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Moral और Ethics के बीच संबंध

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Moral और Ethics के बीच संबंध
13 Jun 2022
7 min read

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नैतिकता की दुनिया ऐसी नहीं है कि आप एक तरफ नैतिक हो जाएं या अनैतिक हो जाएं। हमारे जीवन में ऐसी बहुत सी परिस्थितियाँ आती हैं जहाँ हमें नैतिक और अनैतिक होना पड़ता है, नैतिक या अनैतिक एक समय पर होना संभव नहीं होता। Ethics और Morality जैसे शब्दों को  हमने अंग्रेजी में बहुत बार पढ़ा है जिनका हिंदी में अनुवाद करने पर नैतिकता अर्थ सामने आता है। लेकिन जब हम इनकी परिभाषा की ओर अग्रसर होंगे तब हमें इनके बीच का अंतर स्पष्ट होगा। चलिए उदाहरण के जरिये हम इन दोनों के बीच का अंतर समझते हैं। जब समाज और कानून की बात आती है तब हम Ethically सोचते हैं वहीँ जब हम आंतरिक विचारों को महत्व देते हैं या मानवीय संवेदनाओं Human Feelings को समझते हैं तब हम Morally सही होते हैं। लेकिन हम एक समय पर नैतिक और अनैतिक नहीं हो सकते हैं। चलिए इस अंतर को करते हैं स्पष्ट जानते हैं क्या है Moral और Ethics में अंतर? 

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एथिक्स और नैतिकता महज ये एक शब्द नहीं है बल्कि एक मार्गदर्शक बल (Guiding force) है, जो हर पल हमारे साथ होता है और हमे, हमारे लिए जो सही है उस दिशा में अग्रेषित करता है।नैतिकता के आधार पर हम बड़े-बड़े नेताओं को अपना पद त्यागते देखते हैं,अनएथिकल व्यवहार (unethical behavior) के आधार पर कई लोगों को नौकरियों से निकाला जाना देखते हैं। तो सवाल यही आता है कि आखिर क्या है एथिक्स और नैतिकता।

एथिक्स और नैतिकता में अंतर्द्विंद (Conflict Between Ethics And Morality)

Ethics और Morality का जब इस्तेमाल इंग्लिश में होता है तो ये कहना आसान हो जाता है कि दोनों में कुछ तो फर्क होगा, पर वहीं जब इसका इस्तेमाल हिन्दी में होता है तो अंतर जैसे मिट सा जाता है। वो कैसे? क्योंकि एथिक्स और मोरालिटी दोनों का प्रयोग हिन्दी में नैतिकता के लिए कर दिया जाता है। अब जब दोनों का प्रयोग नैतिकता के लिए होगा तो स्वाभाविक है कि अंतर को पृथक करना काफी मुश्किल होगा।

हालांकि हिन्दी में भी जब एथिक्स के लिए नीतिशास्त्र या आचार-विचार या फिर आचारशास्त्र का प्रयोग किया जाता है, तो थोड़ी सी पृथकता नजर आने लगती है। फिर भी पूरी तरह से इसके बीच अंतर का पता नहीं चल पाता है।

नैतिकता क्या है? (what is morality)-

नैतिकता एक वैल्यू है, जो हमें हमेशा, हर क्षण, हर मोड़ पर, हर स्थिति में हमें बताता है कि हमारे लिए क्या सही है और क्या नहीं। ज़िंदगी में ऐसे क्षण आते रहते हैं जब हमें कोई एक ही निर्णय लेना होता है, पर हमारे पास विकल्प कई होते हैं और, सभी सही होते हैं । पर न चाहते हुए भी हमें एक का ही चुनाव करना पड़ता है। अक्सर हम इसे कुछ इस तरह से कह देते हैं कि दिल कुछ और कह रहा है दिमाग कुछ और कह रहा है। दोनों ही सही है। पर करें तो करे क्या?

इस तरह देखें तो हर एक निर्णय में जहां द्वंद्व या कहें की मानसिक संघर्ष Mental Conflict होता है वहाँ हम हर बार कुछ न कुछ का त्याग करते हैं, या छोड़ देते हैं। क्योंकि हमें कोई एक ही निर्णय लेना होता है और उसपर आगे बढ़ना होता है, पर आप गलत नहीं होते है क्योंकि नैतिकता है ही ऐसी चीज़ | 

एथिक्स क्या है? (What is Ethics)

किसी संगठित समूह, व्यवसाय आदि के आचार संहिंता (Code of conduct) के मानकों के अनुरूप आचरण को एथिक्स कहा जाता है। अगर हम किसी कंपनी में उसके कोड ऑफ कंडक्ट के अनुसार ही काम करते हैं, तो हमारा ये काम एथिकल हुआ।

एथिक्स और नैतिकता में अंतर (Difference Between Morals And Ethics)

Ethics, philosophy की एक ब्रांच है यह जीवन को जीने के सलीके या नियम और विनियम rules, regulations  के बारे में हमें बताते हैं। जो विज्ञान, नैतिकता क्या है ? के साथ-साथ क्या होनी  चाहिए ? में रूचि रखे उसे ethics कहते हैं। ethics में  जब समाज और कानून की बात आती है तब हम ethically सोचते हैं वहीँ जब हम आंतरिक विचारों को महत्व देते हैं या मानवीय संवेदनाओं को समझते हैं तब हम morally सही होते हैं। भूखे को खाना खिलाना नैतिकता है। समान्य स्थिति में जो व्यक्ति किसी सेवा का आकांक्षी है , परन्तु उसे प्रताड़ित किया जाए तो ऐसी अवस्था में यह प्रक्रिया अनैतिक कहलाती है। वहीँ नीतिशास्त्र के मुताबिक ऐसे कार्य जो न नैतिक हो या अनैतिक उन्हें निर्नैतिक कहते हैं, उदहारण के तौर पर कपड़े धुलना निर्नैतिक ethical कार्य है। एथिक्स और मोरालिटी को पर्यावाची के तरह देखा जाता है जबकि हम जानते हैं कोई भी दो पर्यायवाची अपूर्ण पर्याय होते हैं।

एथिक्स बाह्य एजेंसी या संस्था द्वारा निर्धारित होता है। उपरोक्त केस में देखें तो यहाँ वो बाह्य एजेंसी समाज है। जबकि नैतिकता हमारे मन, हमारे अंतरात्मा (Conscience) द्वारा निर्धारित होती है। यानी कि नैतिकता हमारा आंतरिक गुण है।

इसे दूसरे शब्दों में कहें तो किसी संगठित समूह, व्यवसाय आदि के आचार संहिंता (Code of conduct) के मानकों के अनुरूप आचरण को एथिक्स कहा जाता है। जबकि एक व्यक्ति के रूप में हमारे जीवन मूल्य और सिद्धांतरूपी मानकों के अनुरूप आचरण को Morality या नैतिकता कहा जाता है।

अगर हम किसी कंपनी में उसके कोड ऑफ कंडक्ट के अनुसार ही काम करते हैं, तो हमारा ये काम एथिकल हुआ। वहीं अगर किसी कंपनी के कोड ऑफ कंडक्ट में लिखा है कि ग्राहक के साथ हमेशा अच्छे से पेश आए लेकिन हम बेहूदगी से पेश आते हैं तो हमारा ये काम अनएथिकल (Unethical) हुआ।

यहाँ पर एथिकल के लिए नैतिक शब्द का इस्तेमाल और अनएथिकल के लिए अनैतिक शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन आप देख रहें है कि दोनों किसी बाह्य कोड ऑफ कंडक्ट द्वारा संचालित हो रहे हैं ।

कभी-कभी ऐसा समय आता है जब हम Ethically Correct होते हैं लेकिन Morally Wrong और कभी-कभी ऐसा भी समय भी आता है जब हम Morally Correct होते हैं लेकिन Ethically Wrong। इसका क्या मतलब है? आइये इसे उदाहरण से समझते हैं।

Ethically Correct? Morally Wrong

मान लीजि ये कि आप एक दुकान में काम करते हैं और आपके पास एक परेशान सा आदमी आता है और आपसे जहर की पुड़िया मांगता है। आप उस आदमी को जानते भी है क्योंकि वो आपके बगल वाले फ्लैट में ही रहता है और आपने रात में सुना भी था कि वो अपने बीबी को कह रहा था कि वो कल आत्महत्या कर लेगा। अब आपका तो काम ही है सामान बेचना इसीलिए आप उसे जहर बेच देते हैं – आप Ethically Correct है आपने कोई गलती नहीं की। लेकिन आपको पता चला कि वो आपके दुकान के सामने ही जहर खाकर मर गया। अब आप चूंकि पहले से ही जानते थे वो ऐसा करने वाला है तो आप उसे ये जहर नहीं भी दे सकते थे। अब आपको इसका पश्चाताप हो रहा है तो यहाँ आप Morally Wrong हुए।

इसी का उल्टा आप सोच लीजिये कि आप उसे वो जहर नहीं देते, क्योंकि आपकी अंतरात्मा भी यही कह रही है। तो आप Morally तो Correct हो जाते। लेकिन Ethically Wrong हो जाते क्योंकि दुकान का कोड ऑफ कंडक्ट था कि अगर कोई सामान है तो आप उसे जरूर बेचेंगे। आप देख रहे हैं न एक पक्ष को अक्सर हमें छोड़ना ही पड़ता है। Ethically और Morally दोनों Correct होना रियल लाइफ में बहुत ही ज्यादा मुश्किल होता है। लेकिन नामुमकिन नहीं। क्योंकि ज़िंदगी में कुछ क्षण ऐसे भी आ ही जाते है जहां हम Ethically भी Correct होते हैं और Morally भी। वो कैसे? उदाहरण से समझते हैं।

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Ethically Correct Morally Correct

मान लीजिये आप एक वकील हैं। और वकील की तो फितरत ही होती है अपने क्लाइंट को किसी भी तरीके से केस जितवाना भले ही Morally Wrong ही क्यों न होना पड़े। पर मान लीजिये कि आपको एक दिन एक ऐसा क्लाइंट मिलता है जिसके पास उतने पैसे नहीं है जितनी आपकी फीस है और कोई दूसरा इसका केस लड़ने को तैयार नहीं है। जबकि आप जानते है कि वो निर्दोष है और अगर इसका केस कोई नहीं लड़ेगा तो वो हार जाएगा और बकायदे सजा भी हो सकती है। अब आपके अंतरात्मा से आवाज आती है कि नहीं इसे तो किसी भी हालत में बचाया ही जाना चाहिए। और आपका कोड ऑफ कंडक्ट भी यही कहता है कि निर्दोष को हर संभव प्रयास से बचाया जाना चाहिए।

यानी कि आपका एथिक्स भी आपसे वही कह रहा है जो आपकी Morality आपसे कह रही है। इस स्थिति में आप Ethically भी Correct हैं और Morally भी।
उम्मीद है आप एथिक्स और नैतिकता (Ethics and Morality) को अच्छे से समझ गए होंगे।