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HAR GHAR TIRANGA: 1857 की क्रांति- जब मंगल पांडेय ने चलाई गोली

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HAR GHAR TIRANGA: 1857 की क्रांति- जब मंगल पांडेय ने चलाई गोली
13 Aug 2022
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भारत India की वीर सपूत मंगल पांडे Mangal Pandey को 8 अप्रैल 1857 को फांसी दी गई थी। मंगल पांडेय को स्थानीय जल्लादों Local Executioners ने फांसी देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद कोलकाता Kolkata से चार जल्लादों को बुलाकर इस जांबाज को फांसी दी गई। लेकिन ये शायद कम लोगों को ही पता है कि 19 जुलाई 1827 को जन्मे मंगल पांडे ने फांसी से कई दिन पहले खुद की जान लेने की भी कोशिश की थी और, इस कोशिश में वह गंभीर रूप से घायल भी हो थे। ये साल 1857 के मार्च महीने की 29 तारीख थी। मंगल पांडे 34वीं बंगाल नेटिव इंफेन्टरी Bengal Native Infantry के साथ बैरकपुर में तैनात थे। सिपाहियों में जबरन ईसाई बनाए जाने से लेकर कई तरह की अफवाहें फैल रही थीं। इनमें से एक अफवाह ये भी थी कि बड़ी संख्या में यूरोपीय सैनिक European Soldiers हिंदुस्तानी सैनिकों को मारने आ रहे हैं।

इतिहासकार किम ए वैगनर Kim A Wagner ने अपनी क़िताब 'द ग्रेट फियर ऑफ 1857 - रयूमर्स, कॉन्सपिरेसीज़ एंड मेकिंग ऑफ द इंडियन अपराइज़िंग' The Great Fear of 1857 - Rumors, Conspiracies and Making of the Indian Uprising में 29 मार्च की घटना को सिलसिलेवार अंदाज़ में बयान किया है. ब्रितानी इतिहासकार रोज़ी लिलवेलन जोन्स Rosie Lillewellyn Jones ने भी अपनी किताब "द ग्रेट अपराइजिंग इन इंडिया न, 1857 - 58 अनटोल्ड स्टोरीज, इंडियन एंड ब्रिटिश में मंगल पांडे के दो ब्रितानी सैन्य अधिकारियों पर हमला बोलने की घटना को बताया है। जोन्स लिखती हैं, "तलवार और अपनी बंदूक से लैस मंगल पांडेय ने क्वार्टर गार्ड Quarter Guard (बिल्डिंग) के सामने घूमते हुए अपनी रेजिमेंट को भड़काना शुरू कर दिया। वह रेजिमेंट के सैनिकों को यूरोपीय सैनिकों द्वारा उनके खात्मे की बात कहकर भड़का रहे थे।

सार्जेन्ट मेजर जेम्स ह्वीसन Howson इस सबके बारे में जानने के लिए पैदल ही बाहर निकले और, इस पूरी घटना के चश्मदीद गवाह हवलदार शेख पल्टू के मुताबिक पांडे ने ह्वीसन पर गोली चलाई, लेकिन ये गोली ह्वीसन को नहीं लगी।" जोन्स आगे लिखती हैं कि, "जब अडज्यूटेंट लेफ्टिनेंट बेंपदे बाग Bempade Bagh को इस बारे में बताया गया तो वह अपने घोड़े पर सवार होकर वहां पहुंचे और पांडेय को अपनी बंदूक लोड करते हुए देखा। मंगल पांडेय ने फिर एक बार गोली चलाई और फिर एक बार निशाना चूक गया, बाग ने भी अपनी पिस्तौल से पांडे पर निशाना साधा, लेकिन गोली निशाने पर नहीं लगी।"मंगल पांडेय के बाद एक और सिपाही ईश्वरी प्रसाद पांडे Sepoy Ishwari Prasad Pandey को फांसी दी गई थी।

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