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पर्वतों का मानवीय जीवन में महत्व

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पर्वतों का मानवीय जीवन में महत्व
11 Dec 2021
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पहाड़ों का कटकर शहरी क्षेत्रों में परिवर्तित होना, प्रदूषण स्तर में हो रही वृद्धि ग्लेशियरों को गला रही है तथा मानसून में परिवर्तन का कारण बन रही है। यही कारण है कि पर्वत अपने चक्रीय प्रक्रिया cyclic process में विचलित हो रहे हैं। इन्हीं वजहों से भू-स्खलन जैसी आपदाएं बढ़ती जा रही हैं । जिन्हें नियंत्रित करना अति आवश्यक है। पर्वतों की महत्ता को सबको समझाने के लिए प्रति वर्ष 11 दिसंबर को अन्तर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस मनाया जाता है, ताकि लोग अपने जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए पहाड़ों की उपयोगिता को समझ पाएं।

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प्रकृति स्वयं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए संसाधनों का भण्डार स्वयं ही करती है। कोई भी  मनुष्य चाहे तो मात्र इन संसाधनों पर आश्रित रहकर  अपना संपूर्ण जीवन आसानी से  निर्वाह कर सकता है। मनुष्य को जीवन निर्वाह के लिए जिन मुख्य तत्वों की आवश्यकता है, प्रकृति उसका संचार निरंतर पर्याप्त मात्रा में करती रहती है। जल, वायु, भोजन और अग्नि ऐसी कई महत्वपूर्ण तत्व हैं जो संसार में आसानी से उपलब्ध हैं, जो मानव जीवन को सहज बनाता है। प्रकृति के पास ऐसे धरोहर हैं जहां से स्रोतों sources का निर्माण होता है तथा इन्हीं के सहारे जीवों का जीवन सरल होता है। पर्वत mountain, नदियां river, सागर sea, और जंगल forest कुदरत nature के पास संचित वह धन हैं, जो किसी कुबेर के भंडार से कम नहीं। मनुष्य की ज़िंदगी में इनका बहुत महत्व होता है। इन्हीं में से एक मुख्य संसाधन key resources हैं हमारे पर्वत, जो व्यक्ति को भोजन, जल इत्यादि का स्रोत प्रदान करते हैं। यदि पर्वत ना हों तो हम शायद ज़िंदगी जी ना पाएं। पर्वत मनुष्य के लिए ना केवल एक उपयोगी संसाधन useful resource है बल्कि यह हमारे जीवन के होने के लिए ही महत्वपूर्ण है। इसलिए पर्वतों का संरक्षण protection of mountains हमारे लिए अति आवश्यक है।

पर्वतों का मानवीय जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, हमारे जीवन में पीने वाले पानी का मुख्य स्रोत ही पर्वत हैं, पर्वत ही भोजन का मुख्य आधार है, यहीं से दुनिया का मौसम world weather निर्मित होता है। यह पूरे विश्व के लोगों का जीवन निर्धारित करता है, साथ ही पर्वतों के माध्यम से दुनिया में करोड़ों लोगों की जीविका चलती है।

पर्वतीय इलाकों में भी अनेक लोग रहते हैं। दुनिया का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा पर्वतों से ढ़का है तथा दुनिया की लगभग 13 प्रतिशत आबादी पहाड़ों पर ही रहती है। वहां की जीवनशैली समतल क्षेत्रों जीवनशैली से भिन्न होती है। UNO united nations organization के एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया को 60-80 प्रतिशत ताजा पीने लायक पानी potable water पर्वतों से ही मिलता है। साथ ही मानसून, जो coastal areas  में ज़िंदगी की आधारशिला है वह भी पर्वतों पर ही निर्भर है। यहां तक हमें मिलने वाले पोषक तत्व भी पहाड़ों से मिलते हैं। परन्तु आज स्थिति यह है कि हमें ज़िंदगी देने वाले पर्वत स्वयं के जीवन की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। अब सोचने वाली बात यह है कि यदि हमारे पर्वत ही नष्ट होने लगेंगे तो हम कैसे जीवित रहेंगे।

जलवायु परिवर्तन Climate change की बढ़ती दर, आधुनिकता की तरफ अग्रसर दुनिया तथा जनसंख्या में निरन्तर हो रही वृद्धि पर्वतीय क्षेत्रों के अस्तित्व को ख़तरे में डाल रही है। पहाड़ों का कटकर शहरी क्षेत्रों में परिवर्तित होना, प्रदुषण स्तर pollution level में हो रही वृद्धि ग्लेशियर glecier को गला रही है तथा मानसून में परिवर्तन का कारण बन रही है। यही कारण है कि पर्वत अपने चक्रीय प्रक्रिया cyclic process में विचलित हो रहे हैं। इन्हीं वजहों से भू-स्खलन landslide जैसी अन्य आपदाओं का आना बढ़ता जा रहा है, जिन्हें नियंत्रित करना अति आवश्यक है। पर्वतों की महत्ता को सबको समझाने के लिए प्रति वर्ष 11 दिसंबर को अन्तर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस मनाया जाता है, ताकि लोग अपने जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए पहाड़ों की उपयोगिता को समझ पाएं।