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धागों से जुड़ता दिलों का रिश्ता 

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धागों से जुड़ता दिलों का रिश्ता 
21 Aug 2021
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वैसे तो दुनिया का हर रिश्ता खास होता है परन्तु कुछ रिश्तो की अहमियत कुछ ज्यादा ही खास होती है। भाई-बहन का रिश्ता भी उसी भाव से आता है। इस रिश्ते की भावना की ना ही कोई तुलना की जा सकती है और ना ही इसे कभी ख़त्म किया जा सकता है। रक्षा-बंधन का त्यौहार उसी भावना का एक दिन है जो वर्षों से उमंग की स्फूर्ति लिए चला आ रहा है और वर्षों तक इसी उत्साह से चलता रहेगा और लोगों को खुशियां बांटता रहेगा।   

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प्यार एक ऐसी भावना है जो एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से कोई जरूरत ना हो तब भी जोड़े रखती है। यह ऐसा एहसास है जो मनुष्य को दूसरे मनुष्य के लिए बिना किसी अपेक्षा के कुछ करने के लिए उत्साहित करता है। दुनिया के किसी भी रिश्ते का तभी महत्व होता है जब उसमें प्यार और सम्मान की भावना हो। माँ-बच्चे का रिश्ता, पिता-बच्चे का रिश्ता यह दोनो ऐसे संबंध हैं जिसकी तुलना दुनिया के किसी भी रिश्ते से नहीं की जा सकती है। दुनिया ऐसी कई मिसालों से भरी पड़ी है, जो इन रिश्तों की सच्चाई को बयां करती हैं। परन्तु इसके आलावा एक रिश्ता ऐसा भी है जो पूरी दुनिया में सबसे अनोखा है। यह वो बंधन है जिसका आधार ही एक-दूसरे की रक्षा करने और सामने वाले के अच्छे जीवन की सलामती की दुआ करने पर ही टिका है। जिस बंधन की पवित्रता के लोग कसमें खाते हैं। दुनिया में भाई-बहन का रिश्ता सबसे अनोखा और सबसे पवित्र माना गया है। यह एक ऐसा रिश्ता है जो भाई-बहन के साथ एक सबसे अच्छे दोस्त की भूमिका भी निभाता है। इस रिश्ते की महत्ता को हम इससे ही समझ सकते हैं कि हम इसको एक त्यौहार के रूप में मनाते हैं। 

सुरक्षा देने का वचन है रक्षा बंधन 

भाई-बहन का रिश्ता दुनिया का वो रिश्ता है जिसके लिए कभी किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं पड़ती। बस इतना ही कहना काफी होता है कि "भाई है मेरा" या "बहन है मेरी" इतने ही शब्दों से पूरी बात खत्म हो जाती है। कहने को भाई-बहन का रिश्ता यूं तो खून का रिश्ता कहा जाता है। परन्तु इस रिश्ते की पवित्रता के लिए खून का रिश्ता होना आवश्यक नहीं है। मन की सच्ची भावना से भी लोग भाई-बहन के रिश्ते को पूरी ज़िंदगी निभाते हैं। भाई-बहन के रिश्ते को हम रक्षा-बंधन के रूप में मानते हैं। रक्षा-बंधन पूरे देश में एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। रक्षा बंधन यह शब्द ही अपनी महत्ता और अपने अर्थ को प्रकट करता है। "रक्षा बंधन - रक्षा के लिया बांधा गया बंधन" इस त्यौहार में बहन एक धागे को भाई की कलाई पर बाँध कर उसके लम्बे उम्र, उसके अच्छे स्वास्थ्य और उसके लिए हमेशा खुशियों की कामना करती है, बदले में भाई अपनी बहन को ज़िंदगी भर के लिए उसकी सुरक्षा करने का वचन देता है। 

केवल भाई-बहन तक नहीं सीमित यह बंधन 

रक्षा बंधन का त्यौहार केवल भाई-बहन ही नहीं मनाते हैं। इस त्यौहार को ननद-भाभी, बुआ-भतीजा जैसे रिश्ते भी मनाते हैं। इस त्योहार का मनाने का मुख्य उद्देश्य उस भावना के लिए जश्न मनाना है, जिसमें लोग एक-दूसरे की परवाह करते हैं। रक्षा बंधन एक ऐसा त्यौहार है जिसे धर्म की सीमा भी नहीं बांध पाती है। हर धर्म रक्षा-बंधन को उतने ही हर्ष उल्लास से मनाने की इजाज़त देता है जितना कि अपने बाकी के त्योहारों को। देश भर में रक्षा बंधन होली, दिवाली, ईद की तरह ही धूम-धाम से मनाया जाता है। यह इकलौता ऐसा त्यौहार है जो किसी रिश्ते के लिए मनाया जाता है। 

पूर्णिमा के चाँद की तरह चमकता यह बंधन 

पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह त्यौहार पूर्णिमा के उजाले की तरह ही प्रत्येक के जीवन में चहकती रोशनी की उमंग लेकर आता है, जो प्रत्येक व्यक्ति को अपना प्रेम प्रकट करने का अवसर देता है। भाई-बहन का रिश्ता खास इसलिए भी होता है, क्यूंकि हम सामने वाले से अपने मन की हर बात साझा कर लेते हैं। भाई-बहन के रिश्ते में हम उनसे लड़ते भी हैं, उन पर चिल्लाते भी हैं, परन्तु उन्हें अगर तकलीफ हो तो हम परेशान भी हो जाते हैं। भाई-बहन केवल बाहरी दुनिया में ही रक्षा नहीं करते है बल्कि मानसिक तौर पर भी स्थिरता देते हैं। भाई-बहन का बंधन ही ऐसा रिश्ता है जिसमें हम हर बात साझा कर लेते हैं चाहे वो बात घर की हो या बाहर की। कभी-कभी हम बातें साझा नहीं कर पाने के कारण मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए सही नहीं होता। ऐसे में भाई-बहन का रिश्ता हमें उस परेशानी से मुक्ति देता है। और ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ भाई-बहन के रिश्तों में ही होता है यह किसी भी रिश्ते में हो सकता है। यही कारण है कि हम रक्षा बंधन के त्यौहार के लिए इतने उत्साहित रहते हैं ताकि हम अपने इस खास बंधन को ख़ुशी से मना पाएं। 

दूर रहने वालों को भी पास लाता 

रक्षा बंधन का त्यौहार इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्यूंकि यह इकलौता ऐसा त्योहार है जहाँ पर हम सब एक साथ इकट्ठा होते हैं, बाकि त्योहारों में सबकी कोशिश रहती है कि वो जश्न अपने घर मनाये। इस त्यौहार के माध्यम से साल भर में एक बार पूरा परिवार, सारे अपने एक साथ होते हैं, और इस पर्व का जश्न मनाते हैं। इस त्यौहार के कारण ही दूर रहने वाले लोग भी अपने घर आते हैं, लोग अपनों के घर जाते हैं ताकि वो अपनी बहन से और उन लोगों से कलाई पर राखी बंधवा पाएं, जिनकी वो रक्षा करना चाहते हैं या जिनकी वो फ़िक्र करते हैं। हर साल मनाया जाने वाला रक्ष बंधन का त्यौहार रेशम के धागे से अनगिनत एहसासों और उम्मीदों को बांधता है।