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बच्चों में अवसाद, ना करें नज़रअंदाज

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बच्चों में अवसाद, ना करें नज़रअंदाज
02 Nov 2021
9 min read
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डिप्रेशन एक गंभीर बिमारी है लेकिन चिंता की बात यह है कि लोग‌ इसे लेकर बहुत सतर्क नहीं रहते। ज़्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि पहले की पीढ़ीयों की तुलना में आज की पीढ़ी अधिक तनाव महसूस करती है। यह शायद आजकल की व्यस्त ‌जीवनशैली की वजह से हो सकता है। लेकिन इस तनाव के कारण आत्महत्या जैसा खतरनाक कदम उठा लेना इस बात को भी सिद्ध करता है कि, आज की पीढ़ी में सहनशक्ति की बहुत कमी है।

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हम सभी के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। यह जीवन का हिस्सा होते हैं। कभी-कभी उदास महसूस करना सामान्य है। लेकिन लंबे समय तक ऐसा महसूस करना अवश्य ही चिंता का विषय हो सकता है। आजकल युवा पीढ़ियों को डिप्रेशन बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है, जिसके कारण वह हमेशा उदास रहते हैं। यह सभी में तो नहीं पायी जाती, लेकिन वर्तमान में इसके ऑंकड़ों में बढ़ोतरी देखने को मिल रहा है। इसके कई कारण भी विशेषज्ञों द्वारा बताए जाते हैं। इस अवसाद के कारण युवाओं में अनेक प्रकार के परिवर्तन देखने को मिलते हैं। कभी-कभी इसके परिणाम घातक भी साबित होते हैं, जो चिंताजनक है। इसलिए प्रत्येक माता-पिता को अपने बच्चों के व्यवहार पर ख़ासकर ग़ौर करने की आवश्यकता है। 

युवाओं में बढ़ता अवसाद (डिप्रेशन)

युवावस्था को जीवन का सबसे अच्छा समय माना जाता है। यह समय उनके जीवन या कह सकते हैं कि भविष्य निर्माण के लिए सबसे उचित समय होता है। यह वही समय होता है, जब युवा अपने भविष्य के लिए योजनाएं बनाते हैं और जीवन में आगे बढ़ने व सफल होने का प्रयास करते हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश आज यह युवा पीढ़ी अवसाद जैसी मानसिक बिमारी से बुरी तरह प्रभावित होती जा रही है। यह वाकई में ‌एक चिंता का विषय है। दिन-प्रतिदिन ‌इनके ऑंकड़ों में बढ़ोतरी देखने को मिल रहा है, जिसके कारण मनोवैज्ञानिक भी चिंतित हैं। अध्ययनों के अनुसार इसके कई कारण हो सकते हैं। आज की आधुनिक जीवनशैली वैज्ञानिकों द्वारा इसका मुख्य कारण बताई जा रही है। इसके अलावा बढ़ रही प्रतिस्पर्धा और कई प्रकार के मानसिक दबाव भी इस बीमारी का मुख्य कारक बन रहे हैं। बेरोज़गारी, खर्च, आर्थिक समस्या, पढ़ाई और पारिवारिक कारणों से भी युवा डिप्रेशन के शिकार होते हैं। मुख्य रूप से यह समस्या 20 से 30 साल के युवा वर्ग में देखी जाती है। इस मानसिक तनाव का नतीज़ा कभी-कभी खतरनाक साबित होता है। यहॉं तक कि कई बार कुछ युवा आत्महत्या जैसी नासमझी का कदम उठा लेते हैं। इसलिए यह माता-पिता की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि, वह अपने बच्चों के व्यवहार में आ रहे परिवर्तन पर ग़ौर करें।

इन परिवर्तनों पर करें ग़ौर

अवसाद के लक्षण सभी के लिए एक जैसे नहीं होते, यह सभी के लिए अलग-अलग हो सकते हैं। अक्सर उदासी की भावना सबसे आम‌ लक्षण है, जो अक्सर‌ डिप्रेशन से ग्रसित लोगों में पाया जाता है। इसके अलावा चिड़चिड़ापन, छोटी-छोटी बातों पर क्रोध आना, किसी काम में रुचि न होना, अत्यधिक सोचना, बार-बार मृत्यु या आत्महत्या का विचार आना और परिवार व दोस्तों में रुचि ‌खत्म होना, यह सभी भी अवसाद के कारण हो सकते हैं। इसलिए ऐसी भावनाएं आने पर सतर्क रहना अति आवश्यक है। इन भावनात्मक परिवर्तन के अलावा कुछ व्यवहार में परिवर्तन आने की भी संभावना होती है। अनिद्रा या बहुत अधिक सोना, भूख में परिवर्तन, अक्सर सिर‌ दर्द की शिकायत होना, क्रोध आना यह भी अवसाद के लक्षणों में शामिल होते हैं।

अवसाद के उपाय

इस भयंकर समस्या को कई तरीकों से ठीक किया जा सकता है। इसका सबसे अच्छा अगर कोई इलाज हो सकता है तो वह है मनोचिकित्सक की सहायता। लेकिन अक्सर ऐसा देखा गया है कि अवसाद से पीड़ित लोग खुद को रोगी मानते ही नहीं हैं, इसी कारण वह मनोचिकित्सक के पास जाने से हिचकते हैं। इसके अलावा ऐसे लोगों के लिए प्रेरणादायक किताबें पढ़ना, आशावादी फिल्में देखना और अपनी पसंदीदा जगहों पर घूमने जाना काफी हद तक प्रभावी साबित हो सकता है। अवसाद से ग्रसित लोगों के लिए दवाओं से बेहतर परिवार व दोस्तों से मिला प्यार और सहयोग काम में आता है।