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क्या हैं भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं? (Features of Indian Economy in Hindi)

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क्या हैं भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं? (Features of Indian Economy in Hindi)
16 May 2022
7 min read
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भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) एक विकासशील अर्थव्यवस्था (Developing Economy) है, जो निरंतर अपनी गति से चलायमान है। आज के समय में विश्व भर में राष्ट्रों के बीच बढ़ते हुये आर्थिक अंतर (economic gap) के बीच विकास के प्रयत्नों की आवश्यकता को और अधिक आवश्यक बना दिया है। किसी भी अर्थव्यवस्था में आर्थिक विकास (economic growth) का तात्पर्य एक नये दृष्टिकोण से गरीबी, असमानता और बेरोजगारी (Poverty, inequality and unemployment) को कम करने एवं जनकल्याण को बढ़ावा देने का प्रयास करना है। विकासशील देशों में भारत सबसे तेज गति से विकास कर रहा है। भारत अन्य देशों जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन (US, UK, Russia, China) देशों के समान बढ़ रहा है। आज हम इस आर्टिकल में भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषता के बारे में बात करेंगे जिसे मिश्रित अर्थव्यवस्था भी कहा जाता है।

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भारत की बात करें अगर तो भारत (India) क्षेत्रफल की दृष्टि से संसार का सातवां तथा जनसंख्या की दृष्टि से चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश है। देश का कुल क्षेत्रफल 32.87 लाख वर्ग किलोमीटर है जो विश्व की कुल भूमि का 2.4 प्रतिशत है। इसकी भू-सीमा 15200 किलोमीटर व तटीय सीमा 7517.6 किलोमीटर है। यह तीन ओर से समुद्री सीमाओं से तथा एक ओर से हिमालय की पर्वत श्रेणियों से घिरा हुआ है, इस कारण भारत को उपमहाद्वीप (subcontinent) कहा जाता है। इस देश में अनेक प्रकार की भूमि, खनिज पदार्थ, जलवायु, वनस्पतियां, कृषि उत्पादन (land, minerals, climate, vegetation, agricultural production) तथा पर्याप्त मात्रा में जल संसाधनों (water resources) की उपलब्धता है। 

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से देश में कई क्रांतिकारी परिवर्तन (radical change) हुये है, नये-नये उद्योग (new industries) स्थापित हुए है, जो कि विकास के क्षेत्र में गतिशील हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) में सार्वजनिक क्षेत्र में वृद्धि को शामिल करने हेतु औद्योगिक विकास, बैकिंग सुविधाएं, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, बचत एवं पूँजी-निर्माण में वृद्धि (Industrial development, banking facilities, increase in per capita income, increase in savings and capital formation) व नवीन उद्योगों की स्थापना, आदि कार्य सम्पन्न हुए हैं। 

भारतीय अर्थव्यवस्था विशाल अर्थव्यवस्था (huge economy) है, जो विश्व के उत्तरी गोलार्ध (northern hemisphere) में 8.4′ डिग्री से 37.6 अक्षांश तथा 68.17′ डिग्री से 97.2 पूर्वी देशांतर के बीच में फैली हुई है, ओखा से अरुणाचल तथा कश्मीर से कन्याकुमारी तक। 

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं (Features of Indian Economy)

  • नियोजित अर्थव्यवस्था (Planned Economy)-

भारत में विकास (development in india) के लिये नियोजन की नीति अपनायी गयी हैं। यह नियोजन (planning) 1 अप्रैल 1951 से चालू किया गया है। अब तक बहुत सी विकास योजनाओं (development plans) को क्रियान्वित किया गया हैं, जिससे देश का विकास हुआ है। 

  • सार्वजनिक क्षेत्र के विकास हेतु कार्य (Development of public sector)-

यहाँ पर सार्वजनिक क्षेत्रों का विकास (development of public sector) भी लगातार हो रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत लोहा एवं इस्पात उद्योग, सीमेन्ट उद्योग, रसायन उद्योग, इंजीनियरिंग उद्योग, कोयला उद्योग (Iron and Steel Industry, Cement Industry, Chemical Industry, Engineering Industry, Coal Industry) व अनेक उपभोक्ता उद्योग शामिल हैं। 

  • बैंकिंग सुविधाओं का विकास (Development of banking facilities)-

यहाँ पर बैंकिंग सुविधाओं (banking facilities) का बराबर विकास हो रहा है। जून 1969 में भारत में व्यापारिक बैंकों की 8262 शाखाएँ (branches) थी, लेकिन जून 2007 के अंत में इन शाखाओं की संख्या 72,165 हो गई है। 

  • प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि (increase in per capita income)-

भारतीय अर्थव्यवस्था में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद व्यक्ति के आय लगातार बढ़ रही है। वर्तमान की कीमतों के आधार पर यह 1999-2000 में 15,881 रुपये से बढ़कर 2006-2007 में 29642 रुपये हो गयी है। और 2016-17 में यह 1,03,870 रुपये थी। इसके अलावा वर्तमान मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय में अधिक बढ़ोत्तरी हुई है।  

  • बचत एवं पूंजी निर्माण दरों में वृद्धि (Increase in savings and capital formation rates)-

बचतों व पूंजी निर्माण की दरों में भी वृद्धि हो रही है, साल 1950-51 में बचते सफल घरेलू आय का 8.6 प्रतिषत थी, जबकि 06-07 में 34.8 हो गयी और यह वर्तमान समय में भी यह लगातार बढ़ रही है। 

  • सामाजिक सेवाओं का विस्तार (extension of social services) -

भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य (education & health) जैसी सामाजिक सेवाओं का विकास हुआ है। शोध एवं तकनीकी शिक्षा (research and technical education) में प्रगति हुई। इसके साथ ही साक्षरता का स्तर भी बढ़ा है। व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रौद्योगिकीय शिक्षा (Vocational Education & Technological Education) के विद्यालयों में महाविद्यालयों की संख्या बढ़ी हैं। 

  • सामाजिक परिवर्तन (social change)-

देश में हो रहे विकास के फलस्वरूप यहाँ सामाजिक परिवर्तन (social change) की गति तेज हुई हैं। रूढि़वादिता, जाति-प्रथा, बाल-विवाह तथा छुआ-छूत (orthodoxy, caste-system, child-marriage and untouchability) जैसी बुराइया कम हुई हैं। सामाजिक राजनैतिकता (social politics) तथा आर्थिक क्रियाकलापों में महिलाओं की सहभागिता (women's participation) बढ़ी हैं। इसके साथ ही महिलाओं में शिक्षा एवं ज्ञान का स्तर बढ़ा हैं। 

  • बाजार तंत्र (market mechanism)-

भारतीय अर्थव्यवस्था में एक मजबूत व्यापार तंत्र (strong trading system) का विकास हुआ है। यहाँ वस्तुओं के साथ-साथ श्रम एवं पूंजी (labor and capital) के संगठित बाजार हैं। इसके अलावा, वस्तु बाजार अधिकांश वस्तुओं की कीमतें, उनकी माँग एवं पूर्ति द्वारा निर्धारित होती है। अनिवार्य वस्तुओं के अभाव में उनका वितरण उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से किया जाता हैं। कृषकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिये भारत सरकार (Indian Government) द्वारा अनेक उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया जाता हैं।

  • गरीबी एवं बेरोजगारी दूर करने के उपाय (Measures to remove poverty and unemployment)-

देश में गरीबी एवं बेरोजगारी (poverty and unemployment) दूर करने के लिये विशिष्ट कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जैेसे ग्रामीण रोजगार गारण्टी कार्यक्रम (Rural Employment Guarantee Program) समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम आदि। 

  • नवीन प्रौद्योगिकी (Innovative technology)-

भारत में नित हो रहे नवीन खोजो से नवीन प्रौद्योगिकी का विकास (development of new technology) हो रहा है। इसमें उत्पादन तकनीक में सुधार और नये उद्योगों की स्थापना (Improvement in technology and establishment of new industries) हो रही है। ‘विकास उद्योगों’ (Development Industries) की स्थापना से व्यावसायिक जीवन में गति शीलता बढ़ गई है तथा प्रबंधकों के समक्ष प्रबंधन के नये-नये आयाम विकसित हो रहे है।

कृषि पर निर्भरता (dependence on agriculture)-

भारत की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आधारित (Depend on agriculture) है। राष्ट्रीय आय में कृषि का कुल 30 प्रतिशत का योगदान है। हालांकि विकसित देशों में कृषि का राष्ट्रीय आय में योगदान 2 से 4 प्रतिशत तक होता है। 

भारतीय अर्थव्यवस्था को समझने के लिए बहुत अच्छी रिसर्च की आवश्यकता है, इसे किसी एक आर्टिकल में समेटा नहीं जा सकता। एक कहावत है कि बूँद-बूँद से ही सागर भरता है, ठीक उसी प्रकार थोड़ी-थोड़ी जानकारी से ही हमे किसी भी विषय के बारे में पूरी जानकारी होती है। आशा है ये आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। 

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