस्वार्थ भावना से पूजा करता है।