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Sustainability Community Welfare

ऊर्जा की बचत सुरक्षित भविष्य का निर्माण

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ऊर्जा की बचत सुरक्षित भविष्य का निर्माण

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Post Highlights

हमारे पास ऊर्जा के इतने प्राकृतिक स्रोत हैं कि हम हर एक परिपेक्ष में उसका उपयोग भी करते हैं तथा दुरूपयोग भी। बिजली-पानी, प्राकृतिक गैस से मिलने वाली ऊर्जा, सूरज से मिलने वाली ऊर्जा इत्यादि हमारी ज़िंदगी को आसान कर रहे हैं, परन्तु हम इसकी क़दर नहीं कर पा रहे। कहीं ऐसा ना हो कि भविष्य में हम अपनों के लिए केवल सिर्फ एक संघर्ष भरा जीवन ही छोड़ के जाएं।

हम मानव इतने भाग्यशाली हैं कि हमें धरती से हमारी ज़रूरतों को पूरा करने का पर्याप्त साधन मिल जाता है। हम अपनी आवश्यकता को प्रकृति के स्रोतों से बड़ी आसानी से पूरा कर लेते हैं। उन स्रोतों को हम अनेक रंग-रूपों में बदलकर भी उसका उपयोग करते हैं। परन्तु हम यह भूल जाते हैं कि धरती का भी अपना एक चक्रण होता है, जिसे हमें नियंत्रित करने की कोशिश नहीं करनी  चाहिए। धरती के भीतर ऊर्जा के असीमित स्रोत हैं, परन्तु वह तब तक ही असीमित है जब तक हम मनुष्य उसका दुरूपयोग नहीं करते। दुनिया का रूप पहले से बहुत बदला है। लोगों की ज़रूरतें बदली हैं या यूं कहें तो ज़रूरतों में इज़ाफ़ा होता गया। जैसे-जैसे हम नये युग में प्रवेश करते गए, वैसे-वैसे लोगों की आवश्यकताओं का भी आकार बढ़ता गया। हम अपनी क्षमताओं को असीमित करने के लिए पृथ्वी के संसाधनों को सीमित करने लगे। हमारे पास ऊर्जा के इतने प्राकृतिक स्रोत हैं कि हम हर एक परिपेक्ष में उसका उपयोग भी करते हैं तथा दुरूपयोग भी। बिजली-पानी electric - water, प्राकृतिक गैस से मिलने वाली ऊर्जा, सूरज से मिलने वाली ऊर्जा solar energy इत्यादि हमारी ज़िंदगी को आसान कर रहे हैं, परन्तु हम इसकी क़दर नहीं कर पा रहे। कहीं ऐसा ना हो कि आने वाले भविष्य में हम अपनों के लिए केवल एक संघर्ष ही छोड़ के जाएं।

जिन प्राकृतिक स्रोतों का हम ईंधन के रूप में प्रयोग करके ऊर्जा का उत्पादन करते हैं, वह सैकड़ों तथा हजारों वर्षों में बनकर तैयार होते हैं। ऐसे में जितनी तीव्र गति से हम ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं, वैसे इसे ख़त्म होने में वक़्त नहीं लगेगा। हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए ऊर्जा के यह स्रोत बचेंगे ही नहीं।

प्राकृतिक गैस natural gas का उपयोग रसोईघर में ईंधन के लिए किया जाता है, इसके अलावा वाहनों में भी इन्हीं प्राकृतिक गैसों का ही उपयोग किया जाता है। रेलवे में, इंडस्ट्रियल क्षेत्रों industrial sectors में बड़े पैमाने पर कोयले का उपयोग किया जाता है। ये सब ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं, जिन्हें बनने में कई वर्ष लग जाते हैं।

हम सब इस बात से अंजान नहीं हैं। बावजूद इसके हम इसका इस प्रकार जम कर  दोहन कर रहे हैं कि भविष्य में यह ऊर्जा पूर्ण रूप से ख़त्म हो जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं । बिजली उत्पादित करने में भी कोयले का उपयोग किया जाता है, पानी को घर-घर पहुंचाने में भी ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। परन्तु इन सब तथ्यों को दरकिनार कर हम बल्ब जलाकर, पंखे चलाकर, स्विचेज़ ऑफ नहीं करके तथा और अन्य तरीकों से भी बिजली को बर्बाद कर रहे हैं। हमें थोड़ी दूरी पर भी जाना होता है तो हम बाईक या फिर कार से जाना अधिक मुनासिब समझते हैं क्योंकि हम अपने शरीर को अधिक कष्ट नहीं देना चाहते हैं। पइस तरह हम  ऊर्जा का अनावश्यक खर्च करते हैं। जो हमें भविष्य की सुरक्षा के लिए संचित करनी चाहिए।

ऐसे ही औद्योगिक क्षेत्रों में भी ऊर्जा का क्षरण energy loss तीव्रता से हो रहा है। जो भविष्य के संरक्षण को खतरे में डाल रहा है। हम अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए अनेक प्रयास करते हैं तो क्या यह संरक्षण आने वाली पीढ़ियों future generations के लिए आवश्यक नहीं। आखिरकार वे भी तो उत्तम जीवन के हकदार हैं।

हम मानव इतने भाग्यशाली हैं कि हमें धरती से हमारी ज़रूरतों को पूरा करने का पर्याप्त साधन मिल जाता है। हम अपनी आवश्यकता को प्रकृति के स्रोतों से बड़ी आसानी से पूरा कर लेते हैं। उन स्रोतों को हम अनेक रंग-रूपों में बदलकर भी उसका उपयोग करते हैं। परन्तु हम यह भूल जाते हैं कि धरती का भी अपना एक चक्रण होता है, जिसे हमें नियंत्रित करने की कोशिश नहीं करनी  चाहिए। धरती के भीतर ऊर्जा के असीमित स्रोत हैं, परन्तु वह तब तक ही असीमित है जब तक हम मनुष्य उसका दुरूपयोग नहीं करते। दुनिया का रूप पहले से बहुत बदला है। लोगों की ज़रूरतें बदली हैं या यूं कहें तो ज़रूरतों में इज़ाफ़ा होता गया। जैसे-जैसे हम नये युग में प्रवेश करते गए, वैसे-वैसे लोगों की आवश्यकताओं का भी आकार बढ़ता गया। हम अपनी क्षमताओं को असीमित करने के लिए पृथ्वी के संसाधनों को सीमित करने लगे। हमारे पास ऊर्जा के इतने प्राकृतिक स्रोत हैं कि हम हर एक परिपेक्ष में उसका उपयोग भी करते हैं तथा दुरूपयोग भी। बिजली-पानी electric - water, प्राकृतिक गैस से मिलने वाली ऊर्जा, सूरज से मिलने वाली ऊर्जा solar energy इत्यादि हमारी ज़िंदगी को आसान कर रहे हैं, परन्तु हम इसकी क़दर नहीं कर पा रहे। कहीं ऐसा ना हो कि आने वाले भविष्य में हम अपनों के लिए केवल एक संघर्ष ही छोड़ के जाएं।

जिन प्राकृतिक स्रोतों का हम ईंधन के रूप में प्रयोग करके ऊर्जा का उत्पादन करते हैं, वह सैकड़ों तथा हजारों वर्षों में बनकर तैयार होते हैं। ऐसे में जितनी तीव्र गति से हम ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं, वैसे इसे ख़त्म होने में वक़्त नहीं लगेगा। हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए ऊर्जा के यह स्रोत बचेंगे ही नहीं।

प्राकृतिक गैस natural gas का उपयोग रसोईघर में ईंधन के लिए किया जाता है, इसके अलावा वाहनों में भी इन्हीं प्राकृतिक गैसों का ही उपयोग किया जाता है। रेलवे में, इंडस्ट्रियल क्षेत्रों industrial sectors में बड़े पैमाने पर कोयले का उपयोग किया जाता है। ये सब ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं, जिन्हें बनने में कई वर्ष लग जाते हैं।

हम सब इस बात से अंजान नहीं हैं। बावजूद इसके हम इसका इस प्रकार जम कर  दोहन कर रहे हैं कि भविष्य में यह ऊर्जा पूर्ण रूप से ख़त्म हो जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं । बिजली उत्पादित करने में भी कोयले का उपयोग किया जाता है, पानी को घर-घर पहुंचाने में भी ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। परन्तु इन सब तथ्यों को दरकिनार कर हम बल्ब जलाकर, पंखे चलाकर, स्विचेज़ ऑफ नहीं करके तथा और अन्य तरीकों से भी बिजली को बर्बाद कर रहे हैं। हमें थोड़ी दूरी पर भी जाना होता है तो हम बाईक या फिर कार से जाना अधिक मुनासिब समझते हैं क्योंकि हम अपने शरीर को अधिक कष्ट नहीं देना चाहते हैं। पइस तरह हम  ऊर्जा का अनावश्यक खर्च करते हैं। जो हमें भविष्य की सुरक्षा के लिए संचित करनी चाहिए।

ऐसे ही औद्योगिक क्षेत्रों में भी ऊर्जा का क्षरण energy loss तीव्रता से हो रहा है। जो भविष्य के संरक्षण को खतरे में डाल रहा है। हम अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए अनेक प्रयास करते हैं तो क्या यह संरक्षण आने वाली पीढ़ियों future generations के लिए आवश्यक नहीं। आखिरकार वे भी तो उत्तम जीवन के हकदार हैं।




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