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भारत में रंगोली के विभिन्न रूप

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भारत में रंगोली के विभिन्न रूप
28 Oct 2021
5 min read

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घरों के बाहर डिज़ाइन की गई रंगोली की एक पहचान होती है। वह किसी ना किसी संस्कृति और परंपरा को अवश्य दर्शाती है, जिसका हम में से कई लोगों को पता नहीं होता। रंगोली की इन पारंपरिक कलाओं को ट्रेंडिंग रंगों और बदलते स्वाद के साथ जोड़कर, उन्हें और आकर्षक रूप दिया जा सकता है। इसके अलावा अपने घरों में कुछ पारंपरिक कला रूपों से सजाने के लिए यह रंगोली अच्छे विकल्प हो सकते हैं।

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भारत में प्रत्येक त्योहार से कुछ मान्यताएं जुड़ी होती हैं। लोग उन पुरानी परंपराओं को जीवित रखने के लिए अनेक तरह के अनुष्ठानों को अपनाते हैं। जिनमें उत्सव और त्योहारों में रंगोली बनाना उनमें से एक है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरह की रंगोलियां बनाई जाती हैं। प्रत्येक रंगोली की अपनी एक शैली होती है। हर क्षेत्र में इन रंगोलियां को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। राजस्थान और मध्यप्रदेश में मंदाना, तमिलनाडु में कोलम, उत्तर प्रदेश में चौक पुराण, उत्तराखंड में ऐपन, बिहार में अरिपन‌ आदि भारत के विभिन्न हिस्सों की प्रसिद्ध रंगोलियां हैं। इन विभिन्न रंगोलियों को बनाने की विधि भिन्न होती है और यह एक निश्चित नियम के अनुसार बनाई जाती है। यह पारंपरिक कला रूप घरों को आकर्षक बनाती हैं।

घरों में रंगोली की परंपरा

भारत "अनेकता में एकता" के लिए जाना जाता है। यहां विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की संस्कृति और परंपरा का पालन किया जाता है और यही भारत को अद्वितीय देश बनाता है। भारत में शुभ संकेतों के साधन के रूप में अनेक प्रकार की परंपराओं का पालन किया जाता है। घर में सुख-समृद्धि और शुभता लाने के लिए कई चीज़ों को घर लाया जाता है और विभिन्न अनुष्ठानों का पालन किया जाता है, जैसे घर में तुलसी का पौधा लगाना, दिवाली पर दिए जलाना आदि। उन परंपराओं में से एक है रंगोली बनाना। रंगोली एक लोक कला है जो घर के दरवाजे के सामने फर्श पर, आंगन में, मंदिर के सामने बनाई जाती हैं। विभिन्न अवसरों व समारोह जैसे दिवाली, विवाह, पूजा इत्यादि पर रंगोली बनाई जाती है। रंगोली बनाना घर और परिवार के लिए शुभ और भाग्यशाली माना जाता है। यह देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग पैटर्न में बनाई जाती हैं। प्रत्येक त्योहार और अवसरों पर यह एक अलग महत्व रखते हैं। देश ‌के हर‌ कोने में रंगोली अलग-अलग शैलियों और तकनीकों के साथ ‌बनाई‌ जाती हैं। देश ‌के विभिन्न हिस्सों में बनाई जाने वाली रंगोली के कई प्रकार होते हैं।

1. मंदाना - राजस्थान और मध्य प्रदेश 

मंदाना‌ एक आदिवासी कला के रूप में राजस्थान और मध्य प्रदेश ‌के आदिवासी क्षेत्रों में बहुत ही प्रसिद्ध मानी जाती है। फर्श और दीवारों पर बनाए जाने वाले चित्रों को वहां के समुदायों द्वारा रंगोली के रूप में अपनाया जाता है। यह आदिवासी कला बहुत ही प्राचीन है। इस कला के आधार को मिट्टी, गाय के गोबर, पानी, लाल रंग और गेरू की सहायता से बनाया जाता है। आधार पूरा करने के बाद फर्श पर चॉक पाउडर के साथ डिजाइन बनाया जाता है।

दिवाली पर‌ रंगोली को एक पारंपरिक रूप देने और कुछ अलग संस्कृति को जानने के लिए मंदाना एक अच्छा रास्ता होता है।

2. चौक पुराण - उत्तर प्रदेश

चौक पुराण उत्तर प्रदेश की प्राचीन पारंपरिक कला है। इसे सममित (symmetrical) रंगोली के नाम से भी जाना जाता है। बिंदीदार आधार के साथ बनाई जाने वाली यह रंगोली बहुत ही खूबसूरत दिखाई पड़ती है। इसे बनाने की विधि सरल के साथ-साथ जटिल भी होती‌ है।‌ सफेद आधार और समान दूरी पर डिजाइन बनाकर, अंत में रिक्त जगहों को सुंदर रंगों से इसे आकर्षित रूप दिया जाता है। 

3. अल्पना - बंगाल

पश्चिम बंगाल की एक पवित्र कला अल्पना के नाम से जानी जाती है। इस कला को चावल के पाउडर से बने तरल पेस्ट के‌ साथ गहरे रंग की पृष्ठभूमि पर बनाया जाता है। यह मुख्य रूप से सफेद रंग से ही बनाई जाती है, लेकिन कभी-कभी कुछ हरे और लाल रंगों को भी इसमें जोड़ा जाता है। आजकल इस कला‌ ने एक नया रूप ले लिया है, जिसमें रंगोली को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए गोंद के साथ कुछ कपड़े के रंगों का उपयोग किया जाता है।  अपने घरों को दिवाली में एक नये रूप से सजाने के लिए अल्पना एक आदर्श विकल्प है।

4. मुरुजा/ झोती - ओडिशा

मुरुजा ओडिशा की एक पारंपरिक कला है, जो मुख्य रूप से घर‌ के पवित्र तुलसी के पौधे के आसपास बनाई जाती है। इस कला के पैटर्न ज्यादातर मोर, भगवान कृष्ण और भगवान जगन्नाथ को समर्पित होते हैं। इस कला को आकर्षित बनाने का कोई विशेष तरीका नहीं होता। लेकिन रंगों का चुनाव करना इसमें एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

5. कोलम - तमिलनाडु

कोलम तमिलनाडु की पारंपरिक कला रूप है, जो इसके रूप में रचनात्मकता को प्रदर्शित करता है। कोलम में आमतौर पर फूलों की आकृतियों और सफेद रंग का इस्तेमाल किया जाता है। कोलम पूरी तरह से फ्रीस्टाइल कला को दर्शाता है, क्योंकि इसे बनाने में कोई भी नियम नहीं होते। ‌ इसलिए यह फर्श पर अपनी कला और प्रतिभा दिखाने की अनुमति देता है।

घरों के बाहर डिज़ाइन की गई रंगोली की एक पहचान होती है। वह किसी ना किसी संस्कृति और परंपरा को अवश्य दर्शाती है, जिसका हम में से कई लोगों को पता नहीं होता। रंगोली की इन पारंपरिक कलाओं को ट्रेंडिंग रंगों और बदलते स्वाद के साथ जोड़कर, उन्हें और आकर्षक रूप दिया जा सकता है। इसके अलावा अपने घरों में कुछ पारंपरिक कला रूपों से सजाने के लिए यह रंगोली अच्छे विकल्प हो सकते हैं।