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मीडिया साक्षरता क्यों महत्वपूर्ण है?

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मीडिया साक्षरता क्यों महत्वपूर्ण है?
08 Jun 2022
7 min read
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मीडिया साक्षरता शिक्षा Media Literacy Education एक विधि है, जिसके माध्यम से हम  मीडिया साक्षरता कौशल Media Literacy Skills  में सुधार कर सकते है। ये तो हम सब जानते हैं कि पूरे संसार में घटी हुई विभिन्न घटनाओं की जानकारी हमें मीडिया के माध्यम से ही मिलती है। यदि ये जानकारी सकारात्मक रूप से पेश की जाती है तो समाज में ईमानदारी शांति, नैतिकता, सौहार्द कायम रह सकता है और यदि यही जानकारी नकारात्मक तरीके से पेश की जाती है तो समाज में भ्रष्टाचार लालच, भय, द्वेष, दुर्भावना, दंगे, असंतुलन और अव्यवस्था फ़ैल जाती है। इन सभी चीज़ों को देखते हुए मीडिया साक्षरता आज के समय में बहुत जरुरी है। मीडिया साक्षरता का अर्थ Media Literacy Meaning है बच्चों को या लोगों को मीडिया के प्रति जागरूक बनाना और समाज में मीडिया के फैलते स्वरूप और बहुत बड़े स्तर पर उनके प्रभाव को देखते हुए उन्हें मीडिया के बारे में जागरूक करना। 

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आज के समय में मीडिया की उपयोगिता एवं भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गयी है। यहाँ तक कि मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ भी कहा जाता है। क्योंकि मीडिया की जनता को जागरूक करने में बहुत बड़ी भूमिका होती है। दरअसल समाज के निर्माण में सूचनाओं का बहुत अहम् योगदान होता है और इन्हीं सूचनाओं को जन-जन तक पहुँचाने का काम करता है मीडिया। मीडिया से रीलेटेड आज के समय मे कई टर्म्स इस्तेमाल होने लगे हैं। न्यूज़ और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में मीडिया शब्द का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इतना ही नही लोग मीडिया के अर्थ को न्यूज़ के संदर्भ में भी  देखते हैं। आज मीडिया का हस्तक्षेप media intervention हमारे जीवन के हर हिस्से में है, चाहे वह हमारा व्यक्तिगत जीवन हो या सामाजिक। प्रायः हम सूचनाओं की प्राप्ति के लिए और किसी सूचना को आम जनमानस तक प्रेषित करने के लिए मीडिया पर ही आश्रित रहते हैं। सूचनाओं का प्रसार और लोगों पर उसका प्रभाव, इस बात पर भी निर्भर करता है कि हम किस माध्यम का चयन कर रहे हैं।

मीडिया साक्षरता (Media Literacy)

किसी भी समाज के निर्माण व संचालन में सूचनाओं का अहम योगदान होता है और इन सूचनाओं को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति या एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मीडिया अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पढ़ने और लिखने की क्षमता को आमतौर पर "साक्षरता" कहा जाता है। साक्षरता पढ़ने और मीडिया साक्षरता के बीच बहुत समानताएं हैं। अक्षर पहचान पढ़ना सीखने का पहला चरण है। पाठक जल्द ही शब्दों को पहचानने में सक्षम होंगे और अधिक महत्वपूर्ण रूप से, उनके अर्थों को समझ सकेंगे। पाठक पुस्तक के साथ अपने अनुभवों के परिणामस्वरूप लेखक बनते हैं। पाठक और लेखक साक्षरता में दक्षता हासिल करते हैं क्योंकि वे अनुभव प्राप्त करते हैं। विभिन्न प्रकार के मीडिया को पहचानने और उनके द्वारा दिए गए संदेशों को समझने की क्षमता को मीडिया साक्षरता के रूप में जाना जाता है। मीडिया साक्षरता को जानना और समझना हम सबके लिए बहुत जरुरी है तभी जाकर हम एक अच्छे समाज का निर्माण करने में अपनी भागीदारी दे सकते हैं तो चलिए जानते हैं क्या है मीडिया साक्षरता और इसका क्या महत्व है। 

मीडिया और मीडिया साक्षरता के बीच अंतर (Difference Between Media And Media Literacy)-

आज हम बतायेंगे आपको मीडिया और मीडिया साक्षरता के बीच अंतर। मीडिया Media प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से समाज में योगदान दे रहा है और वे अपने उत्तरदायित्वों के निर्वहन के समय समाज पर कैसा प्रभाव छोड़ रहे हैं, ये जानना अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि आज मीडिया का लोगों पर सकारात्मक प्रभाव Positive impact, के साथ साथ नकारात्मक प्रभाव negative impact भी अधिक पड़ रहा है। हम मीडिया की उपयोगिकता, समाज में उनकी शक्ति और उनके महत्व को नकार नहीं सकते हैं लेकिन साथ साथ उनके नकारात्मक प्रभाव को भी अनदेखा नहीं कर सकते हैं। मीडिया ने जहाँ जनता को जागरूक कर निर्भीक बनाने का और पूरे विश्व में घटित विभिन्न घटनाओं की जानकारी देने और भ्रष्टाचार को उजागर करने का काम किया है वहीं दूसरी ओर मीडिया ने चटपटी खबरों को ज्यादा बढ़ा चढ़ा कर पेश करना और, अराजकता और अफवाह वाली खबरे प्रकाशित करना, खबरों को तोड़-मरोड़कर पेश करना, लालच में सत्तारूढ़ दल की चापलूसी करना और लालच, भय, राजनैतिक जाल में फंसकर अपनी भूमिका को खराब भी किया है। मीडिया के इस आचरण से समाज में अव्यवस्था फ़ैल रही है। इन्हीं सब चीज़ों को समझने के लिए आजकल एक शब्द का इस्तेमाल बहुत अधिक किया जा रहा है वो है Media Literacy मीडिया साक्षरता। 

मीडिया के प्रति जागरूक (Media Conscious)-

आज हमारे पास इतनी सूचनाओं का अंबार Pile of information होता है कि हम सही और गलत में फर्क नहीं कर पाते हैं। इस समय राजनीतिक विचारधारा, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर हर दिन झूठी खबरें आती हैं। वहीं अगर देखा जाये तो आज मीडिया का हस्तक्षेप हमारे जीवन के हर हिस्से में हैं, चाहे वह हमारा व्यक्तिगत जीवन हो या सामाजिक। हम सब आजकल मीडिया पर बहुत अधिक निर्भर भी हो गए हैं, फिर चाहे हमें किसी सूचना को प्राप्त करना हो या फिर किसी सूचना को लोगों तक पहुँचाना हो। अब लोगों पर उसका प्रभाव कैसा पड़ता है यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि मीडिया ने उसे किस तरह से परोसा है। मीडिया साक्षरता का अर्थ सिर्फ अखबार, रेडियो और टेलीविज़न का प्रशिक्षण देने से नहीं है बल्कि लोगों को मीडिया के प्रति जागरूक Media conscious बनाने से है। पहले टेलीविजन, रेडियो और अखबार के द्वारा ही सूचनाओं का आदान प्रदान होता था लेकिन आज सोशल मीडिया Social media के द्वारा भी सूचनाओं का आदान-प्रदान बहुत सरल हो गया है। क्योंकि आज शायद ही कोई ऐसी जगह है जहाँ मोबाईल और इंटरनेट Mobile and internet की पहुँच न हो। जिसके कारण लोग सोशल मीडिया पर चलने वाली हर ख़बर और हर बात पर बिना सोचे समझे विश्वास कर लेते हैं। जिसका नतीजा बहुत ही भयानक रूप ले रहा है इसलिए मीडिया साक्षरता के द्वारा समाज में होने वाली चीज़ों के प्रति सही समझ उत्पन्न करने और नज़रिए में पारदर्शिता लाना जरुरी है। क्योंकि झूठी ख़बरों के द्वारा लोग मानसिक रूप से परेशान रहने लगे हैं।

वर्तमान में फेक न्यूज़ और झूठी अफवाहों को पहचानने के लिए हमें साक्षरता पर बल देना होगा- 

मीडिया द्वारा खबरों को तोड़-मरोड़कर पेश करना और दंगे भड़काने वाली खबरे प्रकाशित करना। इसके अलावा किसी की बहुत अधिक प्रशंसा करना और किसी दूसरे की आलोचना करना। साथ ही टेलीविज़न न्यूज़ चैनल टीआरपी की होड़ और अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में सामाजिक सरोकार, समाज के प्रति अपने दायित्व और नैतिकता को भूलकर खुद एक-दूसरे को टक्कर दे रहे हैं, एक दूसरे को गलत-सही ठहरा रहे हैं। उन्हें फर्क नहीं पड़ता है कि समाज पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। शायद वो ये भूल जाते हैं कि उन पर पूरा देश आँख बंद करके भरोसा कर लेता है फिर चाहे वो सही हो या गलत। बस इसी सही और गलत की जानकारी को देखते हुए मीडिया साक्षरता को लेकर एक उचित कदम उठाने की ज़रूरत है। आम जनता को इसके प्रति जागरूक करने का अभियान शुरू किया जाना चाहिए। स्कूली स्तर से ही बच्चों को मीडिया के प्रयोग, खबरों के प्रति जागरूक करने और सही व गलत खबरों में अंतर सिखाने का अध्ययन एवं प्रशिक्ष्ण देना चाहिए, जिससे बच्चों में मीडिया के प्रति समझ विकसित हो सके और वो गलत और सही जानकारी की पहचान कर सकें। क्योंकि बच्चे ही देश का भविष्य होते हैं। इसके अलावा मीडिया साक्षरता की जरुरत सिर्फ स्टूडेंट या बच्चों के लिए जरुरी नहीं है बल्कि समाज के हर नागरिक के लिए जरुरी है जिससे एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके। मिडिया साक्षरता Media literacy का मतलब लोगों की उस क्षमता से है जो उन्हें विविध प्रकार के मिडिया के लिये संदेशों का विश्लेषण करने फिर मूल्यांकन करने और अंत में सृजन करने के लायक बनाती है और ये सब एक स्वस्थ मानसिक समृद्धि व समझ से ही संभव है।

हमें मीडिया साक्षरता को हमारी शिक्षा प्रणाली के पाठ्यक्रम में जोड़ना होगा- 

मौजूदा हालात को देखते हुए भारत में मीडिया साक्षरता को लेकर एक उचित कदम उठाने की ज़रूरत है और मीडिया शिक्षा को भी एक नया रूप देने की ज़रूरत महसूस होती है। आज भी कौन सी सूचना सही है और कौन सी गलत, इसका पूर्ण रूप से पता लगाना बहुत मुश्किल है। हालांकि, आज तमाम फैक्ट चेकर उपलब्ध हैं, लेकिन वह सही व गलत का आकलन करने हेतु पर्याप्त नहीं  हैं। किसी सूचना की जांच-पड़ताल के लिए एक बेहतरीन तकनीक से देश में लोगों को मीडिया साक्षर बनाने की तरफ पहले कदम उठाया जाना चाहिए। आज डिजिटलाइजेशन के दौर में लोगों तक पहुंचना बहुत आसान हो गया है, ऐसे में सरकारी स्तर पर ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से आम जनता को इसके प्रति जागरूक करने का अभियान शुरू किया जाना चाहिए। इसके साथ ही स्कूली स्तर पर मीडिया साक्षरता बढ़ाने पर जोर दिया जाना चाहिए।

मीडिया साक्षरता, एक जागरूक नागरिकों के समाज का निर्माण करने में सहायक साबित होगी -

मीडिया साक्षरता की ज़रूरत केवल स्टूडेंट्स को ही नहीं, अपितु हमारे पूरे समाज को है। ऐसे में एक बेहतर समाज के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले प्रशासनिक अधिकारियों Administrative Officers और कर्मचारियों को भी है, जिससे वह फेक खबरों की समस्या Problem of fake news और उसके दुष्प्रभावों को बेहतर तरीके से समझ पाएं और उसके खिलाफ उचित कदम उठा पाएं। हमें यह समझना होगा कि किसी सोशल प्लेटफार्म Social Platform पर दिखने वाली हर खबर सही ही हो, इसकी कोई गारंटी नहीं है। उस कंटेंट की गहनता से जांच-पड़ताल करना ज़रूरी है, उसे यूं ही दूसरे से साझा करना उचित नहीं है। आज अखबार और टेलीविज़न Newspapers and Television की खबरों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे कई मौके रहे हैं, जब मीडिया को बढ़ा-चढ़ा कर, मिर्च-मसाला लगाकर गलत खबरों को पेश करते हुए देखा गया है। ऐसे में सरकार की भी आम जनता के प्रति ज़िम्मेदारी बनती है कि वह एक बेहतर मानक Standard तैयार करे और साथ ही हर वर्ग को मीडिया साक्षर बनाने हेतु एक सिलेबस तैयार कर इसे पाठ्यक्रम में शामिल करे, जिससे बेहतर और सही सूचनाओं का आदान-प्रदान  हो सके और एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके।

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अंत में मैं यही कहूंगी कि मीडिया साक्षरता सिर्फ एक इंसान का व्यक्तिगत हित से ही नहीं बल्कि सामाजिक हित से भी जुड़ा हुआ है इसलिए पूरे समाज को इसके प्रति जागरूक और मीडिया के इस्तेमाल की और उसके क्रिटिकल पाठ Critical Lesson की चेतना को जाग्रत करना है। यदि आप किसी कंटेंट को शेयर करते हैं तो पहले ये सोच ले कि उस कंटेंट से समाज व परिवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा। तभी जाकर उसको फॉरवर्ड करें। जिस खबर को आप पढ़ रहे हैं ये जरूर देखें कि उसका सोर्स Source क्या है और वह कितना विश्वसनीय है। क्योंकि अब समाचारों को आलोचनात्मक दृष्टि Critical Point Of View से पढ़ना होगा। सूचना का सच नहीं उसके पीछे के सत्य को समझना होगा और इसके लिए ‘मीडिया साक्षरता’ पर गंभीरता से विचार करना और उसे जानना होगा।