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बच्चों में अच्छी आदतों का निर्माण

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बच्चों में अच्छी आदतों का निर्माण
21 Jan 2023
3 min read
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अगर हम चाहते हैं कि हमारा बच्चा एक अच्छा इंसान बनें और अच्छा इंसान होने के साथ-साथ उनमें समाज सेवा का गुण भी हों तो इसके लिए हमें बच्चों में शुरू से ही अच्छी आदतों का निर्माण Building Good Habits In Children करना होगा। अच्छी आदतें बच्चे को मानसिक और शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रखती हैं। अच्छी आदतें बच्चे के चरित्र एवं व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होती हैं। जिन बच्चों में सही समय पर कार्य करने की आदत नहीं होती है वे बच्चे हर दृष्टिकोण से पिछड़ जाते हैं। बच्चों को अच्छी शिक्षा दें। बच्चों को अच्छी आदतों का निरंतर अभ्यास कराएं। बच्चों को बुरी बातों से दूर रखें। सही पर्यावरण दें और खुशनुमा माहौल दें।

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बच्चों के सही विकास proper development of children के लिए हर माता-पिता को अपने बच्चे पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। जब आपका बच्चा 4-5 साल का हो जाए, तो आपको उसकी आदतों को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए। इस बात से हम सब वाकिफ हैं कि बचपन की अच्छी आदतें भविष्य का निर्माण building the future करने में मदद करती हैं। माता-पिता को अपने बच्चों के बिहेवियर पर ध्यान देना चाहिए, ताकि भविष्य में उनके बच्चों को ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े। आदत शब्द एक ऐसा शब्द है जिसे हम सामान्यतः दिन में कई बार सुनते हैं। हम अक्सर इन वाक्यों का प्रयोग करते हैं जैसे - उसकी ये आदत अच्छी नहीं है, उस बच्चे की लेट उठने की आदत है, वह इस आदत का आदी है, उसकी ये बहुत अच्छी आदत है कि वह सबका सम्मान करता है। इस तरह के वाक्यों से हमारा सामना अक्सर होता रहता है। हम ये कह सकते हैं कि इंसान जो कुछ भी करता है, उसका आदी हो जाता है और उसी को हम आदत कहते हैं। आदतें अच्छी और बुरी दो तरह की होती हैं। अच्छी आदतें इंसान को अच्छा इंसान बनाती हैं वहीं बुरी आदतें इंसान को पतन की ओर ले जाती हैं इसलिए बच्चों में हमेशा अच्छी आदतों का निर्माण करना चाहिए जिससे स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके। तो आज जानते हैं कि कौन सी अच्छी आदतें हैं जो हमें अपने बच्चों को सिखानी और समझानी चाहिए।

बच्चों में अच्छी आदतों का निर्माण (Building Good Habits In Children)

अनुशासनशील बनाएं Make discipline

खुद का खुद पर शासन ही आत्म-अनुशासन है। आत्म-अनुशासन ताले की उस चाबी की तरह है, जिसे कामयाबी या सफलता कहा जाता है |जीवन को सफल बनाने के लिए अच्छी आदतें बहुत ही महत्वपूर्ण होती हैं। मेरा मानना है कि सबसे पहले बच्चे को अनुशासनशील बनाएं क्योंकि अनुशासन जिंदगी में बहुत आवश्यक है। बचपन से ही अगर बच्चा अनुशासन में रहना सीख गया तो वह मुश्किल हालातों के बावजूद भी कभी जीवन में हार नहीं सकता क्योंकि उस बच्चे को समय की कीमत पता होती है। समय से उठना, समय से पढ़ना और समय से खेलना यही सब चीज़ें तो बच्चे को अनुशासन सिखाती हैं। ये गुण अगर बच्चे में बचपन से ही जाए तो बच्चा अपने जीवन में हमेशा प्रगति की ओर अग्रसर रहेगा।

अनुशासित रहना आसान नहीं है इसीलिए अपने बच्चे को कुछ टास्क दें give the child some tasks और उसे कहें कि समय से पहले उसे उन टास्क को पूरा करना है। आप देखेंगे कि धीरे धीरे आपका बच्चा समय की अहमियत को समझने लगेगा और हर काम को उचित समय पर करने लगेगा।  

विनम्र बनना सिखाएं Teach to be polite

बच्चों को विनम्र बनना सिखाएं। विनम्रता का गुण एक ऐसा गुण है जो लोगों का सम्मान करना सिखाता है। बच्चों को अपने से बड़ों का आदर करना सिखाएं। उन्हें अच्छे से बात करना सिखाएं। इसके लिए सबसे पहले आप अपने बच्चों के साथ सम्मान के साथ पेश आयें। क्योंकि बच्चा जो देखता है, वही सीखता है। बच्चे में अच्छे गुणों का विकास development of good qualities घर से ही होता है। बच्चा अपने माता-पिता से बहुत कुछ सीखता है। अगर बच्चा विनम्र स्वभाव का है तो बच्चे की हर कोई तारीफ करेगा। जिससे बच्चे को सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी और बच्चा बेहतर बनने का प्रयास करेगा।

इसकी शुरुआत आप एक बहुत छोटी चीज़ से कर सकते हैं। अगली बार आप जब भी अपने बच्चे से बात करें तो उसे तुम की जगह आप कहकर बुलाएं क्योंकि आपके बच्चे में ये गुण होना चाहिए कि वह ना सिर्फ अपने से बड़ों के साथ बल्कि अपने से छोटे लोगों के साथ भी सम्मान के साथ पेश आए। अगर आप अपने बच्चे के साथ प्रेम से पेश आएंगे और विनम्र होकर बात करेंगे तो वह आप से और अन्य लोगों से विनम्र होकर बात करेगा। 

बच्चों को समय दें Give time to children

आजकल पेरेंट्स अपने काम में बिजी रहते हैं। उनके पास अपने बच्चों तक के लिए समय नहीं है। वे बस आर्थिक रूप से मजबूत होना चाहते हैं। वे ये भूल जाते हैं कि इन सब चीज़ों के चक्कर में वे अपने मासूम बच्चों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बच्चे गलत आदतों के शिकार हो जाते हैं। जरूरी है कि आप अपने बच्चों के लिए समय निकालें। उन्हें बाहर घुमाने ले जाएं, परिवार के लोगों से मिलाएं। उनकी पढ़ाई के बारे में उनसे बात करें। उन्हें प्रेरणादायक कहानियाँ inspirational stories सुनाएं और अच्छा माहौल दें। ऐसा करने से बच्चों के अंदर अच्छी आदतों का निर्माण होगा।

आपके बच्चे की उम्र चाहे कितनी भी क्यों ना हो, उसके प्रति आपका दायित्व कभी खत्म नहीं होगा इसीलिए अच्छे पेरेंट्स बनने के लिए आपको इस कला में माहिर होना पड़ेगा कि अपने बिजी शेड्यूल के बावजूद भी आपको अपने बच्चे को सही और गलत के बीच के अंतर की शिक्षा देनी है। 

अगर आपका बहुत बिज़ी शेड्यूल है तो आप ऑफिस जाने से पहले अपने बच्चे से बात करें। रात में घर आने के बाद और डिनर करने के बाद उसे कुछ अच्छी मोटिवेशनल कहानियां सुनाइए। कहानी की मदद से आप अपने बच्चे को कई नैतिक मूल्य सीखा सकते हैं। 

जब भी आपके द्वारा दिए गए किसी काम को आपका बच्चा अच्छे से सही समय पर कर ले तो उसे उस काम के लिए शाबाशी या ईनाम देना ना भूलें क्योंकि शाबाशी और ईनाम हर बच्चे को पसंद होता है। 

अच्छे खान-पान के बारे में बतायें Tell me about good food

आजकल छोटे-छोटे बच्चों में भी बहुत अधिक बीमारियाँ हो रही हैं और इसकी वजह है अच्छा खान-पान होना। अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई बच्चों के स्वास्थ्य के साथ समझौता कर रहा है और उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। बच्चे भी बाहर की चीज़ें खाना सीख गए हैं। उन्हें घर के खाने में स्वाद नहीं आता है। बच्चों को जंक फ़ूड पसंद है। बच्चों को नहीं पता कि रोज-रोज इस जंक फूड को खाने के कारण उनमें कितनी बीमारियाँ बढ़ रही हैं। पैरेंट्स को अपने बच्चों में खानपान की अच्छी आदतें विकसित करनी चाहिए। जिससे वह स्वस्थ रहेंगे और तभी उनका पूर्ण रूप से विकास होगा।

बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास physical and mental development में हेल्दी डाइट का विशेष महत्व होता है। आज कल बच्चे ज्यादातर चिप्स, नूडल्स, बिस्किट, मिठाई, और तरह तरह के जंक फूड्स खाना पसंद करते हैं। अब ऐसे में आप अपने बच्चों को घर के खाने का महत्व समझाएं। उन्हें बाज़ार के पैकेट बंद चिप्स और कोला की जगह फल और सब्जियां, दूध, दही, पनीर आदि फायदेमंद भोजन दें। उन्हें अच्छी डाइट के महत्व के बारे में बताएं। उन्हें जंक फूड से होने वाले नुकसान के बारे में बताएं ताकि वे आपसे जंक फूड खाने के लिए ज़िद ना करें।

 गैजेट्स की जगह किताबों के बारे में बताएं Tell about books instead of gadgets 

आजकल बच्चों ने किताबों से दूरी बना ली है। उन्हें बस मोबाइल, कंप्यूटर, इंटरनेट का साथ चाहिए। इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव ये है कि गैजेट्स के इस्तेमाल से बच्चे संवेदनहीन हो रहे हैं। माता-पिता को चाहिए कि इसके लिए एक समय निश्चित करें। बच्चों को व्यावहारिक बनाएं। स्मार्टफोन या अन्य गैजेट्स smartphone or other gadgets देने के साथ-साथ उन्हें उनके अच्छे और बुरे परिणामों के बारे में बताएं और बच्चे की गतिविधियों पर नजर रखें। बच्चों को किताबों के बारे में बताएं। इसके लिए आप घर में छोटी सी लाइब्रेरी बना सकते हैं। उनमें कहानी की किताबें, नैतिक शिक्षा की किताबें और कुछ प्रेरणादायक किताबें inspirational books भी रख सकते हैं। जिससे बच्चे का ध्यान अन्य चीज़ों की तरफ से हटकर किताबों में लगा रहेगा।

चूंकि आपने अपने बच्चे को अनुशासन का पाठ दिया है तो किताबें भी पढ़ेगा और फोन का भी इस्तेमाल करेगा और दोनों ही ज़रूरी है लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब वह इनमें से किसी एक चीज़ को ज्यादा समय देने लगे। अपने बच्चे को समझाएं कि फोन का इस्तेमाल कम ही करना है और ज्यादा समय किताबों को देना है। 

आप तो उन्हें रोज़ कुछ नई-नई बातें सीखा ही रहे हैं लेकिन जो बातें एक अच्छी किताब सीखा सकती है वह काम शायद ही कोई कर सकता है। अपने बच्चे के लिए उसके रूम में एक लाइब्रेरी बनवाएं और वहां कई अच्छी-अच्छी किताबें लाकर रख दें। आप नोटिस करेंगे कि अपने खाली समय में आपका बच्चा फोन से ज्यादा किताबों में डूबा रहेगा। भला इससे भी अच्छा कुछ हो सकता है!

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सफाई से अवगत करायें

बच्चों को समय-समय पर सफाई और स्वच्छता से भी अवगत कराते रहें। उन्हें बताएं कि सफाई से ही हम स्वस्थ रह सकते हैं। उन्हें सिर्फ घर में ही नहीं बल्कि अपने आस-पास सफाई करवाना सिखाएं। ये सब करने से बच्चों को जिम्मेदारी का एहसास children's sense of responsibility होगा और भविष्य में बच्चा जिम्मेदार नागरिक बनेगा। बच्चों को समझाएं कि कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में ही फेंकना चाहिए और उन्हें ये भी बताएं कि जब हम घर से बाहर हों तो कूड़े को इधर-उधर कभी भी फेंके। अगर वहां पर कूड़ादान हो तो कूड़ा एक पॉलिथीन में रख दें और अपने बैग में डाल दें और बाद में उसे फेंक दें। इससे बच्चों में अच्छी आदत का विकास भी होगा। उन्हें समझाने का प्रयास करें कि साफ़-सफाई से बीमारियाँ हमसे दूर रहती हैं और साफ़-सफाई से ही हमारा राष्ट्र स्वस्थ सुंदर होगा।

साथ-साथ उन्हें यह भी समझाएं कि जब भी वे बाहर से घर आएं, तो सबसे पहले अपने हाथ-मुंह को धुलें और हाथ धोने से पहले खाने की किसी भी चीज़ को टच न करें। बच्चों को ये भी बताएं कि कूड़े को इधर-उधर न फेंके। डस्टबिन में ही कूड़े को डालें। ऐसा करने से बच्चों में साफ-सफाई की आदत विकसित होगी। ये बहुत सामान्य बात है लेकिन एक बार अगर आपके बच्चे को इसकी आदत पड़ जाएगी तो वह ज़िंदगी भर इन बातों का ध्यान रखेगा। 

अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा किसी काम को जल्दी सीखे तो आप उसे कुछ दिखाकर सीखा सकते हैं। दरअसल, हम सबके लिए देखकर सीखना बेहद आसान होता है इसीलिए अपने बच्चे को कुछ नया सीखाना हो तो आप फिल्म्स, टीवी शोज और यू ट्यूब विडियोज की मदद ले सकते हैं और उन्हें बता सकते हैं कि इस आदत का क्या महत्व है। आप उनकी जगह खुद को रखकर सोचें और फिर ये तय करें कि वह आपकी बात को कैसे आसानी से समझ पाएंगे।