एक से भले दो

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एक से भले दो
31 Jul 2021
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किसान हमारे देश केअन्नदाता हैं। किसान की जीविका खेती है। वह मेहनत करके अपना जीवन यापन करते हैं । किसान को इतनी जानकारी नहीं मिल पाती कि अपने खेतों में एक फसल के साथ और भी व्यवसाय कर सकते हैं। कृषि से जुड़े कम लागत के व्यवसायों से किसान खेती के साथ-साथ अच्छी आमदनी कर सकते हैं। किसान अगर चाहें तो इन व्यवसायों को अपने खेतों पर ही शुरू कर सकते हैं।

जीवन की ज़रूरत में सबसे पहले अन्न है,

किसानों की ही मेहनत से देश संपन्न है...

किसान हमारे देश केअन्नदाता हैं। किसान की जीविका खेती है। वह मेहनत करके अपना जीवन यापन करते हैं । किसान को इतनी जानकारी नहीं मिल पाती कि अपने खेतों में एक फसल के साथ और भी व्यवसाय कर सकते हैं। 

आज के ज़माने में किसानों के लिए कृषि से जुड़ा अतिरिक्त आय का कोई साधन होना बहुत जरूरी है। ताकि, अगर किसी कारणवश उन्हें अपनी फसल से अच्छी कमाई न मिले, तो उनके पास आजीविका का कोई दूसरा रास्ता हो। किसानों की आय को बढ़ाने के लिए, कृषि विभाग द्वारा कई तरह की योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। 

कृषि से जुड़े कम लागत के व्यवसायों से किसान खेती के साथ-साथ अच्छी आमदनी कर सकते हैं। किसान अगर चाहें तो इन व्यवसायों को अपने खेतों पर ही शुरू कर सकते हैं।

आज हम आपको पांच कृषि आधारित व्यवसायों के बारे में बता रहे हैं, जो किसान अपने खेतों पर शुरू कर सकते हैं। 

1. केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्ट) :

बढ़ते जैविक खेती और होम-गार्डनिंग के चलन से आज वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) की बाजार में अच्छी मांग है। बहुत से किसान जैविक खेती से जुड़ना चाहते हैं, जिसके लिए उन्हें काफी ज्यादा मात्रा में केंचुआ खाद की ज़रूरत होती है। छोटे किसानों के लिए, अपनी ज़रूरत के हिसाब से केंचुआ खाद तैयार करना आसान है। लेकिन, बड़े किसान ज्यादातर बाजार से ही खाद खरीदते हैं। इसलिए अगर कोई किसान चाहे, तो अपने खेतों पर ही 15-20 हजार रुपए की लागत में, वर्मीकम्पोस्टिंग यूनिट शुरू कर सकते हैं। 

2. मशरूम:

मशरूम खाने में जितना स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर होता है, इसकी खेती करना भी उतना ही आसान होता है। मशरूम को किसान अपने खेतों पर या अपने घर में, कहीं भी छोटी-बड़ी शेड लगाकर उगा सकते हैं। सबसे अच्छी बात है कि मशरूम में जल्दी उत्पादन मिलता है और इसकी बाजार में काफी अच्छी मांग है। 

किसान भाई, अपने आसपास किसी मशरूम की खेती करने वाले किसान या ‘कृषि विज्ञान केंद्र’ से मशरूम की खेती की ट्रेनिंग लें। क्योंकि, इस काम में सही ट्रेनिंग लेना बहुत जरूरी है। इसके बाद, आप अपनी सामान्य खेती के साथ-साथ, कम से कम लागत में मशरूम की खेती शुरू कर सकते हैं। मशरूम की खेती शुरुआत में, 1000-1500 रुपए की लागत में भी की जा सकती है। फिर जैसे-जैसे आपको इसमें सफलता मिलने लगे, आप अपना स्तर बढ़ा सकते हैं। 

 3. मोती पालन:

हम सब जानते हैं कि किसानों को अपने खेतों में तालाब खुदवाने के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी दी जा रही है। किसान अपने खेतों पर ही सामान्य खेती के साथ-साथ, तालाब में मोती पालन भी शुरू कर सकते हैं। तालाब की क्षमता के हिसाब से इसमें सीप डाले जा सकते हैं। एक सीप से दो मोती निकलते हैं तथा इनकी गुणवत्ता के अनुसार, इनकी कीमत 100 से 250 रुपए तक मिल जाती है। इस तरह, छोटे से छोटे तालाब से भी किसान अच्छा मुनाफा ले सकते हैं।

 4. नर्सरी:

अगर कोई किसान फल-सब्जियों की अच्छी पौध तैयार कर सकता है, तो उसे अपने खेतों पर नर्सरी का काम भी करना चाहिए। जिसके लिए किसानों को ज्यादा लागत निवेश करने की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी। अपने खेतों के लिए सब्जियों के पौधे तैयार करते समय ही, वे नर्सरी भी तैयार कर सकते हैं। और इन पौधों को आसपास के इलाके के किसानों को बेच सकते हैं। सब्जियों के अलावा, किसान फलों या फिर अन्य पेड़-पौधों जैसे चंदन, महोगनी आदि की नर्सरी भी शुरू कर सकते हैं। खेती के साथ-साथ, नर्सरी चलाना भी आय बढ़ाने का एक अच्छा तरीका है। 

 5. प्रोसेसिंग:

प्रोसेसिंग ऐसा व्यवसाय है, जो छोटे-बड़े सभी किसानों को अपनाना चाहिए। जब किसान खुद अपनी उपज को प्रोसेस करके खाद्य उत्पाद बनाकर बाजार में बेचेंगे, तो उनकी कमाई अपने आप ही बढ़ जाएगी। सबसे अच्छी बात है कि इसके लिए, आपको एक साथ पूरा सेट-अप कराने की भी ज़रूरत नहीं है। 

अगर आप घर पर हाथ से प्रोसेसिंग नहीं कर सकते हैं, तो आसपास के इलाकों में दाल मिल या आटा मिल खोजकर, वहां अपनी उपज को प्रोसेस करा सकते हैं। ऐसा करने से ज्यादा लागत भी नहीं आएगी और प्रोसेस की हुई चीजों को आप, अपने ब्रांड नाम से पैक करके ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। 

तो देर किस बात की! आज से ही किसान अपने इलाकों में उपलब्ध मौकों को तलाशें और सही ट्रेनिंग लेकर, कृषि से संबंधित कुछ अतिरक्त व्यवसाय की शुरुआत पर ध्यान दें। ताकि आप अपनी आमदनी बढ़ाते हुए, कृषि के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना सकें।