केंद्रीय बजट 2026–27 की पूरी जानकारी: बड़ी घोषणाएँ और अहम बातें

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केंद्रीय बजट 2026–27 की पूरी जानकारी: बड़ी घोषणाएँ और अहम बातें
05 Feb 2026
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1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026–27 का केंद्रीय बजट पेश किया। यह बजट भारत को एक “विकासशील” देश से एक “वैश्विक नेतृत्वकर्ता अर्थव्यवस्था” की ओर ले जाने की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत करता है।

यह बजट ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं से गुजर रही है। दुनिया भर में सप्लाई चेन में बदलाव हो रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से अर्थव्यवस्थाओं की दिशा बदल रहा है। ऐसे माहौल में सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए औद्योगिक विकास को तेज करने का संकल्प दोहराया है।

वित्त मंत्री का “आकांक्षाओं को उपलब्धियों में बदलने” का बयान इस बजट की मूल भावना को दर्शाता है। बजट में एक ओर बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे में निवेश की योजना है, तो दूसरी ओर छोटे लेकिन असरदार सुधारों पर भी ध्यान दिया गया है।

इस बजट का मुख्य फोकस “युवा शक्ति” पर है। सरकार का उद्देश्य भारत की युवा आबादी को कुशल, उत्पादक और रोजगार योग्य बनाना है, ताकि जनसांख्यिकीय लाभ को आर्थिक ताकत में बदला जा सके।

सरकार ने नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 10.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जबकि वास्तविक आर्थिक वृद्धि करीब 7 प्रतिशत रहने की संभावना है। इसके जरिए भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस बार बजट केवल चुनिंदा औद्योगिक कॉरिडोरों तक सीमित नहीं है। सरकार ने शहर आर्थिक क्षेत्रों और पुराने औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार पर भी जोर दिया है, जिससे विकास को अधिक व्यापक और संतुलित बनाया जा सके।

बजट में आत्मनिर्भर भारत को आगे बढ़ाने के लिए बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर और अन्य उभरते क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इसका उद्देश्य सिर्फ घरेलू उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाना और बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करना भी है।

कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026–27 Union Budget 2026-27 भारत की दीर्घकालिक विकास रणनीति को मजबूती देता है और देश को एक आत्मनिर्भर, प्रतिस्पर्धी और वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में आगे बढ़ाता है।

भारत का केंद्रीय बजट FY26–27: बड़ी घोषणाएँ, नीतिगत बदलाव और आर्थिक फोकस  India Union Budget FY26–27: Big Announcements, Policy Changes and Economic Focus

1. मजबूत वित्तीय आधार: विकास और अनुशासन का संतुलन The Fiscal Foundation: Balancing Growth with Discipline

केंद्रीय बजट 2026–27 में सरकार ने कुल ₹53.5 लाख करोड़ के व्यय का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.7 प्रतिशत अधिक है।
इस बजट की सबसे अहम विशेषता पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स पर ज़ोर है, जिसे बढ़ाकर रिकॉर्ड ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है।

FY26 के संशोधित अनुमान की तुलना में यह 11.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
इसका उद्देश्य निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक निवेशक स्थिर और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की तलाश में हैं।

इतने बड़े निवेश के बावजूद सरकार ने वित्तीय अनुशासन से समझौता नहीं किया है।
वित्त वर्ष 2026–27 के लिए राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 4.3 प्रतिशत तय किया गया है, जो पिछले वर्ष के 4.4 प्रतिशत से कम है।

सरकार ने दीर्घकालिक ऋण–GDP अनुपात का लक्ष्य 2030–31 तक 50 प्रतिशत (±1 प्रतिशत) बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
वर्तमान वर्ष में यह अनुपात लगभग 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

यह वित्तीय सतर्कता इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि इससे भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग मजबूत रहती है।
2025 में भारत को तीन क्रेडिट अपग्रेड मिले थे, जिससे निजी क्षेत्र के लिए कर्ज़ की लागत नियंत्रित और प्रतिस्पर्धी बनी रहती है।

2. तीन कर्तव्य: तीन स्तंभों पर आधारित विकास रणनीति The Three Kartavya: A Triple-Pillared Growth Strategy

इस बजट की रूपरेखा तीन “कर्तव्यों” पर आधारित है, जो सरकार की आर्थिक और सामाजिक दिशा तय करते हैं।

आर्थिक उत्पादकता और मजबूती Economic Productivity and Resilience

सरकार का लक्ष्य संरचनात्मक सुधारों के ज़रिए भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाना है।
इसके साथ ही वैश्विक आर्थिक अस्थिरता से निपटने के लिए अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत और लचीला बनाना भी प्राथमिकता है।

मानव पूंजी और कौशल विकास Human Capital and Skill Fulfillment

इस बजट में “युवा शक्ति” पर विशेष ध्यान दिया गया है।
युवाओं को आधुनिक तकनीकी और व्यावसायिक कौशल देकर उन्हें 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

समावेशी विकास – सबका साथ, सबका विकास Inclusive Prosperity (Sabka Sath, Sabka Vikas)

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेज़ आर्थिक विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे।
चाहे वह किसी टियर-III शहर का MSME उद्यमी हो या किसी दूर-दराज़ गाँव का हथकरघा बुनकर, सभी को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर ज़ोर दिया गया है।

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3. बायोफार्मा शक्ति: भारत को वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में कदम Biopharma SHAKTI: Positioning India as a Global Hub

स्वास्थ्य और फार्मा क्षेत्र के लिए एक अहम कदम उठाते हुए सरकार ने “बायोफार्मा शक्ति” योजना शुरू की है।
इस योजना का पूरा नाम है — Strategy for Healthcare Advancement through Knowledge, Technology & Innovation।

इस योजना के तहत अगले पाँच वर्षों में ₹10,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा।
इसका लक्ष्य उच्च मूल्य वाले बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर बाज़ार में भारत की मज़बूत मौजूदगी बनाना है।

संस्थागत ढांचे में सुधार Institutional Upgradation

योजना के तहत तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER) स्थापित किए जाएंगे।

4. रणनीतिक विनिर्माण: ISM 2.0 और उभरते क्षेत्र Strategic Manufacturing: ISM 2.0 and Frontier Sectors

केंद्रीय बजट 2026–27 में विनिर्माण क्षेत्र के लिए “फ्रंटियर-फर्स्ट” यानी उन्नत और भविष्य की तकनीकों को प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई गई है।
इस दिशा में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन
India Semiconductor Mission (ISM) 2.0 की शुरुआत की गई है, जिसके लिए ₹40,000 करोड़ का बढ़ा हुआ बजट रखा गया है।

जहाँ ISM 1.0 का फोकस देश में पहली सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियों की स्थापना पर था, वहीं ISM 2.0 पूरे इकोसिस्टम को मज़बूत करने पर केंद्रित है।
इसमें सेमीकंडक्टर उपकरण निर्माण, कच्चे माल की आपूर्ति और पूरी तरह भारतीय बौद्धिक संपदा (IP) के विकास पर ज़ोर दिया गया है।

अन्य प्रमुख विनिर्माण पहलें Other Key Manufacturing Highlights

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट विनिर्माण Electronics Component Manufacturing

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना का बजट बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है।
इसका उद्देश्य केवल असेंबली तक सीमित रहने के बजाय उच्च मूल्य वाले कंपोनेंट्स का घरेलू उत्पादन बढ़ाना है।

रेयर अर्थ कॉरिडोर Rare Earth Corridors

महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक रणनीतिक अहमियत को देखते हुए सरकार ने रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने का निर्णय लिया है।
ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में इन कॉरिडोरों के ज़रिए खनन और प्रोसेसिंग की एकीकृत व्यवस्था विकसित की जाएगी।
ये खनिज हरित तकनीक और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद ज़रूरी हैं।

कंटेनर विनिर्माण Container Manufacturing

सरकार ने पाँच वर्षों में ₹10,000 करोड़ की एक नई योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य आयातित शिपिंग कंटेनरों पर भारत की निर्भरता कम करना है।
यह कदम समुद्री लॉजिस्टिक्स सुरक्षा और निर्यात–आयात व्यवस्था को मज़बूत बनाने के लिए अहम माना जा रहा है।

5. चैंपियन SMEs और MSMEs को सशक्त बनाना Empowering Champion SMEs and MSMEs

भारत के सकल घरेलू उत्पाद में MSMEs का योगदान लगभग 30 प्रतिशत है।
इसी को ध्यान में रखते हुए बजट 2026–27 में ₹10,000 करोड़ के कोष के साथ SME ग्रोथ फंड की शुरुआत की गई है।

इस फंड का उद्देश्य ऐसे “चैंपियन SMEs” की पहचान करना और उन्हें विस्तार देना है, जो वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ने की क्षमता रखते हैं।

कॉरपोरेट मित्र पहल Corporate Mitras

सरकार टियर-II और टियर-III शहरों में 10,000 “कॉरपोरेट मित्र” तैयार करेगी।
ये विशेषज्ञ छोटे कारोबारियों को नियमों के पालन, दस्तावेज़ी प्रक्रिया और पेशेवर मार्गदर्शन में सहायता करेंगे।
इससे MSMEs पर नियामकीय बोझ कम होगा।

सेल्फ रिलायंट इंडिया (SRI) फंड Self-Reliant India (SRI) Fund

सूक्ष्म उद्यमों को जोखिम पूंजी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए SRI फंड में ₹2,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि दी गई है।

6. बुनियादी ढांचा: हाई-स्पीड रेल और सिटी इकोनॉमिक रीजन Infrastructure: High-Speed Rail and City Economic Regions

बुनियादी ढांचा भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है।
रिकॉर्ड कैपेक्स के अलावा, बजट में सिटी इकोनॉमिक रीजन (CERs) की अवधारणा पेश की गई है।

प्रत्येक चयनित क्षेत्र के लिए ₹5,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
इन क्षेत्रों को सुधार-आधारित और चुनौती-आधारित वित्तीय मॉडल के ज़रिए बड़े आर्थिक क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा।

हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर High-Speed Rail Corridors

इन नए आर्थिक केंद्रों को जोड़ने के लिए सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित किए गए हैं।

  • मुंबई–पुणे

  • पुणे–हैदराबाद

  • हैदराबाद–बेंगलुरु

  • हैदराबाद–चेन्नई

  • चेन्नई–बेंगलुरु

  • दिल्ली–वाराणसी

  • वाराणसी–सिलीगुड़ी

अंतर्देशीय जल परिवहन का विस्तार Expansion of Inland Water Transport

इसके अलावा 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को चालू करने की योजना है।
इससे अंतर्देशीय जल परिवहन की हिस्सेदारी दोगुनी होने की उम्मीद है।
यह पहल खनिज-समृद्ध और औद्योगिक राज्यों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत को काफी कम करेगी।

7. डिजिटल अर्थव्यवस्था और 2047 तक टैक्स हॉलिडे Digital Economy and the 2047 Tax Holiday

भारत अब डिजिटल-फर्स्ट अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर AI-फर्स्ट अर्थव्यवस्था की ओर कदम बढ़ा रहा है।
इसी दिशा में बड़े वैश्विक निवेश को आकर्षित करने के लिए केंद्रीय बजट में डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाओं के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे की घोषणा की गई है।

यह टैक्स छूट उन विदेशी कंपनियों को मिलेगी जो भारतीय ग्राहकों को भारतीय रिसेलर के माध्यम से क्लाउड और डेटा सेंटर सेवाएँ प्रदान करेंगी।

निवेश में स्थिरता Investment Certainty

इस फैसले से वैश्विक निवेशकों को लगभग 20 वर्षों की नीति-स्थिरता और भरोसेमंद कारोबारी माहौल मिलेगा।
इससे हाइपरस्केलर कंपनियों और बड़े क्लाउड सेवा प्रदाताओं को भारत में दीर्घकालिक निवेश करने का प्रोत्साहन मिलेगा।

सेफ हार्बर प्रावधान Safe Harbour Provision

डेटा सेंटर क्षेत्र में आपसी कंपनियों के बीच होने वाले लेन-देन के लिए लागत पर 15 प्रतिशत का सेफ हार्बर तय किया गया है।
इससे ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े विवाद कम होंगे और कर अनुपालन सरल बनेगा।

8. शिक्षा, कौशल और ऑरेंज इकॉनमी Education, Skills, and the Orange Economy

बजट 2026–27 में ऑरेंज इकॉनमी यानी क्रिएटिव इकॉनमी को रोजगार सृजन का एक बड़ा स्रोत माना गया है।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक AVGC सेक्टर के लिए 20 लाख कुशल पेशेवर तैयार करना है।

AVGC सेक्टर में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें युवाओं के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं।

AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स AVGC Content Creator Labs

देश भर के 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जाएँगी।
इन लैब्स को मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज़ का सहयोग मिलेगा।
इस पहल से छात्रों को शुरुआती स्तर पर ही डिजिटल और क्रिएटिव स्किल्स विकसित करने का मौका मिलेगा।

एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट समिति Education to Employment Committee

एक उच्च स्तरीय स्थायी समिति बनाई जाएगी, जो शिक्षा पाठ्यक्रम और उद्योग की ज़रूरतों के बीच तालमेल बनाए रखेगी।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पढ़ाई के बाद युवाओं को रोजगार के लिए अतिरिक्त संघर्ष न करना पड़े।

9. जलवायु तकनीक: कार्बन कैप्चर और ऊर्जा परिवर्तन Climate Technologies: Carbon Capture and Energy Transition

भारत के “नेट ज़ीरो 2070” लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बजट में कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) तकनीकों के लिए ₹20,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

प्रमुख सेक्टर फोकस Sector Focus

यह निवेश खासतौर पर बिजली, इस्पात, सीमेंट, रिफाइनरी और रसायन उद्योगों में लागू किया जाएगा।
इन क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन सबसे अधिक होता है, इसलिए यहाँ CCUS तकनीक का उपयोग अहम माना गया है।

कस्टम ड्यूटी में छूट Customs Duty Exemptions

लिथियम-आयन सेल निर्माण और परमाणु ऊर्जा उपकरणों के लिए पूंजीगत वस्तुओं पर बुनियादी सीमा शुल्क में छूट को आगे बढ़ाया गया है।
यह कदम स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम प्रयास है।

10. स्वास्थ्य क्षेत्र: मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म और आयुष (Healthcare: Medical Value Tourism and AYUSH)

भारत को दुनिया की “वेलनेस कैपिटल” बनाने के लक्ष्य के साथ, बजट 2026–27 में मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
सरकार देश में पाँच क्षेत्रीय मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म हब स्थापित करने का प्रस्ताव रखती है।
ये हब निजी क्षेत्र की साझेदारी से विकसित किए जाएंगे, जहाँ उन्नत सर्जरी, आधुनिक जांच सुविधाएँ और इलाज के बाद देखभाल एक ही परिसर में उपलब्ध होगी।

केयर इकॉनमी (Care Economy)

बजट में बुज़ुर्गों और सहायक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक संगठित केयर इकॉनमी विकसित करने की योजना है।
इसके तहत 1.5 लाख बहु-कौशल से लैस केयरगिवर्स को प्रशिक्षित और तैनात किया जाएगा।
इस पहल से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

आयुष क्षेत्र को मजबूती (Strengthening AYUSH)

बजट में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव है।
इसके साथ ही आयुष दवाओं की परीक्षण प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाया जाएगा।
इससे पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा सकेगा।

11. कर व्यवस्था का आधुनिकीकरण: आयकर अधिनियम 2025 (Modernizing Taxation: Income Tax Act 2025)

बजट 2026–27 की सबसे बड़ी प्रशासनिक सुधारों में से एक है आयकर अधिनियम 2025।
यह नया कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और 65 वर्ष पुराने आयकर कानून की जगह लेगा।
इसका उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना और कानूनी विवादों को कम करना है।

विश्वास आधारित अनुपालन (Trust-Based Compliance)

अब असेसमेंट और पेनल्टी से जुड़े मामलों के लिए एक ही संयुक्त आदेश जारी किया जाएगा।
इससे करदाताओं को बार-बार कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरने की परेशानी नहीं होगी।

एलआरएस में राहत (LRS Rationalization)

विदेश में पढ़ाई और मेडिकल खर्च के लिए भेजे जाने वाले पैसों पर टीसीएस घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है।
इस फैसले से मध्यम वर्ग को सीधी राहत मिलेगी।

कस्टम्स सुधार (Customs Reforms)

कस्टम्स टैरिफ ढांचे को सरल बनाया जा रहा है ताकि ड्यूटी इनवर्ज़न की समस्या दूर हो सके।
इससे “मेक इन इंडिया” पहल को मजबूती मिलेगी और घरेलू उद्योग को लाभ होगा।

निष्कर्ष (Conclusion)

केंद्रीय बजट 2026–27 भारत की आर्थिक रणनीति का एक संतुलित और दूरदर्शी खाका प्रस्तुत करता है।
जहाँ एक ओर बुनियादी ढांचे, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल ताकत पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर एमएसएमई, कौशल विकास और रोजगार सृजन को भी प्राथमिकता दी गई है।

सरल कर व्यवस्था और नीतिगत स्थिरता यह संकेत देती है कि भारत अब अल्पकालिक लाभ नहीं, बल्कि दीर्घकालिक वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
जैसा कि वित्त मंत्री ने कहा, यह बजट आकांक्षा से उपलब्धि तक का सेतु है।

यह भारत को 2026 और उसके बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक स्थिर, नवोन्मेषी और मजबूत आधार बनाने की दिशा में स्थापित करता है।