2025 में भारत की एक्सपोर्ट ग्रोथ: किन उद्योगों ने बनाई वैश्विक पहचान?
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भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को तेज़ी से बदल रहा है। लंबे समय तक भारत का व्यापार प्रोफ़ाइल पारंपरिक वस्तुओं और एक मजबूत लेकिन सीमित सेवाओं के क्षेत्र पर आधारित था।
लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। आज का भारत एक विविध और तेज़ी से उभरती निर्यात शक्ति बन चुका है, जो दुनिया को उन्नत मैन्युफैक्चरिंग उत्पाद, आधुनिक सेवाएँ और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं निर्यात कर रहा है।
इस बदलाव के केंद्र में सरकार की प्रमुख पहल “Make in India for the World” है। 2014 में शुरू हुई इस योजना ने भारत को केवल कच्चा माल या सेवा प्रदान करने वाले देश से आगे बढ़ाकर विश्वसनीय मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस ब्लूप्रिंट ने अपनी सफलता आंकड़ों में भी दिखा दी है।
FY 2024-25 में भारत का कुल निर्यात बढ़कर रिकॉर्ड $824.9 बिलियन हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.01% अधिक है और 2014-15 के मुकाबले 76% की जबरदस्त वृद्धि दर्शाता है।
भारत की यह निर्यात गति दो मज़बूत स्तंभों पर आधारित है —
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$387.5 बिलियन के सेवाओं के निर्यात
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और $374.1 बिलियन के गैर-पेट्रोलियम मर्चेंडाइज़ निर्यात
ये आंकड़े बताते हैं कि भारत केवल अपने ज्ञान-आधारित क्षेत्रों पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह एक तेज़ी से बढ़ता वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस भी बन रहा है।
मेक इन इंडिया की सफलता की कहानियाँ: भारत की अर्थव्यवस्था को बदलने वाले शीर्ष निर्यात उत्पाद Make in India Success Stories: Top Export Products Transforming India’s Economy
दोहरे इंजन की ग्रोथ: सेवाएँ और मर्चेंडाइज़ (Dual Engine Growth: Services and Merchandise)
भारत के FY2024-25 के निर्यात आँकड़े बताते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था दो मजबूत इंजनों से चल रही है—तेजी से बढ़ती सेवाएँ और लगातार मजबूत हो रहा मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट।
सेवाएँ (Services): भारत की ज्ञान-आधारित ताकत (Services Exports – The Knowledge Leader)
FY2024-25 में भारत की सेवाओं का निर्यात रिकॉर्ड $387.5 बिलियन तक पहुँच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 13.6% की तेज वृद्धि है।
आईटी और BPM सेवाएँ अब भी भारत की मुख्य शक्ति हैं, लेकिन इसके साथ ही फाइनेंशियल, प्रोफेशनल, डिजिटल और टेक्नोलॉजी आधारित सेवाएँ भी तेज़ी से दुनिया भर में अपनी पहचान बना रही हैं। भारत की स्किल्ड मानव क्षमता ने इसे दुनिया का प्रमुख सेवा निर्यातक बना दिया है।
मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट: भारत का मैन्युफैक्चरिंग रेनैसांस (Merchandise Exports – The Manufacturing Renaissance)
पेट्रोलियम को छोड़कर भारत का मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट FY2024-25 में $374.1 बिलियन तक पहुँचा, जो पिछले साल की तुलना में 6% ज्यादा है।
यह साफ दिखाता है कि “Make in India” ने भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बना दिया है।
भारत के प्रमुख निर्यात बाज़ार—अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, यूएई और फ्रांस—मिलकर भारत के कुल निर्यात का आधे से ज्यादा हिस्सा लेते हैं।
भारत की एक्सपोर्ट ग्रोथ के प्रमुख उद्योग (Key Industries Driving India’s Export Success)
नीचे पाँच ऐसे सेक्टर दिए गए हैं जिन्होंने नीति-समर्थन और वैश्विक मांग के साथ मिलकर भारत को नया निर्यात चैंपियन बनाया है।
1. इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन: PLI योजना की सबसे बड़ी सफलता (Electronics and Mobile Phones – The PLI Powerhouse)
मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग Make in India की अब तक की सबसे चमकदार सफलता कहानी बन चुकी है। PLI (Production-Linked Incentive) स्कीम की वजह से भारत एक बड़े इंपोर्टर से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्यातक बन गया है।
एक्सपोनेंशियल ग्रोथ (Exponential Growth)
मोबाइल फोन का निर्यात 2014-15 के ₹1,500 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹2 लाख करोड़ (करीब $24 बिलियन) हो गया—यानी 127 गुना वृद्धि।
उत्पादन क्षमता में रिकॉर्ड विस्तार (Production Scale)
भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 10 साल में ₹2.4 लाख करोड़ से बढ़कर ₹9.8 लाख करोड़ (करीब $118 बिलियन) हो गया।
जहाँ 2014 में सिर्फ 2 मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट थीं, वहीं आज 300 से ज्यादा यूनिटें काम कर रही हैं।
भविष्य की दिशा (Future Outlook)
FY2024-25 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 32.47% बढ़कर $38.57 बिलियन पर पहुँच गया।
वैश्विक टेक कंपनियों के भारत में बड़े एक्सपोर्ट बेस स्थापित करने से देश आने वाले वर्षों में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनने की दिशा में बढ़ रहा है।
2. फार्मास्यूटिकल्स: दुनिया की फार्मेसी (Pharmaceuticals – The World’s Pharmacy)
भारत को लंबे समय से “दुनिया की फार्मेसी” कहा जाता है। इसकी वजह है कि भारत दुनिया की जेनेरिक दवाओं के बाजार में 20% हिस्सा रखता है और विश्व की 60% से ज्यादा वैक्सीन सप्लाई करता है।
लगातार मजबूत होती वृद्धि (Sustained Growth)
पिछले दस वर्षों में भारत के फार्मा निर्यात में 102% से अधिक वृद्धि हुई है। FY 2024-25 में यह बढ़कर $30.47 बिलियन तक पहुँच गया है।
मुख्य एक्सपोर्ट मार्केट (Strategic Markets)
भारत की दवाओं के लिए सबसे बड़ा बाजार NAFTA क्षेत्र है, जहाँ लगभग 37% निर्यात होता है।
इसके बाद यूरोप लगभग 19% और अफ्रीका लगभग 13% हिस्सेदारी रखते हैं।
वैल्यू चेन को मजबूत करना (Value Chain Strengthening)
फार्मास्यूटिकल्स के लिए PLI स्कीम PLI scheme for Pharmaceuticals का मुख्य उद्देश्य एक बड़ी कमजोरी को दूर करना है—
API (Active Pharmaceutical Ingredients) और KSM (Key Starting Materials) के लिए चीन पर निर्भरता।
इस स्कीम के माध्यम से इन अहम बल्क ड्रग्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि:
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सप्लाई चेन सुरक्षित हो सके।
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भारत में वैल्यू एडिशन बढ़े।
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बायोलॉजिक्स और कॉम्प्लेक्स जेनेरिक जैसी उच्च-मूल्य वाली दवाओं का उत्पादन तेज़ी से बढ़ सके।
3. इंजीनियरिंग गुड्स: भारत के मैन्युफैक्चरिंग का आधार (Engineering Goods – The Manufacturing Cornerstone)
इंजीनियरिंग गुड्स सेक्टर—जिसमें ऑटो पार्ट्स, इंडस्ट्रियल मशीनरी, और ट्रांसपोर्टेशन इक्विपमेंट शामिल हैं—भारत के पारंपरिक मर्चेंडाइज़ निर्यात की रीढ़ है। यह भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का सबसे बड़ा संकेतक भी है।
रिकॉर्ड निर्यात (Record Exports)
FY2024-25 में भारत के इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात $116.67 बिलियन तक पहुँच गए। यह पिछले वर्ष की तुलना में 6.74% वृद्धि है और देश के कुल मर्चेंडाइज़ निर्यात का 26% से ज्यादा हिस्सा इसी सेक्टर से आता है।
ऑटो और ग्रीन-टेक का बढ़ता प्रभाव (Auto and Green-Tech Momentum)
ऑटोमोबाइल्स के लिए PLI स्कीम और FAME इंडिया FAME India scheme जैसी सरकारी नीतियों ने इस सेक्टर को इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) कंपोनेंट्स और ग्रीन-टेक मैन्युफैक्चरिंग की ओर मोड़ दिया है।
भारत में EV इकोसिस्टम में ₹85,000 करोड़ (लगभग $10 बिलियन) से अधिक का निवेश हो चुका है।
इस वजह से यह सेक्टर भविष्य में भारत के इंजीनियरिंग निर्यात का एक बड़ा ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है।
4. कृषि और खाद्य उत्पाद: विश्व की खाद्य सुरक्षा में भारत की अहम भूमिका (Agriculture and Food Products – Securing Global Food Supply)
भारत की विशाल कृषि क्षमता उसे दुनिया का आठवाँ सबसे बड़ा कृषि निर्यातक बनाती है। FY2024-25 में भारत के कृषि और खाद्य उत्पादों का निर्यात बढ़कर $46.44 बिलियन हो गया, जो देश के कुल निर्यात का लगभग 11.7% है।
मुख्य निर्यात उत्पादों में शामिल हैं:
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बासमती चावल
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मसाले
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समुद्री उत्पाद (सीफूड)
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प्रोसेस्ड फूड
प्रमुख क्षेत्रीय बाजार (Regional Reliance)
मध्य पूर्व (GCC) और ASEAN देश भारत के खाद्य उत्पादों पर काफी निर्भर हैं।
विशेष रूप से चावल और समुद्री उत्पादों के मामले में भारत की सप्लाई लगातार भरोसेमंद रही है।
यह भरोसा न केवल व्यापारिक संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि भारत की जियोपॉलिटिकल स्थिति को भी मजबूत करता है, क्योंकि दुनिया भारत को एक विश्वसनीय खाद्य आपूर्तिकर्ता के रूप में देखती है।
5. टेक्सटाइल, जेम्स और ज्वेलरी: परंपरागत ताकत, आधुनिक प्रोत्साहन (Textiles, Gems & Jewellery – Traditional Strengths, Modern Incentives)
ये श्रम-प्रधान सेक्टर आज भी भारत के लिए बड़े विदेशी मुद्रा कमाने वाले उद्योग हैं और अन्य हाई-टेक क्षेत्रों के संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं।
टेक्सटाइल सेक्टर की मजबूती(Textile Resilience)
भारत के कपड़ा और परिधान उद्योग ने FY2024-25 में लगभग $36 बिलियन का निर्यात किया।
देश के दूसरे सबसे बड़े रोजगार देने वाले इस सेक्टर को कई सरकारी योजनाओं से मजबूती मिली है, जैसे:
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PLI for Textiles,
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PM Mitra Parks, जिनका उद्देश्य बड़े स्तर पर एकीकृत टेक्सटाइल हब बनाना है, ताकि लागत कम हो और उत्पादन क्षमता बढ़े।
जेम्स और ज्वेलरी उद्योग (Gems & Jewellery)
भारत कटे और पॉलिश किए हुए हीरों का विश्व-नेता है। FY2024-25 में इस सेक्टर का निर्यात $30.47 बिलियन रहा।
इसके प्रमुख बाजार अमेरिका (US) और यूएई (UAE) हैं।
सरकारी प्रयास: भारत को एक्सपोर्ट-रेडी बनाना (Government Push – Making India Export-Ready)
भारत के निर्यात में जो तेज़ वृद्धि दिख रही है वह संयोग नहीं है। यह कई बड़े और व्यवस्थित सुधारों का परिणाम है, जिनका उद्देश्य है:
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उत्पादन की लागत कम करना,
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बड़े स्तर पर निर्माण को बढ़ाना,
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और भारत को वैश्विक वैल्यू चेन से गहराई से जोड़ना।
नीचे प्रमुख नीतियों और योजनाओं का सरल विवरण दिया गया है:
Production Linked Incentive (PLI) Schemes
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गेम-चेंजर साबित हुईं।
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₹1.76 लाख करोड़ का वास्तविक निवेश हुआ।
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₹16.5 लाख करोड़ से अधिक का अतिरिक्त उत्पादन/बिक्री हुई।
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12 लाख से अधिक नौकरियाँ बनीं।
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यह स्कीम साबित करती है कि परफॉर्मेंस-बेस्ड इंसेंटिव भारत में मैन्युफैक्चरिंग को नई ऊंचाई दे सकता है।
National Logistics Policy (NLP) और PM Gati Shakti
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लक्ष्य: लॉजिस्टिक लागत को 13–14% से घटाकर 8% करना (2030 तक)।
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₹100 ट्रिलियन की PM Gati Shakti योजना तेज़ी से मल्टी-मॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है।
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परिणामस्वरूप बंदरगाहों पर कार्गो शिप की टर्नअराउंड टाइम में बड़ा सुधार हुआ है।
Foreign Trade Policy (FTP 2023)
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ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा।
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कंसाइनमेंट वैल्यू लिमिट ₹10 लाख तक बढ़ाई गई।
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RoDTEP और RoSCTL जैसी रिफंड स्कीम जारी रखी गईं ताकि भारतीय उत्पाद दुनियाभर में प्रतिस्पर्धी बने रहें।
Ease of Doing Business
(English: Ease of Doing Business)
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42,000 से अधिक अनावश्यक अनुपालन खत्म किए गए।
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3,800 से ज्यादा नियमों को डी-क्रिमिनलाइज़ किया गया।
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इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा और निर्यातकों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाएँ आसान हुईं।
निष्कर्ष: निर्यात की रफ्तार को बनाए रखना (Conclusion – Sustaining the Momentum)
भारत की निर्यात यात्रा स्पष्ट रूप से दिखाती है कि “Make in India for the World” अब सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक तेज़ी से बढ़ती आर्थिक वास्तविकता बन चुका है।
FY2024-25 के आंकड़े—जैसे $824.9 बिलियन का रिकॉर्ड निर्यात, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और इंजीनियरिंग गुड्स का बढ़ता हिस्सा—साफ दर्शाते हैं कि भारत अब विविधीकृत और वैश्विक वैल्यू चेन का मजबूत हिस्सा बन रहा है।
PLI स्कीम के ज़रिए भारत ने दुनिया की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को आकर्षित किया है।
वहीं PM Gati Shakti जैसी योजनाएँ देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को तेज़ी से आधुनिक बना रही हैं, जिससे:
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लॉजिस्टिक लागत घट रही है,
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सप्लाई चेन मजबूत हो रही है,
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और आयात पर निर्भरता कम हो रही है।
आगे बढ़ते हुए, भारत को लंबे समय तक निर्यात वृद्धि बनाए रखने के लिए:
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उन्नत R&D,
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नई स्किल्स,
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और वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुँच
पर निरंतर ध्यान देना होगा।
भारत अब वैश्विक व्यापार का एक मजबूत, भरोसेमंद और अपरिहार्य हिस्सा बनने की राह पर है।
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