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आज का पुनर्चक्रण, एक बेहतर कल का साथ

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आज का पुनर्चक्रण, एक बेहतर कल का साथ
07 Oct 2021
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पुनर्चक्रण समय की मांग है क्योंकि आज ‌प्रदूषण चरम सीमा पर है और इसे जल्द से जल्द नियंत्रित करना बहुत जरूरी है। पुनर्चक्रण प्रदूषण को कम करने के तरीकों में से एक है, इसलिए लोगों और उद्योगों के बीच उचित जागरूकता पैदा करके इसे हर देश में लागू किया जाना चाहिए। पर्यावरण को बचाने के लिए मनुष्यों द्वारा रीसाइक्लिंग एक छोटा कदम है, लेकिन यह छोटा सा कदम लंबे समय के लिए कारगर हो सकता है।   

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वर्तमान समय में प्रदूषण का स्तर काफी तेजी से बढ़ता रहा है, जिसका मुख्य कारण कई गैर बायोडिग्रेडेबल पदार्थों का निष्कासन है। प्लास्टिक, धातु और अन्य हानिकारक पदार्थ हैं जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार हैं। इसी‌‌ कारण आज दुनिया भर में रीसायकल और रीयूज़ की अवधारणा लोकप्रिय हो गई है, जिसके अंतर्गत पुरानी चीजों को पिघलाकर फिर से नई वस्तुओं में बदला जाता है और उसे बार-बार इस्तेमाल में लाया जाता है। इससे पर्यावरण का कम नुकसान होता है और ऊर्जा की बचत भी होती है। पदार्थों का रीयूज़ करने से यह संसाधनों को सीमित करता है। अतः पर्यावरण को क्षति से बचाने के लिए यह प्रक्रिया एक सकारात्मक कदम हो सकती है।

रीयूज़-रीसायकल, पर्यावरण के अनुकूल

आज ऐसा समय आ गया है कि पर्यावरण अपने बुरे दौर से गुजर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदूषण में वृद्धि भी हो रही है, जिससे मानव जीवन के लिए खतरनाक बीमारियों और वातावरण में उपस्थित वनस्पतियों और जीवों को नुकसान पहुंचता है। हर साल विश्व भर‌ में ‌लाखों टन कचरा पैदा होता है। यह वही कचरा होता है जो हम अपने घरों और समुदायों में पैदा करते हैं। वर्तमान समय में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। प्लास्टिक और अन्य प्रकार के गैर-अपघटनीय पदार्थों के उपयोग ने इसे‌ बढ़ावा दिया है। इससे मुकाबला करने का तरीका, ऐसी वस्तुओं को कम से कम उपयोग करना, उनका पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग करना है। इसलिए रीयूज़-रीसायकल की अवधारणा दुनिया भर में लोकप्रिय हो गई है। पुनः उपयोग का अर्थ है किसी वस्तु का एक से अधिक बार उपयोग करना। 

पुनर्चक्रण प्रक्रिया एक तरीका है जिसमें कुछ नया बनाने के लिए अपशिष्ट सामग्री का संग्रह किया जाता है और उसे तोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया में गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्री को पिघलाकर कुछ उपयोगी बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के प्रभाव लोगों को ज्ञात होने के बाद रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

रीसाइक्लिंग ‌और‌ रीयूज़

विभिन्न सामग्रियां जैसे कागज, प्लास्टिक, कांच, धातु इत्यादि रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया से गुजरती हैं। इन‌‌ सामग्रियों को तोड़कर‌ और ‌पिघलाकर‌‌,‌ रीसाइक्लिंग ‌की‌ उचित प्रक्रियाओं से ‌नए उत्पादों ‌के‌ रूप में तैयार किया जाता है। इन्हीं रीसाइकल ‌की‌ हुई पुरानी वस्तुओं को वापस से कार्य में लेना उन‌ पदार्थों का‌ रीयूज़ कहलाता है। ऐसी क्रिया जो पहले से ही छोड़े गए सामान या उत्पादों का फिर से उपयोग करने की अनुमति देती है और इस प्रकार उन्हें एक नया उपयोग देती है, जिससे उत्पन्न कचरे की मात्रा कम हो जाती है, रीयूज़ कहलाती है।

रीसाइक्लिंग की आवश्यकता क्यों?

कई कारणों से रीसाइक्लिंग की आवश्यकता होती है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि यह हमारी पृथ्वी को बचाने में हमारी मदद करता है। साथ ही, रीसाइक्लिंग से बहुत सारी ऊर्जा की बचत होती है क्योंकि कई चीजें जिन्हें हम रीसायकल करते हैं उन्हें आसानी से कच्ची‌ सामग्री में परिवर्तित किया जा सकता है। इसके अलावा, यह बहुत सारे संसाधनों को भी बचाता है।‌ रीसाइक्लिंग पर्यावरण प्रदूषणक का बोझ कम करता है। जैसे-जैसे हम ऊर्जा की बचत करते हैं, ग्रीनहाउस गैसों और ऑक्साइडों की संख्या कम मात्रा में उत्पन्न होती है। क्योंकि ज्यादातर जहरीली गैसें फैक्ट्रियों से पैदा होती हैं। रीसाइक्लिंग कचरे की मात्रा को कम करता है, जिसे सड़ने में वर्षों लगते हैं। इन पुर्नवीनीकरण सामग्री को बेचा जा सकता है। लोग ‌इन पुर्नवीनीकरण सामग्री का उपयोग कई नए उत्पादों के निर्माण के लिए करते हैं। अतः हम कह सकते हैं ‌कि रीसाइक्लिंग पैसे बचाता है। जिन विभिन्न सामग्रियों का हम पुनर्चक्रण करते हैं, उन्हें एक ऐसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जो उन्हें परिष्कृत और शुद्ध करती है। 

रीयूज़‌ क्यों आवश्यक?

पदार्थों का पुन: उपयोग, अन्य अपशिष्ट प्रबंधन विधियों के मुकाबले एक उत्कृष्ट पर्यावरण का विकल्प प्रदान करता है, क्योंकि यह वायु, जल और भूमि प्रदूषण को कम करता है। लकड़ी, पेट्रोलियम, फाइबर और अन्य सामग्री जैसे नए प्राकृतिक संसाधनों की आवश्यकता को सीमित करता है।‌ पुन: उपयोग के भारी पर्यावरणीय लाभ हैं। यह ऊर्जा बचाने, प्रदूषण को सीमित करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है। हालांकि विकासशील दुनिया में इसे उच्च स्तर पर अपनाया जा रहा है लेकिन बढ़ती मजदूरी और परिणामस्वरूप डिस्पोजेबल उत्पादों की सुविधा के लिए उपभोक्ता ने कम मूल्य की वस्तुओं का पुन: उपयोग करना ‌चालू‌ कर‌ दिया जिससे कई पुन: उपयोग योजनाओं का‌ विध्वंश हुआ।

उदाहरण

वर्तमान पर्यावरण जागरूकता धीरे-धीरे व्यक्ति के दृष्टिकोण और विनियमों को बदल रही है। जैसे कि नए पैकेजिंग नियम, धीरे-धीरे स्थिति को उलटने लगे हैं। पुन: बोतलों में दूध की डोरस्टेप डिलीवरी पारंपरिक पुन: उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। अन्य उदाहरणों में टायरों की रीट्रेडिंग और कार्डबोर्ड कार्टन के स्थान पर प्लास्टिक डिलीवरी ट्रे का उपयोग शामिल है। प्लास्टिक बैग छोड़कर और इसके बजाय पर्यावरण के अनुकूल बैग चुनना पर्यावरण के लिए लाभदायक होगा। पेपर को फिर से बनाने के बहुत सारे शानदार तरीके हैं। थोड़ी रचनात्मकता दिखा कर पत्रिकाओं और समाचार पत्रों से अद्भुत और उपयोगी बुने हुए टोकरियां और ट्रे बनाए जा‌ सकते हैं। अखबारों, किराने की थैलियों और पत्रिकाओं को रैपिंग पेपर के रूप में रीसायकल किया जा‌ सकता है। इस तरह कई अनोखे तरीके अपनाकर पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सकता है। कचरे को फेंकने से पहले हमें यह देखना चाहिए कि इसमें कोई रिसायकल योग्य उत्पाद हैं या नहीं।

पुनर्चक्रण समय की मांग है क्योंकि आज ‌प्रदूषण चरम सीमा पर है और इसे जल्द से जल्द नियंत्रित करना बहुत जरूरी है। पुनर्चक्रण प्रदूषण को कम करने के तरीकों में से एक है, इसलिए लोगों और उद्योगों के बीच उचित जागरूकता पैदा करके इसे हर देश में लागू किया जाना चाहिए। कम अपशिष्ट का परिणाम पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक सिद्ध हो सकता है। संक्षिप्त में कहें तो पर्यावरण को बचाने के लिए मनुष्यों द्वारा रीसाइक्लिंग एक छोटा कदम है, लेकिन यह छोटा सा कदम लंबे समय के लिए कारगर हो सकता है।