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महाभारत युग के वह व्यापार/पेशे जो आज भी मौजूद है 

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महाभारत युग के वह व्यापार/पेशे जो आज भी मौजूद है 
20 Jan 2022
5 min read
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श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सारथी बनकर ही गीता का महाज्ञान दिया था । महारथी भीष्म के सारथी -अधिरथ थे, जो दानवीर कर्ण के पिता थे । महाभारत के हस्तिनापुर साम्राज्य की महारानी और महाराज शान्तनु की दूसरी पत्नी सत्यवती भी मत्स्य व्यापार के समुदाय से ही थी, उनका एक नाम मत्स्यगंधा भी था । महाभारत युग के समय की ऐसी कई बातें और व्यापार हैं जिनके विषय में एक blog भी कम पड़ेगा पर फ़िलहाल के लिए आशा है कि आपको आज का यह topic अच्छा लगेगा।

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मत्स्य व्यापार , fisheries -

यह प्रमाणित और लिखित है कि मत्स्य व्यवसाय करने वाले मछुआरों की पूरी बस्ती मौजूद थी। महाभारत के हस्तिनापुर साम्राज्य की महारानी और महाराज शान्तनु की दूसरी पत्नी सत्यवती भी मत्स्य व्यापार के समुदाय से ही थी , उनका एक नाम मत्स्यगंधा भी था। यह समुदाय वृहद् स्तर पर गंगा के किनारे भारत के हर कोने में मत्स्य पालन और व्यवसाय करता था, आज भी मत्स्यपालन और मछुआरों का व्यापार, समुदाय मौजूद है, हाँ अब उस युग की तुलना में फिर भी अब यह व्यवसाय थोड़ा कम प्रसारित है पर अब भारत सरकार के प्रयत्नों द्वारा इसका मंत्रालय भी सकारात्मक दिशा में प्रयासरत है -प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना।

सरकारी कोष और कोषाध्यक्ष, government treasury/ banks and bankers -

राजकाज को चलाने के लिए महाभारत युग में भी सरकारी कोष की उपस्थिति थी । प्राचीन काल से ही सभी तरह के शासन की व्यवस्था चलाने के ही सरकारी ख़ज़ाने से जनता के लिए कार्य किए जाते थे और किसी भी आपातकालीन (emergency ) की स्थिति में जनता की भलाई और सहायता के लिए यह कोष खोल दिए जाए थे । इन सरकारी कोष की पूरे कामकाज का नियंत्रण एक कोषाध्यक्ष (treasury minister) के हाथ में होता था । यही योजना आज government banks और bankers के रूप में दिखती है।

वैद्य, Ayurvedic doctors

महाभारत काल में ऐसी बहुत सी घटनाएँ मिलती हैं जहाँ वैद्य अपनी प्राचीन जड़ी-बूटियों से, प्रकृति से प्रेरणा लेकर चिकित्सा करतें थे, इसका कारण था वे प्रकृति को सबसे बड़ी healer मानते थे और उनके सभी ज्ञान में हर प्राकृतिक गुण और मानव मन-मस्तिष्क की समझ होती थी।यह व्यवसाय वर्तमान कुछ समय के लिए धीमा पड़ गया था पर अब वापस से सरकार की सहायता से इसे स्थापित करने, रिक्तियाँ निकालने और युवाओं को इस ओर प्रेरित करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है । कुछ समय पहले ही माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इसी प्रकृति से जुड़े ज्ञान की ओर प्रेरित करने को आयुष मंत्रालय की स्थापना की है । बहुत कम लोगों को पता है कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ​​​​( National Ayurveda Sansthan ) जयपुर में स्थित है। इसमें कई तरह के course चलतें हैं ।

ललित कलाएँ - varieties of arts 

व्यक्त होने वाली कलाएँ ललित कला (Fine arts) कहलाती हैं। अर्थात् वह कला जिसके अभिव्यंजन (expressiveness) में सुकुमारता(sweetness) और सौंदर्य (beauty) की अपेक्षा हो और जिसकी सृष्टि मुख्यतः मनोविनोद (amusement/entertainment) के लिए हो। जैसे गीत, संगीत, नृत्य, नाट्य तथा विभिन्न प्रकार की चित्रकला।(The five main fine arts were painting ,sculpture,architecture,music, and poetry, with performing arts including theater and dance) नृत्य,गायन, वादन, चित्रकारी, मूर्तिकला  शैली के कई प्रकार में पारंगत कई कलाकरों से यह महाभारत काल समपन्न था । देश-विदेश, गाँव, क़स्बों से कई कलाकार इस युग में राजमहलों में अपनी प्रस्तुति देने आते थे। वर्तमान में इन प्राचीन कलाओं को कई संस्थानों में सिखाया जाता है, आप अपनी कला से जुड़े अपनी  पसंद के किसी भी संस्थान का पता करके प्रशिक्षित हो सकतें हैं, नर्तक (dancer) गायक (singer ) अभिनेता (actor ) या चित्रकार (painter) सूत्रधार (anchor ) यह सभी पेशे तो आज भी हैं पर उस समय और आज के समय में बहुत भेद हैं और बदलाव समय की माँग है ।आज के समय में  भारतीय संस्कृति मंत्रालय Ministry of Culture का इसमें बहुत बड़ा योगदान है।

वस्त्र उद्योग, textile industry 

महाभारत युग के वस्त्र-आभूषण की भव्यता हमें कभी पुस्तकों में पढ़ने को मिलती है तो कभी महाभारत पर बने अनगिनत television shows में । एक बात जो हर जगह देखने को मिलती है की यह युग बहुत भव्य था इस कारण से इस युग का पहनावा भी, यहाँ के वस्त्र के व्यापारी यातायात साधनों (transportation facilities )की कमी के कारण महीनों और कभी-कभी तो वर्षों एक स्थान से दूसरे स्थान पर यात्रा करके तरह-तरह के वस्त्रों को एकत्र कर अपने राज्य में लाते थे ताकि अच्छा व्यापार कर सकें । अब तो यातायात भी आसान है और व्यापार भी तो चाहे आपको -organza चाहिए हो, silk चाहिए हो या -कश्मीर का पश्मीना, पंजाब की फुलकारी, ये सभी बस आपकी एक click पर आपतक पहुँच जाएँगें, किंतु महाभारत युग के व्यापारी यह सफ़र बेहद कठिन परिश्रम से तय करते थे।भारत के Ministry of Textile ने इस पेशे की तरक़्क़ी का पूरा ध्यान रखा है।

सारथी, drivers 

महाभारत में सारथी शब्द का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है । श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सारथी बनकर ही गीता का महाज्ञान दिया था । महारथी भीष्म के सारथी -अधिरथ थे, जो दानवीर कर्ण के पिता थे । अब के समय में रथों का रूप ले लिया है बड़े-बड़े वाहनों ने, और सारथी है नए जमाने के रास्तों पर गाड़ियाँ चलते चालक drivers 

साज-सज्जा, श्रृंगार सेविकाएँ ( beauty and hair dressers )

महाभारत युग में जब पांडवों का अज्ञातवास विराटनगर राज्य में चल रहा था, सभी पांडवों ने अलग-अलग रूप धारण किए थे उसी समय पांडवों की पत्नी महारानी द्रौपदी, विराटनगर की महारानी की साज-सज्जा और श्रृंगार का ध्यान रखने वाली सेवा में सैरन्धरि नाम से उपस्थित थी। इस काल के आलवा भी हर में सभी सवेक-सेविकाओं को राजकाज में उनके गुणों के अनुसार ही कार्य सौंपे जाते थे।यही व्यवसाय आज beautician और hairdressers के रूप में उपस्थित है ।

महाभारत युग के समय की ऐसी कई बातें और व्यापार हैं जिनके विषय में एक blog भी कम पड़ेगा पर फ़िलहाल के लिए आशा है कि आपको आज का यह topic अच्छा लगा होगा।