ESG क्या है और कंपनियों को इसे क्यों अपनाना चाहिए? पूरी जानकारी

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ESG क्या है और कंपनियों को इसे क्यों अपनाना चाहिए? पूरी जानकारी
21 Aug 2026
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Environmental, Social and Governance (ESG) यानी पर्यावरण, सामाजिक और कॉर्पोरेट गवर्नेंस अब केवल Sustainability या टिकाऊ विकास से जुड़ा एक विशेष विचार नहीं रह गया है। आज यह आधुनिक व्यवसाय रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

अब कंपनियों का मूल्यांकन केवल उनकी कमाई, मुनाफे और बाजार हिस्सेदारी के आधार पर नहीं किया जाता है। यह भी देखा जाता है कि कंपनी पर्यावरण से जुड़े जोखिमों को किस तरह संभालती है, अपने कर्मचारियों और समुदायों के साथ कैसा व्यवहार करती है, हितधारकों के हितों की रक्षा कैसे करती है और अपनी शासन व्यवस्था में कितनी पारदर्शिता और ईमानदारी रखती है।

निवेशक, ग्राहक, कर्मचारी, नियामक संस्थाएं और कारोबारी साझेदार अब यह जानने में अधिक रुचि रखते हैं कि कोई कंपनी जिम्मेदारी के साथ कारोबार करते हुए लंबे समय तक मूल्य और विकास कैसे बनाए रख सकती है।

ESG इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पर्यावरण और सामाजिक मुद्दे आगे चलकर कंपनी की वित्तीय और कारोबारी गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जलवायु से जुड़ी समस्याएं सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती हैं। खराब श्रम नीतियां कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। वहीं, कमजोर कॉर्पोरेट गवर्नेंस के कारण नियामकीय कार्रवाई, जुर्माना या निवेशकों के भरोसे में कमी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

इसके दूसरी ओर, प्रभावी ESG नीतियां कंपनियों के लिए नए अवसर भी पैदा कर सकती हैं। ऊर्जा और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से लागत कम की जा सकती है। नई और टिकाऊ तकनीकों से Innovation को बढ़ावा मिल सकता है। जिम्मेदार सोर्सिंग से सप्लाई चेन अधिक मजबूत बन सकती है।

बेहतर कर्मचारी नीतियां प्रतिभाशाली लोगों को आकर्षित करने और उन्हें लंबे समय तक कंपनी से जोड़कर रखने में मदद कर सकती हैं। मजबूत ESG प्रदर्शन से कंपनियों के लिए निवेश और पूंजी तक पहुंच के अवसर भी बेहतर हो सकते हैं।

ESG की बढ़ती अहमियत का एक बड़ा उदाहरण Sustainability Reporting Standards यानी सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग मानकों का तेजी से विकास है। IFRS Foundation के 2025 के एक सर्वे के अनुसार, सर्वे में शामिल 49 देशों और क्षेत्रों ने Sustainability से जुड़ी जानकारी के खुलासे के लिए नियम लागू किए थे या उन्हें लागू करने की योजना बनाई थी।

इनमें से 47 देशों और क्षेत्रों ने ISSB Standards को अपनाया था, उन्हें अपनाने की योजना बनाई थी या किसी अन्य तरीके से उनका उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे।

भारत में भी ESG Reporting का महत्व लगातार बढ़ रहा है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने Business Responsibility and Sustainability Reporting (BRSR) यानी बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग का ढांचा लागू किया है।

इसके कारण सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अपने पर्यावरणीय, सामाजिक और गवर्नेंस से जुड़े प्रदर्शन और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

इस तरह ESG केवल पर्यावरण की रक्षा करने या सामाजिक जिम्मेदारी निभाने तक सीमित नहीं है। यह कंपनियों को जोखिमों को समझने, बेहतर निर्णय लेने, हितधारकों का विश्वास बढ़ाने और लंबे समय तक टिकाऊ विकास हासिल करने में मदद करने वाला एक महत्वपूर्ण बिजनेस फ्रेमवर्क बन चुका है।

ESG क्यों महत्वपूर्ण है? सतत विकास में इसकी भूमिका को समझें Why Is ESG Important for Businesses? Understanding Its Role in Sustainable Growth.

ESG क्या है? इसका अर्थ समझें What Is ESG? Understanding the Meaning.

ESG का पूरा नाम Environmental, Social and Governance यानी पर्यावरण, सामाजिक और शासन है। यह एक ऐसा ढांचा है, जिसकी मदद से यह समझा जाता है कि कोई कंपनी पर्यावरण से जुड़े जोखिमों, सामाजिक जिम्मेदारियों, व्यावसायिक अवसरों और अपने प्रभावों को किस तरह संभालती है।

ESG केवल कंपनी के मुनाफे और वित्तीय प्रदर्शन पर ध्यान नहीं देता। यह कंपनी के काम करने के तरीके और उसके पर्यावरण, कर्मचारियों, ग्राहकों, समुदायों, निवेशकों और अन्य हितधारकों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी समझने में मदद करता है।

Anthesis के अनुसार, ESG में स्थिरता, नैतिक प्रभाव और जोखिम प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल होते हैं। इसके तीनों स्तंभ एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इन्हें अलग-अलग नहीं देखा जाना चाहिए।

ESG का क्या मतलब है? What Does ESG Stand For?

E – Environmental यानी पर्यावरण: कंपनी का प्राकृतिक पर्यावरण के साथ कैसा संबंध है और उसकी गतिविधियों का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है।

S – Social यानी सामाजिक: कंपनी अपने कर्मचारियों, ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं और समुदायों के साथ कैसा व्यवहार करती है।

G – Governance यानी शासन: कंपनी का संचालन किस तरह किया जाता है, निर्णय कैसे लिए जाते हैं और कंपनी के नेतृत्व को किस तरह जवाबदेह बनाया जाता है।

इस तरह ESG का एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या कोई कंपनी पर्यावरण, समाज और बेहतर शासन से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए लंबे समय तक आर्थिक मूल्य तैयार कर सकती है।

ESG के तीन प्रमुख स्तंभ The Three Pillars of ESG.

1. पर्यावरणीय ESG: पृथ्वी पर प्रभाव को कम करना Environmental: Managing the Impact on the Planet.

ESG का पर्यावरणीय हिस्सा किसी कंपनी और प्राकृतिक पर्यावरण के बीच संबंध को समझता है।

किसी कंपनी का मूल्यांकन उसके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, ऊर्जा की खपत, पानी के उपयोग, कचरे के उत्पादन, प्रदूषण, संसाधनों के कुशल उपयोग, जैव विविधता पर प्रभाव और जलवायु से जुड़े जोखिमों के आधार पर किया जा सकता है। इन पहलुओं का महत्व अलग-अलग उद्योगों में अलग हो सकता है।

उदाहरण के लिए, किसी ऊर्जा कंपनी के लिए कार्बन उत्सर्जन और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव महत्वपूर्ण मुद्दे हो सकते हैं। वहीं, किसी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के लिए ऊर्जा दक्षता, कचरा प्रबंधन, पानी की खपत और प्रदूषण नियंत्रण अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

पर्यावरणीय ESG के प्रमुख कारक Key Environmental ESG Factors.

पर्यावरण से जुड़े कुछ प्रमुख ESG संकेतक इस प्रकार हैं।

  • ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन।

  • ऊर्जा की खपत और ऊर्जा दक्षता।

  • नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग।

  • पानी की खपत और जल प्रबंधन।

  • कचरे का उत्पादन और रीसाइक्लिंग।

  • वायु और जल प्रदूषण।

  • जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव।

  • जलवायु से जुड़े जोखिम।

  • प्राकृतिक संसाधनों का टिकाऊ उपयोग।

  • सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़ी पहल।

आज पर्यावरणीय जिम्मेदारी केवल कंपनी की अच्छी छवि बनाने तक सीमित नहीं है। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों की कमी, बदलते नियम और सप्लाई चेन में आने वाली बाधाएं कंपनी की लागत और कारोबार की निरंतरता को प्रभावित कर सकती हैं।

इसलिए कंपनियों के लिए पर्यावरणीय जोखिमों को समझना और उनका सही तरीके से प्रबंधन करना लंबे समय की व्यावसायिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

2. सामाजिक ESG: लोगों को केंद्र में रखना Social: Putting People at the Centre.

ESG का सामाजिक स्तंभ इस बात पर ध्यान देता है कि कंपनी का लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

इसमें कर्मचारी, ग्राहक, सप्लायर, स्थानीय समुदाय और अन्य हितधारक शामिल होते हैं। आज कंपनियों से उम्मीद की जाती है कि वे जिम्मेदार श्रम नीतियों को अपनाएं, कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करें, मानवाधिकारों का सम्मान करें और सभी लोगों के साथ उचित व्यवहार करें।

सामाजिक ESG के प्रमुख कारक Key Social ESG Factors.

सामाजिक ESG के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जा सकता है।

  • कर्मचारियों का स्वास्थ्य और सुरक्षा।

  • उचित वेतन और काम करने की अच्छी परिस्थितियां।

  • विविधता, समानता और समावेशन।

  • कर्मचारियों का प्रशिक्षण और कौशल विकास।

  • मानवाधिकारों की सुरक्षा।

  • सप्लाई चेन में श्रम मानकों का पालन।

  • ग्राहकों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा।

  • उत्पादों की सुरक्षा और गुणवत्ता।

  • समुदाय के विकास में योगदान।

  • ग्राहक संतुष्टि।

  • जिम्मेदार सोर्सिंग और खरीद प्रक्रिया।

किसी कंपनी का पर्यावरणीय रिकॉर्ड अच्छा होने के बावजूद उसकी ESG स्थिति कमजोर हो सकती है, अगर वहां कर्मचारियों की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा जाता, श्रम से जुड़े नियमों का पालन नहीं होता या ग्राहकों के अधिकारों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की जाती।

सामाजिक प्रदर्शन का असर कर्मचारियों को आकर्षित करने और उन्हें लंबे समय तक कंपनी से जोड़कर रखने पर भी पड़ सकता है। आज कई कर्मचारी ऐसी कंपनियों में काम करना पसंद करते हैं, जिनकी नीतियां निष्पक्षता, समानता, समावेशन और जिम्मेदार व्यावसायिक व्यवहार को महत्व देती हैं।

3. गवर्नेंस ESG: जिम्मेदार नेतृत्व और पारदर्शिता Governance: Building Responsible Leadership.

गवर्नेंस का अर्थ कंपनी को चलाने और उसे जवाबदेह बनाए रखने वाली व्यवस्थाओं, संरचनाओं और प्रक्रियाओं से है।

अच्छा गवर्नेंस प्रभावी ESG व्यवस्था की नींव माना जाता है, क्योंकि इससे यह तय होता है कि कंपनी में फैसले किस तरह लिए जाएंगे, जोखिमों की निगरानी कौन करेगा और अलग-अलग जिम्मेदारियां किस तरह तय की जाएंगी।

मजबूत गवर्नेंस यह सुनिश्चित करने में भी मदद कर सकता है कि कंपनी की ESG नीतियां केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें वास्तविक कारोबारी फैसलों में भी शामिल किया जाए।

गवर्नेंस ESG के प्रमुख कारक Key Governance ESG Factors.

गवर्नेंस से जुड़े प्रमुख ESG पहलुओं में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं।

  • बोर्ड का गठन और स्वतंत्रता।

  • अधिकारियों और वरिष्ठ प्रबंधन का पारिश्रमिक।

  • व्यावसायिक नैतिकता।

  • भ्रष्टाचार विरोधी नीतियां।

  • जोखिम प्रबंधन।

  • शेयरधारकों के अधिकार।

  • पारदर्शिता।

  • नियामकीय नियमों का पालन।

  • ऑडिट और वित्तीय निगरानी।

  • डेटा गवर्नेंस।

  • साइबर सुरक्षा की निगरानी।

  • व्हिसलब्लोअर व्यवस्था।

मजबूत गवर्नेंस से कंपनी में गलत गतिविधियों और अनैतिक व्यवहार को रोकने में मदद मिल सकती है। यह यह भी सुनिश्चित कर सकता है कि कंपनी की स्थिरता और ESG से जुड़ी प्रतिबद्धताएं केवल अलग-अलग कॉर्पोरेट योजनाओं का हिस्सा न रहें, बल्कि कंपनी की वास्तविक व्यावसायिक रणनीति और निर्णय प्रक्रिया में शामिल हों।

कंपनियों के लिए ESG क्यों महत्वपूर्ण है। Why Is ESG Important for Businesses.

ESG महत्वपूर्ण है, क्योंकि पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस से जुड़े मुद्दे किसी कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, प्रतिष्ठा, जोखिम से निपटने की क्षमता और विकास को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

Anthesis के अनुसार, कंपनियों के लिए ESG को अपनाने के कई व्यावसायिक कारण हैं। इनमें जोखिम प्रबंधन, नियमों का पालन, हितधारकों की अपेक्षाएं, स्थिरता, पूंजी तक पहुंच और कामकाज में सुधार जैसे पहलू शामिल हैं।

ESG कंपनियों को जोखिम पहचानने और उन्हें संभालने में मदद करता है। ESG Helps Businesses Identify and Manage Risks.

हर व्यवसाय को किसी न किसी तरह के जोखिम का सामना करना पड़ता है। इनमें कुछ जोखिम वित्तीय होते हैं, जबकि कुछ पर्यावरण, समाज और गवर्नेंस से जुड़े हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि कोई कंपनी ऐसे उत्पादन पर निर्भर है जिसमें बहुत अधिक पानी की जरूरत होती है, तो पानी की कमी उसके कारोबार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। इसी तरह, यदि किसी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की सप्लाई चेन में श्रम मानकों का सही तरीके से पालन नहीं होता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई या प्रतिष्ठा को नुकसान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

अगर किसी कंपनी की आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था कमजोर है, तो धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का जोखिम भी बढ़ सकता है।

ESG कंपनियों को ऐसे जोखिमों को पहले से पहचानने और उन्हें व्यापक एंटरप्राइज रिस्क मैनेजमेंट यानी कारोबारी जोखिम प्रबंधन का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

इससे कंपनियां केवल समस्या आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय संभावित जोखिमों के लिए पहले से तैयारी कर सकती हैं।

ESG से कामकाज की दक्षता बेहतर हो सकती है। ESG Can Improve Operational Efficiency.

सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी कई पहल कंपनियों को सीधे तौर पर कारोबारी लाभ भी दे सकती हैं।

उदाहरण के लिए, ऊर्जा की खपत कम करने से बिजली का खर्च घट सकता है। बेहतर कचरा प्रबंधन से सामग्री की बर्बादी कम हो सकती है। पानी का अधिक कुशल उपयोग परिचालन लागत को कम करने में मदद कर सकता है। इसी तरह, टिकाऊ लॉजिस्टिक्स व्यवस्था से ईंधन की खपत कम होने की संभावना रहती है।

इसलिए ESG को केवल कंपनी पर पड़ने वाली अतिरिक्त लागत के रूप में नहीं देखना चाहिए। कई मामलों में ESG कंपनियों को अपनी प्रक्रियाओं में मौजूद कमियों को पहचानने और काम करने के अधिक प्रभावी तरीके विकसित करने में मदद कर सकता है।

इस तरह ESG पहल एक ओर पर्यावरण और समाज के लिए बेहतर परिणाम दे सकती हैं, तो दूसरी ओर कंपनी की लागत और संसाधनों के उपयोग को अधिक कुशल बनाने में भी योगदान दे सकती हैं।

ESG से ब्रांड की प्रतिष्ठा मजबूत हो सकती है। ESG Can Strengthen Brand Reputation.

प्रतिष्ठा किसी भी व्यवसाय की महत्वपूर्ण संपत्ति है। जो कंपनियां जिम्मेदार तरीके से काम करती हैं, वे ग्राहकों, कर्मचारियों, समुदायों और कारोबारी साझेदारों के साथ अपने संबंध मजबूत कर सकती हैं।

इसके विपरीत, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां, कर्मचारियों से जुड़े विवाद या गवर्नेंस में गंभीर कमियां कंपनी की सार्वजनिक छवि और लोगों के भरोसे को तेजी से नुकसान पहुंचा सकती हैं।

आज ग्राहक और अन्य हितधारक यह जानने में अधिक रुचि रखते हैं कि कोई कंपनी केवल कितना मुनाफा कमा रही है, बल्कि वह कारोबार किस तरीके से कर रही है।

हालांकि, कंपनियों के लिए यह जरूरी है कि उनके ESG दावों के पीछे ठोस और मापने योग्य प्रमाण हों। यदि कोई कंपनी अपनी पर्यावरणीय या सामाजिक उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती है, तो उस पर ग्रीनवॉशिंग (Greenwashing) का आरोप लग सकता है।

ग्रीनवॉशिंग का अर्थ ऐसी स्थिति से है, जब कोई कंपनी अपने उत्पादों या गतिविधियों को वास्तविकता से अधिक पर्यावरण-अनुकूल या टिकाऊ बताती है। इससे कंपनी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंच सकता है और ESG के जरिए बनाए गए भरोसे पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

ESG पूंजी तक पहुंच को प्रभावित कर सकता है। ESG Can Influence Access to Capital.

निवेशक कंपनियों का मूल्यांकन करते समय पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस से जुड़े जोखिमों और अवसरों को भी तेजी से ध्यान में रख रहे हैं।

दुनिया में सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट यानी टिकाऊ निवेश का क्षेत्र अब पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हो रहा है। कंपनियों की ESG से जुड़ी जानकारी और उनके स्थिरता प्रदर्शन को समझने के लिए अधिक स्पष्ट और तुलनीय डेटा की जरूरत महसूस की जा रही है।

Global Sustainable Investment Alliance (GSIA) की नवीनतम समीक्षा के अनुसार, टिकाऊ और जिम्मेदार निवेश धीरे-धीरे एक सीमित या विशेष निवेश पद्धति से आगे बढ़कर व्यापक स्तर पर महत्वपूर्ण विचार का विषय बन गया है। हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक स्थिरता से जुड़ी चुनौतियों की तुलना में अभी काफी प्रगति की आवश्यकता है।

बेहतर ESG जानकारी निवेशकों को ऐसे जोखिमों को समझने में मदद कर सकती है, जो पारंपरिक वित्तीय रिपोर्ट में तुरंत दिखाई नहीं देते हैं।

उदाहरण के लिए, किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति वर्तमान में मजबूत हो सकती है, लेकिन यदि वह लंबे समय से जलवायु जोखिम, कमजोर सप्लाई चेन, श्रम विवाद या खराब गवर्नेंस जैसी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है, तो भविष्य में इनका आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।

इसलिए ESG से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी निवेशकों को कंपनी के संभावित दीर्घकालिक जोखिमों और अवसरों को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकती है।

ESG और बदलता नियामकीय माहौल। ESG and the Changing Regulatory Landscape.

ESG के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी रिपोर्टिंग और डिस्क्लोजर आवश्यकताओं का बढ़ना है।

International Sustainability Standards Board (ISSB) ने IFRS S1 और IFRS S2 मानक विकसित किए हैं। इनका उद्देश्य सस्टेनेबिलिटी से जुड़े वित्तीय खुलासों के लिए एक वैश्विक आधार तैयार करना है।

IFRS Foundation के अनुसार, इन मानकों का उद्देश्य पूंजी बाजारों के लिए अधिक सुसंगत और तुलनीय जानकारी उपलब्ध कराना है।

दुनिया के कई देशों में सरकारें और नियामक संस्थाएं सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग से जुड़े नियमों को लागू करने, अपनाने या उन पर विचार करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

IFRS Foundation के 2025 के सर्वे के अनुसार, जवाब देने वाले 49 न्यायक्षेत्रों में से 47 ने ISSB Standards को अपनाया था, अपनाने की योजना बनाई थी या किसी अन्य तरीके से उनका उपयोग करने की दिशा में कदम उठाए थे। इनमें 76 प्रतिशत ने पूर्ण रूप से इन मानकों को अपनाने का लक्ष्य भी बताया था।

यह बदलाव दिखाता है कि ESG अब केवल स्वैच्छिक कॉर्पोरेट पहल तक सीमित नहीं रह रहा है। कई बाजारों में यह तेजी से रिपोर्टिंग, जोखिम प्रबंधन और कारोबारी रणनीति से जुड़ा विषय बन रहा है।

ESG तेजी से डेटा आधारित हो रहा है। ESG Is Becoming More Data-Driven.

ESG रिपोर्टिंग और नियामकीय आवश्यकताओं के बढ़ने के साथ कंपनियों के लिए भरोसेमंद ESG डेटा जुटाना और उसका सही प्रबंधन करना अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

कंपनियों को अपने कारोबार के अनुसार उत्सर्जन, ऊर्जा खपत, पानी के इस्तेमाल, कर्मचारियों से जुड़े आंकड़ों, सप्लाई चेन, गवर्नेंस प्रक्रियाओं और अन्य महत्वपूर्ण स्थिरता से जुड़े पहलुओं की जानकारी एकत्र करनी पड़ सकती है।

इसका मतलब है कि ESG अब कंपनी के केवल सस्टेनेबिलिटी विभाग तक सीमित विषय नहीं रह गया है। यह कंपनी के कई महत्वपूर्ण कारोबारी क्षेत्रों से जुड़ रहा है।

ESG किन कारोबारी क्षेत्रों से जुड़ रहा है। Business Areas Increasingly Connected With ESG.

ESG का संबंध तेजी से इन क्षेत्रों से जुड़ रहा है।

  • डेटा प्रबंधन।

  • आंतरिक नियंत्रण।

  • वित्तीय रिपोर्टिंग।

  • जोखिम प्रबंधन।

  • ऑडिट और स्वतंत्र आश्वासन।

  • कॉर्पोरेट रणनीति।

  • बोर्ड स्तर की निगरानी।

इस तरह ESG केवल पर्यावरण संरक्षण या सामाजिक जिम्मेदारी का विषय नहीं है। यह आधुनिक व्यवसायों के लिए जोखिम, डेटा, वित्त, संचालन, रणनीति और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को एक साथ जोड़ने वाला महत्वपूर्ण ढांचा बनता जा रहा है।

भारत में ESG: BRSR को समझें। ESG in India: Understanding BRSR.

भारत ने कंपनियों की सस्टेनेबिलिटी और ESG से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से सामने लाने के लिए अपना एक रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क विकसित किया है, जिसे SEBI का Business Responsibility and Sustainability Report यानी BRSR कहा जाता है।

BRSR को बाजार पूंजीकरण के आधार पर भारत की शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अनिवार्य किया गया है। SEBI के अनुसार, BRSR पहले इस्तेमाल किए जाने वाले Business Responsibility Report की तुलना में अधिक मात्रात्मक और परिणाम-केंद्रित व्यवस्था है।

SEBI ने BRSR Core भी पेश किया है। इसमें कुछ महत्वपूर्ण प्रमुख प्रदर्शन संकेतक यानी Key Performance Indicators (KPIs) शामिल हैं। इसका उद्देश्य कंपनियों द्वारा दी जाने वाली ESG जानकारी की विश्वसनीयता और गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

शुरुआत में BRSR Core को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत वित्त वर्ष 2023-24 में शीर्ष 150 सूचीबद्ध कंपनियों से शुरुआत करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 तक शीर्ष 1,000 कंपनियों को इसके दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया था।

मार्च 2025 में SEBI ने कारोबार करने में आसानी यानी Ease of Doing Business को बढ़ावा देने के लिए कुछ बदलाव भी किए। इनमें कंपनियों और उनकी वैल्यू-चेन से जुड़े साझेदारों को माप और रिपोर्टिंग की व्यवस्था तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय देने जैसे कदम शामिल थे।

भारतीय कंपनियों के लिए BRSR क्यों महत्वपूर्ण है। Why BRSR Matters to Indian Businesses.

BRSR महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कंपनियों को अपनी सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी जानकारी को अधिक स्पष्ट और मापने योग्य तरीके से प्रस्तुत करने पर जोर देता है।

भारत की सूचीबद्ध कंपनियों के लिए ESG अब केवल पर्यावरण या सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय नहीं रह गया है। यह तेजी से नियामकीय रिपोर्टिंग, निवेशकों के साथ संवाद और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़ रहा है।

BRSR का प्रभाव कंपनी की अपनी गतिविधियों तक ही सीमित नहीं हो सकता है। किसी कंपनी की सप्लाई चेन, विक्रेता, आपूर्तिकर्ता और अन्य वैल्यू-चेन पार्टनर भी उसके कुल ESG प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।

इसलिए कंपनियों को अपनी ESG रणनीति बनाते समय केवल अपने कार्यालय और उत्पादन इकाइयों पर ध्यान देने के बजाय पूरी वैल्यू चेन को समझना जरूरी होता जा रहा है।

ESG रिपोर्टिंग क्या है। What Is ESG Reporting.

ESG रिपोर्टिंग वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से कोई कंपनी अपने पर्यावरणीय, सामाजिक और गवर्नेंस प्रदर्शन, जोखिमों और अवसरों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करती है।

एक अच्छी ESG रिपोर्ट का उद्देश्य केवल कंपनी की सकारात्मक पहलों को दिखाना नहीं होना चाहिए। इसमें ऐसी विश्वसनीय, प्रासंगिक और तुलनीय जानकारी होनी चाहिए, जिससे निवेशक, नियामक और अन्य हितधारक कंपनी के ESG प्रदर्शन को बेहतर तरीके से समझ सकें।

Anthesis के अनुसार, ESG रिपोर्टिंग में पर्यावरण से जुड़े क्षेत्रों में उत्सर्जन, ऊर्जा और पानी के उपयोग जैसे मात्रात्मक और गुणात्मक आंकड़े शामिल हो सकते हैं।

सामाजिक पहलुओं में कर्मचारियों, कार्यस्थल और समुदाय से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है। वहीं, गवर्नेंस के अंतर्गत बोर्ड की संरचना, वरिष्ठ अधिकारियों का पारिश्रमिक, नैतिक व्यावसायिक व्यवहार और अन्य कॉर्पोरेट प्रशासन से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी जा सकती है।

इस प्रकार ESG रिपोर्टिंग कंपनी की सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी गतिविधियों को व्यवस्थित और समझने योग्य तरीके से प्रस्तुत करने का माध्यम बनती है।

ESG रिपोर्टिंग क्यों महत्वपूर्ण है। Why ESG Reporting Matters.

प्रभावी ESG रिपोर्टिंग कंपनियों और उनके हितधारकों के लिए कई तरह से उपयोगी हो सकती है।

  • निवेशकों के लिए: यह उन्हें सस्टेनेबिलिटी से जुड़े संभावित जोखिमों और अवसरों का आकलन करने में मदद कर सकती है।

  • नियामकों के लिए: इससे कंपनियों द्वारा नियमों और आवश्यकताओं के पालन की निगरानी आसान हो सकती है।

  • ग्राहकों के लिए: ग्राहक कंपनी की पर्यावरणीय और सामाजिक नीतियों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।

  • कर्मचारियों के लिए: वे यह जान सकते हैं कि कंपनी कार्यस्थल, समाज और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को कितना महत्व देती है।

  • बोर्ड के लिए: ESG डेटा के माध्यम से कंपनी के प्रदर्शन और जोखिमों की निगरानी बेहतर हो सकती है।

  • कंपनी के लिए: रिपोर्टिंग से उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जहां सुधार की आवश्यकता है।

ESG जानकारी को अधिक तुलनीय और भरोसेमंद बनाने की बढ़ती जरूरत उन अंतरराष्ट्रीय मानकों और फ्रेमवर्क के महत्व को भी बढ़ा रही है, जो कंपनियों को सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी जानकारी एक समान और व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने में मदद करते हैं।

प्रमुख ESG रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क और मानक। Major ESG Reporting Frameworks and Standards.

दुनिया भर में कंपनियों को ESG और सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग से जुड़े कई अलग-अलग फ्रेमवर्क और मानकों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें से कुछ प्रमुख फ्रेमवर्क निम्नलिखित हैं।

ग्लोबल रिपोर्टिंग इनिशिएटिव यानी GRI। Global Reporting Initiative (GRI).

Global Reporting Initiative यानी GRI दुनिया में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क है।

यह किसी संगठन के अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और लोगों पर पड़ने वाले प्रभावों से जुड़ी जानकारी को रिपोर्ट करने पर ध्यान देता है।

GRI कंपनियों को यह समझने और बताने में मदद करता है कि उनकी गतिविधियों का विभिन्न हितधारकों और व्यापक समाज पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

सस्टेनेबिलिटी अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स बोर्ड यानी SASB। Sustainability Accounting Standards Board (SASB).

Sustainability Accounting Standards Board यानी SASB ने उद्योग-विशिष्ट सस्टेनेबिलिटी मानक विकसित किए थे।

इन मानकों का मुख्य उद्देश्य ऐसे सस्टेनेबिलिटी मुद्दों पर ध्यान देना था, जो किसी विशेष उद्योग में निवेशकों के लिए वित्तीय रूप से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

SASB के मानकों को अब IFRS Foundation के व्यापक सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग ढांचे से जुड़े कार्य में शामिल किया गया है।

इसका उद्देश्य अलग-अलग उद्योगों में महत्वपूर्ण ESG और सस्टेनेबिलिटी मुद्दों को अधिक व्यवस्थित तरीके से समझने में मदद करना है।

इंटरनेशनल सस्टेनेबिलिटी स्टैंडर्ड्स बोर्ड यानी ISSB। International Sustainability Standards Board (ISSB).

International Sustainability Standards Board यानी ISSB, IFRS Foundation के अंतर्गत काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी वित्तीय जानकारी के लिए एक वैश्विक आधार तैयार करना है।

ISSB ने दो प्रमुख मानक विकसित किए हैं।

  • IFRS S1: यह सामान्य सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी वित्तीय जानकारी पर केंद्रित है।

  • IFRS S2: यह विशेष रूप से जलवायु से जुड़ी वित्तीय जानकारी और खुलासों पर केंद्रित है।

IFRS Foundation इन मानकों के कार्यान्वयन के लिए मार्गदर्शन विकसित करना जारी रखता है और यह भी देखता है कि अलग-अलग देश और क्षेत्र इन मानकों को किस तरह अपना रहे हैं।

इसके वर्तमान क्षेत्राधिकार प्रोफाइल से पता चलता है कि दुनिया के कई बाजारों में इन मानकों को अपनाने और लागू करने की दिशा में प्रगति हो रही है।

जलवायु से जुड़े वित्तीय खुलासों पर TCFD की भूमिका। Task Force on Climate-related Financial Disclosures.

Task Force on Climate-related Financial Disclosures यानी TCFD की सिफारिशों ने कंपनियों द्वारा जलवायु से जुड़े वित्तीय जोखिमों और अवसरों की रिपोर्टिंग को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इन सिफारिशों ने कंपनियों को यह समझने में मदद की कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों को कॉर्पोरेट रिपोर्टिंग और वित्तीय निर्णयों में किस तरह शामिल किया जा सकता है।

IFRS Foundation के अनुसार, TCFD की सिफारिशों को ISSB Standards में शामिल कर लिया गया है।

इससे जलवायु से जुड़े खुलासों के लिए वैश्विक स्तर पर अधिक व्यवस्थित और तुलनीय दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिली है।

यूरोपियन सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स यानी ESRS। European Sustainability Reporting Standards (ESRS).

European Sustainability Reporting Standards यानी ESRS यूरोपीय संघ के Corporate Sustainability Reporting Directive (CSRD) के तहत सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग में मदद करते हैं।

ESRS कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी जानकारी को अधिक व्यवस्थित और मानकीकृत बनाने की दिशा में यूरोप में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इन मानकों के माध्यम से कंपनियों से पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी उपलब्ध कराने की अपेक्षा की जाती है।

इस तरह BRSR, GRI, SASB, ISSB और ESRS जैसे अलग-अलग फ्रेमवर्क और मानक कंपनियों को ESG जानकारी को व्यवस्थित करने और हितधारकों के सामने अधिक स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत करने में मदद करते हैं। हालांकि, किसी कंपनी के लिए लागू आवश्यकताएं उसके देश, उद्योग, आकार, सूचीबद्ध स्थिति और संबंधित नियामकीय नियमों पर निर्भर कर सकती हैं।

प्रभावी ESG रणनीति कैसे तैयार करें। How Businesses Can Build an Effective ESG Strategy.

ESG को केवल कंपनी की छवि सुधारने या प्रचार से जुड़ी गतिविधि नहीं मानना चाहिए। इसे कंपनी की मुख्य व्यावसायिक रणनीति का हिस्सा बनाना अधिक प्रभावी होता है। Anthesis के अनुसार, एक अच्छी ESG रणनीति में महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान, हितधारकों से बातचीत, लक्ष्य तय करना, डेटा एकत्र करना, व्यावसायिक फैसलों में ESG को शामिल करना, पारदर्शिता, रिपोर्टिंग और लगातार सुधार जैसे कदम शामिल होने चाहिए।

चरण 1: महत्वपूर्ण ESG मुद्दों की पहचान करें। Identify Material ESG Issues.

हर कंपनी के लिए ESG से जुड़े मुद्दे एक जैसे महत्वपूर्ण नहीं होते। उदाहरण के लिए, एक खनन कंपनी, टेक्नोलॉजी कंपनी, बैंक और खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनी की ESG प्राथमिकताएं अलग-अलग हो सकती हैं।

कंपनियों को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और गवर्नेंस से जुड़े कौन से मुद्दे उनके कारोबार और हितधारकों पर सबसे अधिक प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान करने से कंपनी अपने संसाधनों और प्रयासों को सही क्षेत्रों पर केंद्रित कर सकती है।

चरण 2: हितधारकों के साथ संवाद करें। Engage Stakeholders.

किसी भी ESG रणनीति को तैयार करते समय कंपनी को अपने प्रमुख हितधारकों की अपेक्षाओं को समझना चाहिए। इनमें शामिल हो सकते हैं।

  • निवेशक।

  • कर्मचारी।

  • ग्राहक।

  • सप्लायर।

  • स्थानीय समुदाय।

  • नियामक संस्थाएं।

  • बिजनेस पार्टनर।

हितधारकों के साथ नियमित संवाद से कंपनियों को ऐसे जोखिमों और अवसरों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जिन्हें केवल आंतरिक विश्लेषण के माध्यम से पहचानना मुश्किल हो सकता है।

चरण 3: मापने योग्य ESG लक्ष्य निर्धारित करें। Set Measurable ESG Goals.

सिर्फ यह कहना कि कंपनी को अधिक टिकाऊ या जिम्मेदार बनना है, पर्याप्त नहीं है। ESG प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए स्पष्ट और मापने योग्य लक्ष्य तय करना जरूरी है।

कंपनियां ऊर्जा की खपत कम करने, कार्यस्थल की सुरक्षा बेहतर बनाने, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने, कर्मचारियों में विविधता बढ़ाने या सप्लाई चेन में उत्पादों और सामग्रियों की जानकारी को बेहतर तरीके से ट्रैक करने जैसे लक्ष्य निर्धारित कर सकती हैं।

इन लक्ष्यों के साथ समयसीमा और जिम्मेदार अधिकारियों या टीमों को भी निर्धारित करना चाहिए। इससे कंपनी अपनी प्रगति को नियमित रूप से माप सकती है।

चरण 4: भरोसेमंद ESG डेटा एकत्र करें। Collect Reliable ESG Data.

एक प्रभावी ESG रणनीति के लिए सही और भरोसेमंद डेटा बहुत जरूरी है। कंपनियों को ESG से संबंधित जानकारी एकत्र करने, उसकी जांच करने, सुरक्षित रखने और रिपोर्ट करने के लिए स्पष्ट प्रक्रियाएं बनानी चाहिए।

उदाहरण के लिए, कंपनी को ऊर्जा उपयोग, कार्बन उत्सर्जन, पानी की खपत, कर्मचारियों की सुरक्षा, विविधता, सप्लाई चेन और गवर्नेंस से जुड़े आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से रिकॉर्ड करना पड़ सकता है।

यदि डेटा अधूरा या गलत है, तो इससे कंपनी के आंतरिक फैसलों के साथ-साथ बाहरी ESG रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो सकती है।

चरण 5: कारोबारी फैसलों में ESG को शामिल करें। Integrate ESG Into Business Decisions.

ESG को कंपनी के रोजमर्रा के व्यावसायिक फैसलों से अलग नहीं रखा जाना चाहिए। इसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल किया जा सकता है।

  • निवेश से जुड़े फैसले।

  • नए उत्पादों का विकास।

  • खरीद और प्रोक्योरमेंट।

  • कर्मचारियों की नियुक्ति।

  • सप्लाई चेन का प्रबंधन।

  • जोखिम का आकलन।

  • पूंजी का आवंटन।

  • विलय और अधिग्रहण।

इस तरह ESG केवल एक अलग सस्टेनेबिलिटी प्रोग्राम नहीं रहता, बल्कि कंपनी के काम करने के तरीके का हिस्सा बन जाता है।

चरण 6: पारदर्शी ESG रिपोर्टिंग करें। Report Transparently.

कंपनियों को अपनी ESG प्रगति के साथ-साथ सामने आने वाली चुनौतियों की जानकारी भी पारदर्शी तरीके से देनी चाहिए।

पारदर्शी रिपोर्टिंग कंपनी की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद कर सकती है। हितधारक आमतौर पर उन कंपनियों पर अधिक भरोसा कर सकते हैं जो अपनी कमियों और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों को भी स्वीकार करती हैं, बजाय इसके कि वे खुद को पूरी तरह सफल और समस्या-मुक्त दिखाने की कोशिश करें।

ESG रिपोर्ट में केवल अच्छी उपलब्धियों को दिखाने के बजाय संबंधित और प्रमाणित जानकारी देना अधिक महत्वपूर्ण है।

चरण 7: नियमित निगरानी करें और सुधार करते रहें। Monitor and Improve.

ESG कोई एक बार पूरा होने वाला प्रोजेक्ट नहीं है। जलवायु से जुड़े जोखिम, नियम-कानून, नई तकनीक, ग्राहकों की अपेक्षाएं और बाजार की परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं।

इसलिए कंपनियों को समय-समय पर अपनी ESG प्राथमिकताओं और प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए। बदलती परिस्थितियों के अनुसार ESG रणनीति में आवश्यक बदलाव करना और लगातार सुधार करना लंबे समय में अधिक प्रभावी हो सकता है।

कंपनियों के सामने ESG की सामान्य चुनौतियां। Common ESG Challenges for Businesses.

ESG का महत्व तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसे लागू करना हर कंपनी के लिए आसान नहीं होता। कई व्यवसायों को डेटा, लागत, नियमों और सप्लाई चेन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

भरोसेमंद डेटा की कमी। Lack of Reliable Data.

कई कंपनियों के लिए अलग-अलग स्थानों, सप्लायरों और सहायक कंपनियों से सटीक ESG डेटा एकत्र करना मुश्किल होता है।

बड़े संगठनों में अलग-अलग विभागों और स्थानों से जानकारी आती है। यदि डेटा एक समान तरीके से एकत्र और सत्यापित नहीं किया जाता है, तो पूरी ESG रिपोर्ट की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

अलग-अलग रिपोर्टिंग आवश्यकताएं। Different Reporting Requirements.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करने वाली कंपनियों को अलग-अलग देशों और बाजारों में अलग-अलग ESG रिपोर्टिंग नियमों का सामना करना पड़ सकता है।

इन नियमों को समझना, सही डेटा तैयार करना और अलग-अलग आवश्यकताओं के अनुसार रिपोर्ट करना कंपनियों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकता है।

ESG लागू करने की लागत। Cost of Implementation.

ESG व्यवस्था तैयार करने के लिए कंपनियों को डेटा सिस्टम, विशेषज्ञों, मूल्यांकन प्रक्रियाओं, प्रशिक्षण और कभी-कभी स्वतंत्र आश्वासन या जांच पर निवेश करना पड़ सकता है।

बड़ी कंपनियों के लिए यह निवेश संभालना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन छोटी और मध्यम कंपनियों के लिए ESG व्यवस्था विकसित करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ग्रीनवॉशिंग का जोखिम। Greenwashing Risk.

यदि कंपनी अपने पर्यावरण या सस्टेनेबिलिटी प्रदर्शन के बारे में ऐसे दावे करती है जिनके समर्थन में पर्याप्त और मापने योग्य प्रमाण नहीं हैं, तो उस पर ग्रीनवॉशिंग का आरोप लग सकता है।

ग्रीनवॉशिंग से कंपनी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए ESG से जुड़े दावे वास्तविक आंकड़ों, स्पष्ट लक्ष्यों और प्रमाणित जानकारी पर आधारित होने चाहिए।

सप्लाई चेन की जटिलता।

किसी कंपनी का पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव केवल उसके अपने कार्यालयों या कारखानों तक सीमित नहीं रहता। उसके सप्लायर, ठेकेदार और अन्य वैल्यू-चेन पार्टनर भी ESG प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, किसी कंपनी के पास अच्छी श्रम नीतियां हो सकती हैं, लेकिन उसके सप्लायर के यहां खराब कार्य परिस्थितियां या श्रम मानकों का उल्लंघन हो सकता है। इसलिए कंपनियों के लिए अपनी पूरी सप्लाई चेन में ESG मानकों को समझना और लागू करना increasingly महत्वपूर्ण हो रहा है।

ESG केवल पर्यावरणीय स्थिरता तक सीमित नहीं है। ESG Is More Than Environmental Sustainability.

ESG को लेकर एक आम गलतफहमी यह है कि इसका अर्थ केवल पर्यावरण को बचाना या "ग्रीन" बनना है। पर्यावरण से जुड़े मुद्दे ESG का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन ESG का दायरा इससे कहीं अधिक व्यापक है।

ESG के तीनों स्तंभ एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इनमें Environmental यानी पर्यावरण, Social यानी सामाजिक जिम्मेदारी और Governance यानी सुशासन शामिल हैं।

उदाहरण के लिए, यदि कोई कंपनी अपने कार्बन उत्सर्जन को कम कर रही है, लेकिन उसके कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल नहीं है, तो उसकी ESG स्थिति पूरी तरह मजबूत नहीं मानी जा सकती। इसी तरह, किसी कंपनी की कर्मचारी नीतियां अच्छी हो सकती हैं, लेकिन यदि उसमें भ्रष्टाचार रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था या मजबूत गवर्नेंस नहीं है, तो उसके ESG प्रदर्शन में महत्वपूर्ण कमियां बनी रहेंगी।

इसलिए ESG की वास्तविक ताकत इन तीनों पहलुओं को एक साथ समझने में है। एक प्रभावी ESG रणनीति कंपनी को पर्यावरणीय प्रभाव कम करने, लोगों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार करने और मजबूत तथा पारदर्शी शासन व्यवस्था विकसित करने में मदद कर सकती है।

ESG, सस्टेनेबिलिटी और CSR में क्या अंतर है।ESG, Sustainability and CSR: What Is the Difference.

ESG, सस्टेनेबिलिटी और CSR आपस में जुड़े हुए विचार हैं, लेकिन तीनों का अर्थ एक जैसा नहीं है।

सस्टेनेबिलिटी यानी स्थिरता एक व्यापक अवधारणा है। इसका संबंध आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक व्यवस्थाओं को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाए रखने से है।

CSR यानी Corporate Social Responsibility यानी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी आमतौर पर समाज और समुदाय के प्रति कंपनी की जिम्मेदारियों तथा उसके द्वारा की जाने वाली सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा होता है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सामुदायिक विकास और सामाजिक कल्याण जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।

वहीं, ESG यानी Environmental, Social and Governance कंपनियों के पर्यावरणीय, सामाजिक और गवर्नेंस से जुड़े पहलुओं को व्यवस्थित तरीके से समझने और मापने का एक ढांचा है। इसमें खास तौर पर उन मुद्दों पर ध्यान दिया जाता है जो कंपनी के कारोबार, जोखिम, अवसर, प्रदर्शन और हितधारकों को प्रभावित कर सकते हैं।

व्यवहार में कोई कंपनी इन तीनों अवधारणाओं का इस्तेमाल अपनी व्यापक जिम्मेदार और टिकाऊ कारोबारी रणनीति के हिस्से के रूप में कर सकती है। CSR सामाजिक जिम्मेदारी पर अधिक केंद्रित हो सकता है, जबकि ESG कंपनी के पर्यावरणीय, सामाजिक और गवर्नेंस प्रदर्शन को व्यापक रूप से समझने और मापने में मदद करता है।

छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए ESG का क्या मतलब है।What Does ESG Mean for Small and Medium Businesses.

ESG केवल बड़ी कंपनियों या बहुराष्ट्रीय संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय भी ESG से जुड़े व्यावहारिक कदम उठाकर अपने कारोबार को बेहतर और अधिक टिकाऊ बना सकते हैं।

छोटी कंपनियां अपने स्तर पर कई आसान उपाय अपना सकती हैं, जैसे।

  • अनावश्यक बिजली और ऊर्जा की खपत कम करना।

  • कचरे को कम करना और उसका बेहतर प्रबंधन करना।

  • कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा को मजबूत करना।

  • कर्मचारियों के लिए बेहतर और निष्पक्ष नीतियां बनाना।

  • ग्राहकों की व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा करना।

  • सप्लायर और विक्रेताओं के लिए बेहतर मानक तय करना।

  • ईमानदार और नैतिक कारोबारी प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना।

  • जरूरी सस्टेनेबिलिटी आंकड़ों को रिकॉर्ड और ट्रैक करना।

छोटी कंपनियों को बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों जैसी विस्तृत ESG रिपोर्टिंग व्यवस्था की जरूरत हमेशा नहीं होती। फिर भी, शुरुआत से ही अच्छी ESG प्रक्रियाएं अपनाना उनके लिए फायदेमंद हो सकता है।

जैसे-जैसे कारोबार बढ़ता है, ग्राहकों, निवेशकों, बड़े कॉर्पोरेट ग्राहकों और सप्लाई-चेन पार्टनर्स की ESG से जुड़ी अपेक्षाएं भी बढ़ सकती हैं। यदि कोई कंपनी पहले से ही जिम्मेदार कारोबारी प्रक्रियाओं को अपना रही है, तो उसके लिए इन बदलती अपेक्षाओं को पूरा करना आसान हो सकता है।

कारोबार में ESG का भविष्य

भविष्य में ESG के मुख्य कारोबारी रणनीति से और अधिक जुड़ने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग के लिए बनाए जा रहे मानक यह संकेत देते हैं कि ESG से संबंधित जानकारी को अधिक व्यवस्थित, विश्वसनीय और तुलनीय बनाने पर जोर बढ़ रहा है।

IFRS Foundation भी अलग-अलग देशों में ISSB Standards को लागू करने में सहायता देने के साथ-साथ प्रकृति और जैव विविधता से जुड़े जोखिमों तथा अवसरों जैसे नए क्षेत्रों पर काम कर रहा है।

आने वाले वर्षों में कंपनियों का ध्यान कई महत्वपूर्ण ESG क्षेत्रों पर अधिक हो सकता है।

  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता।

  • जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा।

  • सप्लाई चेन में अधिक पारदर्शिता।

  • जिम्मेदार तरीके से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल।

  • डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा।

  • कर्मचारियों का स्वास्थ्य और कल्याण।

  • साइबर सुरक्षा।

  • सर्कुलर इकोनॉमी यानी संसाधनों के दोबारा उपयोग पर आधारित अर्थव्यवस्था।

  • सस्टेनेबल फाइनेंस यानी टिकाऊ विकास को समर्थन देने वाला वित्त।

  • जलवायु और पर्यावरणीय बदलाव के लिए ट्रांजिशन प्लानिंग।

इसलिए ESG का अगला चरण केवल सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा। कंपनियां ESG से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल अपने कारोबारी फैसलों को बेहतर बनाने के लिए भी कर सकती हैं।

निष्कर्ष: लंबे समय की कारोबारी सफलता के लिए ESG क्यों जरूरी है। Conclusion: Why ESG Matters for Long-Term Business Success.

ESG आज कंपनियों के पर्यावरणीय जिम्मेदारियों, सामाजिक संबंधों और गवर्नेंस व्यवस्था को समझने का एक महत्वपूर्ण ढांचा बन गया है। इसकी अहमियत इसलिए बढ़ी है क्योंकि पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस से जुड़े मुद्दे कंपनी के कारोबार की मजबूती, प्रतिष्ठा, कानूनी अनुपालन, हितधारकों के भरोसे, निवेश संबंधी फैसलों और लंबे समय के वित्तीय प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।

कंपनियों के लिए प्रभावी ESG रणनीति का मतलब केवल सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट प्रकाशित करना या कुछ पर्यावरणीय गतिविधियां शुरू करना नहीं है। ESG को कंपनी की बिजनेस स्ट्रैटेजी, रिस्क मैनेजमेंट, रोजमर्रा के संचालन, सप्लाई चेन, गवर्नेंस और निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना अधिक महत्वपूर्ण है।

ESG से जुड़ा नियामकीय वातावरण भी लगातार विकसित हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ISSB Standards सस्टेनेबिलिटी से संबंधित वित्तीय जानकारी के खुलासे के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बन रहे हैं। कई देश इन मानकों को अपनाने या किसी अन्य रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

भारत में SEBI के BRSR और BRSR Core फ्रेमवर्क ने सूचीबद्ध कंपनियों के लिए ESG से संबंधित माप और जानकारी साझा करने को अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए ESG केवल एक स्वैच्छिक पहल के बजाय कारोबारी और नियामकीय चर्चाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

अंततः, ESG को केवल एक अनुपालन आवश्यकता या अस्थायी ट्रेंड के रूप में नहीं देखना चाहिए। सही तरीके से लागू किया गया ESG व्यवसायों को जोखिमों की पहले पहचान करने, संसाधनों और प्रक्रियाओं की दक्षता बढ़ाने, हितधारकों का भरोसा मजबूत करने, नए विचारों और नवाचार को बढ़ावा देने तथा तेजी से बदलते आर्थिक और पर्यावरणीय माहौल के लिए तैयार होने में मदद कर सकता है।

जो कंपनी अपने पर्यावरणीय प्रभाव को समझती है, अपने कर्मचारियों और समुदायों में निवेश करती है तथा मजबूत और पारदर्शी गवर्नेंस व्यवस्था बनाए रखती है, वह लंबे समय में भरोसा, मजबूती और टिकाऊ कारोबारी मूल्य बनाने की बेहतर स्थिति में होती है।