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IRCTC और सरकार में क्यों हुई खींचतान

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IRCTC और सरकार में क्यों हुई खींचतान
01 Nov 2021
9 min read
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आपको जानकर हैरानी होगी कि सरकार के एक फैसले के बाद आईआरसीटीसी (IRCTC) का शेयर 25 प्रतिशत तक नीचे चला गया। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्यों सरकार के फैसले के बाद आईआरसीटीसी और शेयर बाजार में खींचतान मच गई।

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रेल मंत्रालय ने आईआरसीटीसी (IRCTC) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया था, लेकिन यह फैसला कुछ ही घंटों में सरकार को बदलना भी पड़ा। सरकार के लिए गए फैसले के बाद सरकार को काफी नुकसान हुआ। नुकसान के चलते सरकार ने जल्द से जल्द अपने फैसले को वापस लेना ही ठीक समझा। हम बात कर रहे हैं आईआरसीटीसी (IRCTC) के शेयर की जो सरकार के फैसले के बाद बड़ी बुरी तरह से गिर गया। आपको जानकर हैरानी होगी कि सरकार के इस फैसले के बाद आईआरसीटीसी (IRCTC) का शेयर 25 प्रतिशत तक नीचे चला गया। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्यों सरकार के फैसले के बाद आईआरसीटीसी और शेयर बाजार में खींचतान मच गई। 

रेल मंत्रालय ने दिया था यह आदेश

रेल मंत्रालय ने 28 अक्टूबर को आईआरसीटीसी (IRCTC)  को आदेश दिया था कि उन्हें ई-टिकटिंग के माध्यम से होने वाली कमाई में से 50% फीस सरकार को देनी होगी। मसला इस फैसले के बाद ही बदला, जैसे ही यह फैसला आया शेयर बाजार में उथल-पुथल मच गई और आईआरसीटीसी के शेयर बड़ी बुरी तरह गिरने लगे। जब शेयर इतनी बुरी तरह गिरने लगे तो सरकार को सुबह का फैसला रात को ही बदलना पड़ा। वैसा ही हुआ जैसी कहावत है की सुबह का भूला रात को वापस घर लौट आया। सरकार के फैसला बदलने के बाद आईआरसीटीसी (IRCTC) का शेयर फिर सामान्य रूप से ऊपर चढ़ने लगा, जिससे शेयरधारकों को चैन की सांस मिली।

भारत सरकार की हिस्सेदारी वाली है IRCTC

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आईआरसीटीसी (IRCTC) सरकार की हिस्सेदारी वाली कंपनी हैl जिस में सरकार की हिस्सेदारी 67.4 प्रतिशत की है। जिसकी शुरुआत 27 सितंबर 1999 में हुई थी। 

आईआरसीटीसी मुख्य रूप से चार क्षेत्रों में काम करती है जिसमें कैटरिंग, हॉस्पिटैलिटी, इंटरनेट-टिकटिंग, टूरिज्म और रेल मंत्रालय के लिए रेल नीर बनाने का निर्माण शामिल है। 

क्या होता है सुविधा शुल्क?

आईआरसीटीसी (IRCTC) से टिकट बुक करते वक्त आपको सुविधा शुल्क देना पड़ता है। क्योंकि ई-टिकटिंग (E-Ticketing) करते वक्त आपको किसी भी तरह की परेशानी नही होती और आपको घर बैठे आपकी टिकट मिल जाती है। जिसके चलते यह सुविधा शुल्क लिया जाता है। यह टिकट कैंसिल करने पर फीस वापस भी नहीं की जाती। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस ई-टिकटिंग के माध्यम से आईआरसीटीसी (IRCTC) की काफी कमाई होती है। जानकारी के लिए बता दें कि आईआरसीटीसी (IRCTC) ने पिछले वित्त वर्ष में ई-टिकटिंग के सुविधा शुल्क की मदद से 300 करोड़ रुपए की आमदनी की थी।

किस वजह से उलझा था मामला

इस तरह के सुविधा शुल्क पर सरकार की से पहले नजर नहीं थी। साल 2014 तक सरकार को इस बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन 2014 के बाद सरकार ने 20% शुल्क आईआरसीटीसी (IRCTC) से लेना शुरू कर दिया। जिसे साल 2015 में 50% कर दिया गया, लेकिन साल 2016 में फिर से फैसला किया गया कि यह शुल्क अब सरकार नहीं लेगी। साल 2019 में आईआरसीटीसी (IRCTC) शेयर बाजार में आ गई और एक बार फिर सरकार ने फीस लेना शुरू कर दिया, लेकिन जब सरकार ने 50 फ़ीसदी फीस मांगना शुरू की तो शेयर बाजार में हलचल मच गई और पूरा मामला गड़बड़ा गया। 

विशेषज्ञों की राय में भी यह फैसला गलत था। जिसके पीछे कारण यह था कि आईआरसीटीसी (IRCTC) को सबसे अच्छा मुनाफा सुविधा शुल्क वसूल करके ही होता है। सरकार द्वारा जल्द से जल्द इस फैसले को पलटे जाने के पीछे शेयर बाजार का खेल सबसे अहम रहा। अब देखना यह है कि आगे सरकार और आईआरसीटीसी (IRCTC) के बीच चल रही यह खींचतान क्या नया मोड़ लेती है।