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भारत के महान वैज्ञानिकों का योगदान

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भारत के महान वैज्ञानिकों का योगदान
10 Nov 2021
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विज्ञान की दुनिया में जो निरंतर खोज, परिवर्तन, अविष्कार, विकास सब वैज्ञानिकों की मेहनत और समर्पण का नतीजा है। वैज्ञानिक खोजें कई बार न केवल हैरान करती हैं, बल्कि अपने अनूठे गुणों के कारण अक्सर रोमांच से भर देती हैं। आज विज्ञान हमारी जीवन शैली का महत्‍वपूर्ण हिस्सा बन गया है। हमारे देश में ऐसे महान वैज्ञानिक हुए हैं जैसे विक्रम साराभाई, चंद्रशेखर वेंकटरमन, विक्रम साराभाई आदि जिन्होंने विश्वपटल पर भारत के प्रति नजरिये को बदल दिया और देश में विज्ञान के क्षेत्र में क्रांति ला दी। इन वैज्ञानिकों का योगदान और कहानियां काफी प्रेरणादायक हैं। इनके योगदान और अविष्कारों को हम कभी भुला नहीं पायेंगे।

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आज दुनिया विकास के जिस मुकाम पर पहुंची है वह विज्ञान और वैज्ञानिकों (scientist) के महान अविष्‍कारों inventions की ही देन है। आज भारत जिस तकनीकी technology विकास के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है उसी तस्‍वीर को बदलने में भारतीय वैज्ञानिकों Indian scientist का महत्‍वपूर्ण योगदान रहा है और विश्व में भी भारत ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान दिया है। चलिए जानते हैं ऐसे महान वैज्ञानिकों के बारे में जिन्होंने भारत का नक्शा ही बदल दिया। 

डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा, bhabha

होमी जहांगीर भाभा भारत के महान परमाणु वैज्ञानिक थे। उन्हें भारत के परमाणु उर्जा कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। उन्होंने देश के परमाणु कार्यक्रम के भावी स्वरूप की मजबूत नींव रखी जिसके चलते भारत आज विश्व के प्रमुख परमाणु संपन्न देशों की कतार में खड़ा है। उन्होंने कॉस्केट थ्योरी ऑफ इलेक्ट्रान का प्रतिपादन करने के साथ ही कॉस्मिक किरणों पर भी काम किया जो पृथ्वी की ओर आते हुए वायुमंडल में प्रवेश करती है। उन्होंने ‘टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च’ (टीआइएफआर) और ‘भाभा एटॉमिक रिसर्च सेण्टर’ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बहुमुखी प्रतिभा संपन्न डॉक्टर भाभा को नोबेल पुरस्कार Nobel prize विजेता सर सीवी रमन भारत का लियोनार्दो द विंची बुलाते थे। भाभा न सिर्फ महान वैज्ञानिक थे बल्कि वह शास्त्रीय संगीत, नृत्य और चित्रकला में गहरी रूचि रखते थे और इन कलाओं के अच्छे जानकार भी थे।

चंद्रशेखर वेंकटरमन

भारत में कई महान वैज्ञानिकों का जन्म हुआ है। जिसमें से आधुनिक भारत के महान वैज्ञानिकों में से एक वैज्ञानिक चन्द्रशेखर वेंकटरमन रह चुके हैं। चंद्रशेखर वेंकट रमन भारतीय भौतिक विज्ञानी, जिन्होंने भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले भारतीय बनकर अपनी मातृभूमि को गौरवान्वित किया। वर्ष 1954 में सी.वी रमन को भारत रत्न अवार्ड प्रदान किया गया था। वेंकटरमन ने प्रकाश पर गहन अध्ययन किया। वो इस रहस्य को उजागर करना चाहते थे कि पानी रंगहीन और तरल है परन्तु आंखों को नीला क्यों दिखाई देता है। इस प्रकार प्रकाश के प्रकीर्णन पर प्रयोगों की एक श्रृंखला शुरू हुई जिसके परिणामस्वरूप अंततः रमन प्रभाव के रूप में जाना जाने लगा। रामन प्रभाव स्पेक्ट्रम पदार्थों को पहचानने और उनकी अन्तरंग परमाणु योजना का ज्ञान प्राप्त करने का महत्‍वपूर्ण साधन के रूप में जाना गया। उनको 1957 में लेनिन शान्ति पुरस्कार प्रदान किया। 

विक्रम साराभाई 

डॉ. साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक माना जाता है। एक तरह से उन्होंने भारत के अंतरिक्ष प्रोग्राम की नींव रखी। उन्होंने देश में 40 अंतरिक्ष शोधों से जुड़े संस्थानों को खोला। अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला की स्थापना में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष भी थे। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO की स्थापना उनकी महान उपलब्धियों में एक थी। भारतीय परमाणु विज्ञान कार्यक्रम के जनक के रूप में व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त डॉ. होमी जहाँगीर भाभा ने भारत में प्रथम राकेट प्रमोचन केंद्र की स्थापना में डॉ.साराभाई का समर्थन किया। उन्होंने आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य अनेक क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान दिया। डॉ. साराभाई विज्ञान की शिक्षा में अत्यधिक दिलचस्पी रखते थे और 1966 में सामुदायिक विज्ञान केंद्र की स्थापना अहमदाबाद में की। आज यह केंद्र विक्रम साराभाई सामुदायिक विज्ञान केंद्र कहलाता है।

डॉ जगदीश चंद्र बोस 

जगदीश चंद्र बसु एक महान वैज्ञानिक थे। वह वैज्ञानिक जिसकी दोस्ती तरंगों से थी और जिसने पहली बार दुनिया को बताया कि पेड़-पौधों को भी अन्य सजीव प्राणियों की तरह दर्द होता है। भारत के पहले आधुनिक वैज्ञानिक कहे जाने वाले जगदीश चंद्र बसु रेडियो और सूक्ष्म तरंगों पर अध्ययन करने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक थे। उन्हें भौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पतिविज्ञान तथा पुरातत्व का गहन ज्ञान था। उन्होंने वनस्पति विज्ञान में भी कई महत्वपूर्ण खोजें की। पूरी दुनिया में उन्हें रेडियो विज्ञान का पिता कहा जाता है। विभिन्न संचार माध्यमों, जैसे- रेडियो, टेलीविजन, रडार, सुदूर संवदेन यानी रिमोट सेंसिंग सहित माइक्रोवेव ओवन की कार्यप्रणाली में बसु का योगदान अहम है। वर्ष 1885 में बोस ने रेडियो तरंगों द्वारा बेतार संचार का प्रदर्शन किया था। उनका मानना था कि सजीव और निर्जीव या निष्क्रिय पदार्थों के रास्ते कहीं न कहीं आपस में मिलते जरूर हैं और इस मिलन मे विद्युत चुम्बकीय तरंगे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।