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श्रीमद्भगवद्गीता में छिपा है सफलता का रहस्य

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श्रीमद्भगवद्गीता में छिपा है सफलता का रहस्य
19 Nov 2021
8 min read
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श्रीमद्भगवद्गीता सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, इसमें जीवन के प्रत्येक युग और अवस्था को लेकर सुझाव दिए गए हैं। आज हम आपको इसमें छिपे सफलता के रहस्य के बारे में बताएंगे।

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हर इंसान में भर-भर के उत्साह होता है मगर कुछ लोग जीवन में बहुत ज्यादा सफल हो जाते हैं वहीं कुछ लोग एक बार या दो बार असफल होने के बाद कोशिश करना ही छोड़ देते हैं। उत्साह तो हम सब में है लेकिन ऐसा क्यों होता है कि कोई बहुत सफल होता है और कोई असफल। इंसान अपने उत्साह को किस दिशा में लगा रहा है, ये तय करता है कि वह कितना सफल होगा। जो इंसान सही दिशा में सही तरीके से निरंतर continuously प्रयास करता है सफलता success उसे ही मिलती है। 

आज हम आपको भगवद्गीता में छिपे सफलता के रहस्य के बारे में बताएंगे, पर श्रीमद्भगवद्गीता ही क्यों?

श्रीमद्भगवद्गीता bhagavad-gita सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, इसमें जीवन के प्रत्येक युग और अवस्था को लेकर सुझाव दिए गए हैं। तो आइए जानते हैं गीता में छिपे सफलता के रहस्य के बारे में-

1. निष्ठा और अनुशासन

श्री कृष्ण ने अर्जुन को समझाया था कि अर्जुन तुम क्षत्रिय हो और सत्य और धर्म के लिए युद्ध करना तुम्हारा कर्तव्य है इसीलिए युद्ध को भी निष्ठा और अनुशासन से लड़ो। इससे हमें यह सीख मिलती है कि आप चाहे कोई भी काम करें, उसे हमेशा निष्ठा और अनुशासन के साथ करें। जैसे अगर कोई विद्यार्थी है तो उसका कर्तव्य है शिक्षा ग्रहण करना और एक अध्यापक का कर्तव्य है बच्चों को शिक्षा देना और दोनों को अपने-अपने कर्तव्य का पालन निष्ठा और अनुशासन के साथ करना चहिए।

2. कर्म करो

आपने अक्सर लोगों को कहते हुए सुना होगा कि मैं काम तो कर रहा हूं पर मुझे मेरी मेहनत का फल नहीं मिल रहा है। श्री कृष्ण ने समझाया है कि हमें सिर्फ कर्म करना चाहिए और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। जब व्यक्ति को फल की चिंता नहीं होगी तो उसे तनाव नहीं होगा और वह मेहनत करने से नहीं डरेगा इसीलिए सफल होना है तो सबसे ज्यादा मेहनत करो और ये कहना बंद करो कि मुझे मेरी मेहनत का फल नहीं मिल रहा है।

3. लोक कल्याण

अगर आप इस दुनिया में सही सलामत हैं तो आपके मन से लोक कल्याण का ख्याल कभी नहीं जाना चाहिए। ये हमारा कर्तव्य है कि हम दूसरों की मदद करें। दुनिया का हर आम व्यक्ति महान व्यक्तियों से सीख लेता है इसीलिए जीवन में सफलता मिलने पर लोगों की मदद करें ताकि हर आम व्यक्ति आपसे प्रभावित होकर अच्छे काम करे।

4. लालच का त्याग करो

जब तक आपके मन में लालच है, आप खुश नहीं रह सकते। चाहे आप कितने भी सफल क्यों ना हो जाएं कोई न कोई तो ऐसा होगा ही, जो आपसे किसी न किसी चीज़ में आगे होगा इसीलिए लालच का त्याग करो। जो लोग लोभ का त्याग नहीं कर पाते वे जीवन में खुश नहीं रह पाते हैं।

5. क्रोध का त्याग करो

क्रोध में व्यक्ति गलत निर्णय लेता है और उस निर्णय की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान उसी को होता है। गीता में कहा गया है कि क्रोध से बुद्धि का नाश होता है और नाश हुई बुद्धि को सही और गलत के बीच का फर्क नहीं पता होता है। 

आपकी बुद्धि का सबसे बड़ा शत्रु क्रोध है।

6. किस चीज़ का त्याग करें?

सफल बनना है तो हर उस चीज़ का त्याग करो जो आपको आपके लक्ष्य से दूर ले जाता हो। 

7.कौन होता है एक सफल शिष्य

क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान श्री कृष्ण ने गीता के महान उपदेश सिर्फ अर्जुन को ही क्यों दिए?

श्री कृष्ण चाहते तो ये उपदेश वह दुर्योधन, भीम, युधिष्ठिर या कर्ण को भी दे सकते थे लेकिन अर्जुन में कुछ ऐसी विशेष बातें थी जिसकी वजह से श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश उन्हें दिया। 

अर्जुन का सबसे अच्छा गुण था विनम्रता से श्री कृष्ण की बातों को सुनना। अर्जुन को भगवान श्री कृष्ण पर पूरा विश्वास था और वह उनकी किसी भी बात पर कोई संदेह नहीं करते थे। 

जो विद्यार्थी विनम्रता पूर्वक अपने गुरु के द्वारा बताई गई बातों का पालन करता है, सफलता उसके कदम चूमती है।