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Sustainability Quality Education

क्या है ये 30: 30:40, और इसके बाद

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क्या है ये 30: 30:40, और इसके बाद

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Post Highlights

परम्परागत शिक्षा प्रोफेशनल शिक्षा और 30: 30: 40 का फार्मूला बच्चों के मन में लेकर आया है हज़ारों उथल-पुथल। साथ ही साथ नयी संभावनाएं क्या-क्या हो सकती हैं। किस-किस तरह के कोर्सेस का चलन है, भारतीय शिक्षा के सन्दर्भ में आइये जानते हैं और डालते हैं एक नज़र इस पर।

कोविड 19 के दौर में हम सब ने बहुत कुछ देखा भी और सहा भी जिसे भूल पाना कितना कठिन है, मगर समय हमें आगे बढते रहने की तरकीब देते हुये बदलता है। लेकिन ये सोचने वाली बात जरूर है कि हमारे आस पास जो कुछ भी घटा उससे हमारे जीवन मेें या जीवन से जुड़ी तमाम जरूरतों पर कितना प्रभाव पडा है जैसे की व्यवसाय या व्यापार रोजमर्रा की जरूरतें, स्कूल, काॅलेज आदि। 

अगर हम देखें की शिक्षा के क्षेत्र में क्या बदलाव आये हैं और इससे पहले इस क्षेत्र में क्या उथल-पथल चल रही थी। ये समझना एक युवा के लिए जितना आवश्यक है, उतना ही उन सभी लोगों को भी शिक्षा के स्वरूप को समझना आवश्यक हो जाता है। अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं 

अभी हाल ही में जिस तरह कोरोना महामारी के चलते पूरे भारत में परीक्षायें या तो स्थगित हो गयी हैं या तो, उन्हें न कराने का आदेश दिया गया। दसवीं व बारहवीं के रिजल्ट को लेकर काफी माथा-पच्ची करने के बाद CBSE बोर्ड ने 30: 30: 40 का फार्मूला लेकर बच्चों को पास करने का फैसला लिया है। तथा कोविड19 या कोरोना के दौर में आगे की पढ़ाई के क्या अवसर बन सकते हैं और क्या-क्या व्यवसाय उनके लिए खुल सकते है सभी के बारें में विस्तार से समझने का प्रयास करेगें

 

30: 30: 40 फार्मूला क्या है? 

30 30 40 का फार्मूला असल में यह है, तीन श्रेणीयों में 100 प्रतिशत अकों को विभाजित किया गया है। प्रथम 30 प्रतिशत दसवीं बोर्ड रिजल्ट के आधार पर दिया जायेगा। जिसमें उन तीन विषयों के नम्बर लिये जायेंगे जिन विषयों में आपके नम्बर अच्छे होगें।

अगले 30 प्रतिशत नम्बर 11वीं कक्षा के अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के अनुसार दिये जायेगें।

तथा अंत में 40 प्रतिशत नम्बर 12वीं कक्षा के उनिट टेस्ट, मिड टेस्ट, या प्री बोर्ड परीक्षा के आधार पर अंक दिये जायेंगे।

बच्चों के रूझान इस प्रक्रिया को लेकर 

इस फार्मूले को लेेकर 12वीं के बच्चों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखी जा सकती है। कुछ छात्रों का कहना है कि ये प्रकिया कारगर तो है परन्तु रिजल्ट के प्रतिशत पर इसका प्रभाव पड़ेगा । छात्रों का कहना है कि जिन बच्चों के मार्क्स  कम है गत वर्षों में जिस कारण उनके नम्बर कम आकें जायेगें। वहीं कुछ छात्रों का कहना है कि ये निर्णय सही है कोविड को देखते हुए।

भविष्य के प्रति विचार

अब सबसे बड़ी बात जो बच्चों के सामने आ रही है, वह ये कि उनका भविष्य वह कैसे तय करेगें। शिक्षा का क्षेत्र यूँ तो बहुत-बहुत व्यापक है मगर जितनी संभावनाएं होती हैं उतना ही भटकाओ  भी पैदा करती हैं। मगर हमें ये सोचना है की हमारी रूचि किसमें है, और आजकल ऐसा क्या नया है जो हम कर सकते हैं। उसके लिए हमे तरह-तरह की रिसर्च करनी होंगी। फिर भी आपको ज्ञात कराना उचित रहेगा कि शिक्षा के कितने क्षेत्र हैं वह इस प्रकार हैं, 

1.) परम्परागत शिक्षा- ट्रेडिशनल एजुकेशन इस प्रकार की शिक्षा होती है, जिसमें पुराने कोर्सेस आते हैं जैसे की कला, विज्ञान, कॉमर्स आदि।  

2 ) प्रोफेशनल शिक्षा-  इस प्रकार की शिक्षा का चलन पिछले कुछ वर्षो से काफी बढ़ा है क्यूँकि ये शिक्षा जल्दी व्यवसाय देने में सक्षम है इसलिए इसकी जरूरत और आवयश्कता  तेजी से बढ़ी हैं।

 जैसा की आप समझ सकते हैं की किस तरह हम शिक्षा के क्षेत्र में नई-नई तकनीकी और कोर्सेस पर अपना भविष्य बना सकते हैं।

कोविड 19 के दौर में हम सब ने बहुत कुछ देखा भी और सहा भी जिसे भूल पाना कितना कठिन है, मगर समय हमें आगे बढते रहने की तरकीब देते हुये बदलता है। लेकिन ये सोचने वाली बात जरूर है कि हमारे आस पास जो कुछ भी घटा उससे हमारे जीवन मेें या जीवन से जुड़ी तमाम जरूरतों पर कितना प्रभाव पडा है जैसे की व्यवसाय या व्यापार रोजमर्रा की जरूरतें, स्कूल, काॅलेज आदि। 

अगर हम देखें की शिक्षा के क्षेत्र में क्या बदलाव आये हैं और इससे पहले इस क्षेत्र में क्या उथल-पथल चल रही थी। ये समझना एक युवा के लिए जितना आवश्यक है, उतना ही उन सभी लोगों को भी शिक्षा के स्वरूप को समझना आवश्यक हो जाता है। अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं 

अभी हाल ही में जिस तरह कोरोना महामारी के चलते पूरे भारत में परीक्षायें या तो स्थगित हो गयी हैं या तो, उन्हें न कराने का आदेश दिया गया। दसवीं व बारहवीं के रिजल्ट को लेकर काफी माथा-पच्ची करने के बाद CBSE बोर्ड ने 30: 30: 40 का फार्मूला लेकर बच्चों को पास करने का फैसला लिया है। तथा कोविड19 या कोरोना के दौर में आगे की पढ़ाई के क्या अवसर बन सकते हैं और क्या-क्या व्यवसाय उनके लिए खुल सकते है सभी के बारें में विस्तार से समझने का प्रयास करेगें

 

30: 30: 40 फार्मूला क्या है? 

30 30 40 का फार्मूला असल में यह है, तीन श्रेणीयों में 100 प्रतिशत अकों को विभाजित किया गया है। प्रथम 30 प्रतिशत दसवीं बोर्ड रिजल्ट के आधार पर दिया जायेगा। जिसमें उन तीन विषयों के नम्बर लिये जायेंगे जिन विषयों में आपके नम्बर अच्छे होगें।

अगले 30 प्रतिशत नम्बर 11वीं कक्षा के अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के अनुसार दिये जायेगें।

तथा अंत में 40 प्रतिशत नम्बर 12वीं कक्षा के उनिट टेस्ट, मिड टेस्ट, या प्री बोर्ड परीक्षा के आधार पर अंक दिये जायेंगे।

बच्चों के रूझान इस प्रक्रिया को लेकर 

इस फार्मूले को लेेकर 12वीं के बच्चों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखी जा सकती है। कुछ छात्रों का कहना है कि ये प्रकिया कारगर तो है परन्तु रिजल्ट के प्रतिशत पर इसका प्रभाव पड़ेगा । छात्रों का कहना है कि जिन बच्चों के मार्क्स  कम है गत वर्षों में जिस कारण उनके नम्बर कम आकें जायेगें। वहीं कुछ छात्रों का कहना है कि ये निर्णय सही है कोविड को देखते हुए।

भविष्य के प्रति विचार

अब सबसे बड़ी बात जो बच्चों के सामने आ रही है, वह ये कि उनका भविष्य वह कैसे तय करेगें। शिक्षा का क्षेत्र यूँ तो बहुत-बहुत व्यापक है मगर जितनी संभावनाएं होती हैं उतना ही भटकाओ  भी पैदा करती हैं। मगर हमें ये सोचना है की हमारी रूचि किसमें है, और आजकल ऐसा क्या नया है जो हम कर सकते हैं। उसके लिए हमे तरह-तरह की रिसर्च करनी होंगी। फिर भी आपको ज्ञात कराना उचित रहेगा कि शिक्षा के कितने क्षेत्र हैं वह इस प्रकार हैं, 

1.) परम्परागत शिक्षा- ट्रेडिशनल एजुकेशन इस प्रकार की शिक्षा होती है, जिसमें पुराने कोर्सेस आते हैं जैसे की कला, विज्ञान, कॉमर्स आदि।  

2 ) प्रोफेशनल शिक्षा-  इस प्रकार की शिक्षा का चलन पिछले कुछ वर्षो से काफी बढ़ा है क्यूँकि ये शिक्षा जल्दी व्यवसाय देने में सक्षम है इसलिए इसकी जरूरत और आवयश्कता  तेजी से बढ़ी हैं।

 जैसा की आप समझ सकते हैं की किस तरह हम शिक्षा के क्षेत्र में नई-नई तकनीकी और कोर्सेस पर अपना भविष्य बना सकते हैं।




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