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Sustainability Community Welfare

भारत में क्यों महत्वपूर्ण है निर्वाचन आयोग की भूमिका

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भारत में क्यों महत्वपूर्ण है निर्वाचन आयोग की भूमिका

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Post Highlights

जैसा कि आजकल पूरा देश 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव को लेकर उत्साहित है और जिसके नतीजे 10 मार्च को आएंगे। इसके लिए राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं लेकिन इस सबके बीच, इन सबसे बढ़कर एक संस्था ऐसी है जो यह तैयारी करती है कि चुनाव बिना किसी परेशानी के पूरे हों और वह संस्था है ECI भारतीय निर्वाचन आयोग (इलेक्शन कमिशन ऑफ इंडिया) जो कि चुनावों की तैयारी में पूरी तरह से जुटी रहती है। हर 5 साल में राज्य और केंद्र के होने वाले चुनावों को कराने की पूरी जिम्मेदारी Election Commission of India यानी भारत निर्वाचन आयोग की होती है।

देश के 5 राज्यों में आजकल चुनावी माहौल चल रहा है और इन पांच राज्यों में नई सरकारों के चुनाव का बिगुल बज चुका है आजकल स्टार प्रचारक चुनावी प्रचार जोर-शोर से कर रहे हैं। इस समय चुनावी माहौल गर्म है। पार्टियां लगातार अपने स्टार प्रचारकों के साथ रैलियां और जन सभाएं कर रही हैं। इन्हीं चुनाव के दौरान आपने कई बार सुना होगा कि चुनाव आयोग के द्वारा ये कहा गया है कि अगर कोई भी चुनावी रैलियों या प्रचार से जुड़े नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर निर्वाचन अधिकारी फैसला करके उन्हें रैली करने से रोक सकते हैं या फिर चुनाव आयोग ने रोड शो, पदयात्रा, वाहन रैलियों और जुलूसों पर प्रतिबंध लगा दिया है और सभी चरणों के लिए घर-घर जाकर प्रचार करने वालों की संख्या तथा जनसभाओं से संबंधित नियमों में ढील प्रदान कर दी है। अभी 5 राज्यों में व‍िधान सभा चुनाव हो रहे हैं। इसके अलावा आपको कई बार ये भी सुनने को मिल रहा होगा कि व‍िधान सभा चुनाव के ल‍िए ECI की नई गाइडलाइन, बढ़ाया चुनाव प्रचार के ल‍िए समय। क्या आपको पता है कि ये ECI, Election Commission of India यानि भारत निर्वाचन आयोग कौन है जो इस तरह से गाइडलाइन लागू करता है और जो चुनावों को कराने की पूरी जिम्मेदारी लेता है। सभी राजनेता और जो भी दल मैदान में होते हैं उन्हें इस गाइडलाइन को फॉलो करना ही होता है। चलिए आज विस्तार से जानते हैं कि भारत में निर्वाचन आयोग की क्या भूमिका है और ये क्यों महत्वपूर्ण है। 

निर्वाचन आयोग क्या है?

 भारत निर्वाचन आयोग को चुनाव आयोग के नाम से भी जाना जाता है। यह एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था autonomous constitutional body है जो संविधान के आर्टिकल 324 के तहत भारत में होने वाले चुनावों और चुनावी प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार है। जिसकी स्थापना 25 जनवरी, 1950 को की गई थी। भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र Democracy कहा जाता है और भारत में राज्य एवं केंद्र सरकारों का फैसला आम लोगों के वोट से होता है। हर 5 साल में राज्य और केंद्र के होने वाले चुनावों को कराने की पूरी जिम्मेदारी Election Commission of India यानी भारत निर्वाचन आयोग की होती है। यह देश में लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव का संचालन करता है। देश की उच्च न्यायपालिका, केंद्रीय लोक सेवा आयोग और भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (Comptroller & Auditor General of India-CAG) के अलावा निर्वाचन आयोग ही ऐसी संस्था है जो स्वायत्त और स्वतंत्र है। चुनाव आयोग के कार्यों और अधिकारों functions and rights का उल्लेख भारत के संविधान constitution of india में किया गया है। डेप्युटी इलेक्शन कमिश्नर और डायरेक्टर जनरल मुख्यालय में सबसे सीनियर अधिकारी होते हैं। 

निर्वाचन आयोग की संरचना 

निर्वाचन आयोग में मूलतः केवल एक चुनाव आयुक्त का प्रावधान था, लेकिन राष्ट्रपति की एक अधिसूचना के ज़रिये 16 अक्तूबर, 1989 को इसे तीन सदस्यीय बना दिया गया। इसमें दो अतिरिक्त कमिश्नरों की नियुक्ति की गई थी। यह नियुक्ति केवल 1 जनवरी 1990 तक ही थी। इसके बाद कुछ समय के लिये इसे एक सदस्यीय आयोग बना दिया गया और 1 अक्तूबर, 1993 को दो अतिरिक्त चुनाव कमिश्नरों की नियुक्ति की गई थी और इसका तीन सदस्यीय आयोग वाला स्वरूप फिर से बहाल कर दिया गया। मतलब चुनाव आयोग में तीन सदस्य होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा दो और चुनाव आयुक्त होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 साल या 65 वर्ष की उम्र, दोनों में से जो पहले हो, की आयु तक होता है। चुनाव आयुक्तों election commissioners की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी IAS रैंक का अधिकारी होता है। यानि आईएएस, ईआरएस या फिर सिविल सर्विस civil service का कोई अधिकारी ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जिम्मेदारी संभालता है। जैसे कि आपको पता है भारत का चुनाव आयोग एक संवैधानिक और स्वायत्त संस्था है इसलिए सरकार इसके कामकाज में दखल नहीं दे सकती है मतलब सरकार किसी भी तरह इसके कामकाज को प्रभावित नहीं कर सकती है। चुनाव आयुक्त को किसी एक आदेश से पद से नहीं हटाया जा सकता। इसके लिए संसद से महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने की जरूरत होती है। मुख्य चुनाव आयुक्त का दर्जा देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के बराबर होता है।.इसका मुख्यालय निर्वाचन सदन, अशोक रोड नई दिल्ली में स्थित है। 

निर्वाचन आयोग के कार्य

भारत निर्वाचन आयोग का मुख्य कार्य देश में पारदर्शी तरीके से चुनाव कराना होता है इसमें राज्यों के साथ केन्द्र से जुड़े चुनाव और नगर पालिका के चुनाव भी शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का दायित्व भी भारत निर्वाचन आयोग का होता है। निर्वाचन आयोग का सबसे बड़ा काम है नियमित समय पर लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराना। आयोग चुनावों से पहले आचार संहिता Code of conduct लागू करता है जिससे स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव कराए जा सकें। चुनाव आयोग भारत में लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव की संपूर्ण प्रक्रिया entire selection process का संचालन, निर्देशन और नियंत्रण करता है। राजनीतिक दलों और नेताओं को इसी के तहत आचार करना होता है। चुनाव लड़ने वाली पार्टियां आयोग के पास खुद को रजिस्टर कराती हैं। आयोग ही पार्टियों को चुनाव चिन्ह प्रदान करता है और साथ ही चुनाव में होने वाले खर्च की सीमा भी तय करता है। इलेक्टोरल रोल electoral roll और वोटर्स की लिस्ट Voters' list को भी समय-समय पर चुनाव आयोग के द्वारा अपडेट किया जाता है। यदि चुनाव आयोग चाहे तो चुनाव से जुड़े प्रकाशन, ऑपिनियन पोल या एग्जिट पोल पर रोक लगा सकता है। निर्वाचन आयोग मतदान एवं मतगणना केंद्रों के लिये जगह, मतदाताओं के लिये मतदान केंद्र तय करना, मतदान एवं मतगणना केंद्रों counting centers में सभी प्रकार की आवश्यक व्यवस्थाओं का संचालन करना और इससे जुड़े अन्य सभी कार्यों का प्रबंधन करता है। कोई अनुचित कार्य न करे या कोई शक्तियों का दुरुपयोग न करे इसके लिए चुनाव आयोग, चुनाव में ‘आदर्श आचार संहिता’ Model Code of Conduct भी जारी करता है। इसके अलावा चुनाव आयोग सरकार को भी निर्देश जारी कर सकता है। चुनाव संबंधित नियमों का उल्लंघन करने पर चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टियों और उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई तक कर सकता है। 

निर्वाचन आयोग की ताकत और महत्व 

ये तो अब आप अच्छी तरह से समझ गये हैं कि देश में चुनाव करवाने की जिम्मेदारी भारत के चुनाव आयोग की है। यही निर्वाचन आयोग की सबसे बड़ी ताकत है और ये बात अपने आप में बहुत महत्व रखती है। चुनाव आयोग के द्वारा ही राजनीतिक दलों को मान्यता और चुनाव चिन्ह प्रदान किया जाता है। मतदाता सूची तैयार करना आचार संहिता तैयार करना और उसको फिर लागू करना भी चुनाव आयोग की मुख्य जिम्मेदारी है। इस बात से हम समझ सकते हैं कि भारत का चुनाव आयोग बहुत अधिक ताकतवर है। इसके अलावा सरकार इसके कामकाज में दखल नहीं दे सकती है। यदि उम्मीदवारों के द्वारा चुनाव नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उनके खिलाफ केस दर्ज करवा सकते हैं और यहाँ तक गिरफ्तार भी करवा सकते हैं। साथ ही ऐसे उम्मीदवारों का साथ देने वाले अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं यहाँ तक उन अधिकारियों को निलंबित भी कर सकते हैं। चुनाव आयोग संविधान में निहित मूल्यों को मानता है और चुनाव में समानता equality in elections, निष्पक्षता fairness, स्वतंत्रता स्थापित करता है जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहती है। चुनाव आयोग ही वो संस्था है जिसके कारण देश की चुनाव प्रणाली के प्रति लोगों का विश्वास बरक़रार है। साथ ही इसके कारण राजनीतिक दल भी अनुशासित रहते हैं। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि निर्वाचन आयोग की ताकत और महत्व की वजह से ही देश की चुनाव प्रणाली में निष्पक्षता और मज़बूती कायम है।

देश के 5 राज्यों में आजकल चुनावी माहौल चल रहा है और इन पांच राज्यों में नई सरकारों के चुनाव का बिगुल बज चुका है आजकल स्टार प्रचारक चुनावी प्रचार जोर-शोर से कर रहे हैं। इस समय चुनावी माहौल गर्म है। पार्टियां लगातार अपने स्टार प्रचारकों के साथ रैलियां और जन सभाएं कर रही हैं। इन्हीं चुनाव के दौरान आपने कई बार सुना होगा कि चुनाव आयोग के द्वारा ये कहा गया है कि अगर कोई भी चुनावी रैलियों या प्रचार से जुड़े नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर निर्वाचन अधिकारी फैसला करके उन्हें रैली करने से रोक सकते हैं या फिर चुनाव आयोग ने रोड शो, पदयात्रा, वाहन रैलियों और जुलूसों पर प्रतिबंध लगा दिया है और सभी चरणों के लिए घर-घर जाकर प्रचार करने वालों की संख्या तथा जनसभाओं से संबंधित नियमों में ढील प्रदान कर दी है। अभी 5 राज्यों में व‍िधान सभा चुनाव हो रहे हैं। इसके अलावा आपको कई बार ये भी सुनने को मिल रहा होगा कि व‍िधान सभा चुनाव के ल‍िए ECI की नई गाइडलाइन, बढ़ाया चुनाव प्रचार के ल‍िए समय। क्या आपको पता है कि ये ECI, Election Commission of India यानि भारत निर्वाचन आयोग कौन है जो इस तरह से गाइडलाइन लागू करता है और जो चुनावों को कराने की पूरी जिम्मेदारी लेता है। सभी राजनेता और जो भी दल मैदान में होते हैं उन्हें इस गाइडलाइन को फॉलो करना ही होता है। चलिए आज विस्तार से जानते हैं कि भारत में निर्वाचन आयोग की क्या भूमिका है और ये क्यों महत्वपूर्ण है। 

निर्वाचन आयोग क्या है?

 भारत निर्वाचन आयोग को चुनाव आयोग के नाम से भी जाना जाता है। यह एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था autonomous constitutional body है जो संविधान के आर्टिकल 324 के तहत भारत में होने वाले चुनावों और चुनावी प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार है। जिसकी स्थापना 25 जनवरी, 1950 को की गई थी। भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र Democracy कहा जाता है और भारत में राज्य एवं केंद्र सरकारों का फैसला आम लोगों के वोट से होता है। हर 5 साल में राज्य और केंद्र के होने वाले चुनावों को कराने की पूरी जिम्मेदारी Election Commission of India यानी भारत निर्वाचन आयोग की होती है। यह देश में लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव का संचालन करता है। देश की उच्च न्यायपालिका, केंद्रीय लोक सेवा आयोग और भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (Comptroller & Auditor General of India-CAG) के अलावा निर्वाचन आयोग ही ऐसी संस्था है जो स्वायत्त और स्वतंत्र है। चुनाव आयोग के कार्यों और अधिकारों functions and rights का उल्लेख भारत के संविधान constitution of india में किया गया है। डेप्युटी इलेक्शन कमिश्नर और डायरेक्टर जनरल मुख्यालय में सबसे सीनियर अधिकारी होते हैं। 

निर्वाचन आयोग की संरचना 

निर्वाचन आयोग में मूलतः केवल एक चुनाव आयुक्त का प्रावधान था, लेकिन राष्ट्रपति की एक अधिसूचना के ज़रिये 16 अक्तूबर, 1989 को इसे तीन सदस्यीय बना दिया गया। इसमें दो अतिरिक्त कमिश्नरों की नियुक्ति की गई थी। यह नियुक्ति केवल 1 जनवरी 1990 तक ही थी। इसके बाद कुछ समय के लिये इसे एक सदस्यीय आयोग बना दिया गया और 1 अक्तूबर, 1993 को दो अतिरिक्त चुनाव कमिश्नरों की नियुक्ति की गई थी और इसका तीन सदस्यीय आयोग वाला स्वरूप फिर से बहाल कर दिया गया। मतलब चुनाव आयोग में तीन सदस्य होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा दो और चुनाव आयुक्त होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 साल या 65 वर्ष की उम्र, दोनों में से जो पहले हो, की आयु तक होता है। चुनाव आयुक्तों election commissioners की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी IAS रैंक का अधिकारी होता है। यानि आईएएस, ईआरएस या फिर सिविल सर्विस civil service का कोई अधिकारी ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जिम्मेदारी संभालता है। जैसे कि आपको पता है भारत का चुनाव आयोग एक संवैधानिक और स्वायत्त संस्था है इसलिए सरकार इसके कामकाज में दखल नहीं दे सकती है मतलब सरकार किसी भी तरह इसके कामकाज को प्रभावित नहीं कर सकती है। चुनाव आयुक्त को किसी एक आदेश से पद से नहीं हटाया जा सकता। इसके लिए संसद से महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने की जरूरत होती है। मुख्य चुनाव आयुक्त का दर्जा देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के बराबर होता है।.इसका मुख्यालय निर्वाचन सदन, अशोक रोड नई दिल्ली में स्थित है। 

निर्वाचन आयोग के कार्य

भारत निर्वाचन आयोग का मुख्य कार्य देश में पारदर्शी तरीके से चुनाव कराना होता है इसमें राज्यों के साथ केन्द्र से जुड़े चुनाव और नगर पालिका के चुनाव भी शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का दायित्व भी भारत निर्वाचन आयोग का होता है। निर्वाचन आयोग का सबसे बड़ा काम है नियमित समय पर लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराना। आयोग चुनावों से पहले आचार संहिता Code of conduct लागू करता है जिससे स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव कराए जा सकें। चुनाव आयोग भारत में लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव की संपूर्ण प्रक्रिया entire selection process का संचालन, निर्देशन और नियंत्रण करता है। राजनीतिक दलों और नेताओं को इसी के तहत आचार करना होता है। चुनाव लड़ने वाली पार्टियां आयोग के पास खुद को रजिस्टर कराती हैं। आयोग ही पार्टियों को चुनाव चिन्ह प्रदान करता है और साथ ही चुनाव में होने वाले खर्च की सीमा भी तय करता है। इलेक्टोरल रोल electoral roll और वोटर्स की लिस्ट Voters' list को भी समय-समय पर चुनाव आयोग के द्वारा अपडेट किया जाता है। यदि चुनाव आयोग चाहे तो चुनाव से जुड़े प्रकाशन, ऑपिनियन पोल या एग्जिट पोल पर रोक लगा सकता है। निर्वाचन आयोग मतदान एवं मतगणना केंद्रों के लिये जगह, मतदाताओं के लिये मतदान केंद्र तय करना, मतदान एवं मतगणना केंद्रों counting centers में सभी प्रकार की आवश्यक व्यवस्थाओं का संचालन करना और इससे जुड़े अन्य सभी कार्यों का प्रबंधन करता है। कोई अनुचित कार्य न करे या कोई शक्तियों का दुरुपयोग न करे इसके लिए चुनाव आयोग, चुनाव में ‘आदर्श आचार संहिता’ Model Code of Conduct भी जारी करता है। इसके अलावा चुनाव आयोग सरकार को भी निर्देश जारी कर सकता है। चुनाव संबंधित नियमों का उल्लंघन करने पर चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टियों और उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई तक कर सकता है। 

निर्वाचन आयोग की ताकत और महत्व 

ये तो अब आप अच्छी तरह से समझ गये हैं कि देश में चुनाव करवाने की जिम्मेदारी भारत के चुनाव आयोग की है। यही निर्वाचन आयोग की सबसे बड़ी ताकत है और ये बात अपने आप में बहुत महत्व रखती है। चुनाव आयोग के द्वारा ही राजनीतिक दलों को मान्यता और चुनाव चिन्ह प्रदान किया जाता है। मतदाता सूची तैयार करना आचार संहिता तैयार करना और उसको फिर लागू करना भी चुनाव आयोग की मुख्य जिम्मेदारी है। इस बात से हम समझ सकते हैं कि भारत का चुनाव आयोग बहुत अधिक ताकतवर है। इसके अलावा सरकार इसके कामकाज में दखल नहीं दे सकती है। यदि उम्मीदवारों के द्वारा चुनाव नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उनके खिलाफ केस दर्ज करवा सकते हैं और यहाँ तक गिरफ्तार भी करवा सकते हैं। साथ ही ऐसे उम्मीदवारों का साथ देने वाले अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं यहाँ तक उन अधिकारियों को निलंबित भी कर सकते हैं। चुनाव आयोग संविधान में निहित मूल्यों को मानता है और चुनाव में समानता equality in elections, निष्पक्षता fairness, स्वतंत्रता स्थापित करता है जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहती है। चुनाव आयोग ही वो संस्था है जिसके कारण देश की चुनाव प्रणाली के प्रति लोगों का विश्वास बरक़रार है। साथ ही इसके कारण राजनीतिक दल भी अनुशासित रहते हैं। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि निर्वाचन आयोग की ताकत और महत्व की वजह से ही देश की चुनाव प्रणाली में निष्पक्षता और मज़बूती कायम है।




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