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Sustainability Community Welfare

24 अप्रैल- राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस

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24 अप्रैल- राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस

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Post Highlights

पंचायती राज व्यवस्था लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था की रीढ़ है। राज्य तथा केन्द्र सरकारें इसके माध्यम से विकास के हर कार्य को गति देती हैं। लोकतन्त्र की जनकल्याण पर आधारित स्वस्थ पंचायती राज व्यवस्था का जितना विकास होगा, हमारा देश उतना ही उन्नत एवं विकास के लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त कर सकेगा। आज देशभर में लगभग ढाई लाख ग्राम पंचायतें निरंतर भारत के विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं। वर्ष 1993 में 73वें संविधान संशोधन से भारत में पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्ज़ा प्राप्त हुआ और 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के लागू होने के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष 24 अप्रैल को भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ (National Panchayati Raj Day) मनाया जाता है।

देखा जाये तो पंचायतों की भूमिका अब इतनी सीमित नहीं है। आज उन्हें जरूरी अधिकार और धन दोनों ही चीजें मिल रही हैं जिसका असर अब ज़मीनी-स्तर पर भी दिखता है। आज आप गाँव की तरफ चले जाइये वहाँ पर आपको अच्छी सड़कें और बिजली, पानी की सभी सुविधाएं, पक्के मकान आदि देखने को मिल जाएंगे। इसका मतलब साफ़ है कि अब हर गाँव जागरूक हो गया है और अब वहाँ पंचायतें सिर्फ नाम की नहीं है बल्कि प्रत्येक गाँव में वास्तव में काम हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में सामुदायिक विकास के लिए तीन पंचायतें काम करती हैं- ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत Gram Panchayat at the village level, खण्ड स्तर पर जनपद पंचायत Janpad Panchayat at the block level, Zilla Panchayat at the district level जिला स्तर पर जिला पंचायत। इस तरह पंचायती राज व्यवस्था तीन स्तरीय प्रणाली पर कार्य करती है।इसमें गांव, ब्लॉक और जिले का सुव्यवस्थित विकास होता है। सिर्फ केंद्र या राज्य सरकार ही पूरे देश को चलाने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। इसके लिए स्थानीय स्तर पर भी प्रशासन की व्यवस्था की गई है। इसी व्यवस्था को पंचायती राज Panchayati Raj का नाम दिया गया है। चलिए विस्तार से जानते हैं पंचायती राज और राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के बारे में। 

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस और पंचायती राज की भूमिका

73वें संविधान संशोधन अधिनियम के लागू होने के उपलक्ष में प्रत्येक वर्ष 24 अप्रैल को भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ National Panchayati Raj Day मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की शुरुआत साल 2010 में हुई थी। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह Prime Minister Manmohan Singh ने 24 अप्रैल, 2010 को पहला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया था। तब से हर साल 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। 

भारत को ‘गाँवों का देश’ Country of the Villages कहा जाता है जहाँ आज भी 70 प्रतिशत आबादी निवास करती है और आज देशभर में लगभग ढाई लाख ग्राम पंचायतें निरंतर भारत के विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी Father of the Nation Mahatma Gandhi कहते थे कि अगर देश के गांवों को खतरा पैदा हुआ तो भारत को खतरा पैदा हो जाएगा। उन्होंने मजबूत और सशक्त गांवों का सपना देखा था जो भारत के रीढ़ की हड्डी होती। उन्होंने ग्राम स्वराज Gram Swaraj का कॉन्सेप्ट दिया था। इसमें गाँवों की आत्मनिर्भरता की बात है, उनके सशक्तीकरण की बात है, शोषण के विरुद्ध एक ठोस नीति की बात है। उन्होंने कहा था कि पंचायतों के पास सभी अधिकार होने चाहिए। गांधीजी के सपने को पूरा करने के लिए 1992 में संविधान में 73वां संशोधन किया गया और पंचायती राज संस्थान का कॉन्सेप्ट पेश किया गया। इस कानून की मदद से स्थानीय निकायों को ज्यादा से ज्यादा शक्तियां दी गईं। उनको आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की शक्ति और जिम्मेदारियां दी गईं।

पंचायती राज व्यवस्था panchayati raj system

गाँधी जी ने स्वतंत्रता से पूर्व पंचायती राज की कल्पना करते हुए कहा था कि सम्पूर्ण गाँव में पंचायती राज होगा, उसके पास पूरी सत्ता और अधिकार होंगे। सभी गाँव अपने-अपने पैरों पर खड़े होंगे। उन्होंने कहा था यही ग्राम स्वराज में पंचायती राज हेतु मेरी अवधारणा है। उनका मकसद था सत्ता की डोर को देश की संसद से लेकर गाँवों की इकाई तक जोड़ना। पंचायती राज panchayati raj भारत की एक अत्यन्त प्राचीन व्यवस्था और संस्था One of the oldest systems and institutions of India है। पंचायती राज व्यवस्था में प्रत्येक गांव की अपनी एक पंचायत होती थी। गांव की सुरक्षा व्यवस्था, सफाई, शिक्षा, सड़क निर्माण, तालाब व कुएं बनवाना तथा गांववालों को अन्य प्रकार की सुविधाएं प्रदान करना उनके कार्य थे। ब्रिटिश शासकों ने भी भारत में प्रचलित पंचायत व्यवस्था की बहुत प्रशंसा की लेकिन ब्रिटिश शासकों के प्रभाव से इसका स्वरूप कमजोर पड़ गया था ।

धीरे धीरे स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद लोकतन्त्र के गठन के साथ ही देश तथा गांवों के समुचित विकास हेतु इसकी आवश्यकता महसूस की जाने लगी। शासन की विकेन्द्रित नीति decentralized policy के तहत गांव के सभी कार्य उत्तरदायित्व जनता को बांटे जायें। 

फिर अशोक मेहता समिति Ashok Mehta Committee ने भी अपनी रिपोर्ट में गांव की जनता तक शासन की नीतियों के विकेन्द्रीकरण को जरुरी समझा। गांधीजी का कहना था कि भारत की 80 प्रतिशत जनता गांवों में निवास करती है इसलिए यदि हमें भारत का विकास सही रूप में करना है, तो इसकी शुरुआत भारत के गांवों से ही करनी होगी। ग्राम स्वराज’ के सपने को पूरा करने के लिये पूरे देश में विकेंद्रीकरण के माध्यम से पंचायतों का गठन किया गया। पंचायतों को विशेष महत्त्व देते हुए संविधान के अनुच्छेद 40 के नीति निर्देशक सिद्धांतों Directive Principles of Policy of Article 40 में उल्लेख किया गया है- “सरकार ग्राम पंचायतों की स्थापना के लिये आवश्यक कदम उठाएगी एवं उन्हें ऐसी शक्तियाँ और अधिकारों से युक्त करेगी जो उन्हें स्वायत्त शासन की इकाई के रूप में सक्षम बनाने के लिये उपयुक्त हो।” 

जनवरी 1957 में बलवंत राय मेहता समिति का गठन किया गया जो ग्रामीण आबादी की समस्याओं के अध्ययन के लिये बनी थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की। समिति की सिफारिशों को स्वीकृत करते हुए इन संस्थाओं का नाम ‘पंचायती राज’ रखा गया। इस समिति ने त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद लागू करने का सुझाव दिया।

ग्राम पंचायत Gram Panchayat क्या है?

पंचायती राज का सबसे निचला स्तर ग्राम पंचायत है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम की उन्नति, जनकल्याणकारी कार्य, ग्रामवासियों को आत्मनिर्भर बनाना है, जो सार्वजनिक भूमि का प्रबन्ध, आय-व्यय का ब्यौरा रखती है। ग्राम पंचायत की न्यायपालिका को ग्राम कचहरी कहते हैं जिसका प्रधान सरपंच होता है।

ग्राम पंचायत के अंतर्गत मुखिया का स्थान महत्त्वपूर्ण है। पंचायत के सभी कार्यों की देखभाल मुखिया ही करता है। मुखिया अपनी कार्यकारिणी समिति की सलाह से ग्राम पंचायत के अन्य कार्य भी कर सकता है। ग्राम पंचायत में न्याय तथा शान्ति की व्यवस्था करने का उत्तरदायित्व मुखिया का होता है। ग्राम पंचायतें आय के साधन के रूप में अपने गांव के लोगों से दुकानों, मेलों पर कर, मकानों पर कर, पशु क्रय-विक्रय पर कर, प्रकाश व सफाई पर कर लगाती है। ग्राम पंचायत को सरकार से भी अनुदान राशि प्राप्त होती है। ग्राम पंचायत अपनी सुविधानुसार कई समितियों का गठन करती है। यदि सरपंच, उपसरपंच का कार्य असन्तोषजनक है, तो पंच उसके विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव लाकर उसे हटा सकते हैं। सरपंच की अनुपस्थिति में उपसरपंच सरपंच का कार्य करता है ।

प्रत्येक ग्राम पंचायत का एक कार्यालय होता है, जो एक पंचायत सेवक के अधीन होता है। पंचायत सेवक की नियुक्ति राज्य सरकार करती है इसलिए उसे राज्य सरकार द्वारा निर्धारित वेतन भी मिलता है। ग्राम पंचायत के सचिव के रूप में कार्य करने के कारण उसे ग्राम पंचायत के सभी कार्यों के निरीक्षण का अधिकार है। वह मुखिया, सरपंच तथा ग्राम पंचायत को कार्य संचालन में सहायता करता है। 

ग्राम पंचायत के कार्य 

बंजर भूमि का विकास, पशुपालन, ग्रामीण गृह-निर्माण, सड़क, नाली, पुलिया का निर्माण एवं संरक्षण, पेय जल की व्यवस्था, ग्रामीण बिजलीकरण एवं गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत की व्यवस्था एवं संरक्षण, डेयरी उद्योग, मुर्गीपालन, चारागाह का विकास, गाँवों में मत्स्यपालन का विकास, सड़कों के किनारे और सार्वजनिक भूमि पर वृक्षारोपण, कृषि और बागवानी का विकास और उन्नति, ग्रामीण, खादी एवं कुटीर उद्योगों का विकास, प्रकाश व सफाई, नालियों, पुलियों, सड़कों, कुओं, तालाब की व्यवस्था, वार्षिक बजट तैयार करना आदि। पंचायतें विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की शिकायतें अधिकारी से कर सकते हैं । वृक्षारोपण, अस्पतालों का प्रबन्ध इसके ऐच्छिक कार्य हैं। इस प्रकार ग्राम पंचायत पंचायती राज की महत्वपूर्ण कड़ी है।

पंचायत समिति Panchayat committee क्या है?

इसे अलग-अलग राज्यों में विभिन्न नामों से जाना जाता है। इसे कई राज्यों में जनपद पंचायत और क्षेत्र पंचायत भी कहते हैं। यह ग्राम पंचायत एवं जिला पंचायत के बीच महत्त्वपूर्ण कड़ी है। पंचायती राज के लिए प्रखंड स्तर पर गठित निकाय पंचायत समिति Panchayat committee कहलाती है। जनसंख्या के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए स्थान आरक्षित रहते हैं। आरक्षित पदों में भी 30 प्रतिशत पद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। अनारक्षित पदों में भी 50% स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है। जनपद पंचायत के सदस्यों का चुनाव स्वयं जनता नहीं करती । एक ब्लॉक के ग्राम पंचायत के सरपंच तथा उपसरपंच, पंच मिलकर सदस्यों का चुनाव करते हैं । राज्य की विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य भी ब्लॉक समिति के सदस्य होते हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत का मुखिया पंचायत समिति का सदस्य होता है। 

पंचायत समिति के प्रमुख कार्य

गांव के विकास हेतु कृषि विशेषज्ञ, शिक्षा विशेषज्ञ, पशु चिकित्सा विशेषज्ञ उस क्षेत्र के विकास हेतु कार्य करते हैं। किसानों को उत्तम बीज, खाद दिलवाना, शिक्षकों की व्यवस्था करना उनके कार्य हैं। यानि शिक्षा-सम्बन्धी कार्य, कृषि-सम्बन्धी कार्य, ग्रामोद्योग-सम्बन्धी कार्य,आपातकालीन कार्य और स्वास्थ्य-सम्बन्धी कार्य, पंचायत समिति के प्रमुख कार्य हैं। जनपद कर लगाकर तथा सरकार द्वारा अनुदान प्राप्त कर आय प्राप्त करती है । खण्ड विकास् अधिकारी ब्लॉक स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन करवाता है ।

जिला परिषद Zilla Parishad क्या है ?

यह पंचायती राज व्यवस्था की तीसरी और सर्वोच्च श्रेणी है। यह पंचायती राज्य की सबसे ऊपरी संस्था है। इसे कई राज्यों में जिला पंचायत के नाम से भी जाना जाता है। प्रत्येक जिले में एक जिला परिषद होती है। जिला पंचायत का संगठन जनपद जैसा ही है। जो व्यक्ति जनपद पंचायत के प्रमुख चुने जाते है, वे जिला पंचायत के सदस्य बन जाते हैं।

इस स्तर पर स्थानीय प्रशासन में महत्त्वपूर्ण अधिकारी कलेक्टर, जिला न्यायाधीश इत्यादि काम करते हैं। एक जिले से जो व्यक्ति राज्य की विधानसभा तथा लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य चुने जाते हैं, वे भी जिला पंचायत के सदस्य होते हैं । जिला परिषद के आरक्षित स्थानों में 1/3 भाग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित है। इसके अलावा पंचायत समिति में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या का 50 प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित होता है। 

जिला परिषद का कार्य

जिला परिषद या जिला पंचायत की रचना और कार्यो के विषय में विभिन्न राज्यों में अलग-अलग कानून बनाये गये हैं। जिला पंचायत का मुख्य कार्य ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत के कार्यो की देखभाल करना है। जिला परिषद के अंतर्गत सामजिक कल्याण एवं सुधार सम्बन्धी, कृषि-सबंधी, पशुपालन-सबंधी, उद्योग-धंधे-सबंधी, स्वास्थ्य-सम्बन्धी, शिक्षा-सम्बन्धी, आवास-सम्बन्धी कार्यों के अलावा ग्रामीण बिजलीकरण, वृक्षारोपण, ग्रामीण सड़कों का निर्माण, ग्रामीण हाटों और बाज़ारों का अधिग्रहण, वार्षिक बजट बनाना इत्यादि के काम होते हैं। साथ ही पंचवर्षीय योजनाओं के सम्पूर्ण कार्यो का क्रियान्वयन करना इसका कार्य है। 

ई-पंचायत e-Panchayat क्या है ?

आज का समय टेक्नोलॉजी का समय है इसलिए ग्राम पंचायतों को हाईटेक करना और डिजिटल इंडिया बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। ई-पंचायत e-Panchayat न सिर्फ सशक्त भारत की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है बल्कि इससे भ्रष्टाचार-मुक्त समाज बनाने की दिशा में भी काफी सहयोग मिलेगा। इसका फायदा यह है कि जनता को पंचायत-स्तर पर ही ई-गवर्नेंस की सुविधाएँ मिल सकें। इसमें किसी भी सुविधा के लिये ग्रामीण लोग पंचायत से ही आवेदन कर सकें, इसके लिये पंचायत भवनों में ही अलग कक्ष बनाए गए हैं। ई-पंचायत के द्वारा लोग यह जान सकेंगे कि ग्राम विकास के लिये कितना पैसा आया, कहाँ खर्च हुआ, कौन-कौन से काम होने हैं। इसके अलावा मनरेगा और अन्य जानकारियों के साथ इस पर सभी विवरण दर्ज होंगे। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा राष्ट्रव्यापी सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ये एक अनूठी पहल है। ई-पंचायत के द्वारा देश की 2.45 लाख पंचायतों के कार्यों का स्वचालन करना है।

पंचायती राज व्यवस्था का महत्त्व

पंचायती राज व्यवस्था को लोकतान्त्रिक व्यवस्था का आधार स्तम्भ pillar of democracy भी माना गया है। केंद्र या राज्यों की योजनाओं को सफल करने में पंचायती राज व्यवस्था बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पंचायतों ने विभिन्न जन-जागृति अभियानों के माध्यम से गाँवों में उल्लेखनीय कार्य किया है। इसी का नतीजा है कि आज घर-घर शौचालय है। स्वच्छ ईंधन की दिशा में भी काफी आगे जा चुके हैं। सबसे बड़ी बात आज शिक्षा का अधिकार कानून के तहत हर गाँव में स्कूलों का सफलतापूर्वक संचालन हो रहा है। मनरेगा MANREGA के तहत पंचायतों को ना केवल ग्रामीणों को रोजगार का अधिकार प्राप्त हुआ है। साथ ही कुछ वर्षों में महिलाएँ भी ग्राम पंचायत-स्तर पर काफी सक्रिय हुई हैं। इससे महिलाओं की भूमिका मजबूत हो रही है।ग्राम पंचायतें अपनी विभिन्न समितियों के माध्यम से गाँव में विकास कार्यों को संचालित करती हैं और इसके लिए उन्हें किसी पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होती है। गाँव में स्वच्छ पेयजल और खेतों के लिये पानी का प्रबंधन जैसे चुनौतीपूर्ण काम भी पंचायत काफ़ी बेहतरीन तरीके से करती है। 

ग्राम पंचायतें अपनी विभिन्न समितियों के माध्यम से गाँव में विकास कार्यों को संचालित करती हैं जैसे नियोजन एवं विकास समिति, निर्माण एवं कार्य समिति, शिक्षा समिति, जल प्रबंधन समिति समेत अनेक समितियाँ होती हैं जो ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों की देखरेख करती हैं। अगर हम ग्राम पंचायत के कामों को देखें तो इनके अधिकार क्षेत्र में ग्राम विकास सम्बन्धी अनेक कार्य हैं जैसे कृषि, पशुधन, युवा कल्याण, चिकित्सा, रख-रखाव, छात्रवृत्तियाँ, राशन की दुकानों के आवंटन जैसे कई मुद्दे हैं जिन्हे वह करते हैं, इसके लिए उन्हें किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है। 

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2022 की थीम और पुरस्कार  

इस वर्ष 2022 में भारत में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2022 के लिए कोई थीम नहीं है, लेकिन एक पुरस्कार समारोह, जो देश भर में सर्वश्रेष्ठ पंचायतों की सराहना करता है। ये पुरस्कार ग्रामीण परिवारों के जीवन में सुधार लाने के लिए इन पंचायतों द्वारा किए गए कार्यों को मान्यता देने का एक तरीका है।

ये पुरस्कार विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत दिये जाते हैं और इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय देश भर में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों/राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को पुरस्कृत करता है। इस दिवस पर दिये जाने वाले पुरस्कार निम्न हैं -:

नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार

दीन दयाल उपाध्याय पंचायत शक्तीकरण पुरस्कार

ग्राम पंचायत विकास योजना पुरस्कार

ई-पंचायत पुरस्कार

बाल सुलभ ग्राम पंचायत पुरस्कार

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राष्ट्रीय लोक सेवा दिवस- सिविल सेवकों के समर्पण का प्रतीक

देखा जाये तो पंचायतों की भूमिका अब इतनी सीमित नहीं है। आज उन्हें जरूरी अधिकार और धन दोनों ही चीजें मिल रही हैं जिसका असर अब ज़मीनी-स्तर पर भी दिखता है। आज आप गाँव की तरफ चले जाइये वहाँ पर आपको अच्छी सड़कें और बिजली, पानी की सभी सुविधाएं, पक्के मकान आदि देखने को मिल जाएंगे। इसका मतलब साफ़ है कि अब हर गाँव जागरूक हो गया है और अब वहाँ पंचायतें सिर्फ नाम की नहीं है बल्कि प्रत्येक गाँव में वास्तव में काम हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में सामुदायिक विकास के लिए तीन पंचायतें काम करती हैं- ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत Gram Panchayat at the village level, खण्ड स्तर पर जनपद पंचायत Janpad Panchayat at the block level, Zilla Panchayat at the district level जिला स्तर पर जिला पंचायत। इस तरह पंचायती राज व्यवस्था तीन स्तरीय प्रणाली पर कार्य करती है।इसमें गांव, ब्लॉक और जिले का सुव्यवस्थित विकास होता है। सिर्फ केंद्र या राज्य सरकार ही पूरे देश को चलाने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। इसके लिए स्थानीय स्तर पर भी प्रशासन की व्यवस्था की गई है। इसी व्यवस्था को पंचायती राज Panchayati Raj का नाम दिया गया है। चलिए विस्तार से जानते हैं पंचायती राज और राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के बारे में। 

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस और पंचायती राज की भूमिका

73वें संविधान संशोधन अधिनियम के लागू होने के उपलक्ष में प्रत्येक वर्ष 24 अप्रैल को भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ National Panchayati Raj Day मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की शुरुआत साल 2010 में हुई थी। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह Prime Minister Manmohan Singh ने 24 अप्रैल, 2010 को पहला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया था। तब से हर साल 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। 

भारत को ‘गाँवों का देश’ Country of the Villages कहा जाता है जहाँ आज भी 70 प्रतिशत आबादी निवास करती है और आज देशभर में लगभग ढाई लाख ग्राम पंचायतें निरंतर भारत के विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी Father of the Nation Mahatma Gandhi कहते थे कि अगर देश के गांवों को खतरा पैदा हुआ तो भारत को खतरा पैदा हो जाएगा। उन्होंने मजबूत और सशक्त गांवों का सपना देखा था जो भारत के रीढ़ की हड्डी होती। उन्होंने ग्राम स्वराज Gram Swaraj का कॉन्सेप्ट दिया था। इसमें गाँवों की आत्मनिर्भरता की बात है, उनके सशक्तीकरण की बात है, शोषण के विरुद्ध एक ठोस नीति की बात है। उन्होंने कहा था कि पंचायतों के पास सभी अधिकार होने चाहिए। गांधीजी के सपने को पूरा करने के लिए 1992 में संविधान में 73वां संशोधन किया गया और पंचायती राज संस्थान का कॉन्सेप्ट पेश किया गया। इस कानून की मदद से स्थानीय निकायों को ज्यादा से ज्यादा शक्तियां दी गईं। उनको आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की शक्ति और जिम्मेदारियां दी गईं।

पंचायती राज व्यवस्था panchayati raj system

गाँधी जी ने स्वतंत्रता से पूर्व पंचायती राज की कल्पना करते हुए कहा था कि सम्पूर्ण गाँव में पंचायती राज होगा, उसके पास पूरी सत्ता और अधिकार होंगे। सभी गाँव अपने-अपने पैरों पर खड़े होंगे। उन्होंने कहा था यही ग्राम स्वराज में पंचायती राज हेतु मेरी अवधारणा है। उनका मकसद था सत्ता की डोर को देश की संसद से लेकर गाँवों की इकाई तक जोड़ना। पंचायती राज panchayati raj भारत की एक अत्यन्त प्राचीन व्यवस्था और संस्था One of the oldest systems and institutions of India है। पंचायती राज व्यवस्था में प्रत्येक गांव की अपनी एक पंचायत होती थी। गांव की सुरक्षा व्यवस्था, सफाई, शिक्षा, सड़क निर्माण, तालाब व कुएं बनवाना तथा गांववालों को अन्य प्रकार की सुविधाएं प्रदान करना उनके कार्य थे। ब्रिटिश शासकों ने भी भारत में प्रचलित पंचायत व्यवस्था की बहुत प्रशंसा की लेकिन ब्रिटिश शासकों के प्रभाव से इसका स्वरूप कमजोर पड़ गया था ।

धीरे धीरे स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद लोकतन्त्र के गठन के साथ ही देश तथा गांवों के समुचित विकास हेतु इसकी आवश्यकता महसूस की जाने लगी। शासन की विकेन्द्रित नीति decentralized policy के तहत गांव के सभी कार्य उत्तरदायित्व जनता को बांटे जायें। 

फिर अशोक मेहता समिति Ashok Mehta Committee ने भी अपनी रिपोर्ट में गांव की जनता तक शासन की नीतियों के विकेन्द्रीकरण को जरुरी समझा। गांधीजी का कहना था कि भारत की 80 प्रतिशत जनता गांवों में निवास करती है इसलिए यदि हमें भारत का विकास सही रूप में करना है, तो इसकी शुरुआत भारत के गांवों से ही करनी होगी। ग्राम स्वराज’ के सपने को पूरा करने के लिये पूरे देश में विकेंद्रीकरण के माध्यम से पंचायतों का गठन किया गया। पंचायतों को विशेष महत्त्व देते हुए संविधान के अनुच्छेद 40 के नीति निर्देशक सिद्धांतों Directive Principles of Policy of Article 40 में उल्लेख किया गया है- “सरकार ग्राम पंचायतों की स्थापना के लिये आवश्यक कदम उठाएगी एवं उन्हें ऐसी शक्तियाँ और अधिकारों से युक्त करेगी जो उन्हें स्वायत्त शासन की इकाई के रूप में सक्षम बनाने के लिये उपयुक्त हो।” 

जनवरी 1957 में बलवंत राय मेहता समिति का गठन किया गया जो ग्रामीण आबादी की समस्याओं के अध्ययन के लिये बनी थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की। समिति की सिफारिशों को स्वीकृत करते हुए इन संस्थाओं का नाम ‘पंचायती राज’ रखा गया। इस समिति ने त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद लागू करने का सुझाव दिया।

ग्राम पंचायत Gram Panchayat क्या है?

पंचायती राज का सबसे निचला स्तर ग्राम पंचायत है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम की उन्नति, जनकल्याणकारी कार्य, ग्रामवासियों को आत्मनिर्भर बनाना है, जो सार्वजनिक भूमि का प्रबन्ध, आय-व्यय का ब्यौरा रखती है। ग्राम पंचायत की न्यायपालिका को ग्राम कचहरी कहते हैं जिसका प्रधान सरपंच होता है।

ग्राम पंचायत के अंतर्गत मुखिया का स्थान महत्त्वपूर्ण है। पंचायत के सभी कार्यों की देखभाल मुखिया ही करता है। मुखिया अपनी कार्यकारिणी समिति की सलाह से ग्राम पंचायत के अन्य कार्य भी कर सकता है। ग्राम पंचायत में न्याय तथा शान्ति की व्यवस्था करने का उत्तरदायित्व मुखिया का होता है। ग्राम पंचायतें आय के साधन के रूप में अपने गांव के लोगों से दुकानों, मेलों पर कर, मकानों पर कर, पशु क्रय-विक्रय पर कर, प्रकाश व सफाई पर कर लगाती है। ग्राम पंचायत को सरकार से भी अनुदान राशि प्राप्त होती है। ग्राम पंचायत अपनी सुविधानुसार कई समितियों का गठन करती है। यदि सरपंच, उपसरपंच का कार्य असन्तोषजनक है, तो पंच उसके विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव लाकर उसे हटा सकते हैं। सरपंच की अनुपस्थिति में उपसरपंच सरपंच का कार्य करता है ।

प्रत्येक ग्राम पंचायत का एक कार्यालय होता है, जो एक पंचायत सेवक के अधीन होता है। पंचायत सेवक की नियुक्ति राज्य सरकार करती है इसलिए उसे राज्य सरकार द्वारा निर्धारित वेतन भी मिलता है। ग्राम पंचायत के सचिव के रूप में कार्य करने के कारण उसे ग्राम पंचायत के सभी कार्यों के निरीक्षण का अधिकार है। वह मुखिया, सरपंच तथा ग्राम पंचायत को कार्य संचालन में सहायता करता है। 

ग्राम पंचायत के कार्य 

बंजर भूमि का विकास, पशुपालन, ग्रामीण गृह-निर्माण, सड़क, नाली, पुलिया का निर्माण एवं संरक्षण, पेय जल की व्यवस्था, ग्रामीण बिजलीकरण एवं गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत की व्यवस्था एवं संरक्षण, डेयरी उद्योग, मुर्गीपालन, चारागाह का विकास, गाँवों में मत्स्यपालन का विकास, सड़कों के किनारे और सार्वजनिक भूमि पर वृक्षारोपण, कृषि और बागवानी का विकास और उन्नति, ग्रामीण, खादी एवं कुटीर उद्योगों का विकास, प्रकाश व सफाई, नालियों, पुलियों, सड़कों, कुओं, तालाब की व्यवस्था, वार्षिक बजट तैयार करना आदि। पंचायतें विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की शिकायतें अधिकारी से कर सकते हैं । वृक्षारोपण, अस्पतालों का प्रबन्ध इसके ऐच्छिक कार्य हैं। इस प्रकार ग्राम पंचायत पंचायती राज की महत्वपूर्ण कड़ी है।

पंचायत समिति Panchayat committee क्या है?

इसे अलग-अलग राज्यों में विभिन्न नामों से जाना जाता है। इसे कई राज्यों में जनपद पंचायत और क्षेत्र पंचायत भी कहते हैं। यह ग्राम पंचायत एवं जिला पंचायत के बीच महत्त्वपूर्ण कड़ी है। पंचायती राज के लिए प्रखंड स्तर पर गठित निकाय पंचायत समिति Panchayat committee कहलाती है। जनसंख्या के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए स्थान आरक्षित रहते हैं। आरक्षित पदों में भी 30 प्रतिशत पद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। अनारक्षित पदों में भी 50% स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है। जनपद पंचायत के सदस्यों का चुनाव स्वयं जनता नहीं करती । एक ब्लॉक के ग्राम पंचायत के सरपंच तथा उपसरपंच, पंच मिलकर सदस्यों का चुनाव करते हैं । राज्य की विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य भी ब्लॉक समिति के सदस्य होते हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत का मुखिया पंचायत समिति का सदस्य होता है। 

पंचायत समिति के प्रमुख कार्य

गांव के विकास हेतु कृषि विशेषज्ञ, शिक्षा विशेषज्ञ, पशु चिकित्सा विशेषज्ञ उस क्षेत्र के विकास हेतु कार्य करते हैं। किसानों को उत्तम बीज, खाद दिलवाना, शिक्षकों की व्यवस्था करना उनके कार्य हैं। यानि शिक्षा-सम्बन्धी कार्य, कृषि-सम्बन्धी कार्य, ग्रामोद्योग-सम्बन्धी कार्य,आपातकालीन कार्य और स्वास्थ्य-सम्बन्धी कार्य, पंचायत समिति के प्रमुख कार्य हैं। जनपद कर लगाकर तथा सरकार द्वारा अनुदान प्राप्त कर आय प्राप्त करती है । खण्ड विकास् अधिकारी ब्लॉक स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन करवाता है ।

जिला परिषद Zilla Parishad क्या है ?

यह पंचायती राज व्यवस्था की तीसरी और सर्वोच्च श्रेणी है। यह पंचायती राज्य की सबसे ऊपरी संस्था है। इसे कई राज्यों में जिला पंचायत के नाम से भी जाना जाता है। प्रत्येक जिले में एक जिला परिषद होती है। जिला पंचायत का संगठन जनपद जैसा ही है। जो व्यक्ति जनपद पंचायत के प्रमुख चुने जाते है, वे जिला पंचायत के सदस्य बन जाते हैं।

इस स्तर पर स्थानीय प्रशासन में महत्त्वपूर्ण अधिकारी कलेक्टर, जिला न्यायाधीश इत्यादि काम करते हैं। एक जिले से जो व्यक्ति राज्य की विधानसभा तथा लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य चुने जाते हैं, वे भी जिला पंचायत के सदस्य होते हैं । जिला परिषद के आरक्षित स्थानों में 1/3 भाग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित है। इसके अलावा पंचायत समिति में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या का 50 प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित होता है। 

जिला परिषद का कार्य

जिला परिषद या जिला पंचायत की रचना और कार्यो के विषय में विभिन्न राज्यों में अलग-अलग कानून बनाये गये हैं। जिला पंचायत का मुख्य कार्य ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत के कार्यो की देखभाल करना है। जिला परिषद के अंतर्गत सामजिक कल्याण एवं सुधार सम्बन्धी, कृषि-सबंधी, पशुपालन-सबंधी, उद्योग-धंधे-सबंधी, स्वास्थ्य-सम्बन्धी, शिक्षा-सम्बन्धी, आवास-सम्बन्धी कार्यों के अलावा ग्रामीण बिजलीकरण, वृक्षारोपण, ग्रामीण सड़कों का निर्माण, ग्रामीण हाटों और बाज़ारों का अधिग्रहण, वार्षिक बजट बनाना इत्यादि के काम होते हैं। साथ ही पंचवर्षीय योजनाओं के सम्पूर्ण कार्यो का क्रियान्वयन करना इसका कार्य है। 

ई-पंचायत e-Panchayat क्या है ?

आज का समय टेक्नोलॉजी का समय है इसलिए ग्राम पंचायतों को हाईटेक करना और डिजिटल इंडिया बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। ई-पंचायत e-Panchayat न सिर्फ सशक्त भारत की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है बल्कि इससे भ्रष्टाचार-मुक्त समाज बनाने की दिशा में भी काफी सहयोग मिलेगा। इसका फायदा यह है कि जनता को पंचायत-स्तर पर ही ई-गवर्नेंस की सुविधाएँ मिल सकें। इसमें किसी भी सुविधा के लिये ग्रामीण लोग पंचायत से ही आवेदन कर सकें, इसके लिये पंचायत भवनों में ही अलग कक्ष बनाए गए हैं। ई-पंचायत के द्वारा लोग यह जान सकेंगे कि ग्राम विकास के लिये कितना पैसा आया, कहाँ खर्च हुआ, कौन-कौन से काम होने हैं। इसके अलावा मनरेगा और अन्य जानकारियों के साथ इस पर सभी विवरण दर्ज होंगे। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा राष्ट्रव्यापी सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ये एक अनूठी पहल है। ई-पंचायत के द्वारा देश की 2.45 लाख पंचायतों के कार्यों का स्वचालन करना है।

पंचायती राज व्यवस्था का महत्त्व

पंचायती राज व्यवस्था को लोकतान्त्रिक व्यवस्था का आधार स्तम्भ pillar of democracy भी माना गया है। केंद्र या राज्यों की योजनाओं को सफल करने में पंचायती राज व्यवस्था बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पंचायतों ने विभिन्न जन-जागृति अभियानों के माध्यम से गाँवों में उल्लेखनीय कार्य किया है। इसी का नतीजा है कि आज घर-घर शौचालय है। स्वच्छ ईंधन की दिशा में भी काफी आगे जा चुके हैं। सबसे बड़ी बात आज शिक्षा का अधिकार कानून के तहत हर गाँव में स्कूलों का सफलतापूर्वक संचालन हो रहा है। मनरेगा MANREGA के तहत पंचायतों को ना केवल ग्रामीणों को रोजगार का अधिकार प्राप्त हुआ है। साथ ही कुछ वर्षों में महिलाएँ भी ग्राम पंचायत-स्तर पर काफी सक्रिय हुई हैं। इससे महिलाओं की भूमिका मजबूत हो रही है।ग्राम पंचायतें अपनी विभिन्न समितियों के माध्यम से गाँव में विकास कार्यों को संचालित करती हैं और इसके लिए उन्हें किसी पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होती है। गाँव में स्वच्छ पेयजल और खेतों के लिये पानी का प्रबंधन जैसे चुनौतीपूर्ण काम भी पंचायत काफ़ी बेहतरीन तरीके से करती है। 

ग्राम पंचायतें अपनी विभिन्न समितियों के माध्यम से गाँव में विकास कार्यों को संचालित करती हैं जैसे नियोजन एवं विकास समिति, निर्माण एवं कार्य समिति, शिक्षा समिति, जल प्रबंधन समिति समेत अनेक समितियाँ होती हैं जो ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों की देखरेख करती हैं। अगर हम ग्राम पंचायत के कामों को देखें तो इनके अधिकार क्षेत्र में ग्राम विकास सम्बन्धी अनेक कार्य हैं जैसे कृषि, पशुधन, युवा कल्याण, चिकित्सा, रख-रखाव, छात्रवृत्तियाँ, राशन की दुकानों के आवंटन जैसे कई मुद्दे हैं जिन्हे वह करते हैं, इसके लिए उन्हें किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है। 

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2022 की थीम और पुरस्कार  

इस वर्ष 2022 में भारत में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2022 के लिए कोई थीम नहीं है, लेकिन एक पुरस्कार समारोह, जो देश भर में सर्वश्रेष्ठ पंचायतों की सराहना करता है। ये पुरस्कार ग्रामीण परिवारों के जीवन में सुधार लाने के लिए इन पंचायतों द्वारा किए गए कार्यों को मान्यता देने का एक तरीका है।

ये पुरस्कार विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत दिये जाते हैं और इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय देश भर में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों/राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को पुरस्कृत करता है। इस दिवस पर दिये जाने वाले पुरस्कार निम्न हैं -:

नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार

दीन दयाल उपाध्याय पंचायत शक्तीकरण पुरस्कार

ग्राम पंचायत विकास योजना पुरस्कार

ई-पंचायत पुरस्कार

बाल सुलभ ग्राम पंचायत पुरस्कार

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