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जैविक खेती के लाभ एवं आवश्यकता

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जैविक खेती के लाभ एवं आवश्यकता
31 Jul 2021
9 min read
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जिस तरह से पूरे विश्व की जनसँख्या बढ़ रही है तथा अजैविक खाद वाली भोजन सामग्री का बाजार बढ़ता जा रहा है। उसी बीच एक मंद गति से प्रगति करती हुई जैविक खेती दिन व दिन पनप रही है, जो कि मानवीय स्वास्थ्य के लिहाज़ से अति आवशयक है। हर दौर में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो दूसरे के हित के लिए कार्य करते हैं, पर्यावरण के लिए कार्य करते हैं, एवं जलवायु को स्वच्छ करने के लिए कुछ कार्य करते हैं। जैविक खेती की पहल भी कुछ ऐसी ही पहल है, हालाँकि ये प्राचीन पद्दति है, जो आज फिर अपना सर उठा रही है, जो कि आने वाले भविष्य के लिए लाभकारी भी है।

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जिस तरह से पूरे विश्व की जनसँख्या बढ़ रही है तथा अजैविक खाद वाली भोजन सामग्री का बाजार बढ़ता जा रहा है। उसी बीच एक मंद गति से प्रगति करती हुई जैविक खेती दिन व दिन पनप रही है, जो कि मानवीय स्वास्थ्य के लिहाज़ से अति आवशयक है। हर दौर में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो दूसरे के हित के लिए कार्य करते हैं, पर्यावरण के लिए कार्य करते हैं, एवं जलवायु को स्वच्छ करने के लिए कुछ कार्य करते हैं। जैविक खेती की पहल भी कुछ ऐसी ही पहल है, हालाँकि ये प्राचीन पद्दति है, जो आज फिर अपना सर उठा रही है, जो कि आने वाले भविष्य के लिए लाभकारी भी है।

जैविकी खेती करना क्यों है लाभकारी- 

जैविक खेती एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हो जाती है ताकि, भूमि लंबे अंतराल तक खेती लायक बनी रहे। जैविक खेती में सिंचाई के अन्तराल में वृद्धि होती है। जैविक खेती के उपयोग से रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से लागत में कमी आती है और विषैली फसल लोगों तक नहीं पहुँचती तथा साथ ही साथ फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होती है। इससे किसानों को भी लाभ होता है और वह किसानी को एक व्यवसाय से हटकर भी समझ पाते हैं। 

इसका सबसे बड़ा लाभ उन सब छोटे-छोटे कीटों को भी मिलेगा जो मिट्टी की उर्वरता को बढ़ने में मदद करते हैं क्योंकि अजैविक खाद द्वारा उनके खत्म होने से मिट्टी में उपस्थित रासायनिक क्रियायें मंद पड़ जाती हैं जो कि घातक है। 

जैविक खेती के लाभ

किसानों को जैविक खेती से होने वाले लाभ- जिस तरह से जैविक खेती से फसल की उपज बढ़ रही है, उसको देखते हुए ये अनुमान लगाया जा सकता है कि किसानों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। रोज़-रोज़ नए तरीके खोज-खोज कर लोग जैविक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। किसानों की आय में वृद्धि हुई है और जैविक खेती से हुई फसलों को डिमांड बढ़ी है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में जैविक खेती की विधि और भी अधिक लाभदायक है। जैविक विधि द्वारा खेती करने से उत्पादन की लागत तो कम होती है साथ ही साथ किसान भाइयों को आय अधिक प्राप्त होती है। अंतराष्ट्रीय बाजार की स्पर्धा में जैविक उत्पाद अधिक खरे उतरते हैं। जिसके फलस्वरूप सामान्य उत्पादन की अपेक्षा में किसान अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हो जाती है:-  बेहतर फसल उगाने के लिए मिट्टी की उर्वरता अति आवश्यक है और जैविक खेती के द्वारा इसकी उर्वरता बनी रहती है। मिट्टी में सम्मिलित पोटेशियम, फास्फोरस इत्यादि जैविक खेती द्वारा बने रहते हैं जो लाभदायक है। यदि हम मिट्टी की दृष्टि से देखें तो जैविक खाद के उपयोग से भूमि की गुणवत्ता में सुधार आता है, भूमि की जल धारण की क्षमता बढ़ती है और भूमि बंज़र होने से बची रहती है। साथ ही साथ भूमि से पानी का वाष्पीकरण भी कम होता है। 

अन्य पहलू 

1) रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से लागत में कमी आती है- जैविक खेती, की विधि रासायनिक खेती की विधि की तुलना में बराबर या अधिक उत्पादन देती है अर्थात जैविक खेती मृदा की उर्वरता एवं कृषकों की उत्पादकता बढ़ाने में पूर्णत: सहायक है। 
2) फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होती है। 
3) बाज़ार में जैविक उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों की आय में भी वृद्धि होती है। 

आधुनिक समय में निरन्तर बढ़ती हुई जनसंख्या, पर्यावरण प्रदूषण, भूमि की उर्वरा शक्ति का संरक्षण एवं मानव स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती की राह अत्यन्त लाभदायक व प्रभावपूर्ण साबित हुई है। मानव जीवन के सम्पूर्ण विकास के लिए ये अत्यधिक आवश्यक है कि प्राकृतिक संसाधन प्रदूषित न हों, शुद्ध वातावरण रहे एवं पौष्टिक आहार मिलता रहे। इसके लिये हमें जैविक खेती की कृषि पद्धतियाँ अपनाना होगा जोकि हमारे अतिआवश्यक संसाधनों एवं मानवीय पर्यावरण को प्रदूषित किये बगैर मनुष्य जाती को खाद्य सामग्री उपलब्ध करा सकेगी तथा हमें खुशहाल जीने की राह दिखा सकेगी।

ये कुछ महत्वपूर्ण लाभ हैं जोकि जैविक खेती द्वारा आसानी से संभव हैं।