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महिलायें समाज का स्तम्भ

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महिलायें समाज का स्तम्भ
27 Nov 2021
8 min read
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महिलायें साबित कर रही हैं कि अगर उन्हें मौका दिया जाए तो हम नामुमकिन को भी मुमकिन में बदल सकते हैं और ऐसा वो हर क्षेत्र में कर भी रही हैं। महिलायें सिर्फ एक घर या परिवार को ही रोशन नहीं करती हैं बल्कि राष्ट्र को और पूरे संसार को भी रोशन कर रही हैं। उनकी आंखों में भी एक चमक है, एक मुस्कान है जिसको वो कई बड़ी भूमिकाओं को बड़ी कुशलता के साथ निभा रही हैं।

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महिलायें आज हर क्षेत्र में अलग अलग भूमिका निभा रही हैं। आज नारी सशक्तिकरण Women Empowermwnt के बिना मानवता का विकास अधूरा है इसलिए हम कह सकते हैं कि महिलायें समाज का स्तम्भ हैं। यह एक ऐसा स्तम्भ है जो हमारे साथ मजबूती से खड़ा हुआ है और हर पल, हर क्षण हमारी रक्षा करता है। आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। फिर चाहे वो अंतरिक्ष विज्ञान हो, खेल कूद हो या फिर डिफेंस हो। हर क्षेत्र में महिलायें खुद को साबित कर रही हैं। हर रूप उनका अद्भुत है। कभी वो ममता के आँचल से प्यार उड़ेलती हैं तो कभी देश की सेवा के लिए जान देने के लिए भी तैयार रहती हैं इसलिए अब वो वक्त आ गया है कि हम सबको मिलकर उनका सम्मान करना चाहिए जिससे सब महिलायें निरंतर आगे बढ़कर ऊंचाइयों को छू सकें और राष्ट्र का नाम रोशन करें। 

महिलाओं को नजरअंदाज करना 

महिलाओं की शक्तियों से कोई भी अनजान नहीं है बावजूद इसके आज भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें महिलाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। दुनिया में कई ऐसे हिस्से हैं जहाँ उनकी भागीदारी अहम नहीं मानी जाती है। समाज में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो महिलाओं की सफलता से खुश नहीं रहते हैं इसलिए वो उन पर निरंतर अत्याचार करते हैं। जिस कारण महिलायें आज भी समाज में वो दर्जा हासिल नहीं कर पाती हैं, जो उनको मिलना चाहिए। महिलाओं को उत्पीड़न और असमानता का सामना आज भी करना पड़ता है। 

क्या है महिला सशक्तिकरण 

महिलायें जब पारिवारिक हिंसा, अत्याचार और आर्थिक अनिर्भरता, असमानता का शिकार होती हैं तो इन सबको अपने से दूर रखने के लिए ज़रूरत होती है महिला सशक्तिकरण की। महिला सशक्तिकरण से महिलाएँ आज अपने कौशल, आत्मविश्वास और शिष्टता के आधार पर दुनिया की किसी भी चुनौती को संभालने में सक्षम हैं। जितने भी बंधन महिलाओं के लिए थे उन सबके खिलाफ आवाज उठाना ही महिला सशक्तिकरण है। इसके आधार पर महिलायें समाज में परिवर्तन ला रही हैं। हर महिला आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन रही है। महिलाओं की प्रगति के लिए शिक्षा सबसे बड़ा और शक्तिशाली हथियार है। इसलिए महिला सशक्तिकरण के लिए सबसे बड़ा हथियार है बेटियों को शिक्षित करना। महिलायें शिक्षित व सशक्त बनकर अलग अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो रही हैं। निःसंदेह अब महिलाओं की शक्ति को नजरअंदाज करना नामुमकिन है जिससे अब समाज में बदलाव भी आ रहा है। 

नारी सशक्तिकरण से संबंधित संगठन और आंदोलन 

महिलाओं को आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई संगठन और आंदोलन चलाये जाते हैं। इन सबका मकसद एक ही होता है, महिलाओं को उचित सम्मान और दर्जा देना। उन पर हुए जुल्मों के खिलाफ आवाज उठाना। महिलाओं के आत्म सम्मान की रक्षा करना ही इनका ध्येय होता है। इन सबका असर दिख भी रहा है। महिलायें बिना डर के आगे आ रही हैं और महिलायें अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी अपना नाम रोशन कर रही हैं। और तो और महिलायें सबके लिए मिसाल कायम कर रही हैं। कई ऐसे संगठन हैं जैसे आजाद फाउंडेशन Azad foundation, ICRW (International Center for Research on Women), BGMS या भारतीय ग्रामीण महिला संघ। इसके अलावा जैसे आर्ट ऑफ़ लिविंग ने भी महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम आरम्भ किये हैं। जिस कारण महिलायें अपने कौशल का प्रयोग कर आगे बढ़ रही हैं। आर्ट ऑफ़ लिविंग के कार्यक्रम जैसे आर्थिक स्वतंत्रता, कन्या शिक्षा, सामाजिक सशक्तिकरण आदि हैं। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ आंदोलन भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। ये सारे कार्यक्रम सिर्फ कार्यक्रम नहीं हैं बल्कि सामाजिक संवेदना का, लोक शिक्षा का और नारी सशक्तिकरण का अभियान बन गया है। 

महिलाओं का विकास में योगदान 

महिलायें आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और अपनी उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ा रही हैं। नारी सशक्तिकरण के बिना यह संभव नहीं है। आज महिलाओं की शक्ति पर हर किसी को गर्व है। नारी सशक्तिकरण में आर्थिक स्वतंत्रता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अब महिलायें उद्यमिता के क्षेत्र में भी हाथ आजमा रही हैं। हर क्षेत्र में महिलायें अपना योगदान दे रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है महिलाओं का शिक्षित होना। महात्मा गांधी ने कहा था, जब नारी शिक्षित होती है तो दो परिवार शिक्षित होते हैं। क्योंकि जब हम नारी को शिक्षित करते हैं तो न केवल दो परिवारों बल्कि दो पीढ़ियों को शिक्षित करते हैं। महिलायें बराबर की अधिकारी हैं। वो कदम-कदम पर अपने योगदान से देश का नाम रोशन कर रही हैं। एक महिला पूरी ज़िन्दगी बेटी, बहन, पत्नी, माँ, सास, और दादी जैसे रिश्तों को ईमानदारी से तो निभाती ही है साथ ही नौकरी करके आर्थिक मदद भी करती है।