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औषधीय पौधे, रोजगार के जरिये देते

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औषधीय पौधे, रोजगार के जरिये देते
15 Sep 2021
9 min read
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वो कहते हैं ना कि जो चीज़ हमारे पास होती है तब हम उसे उतना महत्व नहीं देते हैं। परन्तु यदि हम उस वस्तु के गुणों को समझ कर उसकी महत्ता पर ध्यान दें तो वह हमें केवल लाभ ही पहुंचाएगा। भारत में मौजूद औषधीय पौधों की प्रजातियां भी उसी श्रेणी में आती हैं। यह गुणकारी पौधे हमें एक स्वस्थ भविष्य का निर्माण करने का अवसर देती हैं चाहे वह शारीरिक रूप से हों, मानसिक रूप से या फिर आर्थिक रूप से।

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मनुष्य खुद को स्वस्थ रखने के लिए कितने जतन करता है। व्यायाम से लेकर खाने-पीने तक हम सारी चीजों पर बहुत ध्यान देते हैं। हम मन से तभी प्रसन्न रह पाते हैं जब हमारा शरीर स्वस्थ रहता है। कहीं ना कहीं हम इस बात से भी डरते हैं कि यदि हम खुद को स्वस्थ नहीं रखेंगे, तो बीमार पड़ जाएंगे और हमें दवाईयों को अपने जीवन में शामिल करना पड़ जाएगा जो हमें बिल्कुल भी नहीं पसन्द होता है। दवाइयां भी ना जाने कितने ही रूप में होती हैं, एलोपैथिक, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक, हर्बल ऐसे कई दवाइयों की श्रेणियां हैं। प्रत्येक श्रेणी अपने-अपने तरीके से बीमारियों का इलाज करती है। क्या आप सब जानते हैं कि इनमें से हर्बल दवाइयों का प्रयोग सबसे पुराने समयकाल से किया जाता रहा है। और आज भी यह उतने ही स्फूर्ति से प्रयोग में लाया जाता है। विशेषज्ञों का तो यह भी मानना है कि हर्बल दवाईयां सबसे अधिक असरदारी होती हैं। माना जाता है कि जिस बीमारी का इलाज किसी और दवाई से संभव नहीं हो पाता उसका भी इलाज हर्बल दवाईयां कर देती हैं। भारत में हर्बल दवाइयों की बहुत ज़्यादा मांग है, क्योंकि हर घर में इनका कुछ न कुछ इस्तेमाल होता ही है। और कोविड-19 के आने के बाद तो इनकी महत्ता और भी बढ़ गई है। अब तो प्रतिदन के आधार पर इनको घरों में प्रयोग में लाया जाता है। हर्बल दवाईयां बनाने में जिन औषधीय पौधों का इस्तेमाल किया जाता है उनकी खेती और बागबानी कर हम अपने लिए भारत में एक सुव्यवस्थित व्यवसाय का द्वार खोल सकते हैं। 

सदियों से किया जा रहा औषधीय पौधों का इस्तेमाल

औषधीय पौधे का प्रयोग प्रागैतिहासिक काल से ही किया जाता रहा है। पहले के समय में इसका इस्तेमाल जड़ी-बूटी के तौर पर पीस कर लेप बनाकर किया जाता था, हालांकि अब आधुनिक समय में इसे कई अन्य रूपों में बदलकर फिर इस्तेमाल में लाया जाता है। भारत में ऐसे पौधों की बहुत अधिकता है, हम कह सकते हैं कि भारत की मिट्टी में ऐसे पौधों की उपज अच्छी मात्रा में हो जाती हैं। एलोवेरा, तुलसी, अश्वगंधा, गिलोय, नीम, हल्दी, अजवाइन, रूई, पुदीना, लेमनग्रास, ब्राह्मी ऐसे कई औषधीय पौधे हैं, जो अपने गुणों से मनुष्य को लाभ पहुंचाते हैं।

औषधीय पौधो में हर रोग ठीक करने की क्षमता

इनमें से अधिकतम पौधे ऐसे हैं जिनसे हर कोई परिचित है। आखिरकार हम रोज इनका सेवन जो करते हैं। इनमें से कई पौधे तो हमारे घर के बगीचे में, आंगन में और घर के बाहर लगे होते हैं। हम ऐसा इसलिए करते हैं ताकि हम इनके इस्तेमाल से खुद को तन्दुरूस्त रख पाएं। अगर ये पौधे सबके लिए इतने महत्वपूर्ण हैं तो सोचिये यदि इन पौधों को हम अपनी आमदनी का जरिया बनाएं तो क्या हमें इसमें कभी कोई नुकसान होगा? 

नीम सबसे गुणकारी औषधीय पौधा

इन पौधों की खेती और बागबानी करने के लिए हमें बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। इनमें से कई पौधे तो ऐसे भी होते हैं, जो एक बार लगाने के बाद थोड़े लम्बे समय तक टिके रहते हैं। पर हां हमें इन पौधों की देखभाल अवश्य करनी पड़ती है। नीम के पौधे और उसके गुणों के बारे में कौन नहीं जानता होगा। यह एक ऐसा पौधा है, जो दो सौ साल तक जीवित रह सकता है। इसका एंटीसेप्टिक, एंटीवायरल और एंटीफंगल के रूप में दवाइयों में इस्तेमाल किया जाता है। यह आम तौर पर बीज के माध्यम से रोपित किया जाता है परन्तु यह टिशू कल्चर और जड़ों के माध्यम से भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा हल्दी का पौधा भी अपने अन्दर कई प्रतिरोधक क्षमताओं को छुपाए रखता है। इसका इस्तेमाल पूरे भारत में सबसे अधिक मात्रा में किया जाता है। 

हवा को शुद्ध करने का गुण तुलसी के अन्दर

तुलसी का पौधा तो हर घर के आंगन की शोभा होता है। जिसकी पूजा भी की जाती है। तुलसी का इस्तेमाल अस्थमा, गले की परेशानी इत्यादि की दवाईयां बनाने में किया जाता है। तुलसी को हम जड़ी-बूटियों की रानी कहकर भी बुलाते हैं। तुलसी के अन्दर हवा को शुद्ध करने की भी प्रवृत्ति होती है। इसके साथ ही एलोवेरा एक ऐसा औषधीय पौधा है, जो घर में सबसे सरल तरीके से उगाया जा सकता है। जिसे सबसे कम संरक्षण की आवश्यकता होती है। यह बालों और त्वचा की परेशानियों के लिए सबसे असरदार औषधीय पौधा होता है। 

कोरोना महामारी में गिलोय की ज्यादा खपत

गिलोय एक ऐसा पौधा है, जो हमें सामान्यत: झाड़ियों में भी मिल जाता है। परन्तु इसके गुणों के कारण इसको व्यवसाय के रूप में इस्तेमाल करने के लिए हम इसकी बागबानी भी कर सकते हैं। कोरोना जैसी महामारी के समय में गिलोय की सबसे अधिक खपत हुई है। राष्ट्रीय से लेकर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक गिलोय से बनने वाली दवाइयों की सबसे ज्यादा बिक्री हुई है। चूंकि इसके उपयोग से स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। इसलिए हम यह कह सकते हैं कि आने वाले समय में गिलोय को लोग सावधानी के तौर पर हमेशा इस्तेमाल करेंगे।

भारत में औषधीय दवाइयों की ज्यादा मांग

भारत में करीबन आधी आबादी ऐसी है, जो औषधीय दवाइयों को पहली पसन्द मानता है। इसका एक कारण यह भी है कि इसका शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। अर्थात फायदा किया तो किया पर नुकसान कभी नहीं करता है। हालांकि इससे बनी दवाइयां फायदा ना करें यह केवल 1 प्रतिशत ही संभव है। सरकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय बाजार में ऐसे पौधों की खपत 4.2 बीलियन है, जिसे बढ़ाकर 2026 तक 14 बीलियन करने का लक्ष्य है। भारतीय बाजार में औषधीय दवाइयों ने अपनी अच्छी धाक जमा रखी है। इसलिए इन पौधों का व्यवसाय हमेशा फलदायी ही होगा।

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पौधों की कम मांग

भारत में करीब 880 प्रकार की औषधीय प्रजातियां मौजूद हैं, जिनमें से करीब 40 प्रजातियों की मांग पूरी दुनिया में होती है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर औषधीय पौधों का बाजार 6.2 बिलियन डॉलर का है, जिनमें भारत की भागेदारी केवल 0.5 प्रतिशत है। यदि हम औषधीय पौधों की उत्पादकता बढ़ा दें, तो अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में भारत द्वारा निर्यात किये जा रहे औषधीय उत्पादों की संख्या में वृद्धि होगी। भारत को फायदा होगा, जिसका सीधा असर हमारी आमदनी पर पड़ेगा।