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वास्तविकता से भरी meta verse की आभासी दुनिया

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वास्तविकता से भरी meta verse की आभासी दुनिया

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Post Highlights

आइये इस आभासी ख्याब की वास्तविकता के विचार से पर्दा हटाते हैं और आपको मेटा वर्ज़ की दुनिया से रूबरू introduce कराते हैं। आजकल पूरी दुनिया में इस एक शब्द की बहुत चर्चा सुनी होगी। आये दिन आप युवाओं से मेटा वर्ज़ से जुड़े किस्से उठते-बैठते सुनते ही रहते होंगे। चलिए विस्तार से चर्चा करते हैं कि इसका हमारे जीवन और हमारी दुनिया पर क्या और कैसा असर होने वाला है।

आप सो कर उठे हैं और तमाम ख्याबों lot of dreams को अपने दिमाग से गिरा कर अपने दैनिक जीवन daily life की योजना बनाने में जुट गए हैं। मगर बीता स्वप्न past dream अभी भी आपके ज़हन में टिका हुआ है ऐसे में आप क्या करेंगे? हमारे ख्याल से अभी आप उस स्वप्न पर अपने करीबियों से चर्चा करेंगे और बताएंगे कि वह स्वप्न कितना अजीब था, कितना बेतुका था, बताएंगे कि न उसका कोई ओर था न उसका कोई छोर था। वास्तविकता यही है कि स्वप्न या ख़्याब हमारे जीवन का आभासी पहलू है। 

आप सोच रहे होंगे कि हम क्या कहना चाहते हैं, तो आइये इस आभासी ख्याब की वास्तविकता के विचार से पर्दा हटाते हैं और आपको मेटा वर्ज़ की दुनिया से रूबरू introduce कराते हैं। आजकल पूरी दुनिया में इस एक शब्द की बहुत चर्चा सुनी होगी। आये दिन आप युवाओं से मेटा वर्ज़ से जुड़े किस्से उठते-बैठते सुनते ही रहते होंगे। आपने अक्सर शहरी चौपालों में लोगों से कहते सुना होगा कि, आज विज्ञान जितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसको देखते हुए देख लेना भैया एक दिन ऐसा आएगा कि लोग दूर बैठे होने के बाबजूद भी बिलकुल क़रीब नज़र आएंगे। आज फेसबुक कुछ इसी तरह का प्रयोग करने में सक्षम हो गया है आभासी दुनिया भी वास्तविकता की ओर बढ़ रही है, जिसका नाम फेसबुक ने बदल कर meta रख दिया। चलिए विस्तार से चर्चा करते हैं कि इसका हमारे जीवन और हमारी दुनिया पर क्या और कैसा असर होने वाला है।

जब कोई नया आविष्कार invention होता है या उसके होने की चर्चा होती है, तो वह अपने साथ असीम संभावनाएं infinite possibilities लेकर आता है। उस आविष्कार में फिर तमाम धनात्मक पहलू होते हैं तो हज़ारों ऋणात्मक पहलू भी होते हैं। नया कुछ भी हो दुनिया में उसका effect आने वाले समय में ही पता चलता है। metaverse के भी अपने कुछ लाभ होने वाले है और वे क्या हैं आइये जानते है। 

क्या है meta verse और इसका ख्याल कब आया 

लोगों को एक ऐसी दुनिया दिखाना जो सच में है नहीं, परन्तु उसमें इतनी वास्तविकता को डाल दिया जाना कि लोग उस आभासी दुनिया virtual world को असल दुनिया real world ही मान लें उसको आप meta verse का नाम दे सकते हैं। मेटावर्स सामाजिक मेल मिलाप social connectivity को केंद्रित करने हेतु 3डी third dimension जैसी आभासी दुनिया का एक रियल नेटवर्क actual network है। विज्ञान के इतनी तेजी से पसरते पाँव और भविष्य की आकांक्षाओं में, यह शब्द अब नए सिरे से असल रूप में वर्णित किया जाने लगा है, जो एक एकल, सार्वभौमिक आभासी दुनिया universal virtual world के रूप में है, जिसे आभासी और वास्तविकता हेडसेट के उपयोग द्वारा सुगम बनाया जाता है।

"मेटावर्स" शब्द की उत्पत्ति origin 1992 के एक वैज्ञानिक उपन्यास स्नो क्रैश में "मेटा" और "ब्रह्मांड" "Meta" and "Universe" in Snow Crash के एक बंदरगाह के रूप की दुनिया दिखाई गयी है। इस तरह से मेटा शब्द का ओरिजिन वहीँ से चलता आ रहा है। फिर बाद में तो वर्चुअल वर्ल्ड प्लेटफॉर्म जैसे, सेकेंड लाइफ second life (दूसरा जीवन) जैसे लोकप्रिय popular उपयोग के लिए विभिन्न मेटावर्स विकसित किए गए हैं। कुछ मेटावर्स पुनरावृत्तियों metaverse iterations में आभासी और भौतिक रिक्त स्थान और आभासी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एकीकरण शामिल है, अक्सर आभासी वास्तविकता प्रौद्योगिकी Technology को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाती है। 

विभिन्न संबंधित प्रौद्योगिकियों और परियोजनाओं के लिए विकास की प्रगति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के लिए जनसंपर्क के उद्देश्यों के लिए इस शब्द का काफी उपयोग चर्चा के रूप में देखा गया है। सूचना गोपनीयता और उपयोगकर्ता की लत मेटावर्स के भीतर चिंता का विषय है, जो संपूर्ण रूप से सोशल मीडिया social media और वीडियो गेम video game उद्योगों industries के सामने आने वाली चुनौतियों से उत्पन्न होती है

फेसबुक facebook ने क्यों बदला अपना नाम 

हर कोई यही चाहता है कि वह अपने व्यवसाय में क्या ऐसा नया जोड़े कि लोग उससे ऊबें न, एक जैसा खाना रोज़-रोज़ किसी को नहीं भाता। जिस तरह से पूरी दुनिया एक आभासी दुनिया की दीवानगी में डूबती दिखाई दे रही है। हर किसी को कम मेहनत कर के अधिक एंटरटेनमेंट Entertainment करने को मिल सके। जिस तरह से समाज के पास समय नहीं है लोगों से मिलने का, ऐसे में हर कोई एक ऐसा विकल्प चाहता है जोकि लोगों को सोशयली, वर्चुल ही सही कनेक्ट रखे। मार्क ज़ुकरवर्ग ने इस अवसर को भुनाने का कार्य किया, उन्होंने सोचा कि क्यों न फेसबुक को उस मुकाम पर ले जाया जाए, जहाँ से लोग दूर होकर भी असल रुपी करीबी का अनुभव करें। फिर क्या था लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित करने के लिए फेसबुक के फाउंडर एवं सीईओ मार्क ज़ुकरवर्ग Facebook founder and CEO Mark Zuckerberg ने तत्काल ही इसका नाम बदल कर मेटा meta कर दिया। ज़ुकरवर्ग ने इसके लिए काफी पैसा भी लगा दिया है और साथ ही साथ यह भी कहा है कि यह इंटरनेट और उनकी ट्रिलियन डॉलर की कंपनी का भविष्य है।

meta verse टेक्नोलॉजी को जाने

Metaverse टेक्नोलॉजी एक ऐसी वर्चूअल दुनिया है जहाँ पर आपको एक अलग प्रकार का अनुभव होगा। हालाँकि यह एक कम्प्यूटर द्वारा तैयार की गयी दुनिया है, लेकिन ये आपको बिलकुल असली दुनिया से भी ज़्यादा सच्ची दुनिया दिखायी पड़ेगी। Meta verse को इंटर्नेट का अदभुत और नया दौर कहना ग़लत नहीं होगा। यह एक ऐसी काल्पनिक दुनिया है, जिसे की तैयार किया गया है advanced Artificial intelligence (AI) टेक्नॉलजी द्वारा जोकि वर्चूअल और augmented रीऐलिटी द्वारा एक साथ जुड़कर बनी है। यह आभासी वास्तविकता, संवर्धित वास्तविकता augmented reality और वीडियो सहित प्रौद्योगिकी के कई तत्वों का एक संयोजन Combination है जहां उपयोगकर्ता एक डिजिटल ब्रह्मांड digital universe के भीतर होने का अनुभव करता है। मेटावर्स के चालक अपने उपयोगकर्ताओं को तमाम तरह के इवेंट्स जैसे संगीत समारोहों या सम्मेलनों आदि से लेकर दुनिया भर की आभासी यात्राओं तक हर चीज के माध्यम से काम करने, खेलने और दोस्तों के साथ जुड़े रहने की कल्पना करते हैं।

क्या है मेटावर्ज़ का भविष्य future of metaverse  

सकारात्मक  पहलू 

अगर हम इसके सकारात्मक पहलुओं को देखे तो कई प्रकार से यह एक नयी दुनिया में ले जाने जैसा ही अनुभव दिलाने वाली पहल है और रही फेसबुक की बात तो यकीनन इसमें वे ऐसा कुछ ले कर आएंगे जो पूरे विश्व को एक नयापन देने वाला है। बीते वर्षों में फेसबुक ने पूरी दुनिया को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया जिस कारण ज़ुकरवर्ग की कंपनी आज टॉप लेवल की सोशल मीडिया कंपनी बन बैठी है। जिस कारण उसको उम्मीद है कि वह यहाँ भी विफल नहीं होगी। मेटा वर्ज़ का सकारात्मक पहलु एक और भी है जो इसको वास्तविक बनाता है जैसे आजकल की वीडियो गेमिंग जो कि आभाषी होने के बावजूद भी वास्तविक दिखाई पड़ती है। वीडियो कालिंग में भी यह वास्तविकता को इस तरह प्रदर्शित करता है कि ऐसा लगता है मानों सामने वाला आपके पास ही बैठा हो। इसका क्रियान्वन कुछ इस तरह चलता है। 

वीडियो गेम्स में मेटा का क्रियान्वन working of meta in video game

आजकल की आधुनिक इंटरनेट की दुनिया से थोड़ा पीछे भी जाएँ तो पाएंगे कि वीडियो गेम के भीतर मेटावर्स प्रौद्योगिकियों के कई घटक पहले ही विकसित किए जा चुके हैं। 2003 के वर्चुअल वर्ल्ड प्लेटफॉर्म सेकेंड लाइफ को अक्सर पहले मेटावर्स के रूप में देखा जाता है, क्योंकि इसने सोशल मीडिया के कई पहलुओं को एक सतत त्रि-आयामी या यूँ कहें कि 3D दुनिया में शामिल किया है, जिसमें उपयोगकर्ता को एक अवतार के रूप में दर्शाया गया था। कई व्यापक मल्टीप्लेयर ऑनलाइन गेम Massively Multiplayer Online Game में सामाजिक कार्य अक्सर एक अभिन्न विशेषता रखते हैं। 

 आभासी वास्तविकता का क्रियान्वन 

बीते दो बरस पहले फेसबुक कंपनी ने फेसबुक होराइजन Facebook Horizon नामक एक सोशल वीआर वर्ल्ड लॉन्च किया था। आज उसका नाम बदलकर फेसबुक  ने "मेटा प्लेटफॉर्म्स" कर दिया। मेटा प्लेटफॉर्म्स द्वारा विज्ञापित कई आभासी वास्तविकता प्रौद्योगिकियों का विकास और उसको संचालित किया जाना बाकी है। आप जान कर हैरान होंगें कि मेटा प्लेटफ़ॉर्म पर यौन उत्पीड़न की घटना के कारण होराइजन वर्ल्ड्स के संबंध में उपयोगकर्ता की सुरक्षा हेतु आलोचना का भी सामना करना पड़ा है। समझने वाली बात यह है कि अभी इस पर कितना कार्य करना बाकी है, ताकि इसके कर्यान्वन में इसकी फंक्शनिंग में वह प्रारूप तैयार हो सके जोकि सामाजिक सुरक्षा में एक नया योगदान भी दे सके। फिर भी अगर आभासी वास्तविकता के क्रियान्वन की बात करें तो इसको बहुत सरल भाषा में समझा जा सकता है, जिसमें कि पारस्परिक आपसी सामाजिक तालमेल को एक आभासी तरीके से बढ़ाना जिसमें मेटा टेक्नोलॉजी का ऐसा मिश्रण होगा जोकि इस आभासीपन को वास्तविकता की चादर पहनाने का कार्य करेगा।    

मेटावर्ज़ के नकारात्मक पहलू 

कोई भी चीज जोकि दुनिया में नयी है फिर चाहे वह खोज हो या आविष्कार उसके अगर फायदे हैं तो कई नुकसान भी हैं। जिसने उस चीज को बनाया है वह तो सिर्फ आपको उस वस्तु, अविष्कार या खोज के फायदे ही गिनाएंगे, परन्तु जब समाज उसका उपभोग करता है या पप्रयोग में लाता है तब उसके नुकसान भी सामने आते है। अब हम बात मेटावर्ज़ की कर रहे हैं तो इसके जो नुकसान हैं उनको भली-भाँति समझा जा सकता है। 

1) जिस तरह से सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम या आप व्हाट्सप्प को ही ले लीजिये लोग इसके इतने आदी हो गए हैं कि आये दिन मानसिक विकार से पीड़ित लोगों का समूह बढ़ता ही जा रहा है। इतना पहले कभी देखने को नहीं मिला कि मानसिक रोगियों की संख्या में इतना इजाफ़ा हुआ हो, परन्तु आज ये तादात पहले से कई गुना हुई है। आप किसी भी सर्वे का डेटा उठा कर देख लीजिये आप पाएंगे की मेटल हेल्थ का ratio 70 प्रतिशत से ऊपर या उसके आसपास ही मिलेगा। ठीक वैसे ही मेटा हमारे जीवन में कितना नकारात्मक असर डालेगा ये तो समय बताएगा। 

2) आप जान के हैरान होंगे की लगभग कई रिपोर्ट्स के माध्यम से पता चला है कि 12-17 वर्ष की आयु के 13% बच्चे अवसाद की स्थिति में देखे गए है जोकि सोशल मीडिआ का इफ़ेक्ट दिखता है। 18 से 25 साल के 25% लोग मानसिक बीमारी से ग्रसित पाए गए हैं। ये आयु वर्ग सोशल मीडिया के उच्च उपयोग की रिपोर्ट करते हैं।

59% अमेरिकी किशोरों ने साइबरबुलिंग या ऑनलाइन उत्पीड़न का अनुभव किया। 90% कहते हैं कि उन्हें लगता है कि यह उत्पीड़न एक ऐसी समस्या है जो उनकी उम्र के अन्य लोगों को प्रभावित करती है। 63% का कहना है कि यह एक बड़ी समस्या है।

3) कई आलोचकों और संशयवादियों Critics and Skeptics ने फेसबुक को सोशल मीडिया कंपनी से मेटावर्स कंपनी में बदलने की जुकरबर्ग की योजना का मजाक उड़ाया है। कुछ आलोचकों का कहना है कि जब कंपनी पीआर संकट से जूझ रही है, तब मेटावर्स पर ध्यान केंद्रित करके और खुद का नाम बदलकर, फेसबुक वास्तविक दुनिया में पैदा होने वाली या योगदान देने वाली समस्याओं से ध्यान हटा रहा है। किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने, प्रसार को सुविधाजनक बनाने जैसे मुद्दे दुष्प्रचार, और राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देना है। 

निष्कर्ष 

कोई भी सुविधा कब असुविधा में तब्दील हो जाए यह तो समय ही बताएगा परन्तु पहले से ही उसके प्रति कोई भी प्रडिक्शन prediction बनाना भी उतना ही व्यर्थ है जितना कि अगले दिन में होने वाली दिनचर्या को ठीक वैसे ही जी पाना जैसा कि अपने प्रडिक्ट किया था। आप ने देखा कि किस तरह से फेसबुक ने खुद को एक नए आयाम में रखकर खुद को मेटा प्लेटफार्म में तब्दील कर लिया। किस तरह से मेटा पूरी दुनिया की आने वाली पसंद बनता जा रहा है। मेटा टेक्नोलॉजी का विस्तारण, उसके फायदे और अंततः उससे होने वाले दुष्परिणाम भी ला सकता है जिस तरह फेसबुक में देखने को मिल रहा है।

आप सो कर उठे हैं और तमाम ख्याबों lot of dreams को अपने दिमाग से गिरा कर अपने दैनिक जीवन daily life की योजना बनाने में जुट गए हैं। मगर बीता स्वप्न past dream अभी भी आपके ज़हन में टिका हुआ है ऐसे में आप क्या करेंगे? हमारे ख्याल से अभी आप उस स्वप्न पर अपने करीबियों से चर्चा करेंगे और बताएंगे कि वह स्वप्न कितना अजीब था, कितना बेतुका था, बताएंगे कि न उसका कोई ओर था न उसका कोई छोर था। वास्तविकता यही है कि स्वप्न या ख़्याब हमारे जीवन का आभासी पहलू है। 

आप सोच रहे होंगे कि हम क्या कहना चाहते हैं, तो आइये इस आभासी ख्याब की वास्तविकता के विचार से पर्दा हटाते हैं और आपको मेटा वर्ज़ की दुनिया से रूबरू introduce कराते हैं। आजकल पूरी दुनिया में इस एक शब्द की बहुत चर्चा सुनी होगी। आये दिन आप युवाओं से मेटा वर्ज़ से जुड़े किस्से उठते-बैठते सुनते ही रहते होंगे। आपने अक्सर शहरी चौपालों में लोगों से कहते सुना होगा कि, आज विज्ञान जितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसको देखते हुए देख लेना भैया एक दिन ऐसा आएगा कि लोग दूर बैठे होने के बाबजूद भी बिलकुल क़रीब नज़र आएंगे। आज फेसबुक कुछ इसी तरह का प्रयोग करने में सक्षम हो गया है आभासी दुनिया भी वास्तविकता की ओर बढ़ रही है, जिसका नाम फेसबुक ने बदल कर meta रख दिया। चलिए विस्तार से चर्चा करते हैं कि इसका हमारे जीवन और हमारी दुनिया पर क्या और कैसा असर होने वाला है।

जब कोई नया आविष्कार invention होता है या उसके होने की चर्चा होती है, तो वह अपने साथ असीम संभावनाएं infinite possibilities लेकर आता है। उस आविष्कार में फिर तमाम धनात्मक पहलू होते हैं तो हज़ारों ऋणात्मक पहलू भी होते हैं। नया कुछ भी हो दुनिया में उसका effect आने वाले समय में ही पता चलता है। metaverse के भी अपने कुछ लाभ होने वाले है और वे क्या हैं आइये जानते है। 

क्या है meta verse और इसका ख्याल कब आया 

लोगों को एक ऐसी दुनिया दिखाना जो सच में है नहीं, परन्तु उसमें इतनी वास्तविकता को डाल दिया जाना कि लोग उस आभासी दुनिया virtual world को असल दुनिया real world ही मान लें उसको आप meta verse का नाम दे सकते हैं। मेटावर्स सामाजिक मेल मिलाप social connectivity को केंद्रित करने हेतु 3डी third dimension जैसी आभासी दुनिया का एक रियल नेटवर्क actual network है। विज्ञान के इतनी तेजी से पसरते पाँव और भविष्य की आकांक्षाओं में, यह शब्द अब नए सिरे से असल रूप में वर्णित किया जाने लगा है, जो एक एकल, सार्वभौमिक आभासी दुनिया universal virtual world के रूप में है, जिसे आभासी और वास्तविकता हेडसेट के उपयोग द्वारा सुगम बनाया जाता है।

"मेटावर्स" शब्द की उत्पत्ति origin 1992 के एक वैज्ञानिक उपन्यास स्नो क्रैश में "मेटा" और "ब्रह्मांड" "Meta" and "Universe" in Snow Crash के एक बंदरगाह के रूप की दुनिया दिखाई गयी है। इस तरह से मेटा शब्द का ओरिजिन वहीँ से चलता आ रहा है। फिर बाद में तो वर्चुअल वर्ल्ड प्लेटफॉर्म जैसे, सेकेंड लाइफ second life (दूसरा जीवन) जैसे लोकप्रिय popular उपयोग के लिए विभिन्न मेटावर्स विकसित किए गए हैं। कुछ मेटावर्स पुनरावृत्तियों metaverse iterations में आभासी और भौतिक रिक्त स्थान और आभासी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एकीकरण शामिल है, अक्सर आभासी वास्तविकता प्रौद्योगिकी Technology को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाती है। 

विभिन्न संबंधित प्रौद्योगिकियों और परियोजनाओं के लिए विकास की प्रगति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के लिए जनसंपर्क के उद्देश्यों के लिए इस शब्द का काफी उपयोग चर्चा के रूप में देखा गया है। सूचना गोपनीयता और उपयोगकर्ता की लत मेटावर्स के भीतर चिंता का विषय है, जो संपूर्ण रूप से सोशल मीडिया social media और वीडियो गेम video game उद्योगों industries के सामने आने वाली चुनौतियों से उत्पन्न होती है

फेसबुक facebook ने क्यों बदला अपना नाम 

हर कोई यही चाहता है कि वह अपने व्यवसाय में क्या ऐसा नया जोड़े कि लोग उससे ऊबें न, एक जैसा खाना रोज़-रोज़ किसी को नहीं भाता। जिस तरह से पूरी दुनिया एक आभासी दुनिया की दीवानगी में डूबती दिखाई दे रही है। हर किसी को कम मेहनत कर के अधिक एंटरटेनमेंट Entertainment करने को मिल सके। जिस तरह से समाज के पास समय नहीं है लोगों से मिलने का, ऐसे में हर कोई एक ऐसा विकल्प चाहता है जोकि लोगों को सोशयली, वर्चुल ही सही कनेक्ट रखे। मार्क ज़ुकरवर्ग ने इस अवसर को भुनाने का कार्य किया, उन्होंने सोचा कि क्यों न फेसबुक को उस मुकाम पर ले जाया जाए, जहाँ से लोग दूर होकर भी असल रुपी करीबी का अनुभव करें। फिर क्या था लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित करने के लिए फेसबुक के फाउंडर एवं सीईओ मार्क ज़ुकरवर्ग Facebook founder and CEO Mark Zuckerberg ने तत्काल ही इसका नाम बदल कर मेटा meta कर दिया। ज़ुकरवर्ग ने इसके लिए काफी पैसा भी लगा दिया है और साथ ही साथ यह भी कहा है कि यह इंटरनेट और उनकी ट्रिलियन डॉलर की कंपनी का भविष्य है।

meta verse टेक्नोलॉजी को जाने

Metaverse टेक्नोलॉजी एक ऐसी वर्चूअल दुनिया है जहाँ पर आपको एक अलग प्रकार का अनुभव होगा। हालाँकि यह एक कम्प्यूटर द्वारा तैयार की गयी दुनिया है, लेकिन ये आपको बिलकुल असली दुनिया से भी ज़्यादा सच्ची दुनिया दिखायी पड़ेगी। Meta verse को इंटर्नेट का अदभुत और नया दौर कहना ग़लत नहीं होगा। यह एक ऐसी काल्पनिक दुनिया है, जिसे की तैयार किया गया है advanced Artificial intelligence (AI) टेक्नॉलजी द्वारा जोकि वर्चूअल और augmented रीऐलिटी द्वारा एक साथ जुड़कर बनी है। यह आभासी वास्तविकता, संवर्धित वास्तविकता augmented reality और वीडियो सहित प्रौद्योगिकी के कई तत्वों का एक संयोजन Combination है जहां उपयोगकर्ता एक डिजिटल ब्रह्मांड digital universe के भीतर होने का अनुभव करता है। मेटावर्स के चालक अपने उपयोगकर्ताओं को तमाम तरह के इवेंट्स जैसे संगीत समारोहों या सम्मेलनों आदि से लेकर दुनिया भर की आभासी यात्राओं तक हर चीज के माध्यम से काम करने, खेलने और दोस्तों के साथ जुड़े रहने की कल्पना करते हैं।

क्या है मेटावर्ज़ का भविष्य future of metaverse  

सकारात्मक  पहलू 

अगर हम इसके सकारात्मक पहलुओं को देखे तो कई प्रकार से यह एक नयी दुनिया में ले जाने जैसा ही अनुभव दिलाने वाली पहल है और रही फेसबुक की बात तो यकीनन इसमें वे ऐसा कुछ ले कर आएंगे जो पूरे विश्व को एक नयापन देने वाला है। बीते वर्षों में फेसबुक ने पूरी दुनिया को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया जिस कारण ज़ुकरवर्ग की कंपनी आज टॉप लेवल की सोशल मीडिया कंपनी बन बैठी है। जिस कारण उसको उम्मीद है कि वह यहाँ भी विफल नहीं होगी। मेटा वर्ज़ का सकारात्मक पहलु एक और भी है जो इसको वास्तविक बनाता है जैसे आजकल की वीडियो गेमिंग जो कि आभाषी होने के बावजूद भी वास्तविक दिखाई पड़ती है। वीडियो कालिंग में भी यह वास्तविकता को इस तरह प्रदर्शित करता है कि ऐसा लगता है मानों सामने वाला आपके पास ही बैठा हो। इसका क्रियान्वन कुछ इस तरह चलता है। 

वीडियो गेम्स में मेटा का क्रियान्वन working of meta in video game

आजकल की आधुनिक इंटरनेट की दुनिया से थोड़ा पीछे भी जाएँ तो पाएंगे कि वीडियो गेम के भीतर मेटावर्स प्रौद्योगिकियों के कई घटक पहले ही विकसित किए जा चुके हैं। 2003 के वर्चुअल वर्ल्ड प्लेटफॉर्म सेकेंड लाइफ को अक्सर पहले मेटावर्स के रूप में देखा जाता है, क्योंकि इसने सोशल मीडिया के कई पहलुओं को एक सतत त्रि-आयामी या यूँ कहें कि 3D दुनिया में शामिल किया है, जिसमें उपयोगकर्ता को एक अवतार के रूप में दर्शाया गया था। कई व्यापक मल्टीप्लेयर ऑनलाइन गेम Massively Multiplayer Online Game में सामाजिक कार्य अक्सर एक अभिन्न विशेषता रखते हैं। 

 आभासी वास्तविकता का क्रियान्वन 

बीते दो बरस पहले फेसबुक कंपनी ने फेसबुक होराइजन Facebook Horizon नामक एक सोशल वीआर वर्ल्ड लॉन्च किया था। आज उसका नाम बदलकर फेसबुक  ने "मेटा प्लेटफॉर्म्स" कर दिया। मेटा प्लेटफॉर्म्स द्वारा विज्ञापित कई आभासी वास्तविकता प्रौद्योगिकियों का विकास और उसको संचालित किया जाना बाकी है। आप जान कर हैरान होंगें कि मेटा प्लेटफ़ॉर्म पर यौन उत्पीड़न की घटना के कारण होराइजन वर्ल्ड्स के संबंध में उपयोगकर्ता की सुरक्षा हेतु आलोचना का भी सामना करना पड़ा है। समझने वाली बात यह है कि अभी इस पर कितना कार्य करना बाकी है, ताकि इसके कर्यान्वन में इसकी फंक्शनिंग में वह प्रारूप तैयार हो सके जोकि सामाजिक सुरक्षा में एक नया योगदान भी दे सके। फिर भी अगर आभासी वास्तविकता के क्रियान्वन की बात करें तो इसको बहुत सरल भाषा में समझा जा सकता है, जिसमें कि पारस्परिक आपसी सामाजिक तालमेल को एक आभासी तरीके से बढ़ाना जिसमें मेटा टेक्नोलॉजी का ऐसा मिश्रण होगा जोकि इस आभासीपन को वास्तविकता की चादर पहनाने का कार्य करेगा।    

मेटावर्ज़ के नकारात्मक पहलू 

कोई भी चीज जोकि दुनिया में नयी है फिर चाहे वह खोज हो या आविष्कार उसके अगर फायदे हैं तो कई नुकसान भी हैं। जिसने उस चीज को बनाया है वह तो सिर्फ आपको उस वस्तु, अविष्कार या खोज के फायदे ही गिनाएंगे, परन्तु जब समाज उसका उपभोग करता है या पप्रयोग में लाता है तब उसके नुकसान भी सामने आते है। अब हम बात मेटावर्ज़ की कर रहे हैं तो इसके जो नुकसान हैं उनको भली-भाँति समझा जा सकता है। 

1) जिस तरह से सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम या आप व्हाट्सप्प को ही ले लीजिये लोग इसके इतने आदी हो गए हैं कि आये दिन मानसिक विकार से पीड़ित लोगों का समूह बढ़ता ही जा रहा है। इतना पहले कभी देखने को नहीं मिला कि मानसिक रोगियों की संख्या में इतना इजाफ़ा हुआ हो, परन्तु आज ये तादात पहले से कई गुना हुई है। आप किसी भी सर्वे का डेटा उठा कर देख लीजिये आप पाएंगे की मेटल हेल्थ का ratio 70 प्रतिशत से ऊपर या उसके आसपास ही मिलेगा। ठीक वैसे ही मेटा हमारे जीवन में कितना नकारात्मक असर डालेगा ये तो समय बताएगा। 

2) आप जान के हैरान होंगे की लगभग कई रिपोर्ट्स के माध्यम से पता चला है कि 12-17 वर्ष की आयु के 13% बच्चे अवसाद की स्थिति में देखे गए है जोकि सोशल मीडिआ का इफ़ेक्ट दिखता है। 18 से 25 साल के 25% लोग मानसिक बीमारी से ग्रसित पाए गए हैं। ये आयु वर्ग सोशल मीडिया के उच्च उपयोग की रिपोर्ट करते हैं।

59% अमेरिकी किशोरों ने साइबरबुलिंग या ऑनलाइन उत्पीड़न का अनुभव किया। 90% कहते हैं कि उन्हें लगता है कि यह उत्पीड़न एक ऐसी समस्या है जो उनकी उम्र के अन्य लोगों को प्रभावित करती है। 63% का कहना है कि यह एक बड़ी समस्या है।

3) कई आलोचकों और संशयवादियों Critics and Skeptics ने फेसबुक को सोशल मीडिया कंपनी से मेटावर्स कंपनी में बदलने की जुकरबर्ग की योजना का मजाक उड़ाया है। कुछ आलोचकों का कहना है कि जब कंपनी पीआर संकट से जूझ रही है, तब मेटावर्स पर ध्यान केंद्रित करके और खुद का नाम बदलकर, फेसबुक वास्तविक दुनिया में पैदा होने वाली या योगदान देने वाली समस्याओं से ध्यान हटा रहा है। किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने, प्रसार को सुविधाजनक बनाने जैसे मुद्दे दुष्प्रचार, और राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देना है। 

निष्कर्ष 

कोई भी सुविधा कब असुविधा में तब्दील हो जाए यह तो समय ही बताएगा परन्तु पहले से ही उसके प्रति कोई भी प्रडिक्शन prediction बनाना भी उतना ही व्यर्थ है जितना कि अगले दिन में होने वाली दिनचर्या को ठीक वैसे ही जी पाना जैसा कि अपने प्रडिक्ट किया था। आप ने देखा कि किस तरह से फेसबुक ने खुद को एक नए आयाम में रखकर खुद को मेटा प्लेटफार्म में तब्दील कर लिया। किस तरह से मेटा पूरी दुनिया की आने वाली पसंद बनता जा रहा है। मेटा टेक्नोलॉजी का विस्तारण, उसके फायदे और अंततः उससे होने वाले दुष्परिणाम भी ला सकता है जिस तरह फेसबुक में देखने को मिल रहा है।




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