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Mother’s Day: शब्दों  से परे है माँ की परिभाषा 

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Mother’s Day: शब्दों  से परे है माँ की परिभाषा 

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Post Highlights

मां एक ऐसा शब्द है जिसमें संसार के सारे सुख व्याप्त है। प्रेम, दया, करुणा की मूर्ती और एक योद्धा होने के साथ एक बच्चे की पूरी दुनिया होती है मां। मां और बच्चे का रिश्ता दुनिया में सबसे पहला, अहम और अनमोल होता है। परेशान होने पर जब मां की गोद में सर रखते हैं तो ऐसा लगता है मानों ममता और प्यार की छांव में सारी उलझने खत्म हो गयी। वैसे तो हर दिन ही माँ का दिन है लेकिन फिर भी हम एक दिन यानि 8 मई को मदर्स डे (Mother’s Day ) मनाते हैं ताकि कुछ अलग तरीके से हर बार अपनी माँ को बता सकें कि वह हमारे लिए कितनी खास है। 

शब्दों  से परे है माँ की परिभाषा। मां एक सुखद अनुभूति और एक शीतल आवरण है जो हमारे दुःख, तकलीफ की तपिश को ढँक देती है। मां का होना, हमें अपने जीवन की हर लड़ाई को लड़ने की शक्ति देता रहता है। माँ शब्द के अर्थ को भी उपमाओं और शब्दों की सीमा में बाँधना संभव नहीं है। मां शब्द की गहराई और विशालता को परिभाषित करना सरल नहीं है क्योंकि इस शब्द में ही संपूर्ण ब्रह्मांड और सृष्टि की उत्पत्ति  का रहस्य समाया है। 

एक व्यक्ति के जीवन में मां उसकी प्रथम गुरु होती है, और कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में मातृ ऋण से मुक्त नहीं हो सकता। हमारी भारतीय संस्कृति (Indian culture) में जननी एवं जन्मभूमि दोनों को ही माँ का स्थान दिया गया है। माँ के पास बैठकर, उससे बातें करके, और कभी-कभी तो उसके मीठे ताने सुनकर भी आनंद ही मिलता है। 

मां हम सभी की जिंदगी में सबसे अहम किरदार होती है। कोई बात कहे बिना ही आसानी से समझ जाती हैं कि मन में क्या है। वैसे तो एक मां के लिए हर दिन बराबर ही होता है, लेकिन मदर्स डे एक ऐसा दिन होता है जो सिर्फ मां के लिए समर्पित है। यह बेहद खास दिन मई महीने के दूसरे हफ्ते के रविवार को मनाया जाता है। आइये जानते कि कब, क्यों और पहली बार मदर्स डे कब सेलिब्रेट किया गया था। 

कब मनाया जाता है मदर्स डे ?

दुनिया भर में मदर्स डे मई महीने के दूसरे रविवार के दिन मनाया जाता है। 2022 में, मदर्स डे 8 मई को मनाया जा रहा है। औपचारिक तौर पर इस दिन को मनाने की शुरुआत 1914 में हुई थी।

सबसे पहले किसने मनाया मदर्स डे?  

मदर्स डे का इतिहास (History of mother’s day) काफी दिलचस्प है, ऐसा मानना जाता है कि आधुनिक युग में मदर्स डे की शुरुआत एक महिला ने की थी। दरअसल, मदर्स डे मनाने की शुरुआत एना जार्विस (Anna Jarvis) नाम की एक अमेरिकी महिला ने की थी। Anna Jarvis अपनी मां को आदर्श मानती थीं और उनसे बहुत प्यार करती थीं। जब एना की मां का  निधन हुआ तो उन्होंने कभी शादी न करने का फैसला किया और अपनी मां के नाम अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने मां को सम्मान देने के लिए मदर्स डे (Mother’s Day ) मनाने की शुरुआत की। उन दिनों यूरोप में इस खास दिन को मदरिंग संडे (Mothering Sunday) कहा जाता था।

कई सालों तक लोगों ने एना की इस पहल को फॉलो किया। कहा जाता है कि मदर्स डे (Mother’s Day) मनाने का पहला विचार लगभग साल 1908 के आसपास आया था। लेकिन कई सालों तक उतार-चढ़ाव के बाद लगभग 1914 के आसपास Mother’s Day को मनाने की घोषणा हुई। तब से मई महीने के दूसरे हफ्ते के रविवार को मनाया जाता रहा है। इस साल यानि 2022 में मदर्स डे 8 मई दिन रविवार को है। कहा जाता है कि आधुनिक दुनिया में मदर्स डे पहली बार अमेरिका (America) में मनाया गया था।

मई में रविवार को ही क्यों मनाते हैं मदर्स डे?  

एना के इस कदम के बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन (Woodrow Wilson) ने औपचारिक तौर पर 9 मई 1914 में मदर्स डे (Mother’s Day) मनाने की शुरुआत की। इस खास दिन के लिए अमेरिकी संसद में कानून (Law) पास किया गया, जिसमें मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाने का फैसला लिया गया। इसके बाद Mother’s Day को मई के दूसरे रविवार के दिन मनाने की स्वीकृति अमेरिका समेत यूरोप, भारत (India) और कई अन्य देशों ने भी दी।

क्या है मदर्स डे मनाने की वजह?  

अपनी मां को खास महसूस कराने, उनके मातृत्व और प्यार को सम्मानित करने के उद्देश्य से Mother’s Day मनाया जाता हैं। पिछले कुछ दशकों में मां को समर्पित इस दिन को बहुत खास तरीके से मनाया जाता है। इस दिन लोग अपनी मां के साथ समय बिताते हैं। उनके लिए गिफ्ट या कुछ सरप्राइज (Gift or Surprise) प्लान करते हैं। पार्टी का आयोजन करते हैं और मां को बधाई देते हैं उनके प्रति अपने प्यार और अपने लगाव को जाहिर करते हैं। 

कैसे मनाएं मदर्स डे (How to celebrate Mother's Day)?

आप सभी को मालूम होगा कि आपकी मां को क्या पसंद है, उसी के अनुसार ही उन्हें खुश करने की कोशिश कीजिये। हालांकि यहाँ हम आपको कुछ ऐसी चीज़ें भी बताएंगे जो आप अपनी मां के लिए कर सकते हैं। 

  • मां के साथ मूवी और डिनर का प्लान बना सकते हैं। 

  • अपने हाथों से कुछ अच्छा बनाकर मां को खिला सकते हैं। 

  • मां के साथ बाहर कहीं घूमने जा सकते हैं। 

  • मां के लिए कार्ड बना सकते हैं या कोई गिफ्ट ला सकते हैं। 

  • मां के लिए गाना गा सकते हैं।

  • घर के कामों में मां की मदद करवा सकते हैं। 

  • मां के साथ बैठकर आप बचपन की पुरानी यादें तजा कर सकते हैं। 

आप अपनी मां के लिए ये सारी चीज़ें केवल एक दिन नहीं बल्कि हर दिन कर सकते हैं, इससे अपना रिश्ता आपकी मां के साथ और गहरा और खास बनेगा। हालांकि, मां के साथ तो बच्चों का रिश्ता खास ही होता है पर कभी-कभी समय थोड़ी दूरियां ले आता है, जिन्हें भरना भी जरूरी होता है। 

निदा फ़ाज़ली द्वारा लिखी गयी मां के लिए कुछ पंक्तियाँ:

बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ , 

याद आता है चौका-बासन, 

चिमटा फुँकनी जैसी माँ।  

बाँस की खुर्री खाट के ऊपर हर आहट पर कान धरे, 

आधी सोई आधी जागी थकी दुपहरी जैसी माँ।  

चिड़ियों के चहकार में गूँजे राधा-मोहन अली-अली, 

मुर्गे की आवाज़ से खुलती, 

घर की कुंड़ी जैसी माँ। 

बीवी, बेटी, बहन, पड़ोसन थोड़ी-थोड़ी सी सब में, 

दिन भर इक रस्सी के ऊपर चलती नटनी जैसी मां। 

बाँट के अपना चेहरा, माथा, आँखें जाने कहाँ गई, 

फटे पुराने इक अलबम में चंचल लड़की जैसी माँ।

-निदा फ़ाज़ली

Think with Niche पर आपके लिए और रोचक विषयों पर लेख उपलब्ध हैं एक अन्य लेख को पढ़ने के लिए कृपया नीचे  दिए लिंक पर क्लिक करे-

बुजुर्गों की खुशियाँ और सम्मान वापस दिलाती ये संस्थाएं 

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शब्दों  से परे है माँ की परिभाषा। मां एक सुखद अनुभूति और एक शीतल आवरण है जो हमारे दुःख, तकलीफ की तपिश को ढँक देती है। मां का होना, हमें अपने जीवन की हर लड़ाई को लड़ने की शक्ति देता रहता है। माँ शब्द के अर्थ को भी उपमाओं और शब्दों की सीमा में बाँधना संभव नहीं है। मां शब्द की गहराई और विशालता को परिभाषित करना सरल नहीं है क्योंकि इस शब्द में ही संपूर्ण ब्रह्मांड और सृष्टि की उत्पत्ति  का रहस्य समाया है। 

एक व्यक्ति के जीवन में मां उसकी प्रथम गुरु होती है, और कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में मातृ ऋण से मुक्त नहीं हो सकता। हमारी भारतीय संस्कृति (Indian culture) में जननी एवं जन्मभूमि दोनों को ही माँ का स्थान दिया गया है। माँ के पास बैठकर, उससे बातें करके, और कभी-कभी तो उसके मीठे ताने सुनकर भी आनंद ही मिलता है। 

मां हम सभी की जिंदगी में सबसे अहम किरदार होती है। कोई बात कहे बिना ही आसानी से समझ जाती हैं कि मन में क्या है। वैसे तो एक मां के लिए हर दिन बराबर ही होता है, लेकिन मदर्स डे एक ऐसा दिन होता है जो सिर्फ मां के लिए समर्पित है। यह बेहद खास दिन मई महीने के दूसरे हफ्ते के रविवार को मनाया जाता है। आइये जानते कि कब, क्यों और पहली बार मदर्स डे कब सेलिब्रेट किया गया था। 

कब मनाया जाता है मदर्स डे ?

दुनिया भर में मदर्स डे मई महीने के दूसरे रविवार के दिन मनाया जाता है। 2022 में, मदर्स डे 8 मई को मनाया जा रहा है। औपचारिक तौर पर इस दिन को मनाने की शुरुआत 1914 में हुई थी।

सबसे पहले किसने मनाया मदर्स डे?  

मदर्स डे का इतिहास (History of mother’s day) काफी दिलचस्प है, ऐसा मानना जाता है कि आधुनिक युग में मदर्स डे की शुरुआत एक महिला ने की थी। दरअसल, मदर्स डे मनाने की शुरुआत एना जार्विस (Anna Jarvis) नाम की एक अमेरिकी महिला ने की थी। Anna Jarvis अपनी मां को आदर्श मानती थीं और उनसे बहुत प्यार करती थीं। जब एना की मां का  निधन हुआ तो उन्होंने कभी शादी न करने का फैसला किया और अपनी मां के नाम अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने मां को सम्मान देने के लिए मदर्स डे (Mother’s Day ) मनाने की शुरुआत की। उन दिनों यूरोप में इस खास दिन को मदरिंग संडे (Mothering Sunday) कहा जाता था।

कई सालों तक लोगों ने एना की इस पहल को फॉलो किया। कहा जाता है कि मदर्स डे (Mother’s Day) मनाने का पहला विचार लगभग साल 1908 के आसपास आया था। लेकिन कई सालों तक उतार-चढ़ाव के बाद लगभग 1914 के आसपास Mother’s Day को मनाने की घोषणा हुई। तब से मई महीने के दूसरे हफ्ते के रविवार को मनाया जाता रहा है। इस साल यानि 2022 में मदर्स डे 8 मई दिन रविवार को है। कहा जाता है कि आधुनिक दुनिया में मदर्स डे पहली बार अमेरिका (America) में मनाया गया था।

मई में रविवार को ही क्यों मनाते हैं मदर्स डे?  

एना के इस कदम के बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन (Woodrow Wilson) ने औपचारिक तौर पर 9 मई 1914 में मदर्स डे (Mother’s Day) मनाने की शुरुआत की। इस खास दिन के लिए अमेरिकी संसद में कानून (Law) पास किया गया, जिसमें मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाने का फैसला लिया गया। इसके बाद Mother’s Day को मई के दूसरे रविवार के दिन मनाने की स्वीकृति अमेरिका समेत यूरोप, भारत (India) और कई अन्य देशों ने भी दी।

क्या है मदर्स डे मनाने की वजह?  

अपनी मां को खास महसूस कराने, उनके मातृत्व और प्यार को सम्मानित करने के उद्देश्य से Mother’s Day मनाया जाता हैं। पिछले कुछ दशकों में मां को समर्पित इस दिन को बहुत खास तरीके से मनाया जाता है। इस दिन लोग अपनी मां के साथ समय बिताते हैं। उनके लिए गिफ्ट या कुछ सरप्राइज (Gift or Surprise) प्लान करते हैं। पार्टी का आयोजन करते हैं और मां को बधाई देते हैं उनके प्रति अपने प्यार और अपने लगाव को जाहिर करते हैं। 

कैसे मनाएं मदर्स डे (How to celebrate Mother's Day)?

आप सभी को मालूम होगा कि आपकी मां को क्या पसंद है, उसी के अनुसार ही उन्हें खुश करने की कोशिश कीजिये। हालांकि यहाँ हम आपको कुछ ऐसी चीज़ें भी बताएंगे जो आप अपनी मां के लिए कर सकते हैं। 

  • मां के साथ मूवी और डिनर का प्लान बना सकते हैं। 

  • अपने हाथों से कुछ अच्छा बनाकर मां को खिला सकते हैं। 

  • मां के साथ बाहर कहीं घूमने जा सकते हैं। 

  • मां के लिए कार्ड बना सकते हैं या कोई गिफ्ट ला सकते हैं। 

  • मां के लिए गाना गा सकते हैं।

  • घर के कामों में मां की मदद करवा सकते हैं। 

  • मां के साथ बैठकर आप बचपन की पुरानी यादें तजा कर सकते हैं। 

आप अपनी मां के लिए ये सारी चीज़ें केवल एक दिन नहीं बल्कि हर दिन कर सकते हैं, इससे अपना रिश्ता आपकी मां के साथ और गहरा और खास बनेगा। हालांकि, मां के साथ तो बच्चों का रिश्ता खास ही होता है पर कभी-कभी समय थोड़ी दूरियां ले आता है, जिन्हें भरना भी जरूरी होता है। 

निदा फ़ाज़ली द्वारा लिखी गयी मां के लिए कुछ पंक्तियाँ:

बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ , 

याद आता है चौका-बासन, 

चिमटा फुँकनी जैसी माँ।  

बाँस की खुर्री खाट के ऊपर हर आहट पर कान धरे, 

आधी सोई आधी जागी थकी दुपहरी जैसी माँ।  

चिड़ियों के चहकार में गूँजे राधा-मोहन अली-अली, 

मुर्गे की आवाज़ से खुलती, 

घर की कुंड़ी जैसी माँ। 

बीवी, बेटी, बहन, पड़ोसन थोड़ी-थोड़ी सी सब में, 

दिन भर इक रस्सी के ऊपर चलती नटनी जैसी मां। 

बाँट के अपना चेहरा, माथा, आँखें जाने कहाँ गई, 

फटे पुराने इक अलबम में चंचल लड़की जैसी माँ।

-निदा फ़ाज़ली

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