कंपनियां नाम क्यों बदलती हैं ?

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कंपनियां नाम क्यों बदलती हैं ?
03 Nov 2021
5 min read

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आज हम आपको इस बारे में बताने वाले हैं कि आखिर कंपनियां अपना नाम बदलती क्यों हैं, ऐसी क्या वजह होती है कि बड़ी-बड़ी कंपनियों को भी अपने नाम बदलने को लेकर विचार करना पड़ जाता है।

जब भी कोई किसी कंपनी की शुरुआत करता है तो नाम का चुनाव करना कोई आसान बात नहीं है। कंपनी के नाम चुनने को लेकर कई ऐसी बातें होती हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए ही कंपनी का नाम रखा जाता है। उदाहरण के रूप में समझा जाए तो कंपनी का नाम रखते वक्त सबसे पहले दिमाग में यह आता है कि इस नाम को कोई और इस्तेमाल तो नहीं कर रहा? क्या लोग इस नाम को सही तरह से बोल पाएंगे, क्या लोग इसे याद रख पाएंगे, या फिर यह कहे कि सोशल मीडिया अकाउंट और इसकी वेबसाइट बनाने को लेकर डोमेन (Domain) मिल पाएगा। इस तरह के तमाम सवाल कंपनी का नाम रखते वक्त ध्यान में आते हैं। इन कारणों के अलावा भी कई कारण होते हैं, जिनको मद्देनजर रखते हुए किसी कंपनी को नामकरण करना होता है। लेकिन यहां मुद्दा यह है किसी कंपनी के सब कुछ सोच-समझने के बाद रखे गए नाम को भी कंपनियां नाम बदलती हैं। अभी हाल ही में फेसबुक (Facebook) जैसी विख्यात कंपनी ने भी अपना नाम बदल दिया। आज हम आपको इस बारे में बताने वाले हैं कि आखिर कंपनियां अपना नाम बदलती क्यों है, ऐसी क्या वजह होती है कि बड़ी-बड़ी कंपनियों को भी अपने नाम बदलने को लेकर विचार करना पड़ जाता है।

सामाजिक दबाव बनता है कारण

कंपनियों के नाम बदलने के पीछे सामाजिक धारणाएं भी बड़ी भूमिका निभाती है। सामाजिक धारणाएं कभी भी बदल सकती है। कंपनियां हो रहे बदलाव का अनुमान लगाने की कोशिश भी करती है। अगर समय पर बदलाव नहीं किया जाता तो फिर उन्हें सामाजिक दबाव के चलते नाम में बदलाव करना पड़ता है। जैसे-जसे समय बीतता जाता है, कई नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए कंपनियों को नाम बदलना ही सही विकल्प लगता है। कई बार और भी जटिल मामलों को देखते हुए कंपनी पर दबाव होता है, जिसके चलते कंपनी को नाम बदलना पड़ता है।

नई छवि बनाकर शुरुआत के लिए बदलाव

कई बार कंपनियों में कुछ घोटाले हो जाते हैं, कई बार किसी उत्पाद की गुणवत्ता में गिरावट या फिर अन्य कई उतार-चढ़ाव के चलते कंपनी की लोकप्रियता बेहद कम हो जाती है। जिसकी वजह से कंपनी को ग्राहकों के सामने अपनी नई छवि बनाने के लिए और पूर्व में हुए नकारात्मक प्रभावों को हटाने के लिए भी कंपनी का नाम बदलना सही विकल्प लगता है। कई बार देखा जाता है कि ऑनलाइन मीडिया पर किसी कंपनी की रेटिंग काफी खराब हो जाती है और ग्राहक भी नाखुश होते हैं। जिसके चलते नई छवि बनाने हेतु कई कंपनियां पिछले कई वर्षों में नाम बदल चुकी हैं।

कंपनियों के विस्तार के बाद

जब कंपनी की शुरुआत होती है तो एक नाम चुन लिया जाता है। जो लंबे समय तक चलता है, लेकिन धीरे-धीरे जब कंपनी विस्तार की ओर बढ़ने लगती है और वह ग्राहकों को पूर्व में दी गई सेवाओं से ज्यादा सेवाएं देने लगती है, तो कंपनी को लगता है कि हमारी कंपनी का नाम हमारी आज की सेवाएं और पूर्व की सेवाओं से मेल नहीं खा रहा है, इस वजह से कंपनियों को नाम बदलने को लेकर विचार करना पड़ता है। 

उदाहरण के रूप में समझा जाए तो दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी एप्पल (Apple) और स्टारबक्स (Starbucks) ने भी अपने नाम में बदलाव किए थे। साल 2007 में एप्पल ने अपनी कंपनी के नाम में बदलाव करते हुए अपने नाम से ‘कंप्यूटर’ शब्द को हटा लिया था। वही स्टारबक्स ने साल 2011 में अपने नाम से ‘कॉफी’ शब्द को हटा लिया था। यह नाम तब बदले गए जब यह कंपनियां अव्वल दर्जे पर रहीं।

कंपनी की शुरुआत के बाद ही तुरंत नाम बदलना

कई बार देखा जाता है कि कंपनी की शुरुआत में कंपनियां एक नया नाम रखती हैं, लेकिन वह नाम उन्हें शुरुआत में ही रास नहीं आता। जिसे बदलकर वह नया नाम रखना चाहती हैं, ऐसा कई बार देखा गया है कि कई बड़ी कंपनियों ने शुरुआत में अपने नाम प्रयोग के रूप में इस्तेमाल किए, लेकिन बाद में उन्हें बदल लिया गया। उदाहरण के रूप में समझा जाए तो आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि गूगल (Google) जो इतनी प्रख्यात कंपनी है उसका नाम पहले बैकरब (Backrub) हुआ करता था। इसके अलावा इंस्टाग्राम (Instagram), जिसकी शुरुआत बॉर्बन (Bourbn) नाम से हुई थी, वही ट्विटर (Twitter) पहले (Twittr) हुआ करता था।

कॉपीराइट मसलों के चलते

कई बार कंपनियों में कॉपीराइट (Copyright) को लेकर दिक्कतें शुरू हो जाती है, जिसके चलते भी कंपनियों का नाम बदलना पड़ता है। ऐसा कई बार देखा गया है कि कंपनियां कॉपीराइट मसले के चलते अपने नाम बदलने पर मजबूर हो जाती है।

रिब्रांडिंग (Rebranding) प्रयोग के नकारात्मक प्रभाव से

कई बार ग्राहकों के सामने नई तरह से पेश होने के लिए कंपनियां नाम बदलती हैं, लेकिन हर बार नई ब्रांडिंग करने हेतु यह प्रयोग सफल नहीं होते और इन प्रयोगों के असफल होने के बाद कंपनियों को अपने नाम में बदलाव करना ही आखरी विकल्प नजर आता है।