पर्यावरण को खतरे में डालने वाले 5 कारण

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पर्यावरण को खतरे में डालने वाले 5 कारण
19 Jan 2022
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प्रदूषण की मात्रा दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है और ये कहना गलत नहीं होगा कि प्रदूषण आज सबसे बड़ी समस्या है। ऐसा इसीलिए हो रहा है क्योंकि हर मानव पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नहीं है। विकास के नाम पर लोगों ने इतने बदलाव किए है कि पृथ्वी का संतुलन ही बिगड़ गया है।

आज दुनिया भर में रोज़ तरह-तरह के इन्वेंशन हो रहे हैं और ये इन्वेंशन हमारा काम आसान कर रहे हैं। विकास के अलावा ऐसी बहुत सी चीज़ें दुनिया भर में हो रही हैं, जिनसे ज्यादातर लोग अवगत नहीं है। प्रदूषण की मात्रा दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है और ये कहना गलत नहीं होगा कि प्रदूषण आज सबसे बड़ी समस्या है। ऐसा इसीलिए हो रहा है क्योंकि हर मानव पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नहीं है। विकास के नाम पर लोगों ने इतने बदलाव किए है कि पृथ्वी का संतुलन ही बिगड़ गया है। पृथ्वी मनुष्यों और अन्य प्रजातियों के लिए रहने की जगह है लेकिन अगर हमनें पर्यावरण से जुड़ी इन समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द नहीं किया, तो ये कहना गलत नहीं होगा कि मनुष्यों के रहने के लिए और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए भविष्य में कुछ भी नहीं बचेगा और शायद मनुष्यों और अन्य प्रजातियों का अस्तित्व ही पृथ्वी से मिट जाएगा। 

आज हम पर्यावरण को खतरे में डालने वाले 5 कारणों causes of environmental damage के बारे में जानेंगे- 

1. पेड़ों की कटाई Deforestation

वातावरण से कार्बन को सोखने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत जंगलों की होती हैं लेकिन मानव अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए जंगलों को नष्ट कर रहे हैं। जंगल विभिन्न प्रजातियों, पौधों और जानवरों को आसरा देने के लिए होते हैं लेकिन आज हम उन्हीं जंगलों को नष्ट करके उनका इस्तेमाल खेती के लिए कर रहे हैं। शहरों को बसाने के लिए, सड़को और पुलों को बनाने के लिए आज लोग अन्धाधुन्ध पेड़ों को काट रहे हैं। आपको बता दें कि प्रति वर्ष विकास के नाम पर 73 लाख हेक्टेयर जंगलों को काटा जा रहा है।

2. जलवायु परिवर्तन Climate change

वायु प्रदूषण air pollution दिन-ब-दिन बढ़ रहा है और इसी वजह से जलवायु परिवर्तन हो रहा है। कई देश आज सुखा drought, बाढ़ flood, ग्लोबल वार्मिंग global warming और मौसम में परिवर्तन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। जब तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन greenhouse gas emissions को नियंत्रित नहीं किया जाएगा तब तक ग्लोबल वार्मिंग का खतरा कम नहीं होगा।

3. जनसंख्या का बढ़ना Overpopulation

आबादी का तेजी से बढ़ना भी पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं है। प्राकृतिक संसाधन-दिन-ब-दिन कम हो रहे हैं और ऐसे में बढ़ती आबादी की वजह से एक दिन ऐसा भी आ जाएगा, जब लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्राकृतिक संसाधन रहेंगे ही नहीं। औद्योगीकरण industrialization, जनसंख्या, एवं शहरीकरण urbanization में वृद्धि से सबसे ज्यादा नुकसान पृथ्वी को हो रहा है।

4. मिट्टी की क्वालिटी का खराब होना Soil deterioration

केमिकल्स युक्त खाद का इस्तेमाल, अधिक चराई और लैंड यूज कन्वर्जन land use conversion की वजह से मिट्टी की क्वालिटी में गिरावट देखी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हर साल 1.2 हेक्टेयर जमीन बंजर हो रही है।

5. प्रजातियों का लुप्त होना Species extinction

जंगली जानवरों और समुद्री जीवों के खाल और उनके दांत के लिए लोग उनका शिकार करते हैं और इन्हीं कारणों से कई जंगली जानवरों और समुद्री जीवों की प्रजाति लुप्त हो चुकी है और कुछ लुप्त होने के कगार पर हैं। पृथ्वी पर हर प्राणी और पौधा किसी न किसी तरीके से एक दूसरे से जुड़ा हुआ है इसीलिए किसी भी प्रजाति का लुप्त होना इस चेन को बिगाड़ सकता है। अगर इंसान को आगे और मुश्किलों का सामना नहीं करना है तो जंगली जानवरों और समुद्री जीवों का शिकार करना बंद करना पड़ेगा।