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बेकार को दें आकार

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बेकार को दें आकार
31 Jul 2021
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आप चाहें तो हर चीज़ का इस्तेमाल कर सकते हैं, बस आपके अंदर एक सकारात्मक नजरिया होना चाहिए, जिसे आप अपनी काबिलियत से अच्छा बना सकते हैं। क्याआपको पता है कि एक बेकार और बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही वक़्त दिखाती है?  नयी वस्तुओं का इस्तेमाल करना तो बहुत आसान है मगर जिस सामान को हम बेकार और कबाड़ समझ कर फेंक देते हैं क्या हम उसे ही इस्तेमाल करके कुछ नया नहीं बना सकते? इस लेख में जानें बेकार सामान को कैसे इस्तेमाल में लें ?

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आप चाहें तो हर चीज़ का इस्तेमाल कर सकते हैं, बस आपके अंदर एक सकारात्मक नजरिया होना चाहिए, जिसे आप अपनी काबिलियत से अच्छा बना सकते हैं। क्याआपको पता है कि एक बेकार और बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही वक़्त दिखाती है? नयी वस्तुओं का इस्तेमाल करना तो बहुत आसान है मगर जिस सामान को हम बेकार और कबाड़ समझ कर फेंक देते हैं क्या हम उसे ही इस्तेमाल करके कुछ नया नहीं बना सकते? इस लेख में जानें बेकार सामान को कैसे इस्तेमाल में लें ?

इस दुनिया में कुछ भी ‘कबाड़’ या ‘बेकार’ नहीं है। जो आपके लिए ‘कबाड़’ है, हो सकता है किसी और के लिए रोजगार का साधन हो। सबसे दिलचस्प बात यह है कि हमारे देश में बहुत से ऐसे लोग हैं, जो इस बात को सच करके दिखा रहे हैं। आज हम आपको वाराणसी की शिखा शाह से मिलवा रहे हैं, जो पिछले पांच सालों से ‘कबाड़’ को नया रूप देकर उपयोगी चीजें बना रही हैं। साथ ही, अपने कबाड़ के बिज़नेस से लगभग 15 लोगों को रोजगार भी दे रही हैं।

32 वर्षीया शिखा के ब्रांड का नाम है- Scrapशाला । इसके जरिए, वह तरह-तरह के उत्पाद बनाकर ग्राहकों को उपलब्ध कराती हैं। पेन स्टैंड, बांस का टूथब्रश, नेमप्लेट, होम-डेकॉर के अलावा, वह ऑर्डर मिलने पर अपसायकल किया हुआ फर्नीचर भी बनाती हैं। जैसे- पुराने टायरों से स्टूल-कुर्सी या मेज बनाना आदि। दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन करने वाली, शिखा ने कभी बिज़नेस करने के बारे में नहीं सोचा था। लेकिन, कहते हैं न कि ज़िन्दगी आपके मुताबिक नहीं चलती, कई बार आपके अनुभव, आपके भविष्य की दिशा तय कर देते हैं। 

शिखा के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। उन्होंने बताया कि ग्रैजुएशन करने के बाद, उन्होंने वॉटर साइंस मैनेजमेंट में मास्टर्स किया। इसके बाद रिलायंस फाउंडेशन जैसे संगठनों के साथ काम किया। उन्होंने कहा, “इन सबके दौरान, मैंने कचरे की समस्या सामान्य रूप से देखी। मुझे अपने काम के दौरान बहुत कुछ सीखने को मिला। और वहीं से मेरे मन में ख्याल भी आया कि वेस्ट-मैनेजमेंट के लिए मुझे कुछ करना चाहिये।”

लगभग 15 हजार रुपए के निवेश से शिखा ने अपने कबाड़ के बिज़नेस, Scrapशाला की शुरुआत की। उन्होंने कबाड़ीवालों से पुरानी चीजें खरीदीं। कुछ लोगों ने उन्हें अपने घर में पड़ी बेकार-पुरानी चीजें भी दी। शिखा कहती हैं कि शुरुआत में ये सब करना बहुत मुश्किल था, क्योंकि यह बहुत ही अव्यवस्थित क्षेत्र है। आप जो चीजें लेकर आ रहे हैं, आपको भी नहीं पता कि उनसे आप क्या बनाने वाले हैं। फिर जिन कारीगरों को उन्होंने शुरू में रखा, उन्हें भरोसा दिलाना बहुत मुश्किल था कि उनके बनाए इन नए तरह के उत्पादों को कोई खरीदेगा।

उन्होंने कहा, “पहले कई कारीगर आये और चले गए। लेकिन, हार मानना कोई विकल्प नहीं था। इसलिए, मैंने कोशिश जारी रखी और नयी-नयी चीजें शुरू की। जैसे कि काफी महिलाएं मुझसे कहने लगीं कि उन्हें पुरानी-बेकार चीजों को नयी चीजों में अपसायकल करना सीखना है। इसलिए, मैंने अलग-अलग तरह के वर्कशॉप शुरू किये । जैसे- कुछ वर्कशॉप बच्चों के साथ, तो कुछ खासतौर पर महिलाओं के साथ। हमारा वर्कशॉप का आईडिया काम कर गया और इन वर्कशॉप से ही हमें ग्राहक भी मिलने लगे।” 

शिखा और उनकी टीम ने अब तक अपने कबाड़ के बिज़नेस में हजारों तरह के अलग-अलग उत्पाद बनाए हैं। उन्होंने अपने सभी उत्पादों को अलग-अलग केटेगरी में बांटा हुआ है। जैसे- घर में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद, बगीचे की सजावट, कैफ़े की सजावट, लैंडस्केपिंग आइटम, हैंडमेड ज्वेलरी आदि। इसके अलावा, वह ग्राहकों के ऑर्डर के हिसाब से भी चीजें बनाती हैं। उन्होंने और उनकी टीम ने शहर के कई छोटे-बड़े कैफ़े को सजाने का काम भी किया। सबसे अच्छी बात है कि सभी चीजें इको-फ्रेंडली हैं। यहां से उत्पाद खरीदने का मतलब है कि आप पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में, एक बढ़िया कदम उठा रहे हैं। 

शिखा कहती हैं कि उन्होंने इस कबाड़ के बिज़नेस की शुरुआत, पर्यावरण को ध्यान में रखकर की थी। लेकिन, आज इसके जरिए वह स्क्रैप यानी की कचरे के प्रति लोगों का नजरिया भी बदल रही हैं। साथ ही, कई लोगों को एक सम्मानजनक रोजगार दे पा रही हैं। स्क्रैपशाला का सालाना टर्नओवर आज 10 लाख रुपए से ज्यादा है।

कबाड़ का बिज़नेस शुरू करने के लिए ज़रूरी टिप्स: 

हुनर :  सबसे पहले, आप में यह हुनर होना चाहिए कि आप चीजों को नया रूप देकर, उन्हें उपयोगी बना सकें। अगर आपको खुद यह करना नहीं आएगा, तो आप इस व्यवसाय के बारे में नहीं सोच सकते हैं। इसलिए अगर आपको अपसायक्लिंग का शौक है, तभी आप आगे बढ़ें। 

गुणवत्ता: आप जो भी चीजें बना रहे हैं, चाहे वह प्लास्टिक की बोतलों से प्लांटर बनाना हो या कांच की बोतलों से होम डेकॉर बनाना हो, हमेशा ध्यान रखें कि आपको उसी चीज की मार्केटिंग करने में आसानी होगी, जिसकी गुणवत्ता अच्छी है। इसलिए, सबसे पहले गुणवत्ता पर ध्यान दें और ऐसे उत्पाद बनाएं, जो देखने में खूबसूरत हों और लोग उन्हें सालों-साल इस्तेमाल करें। 

फीडबैक: हमेशा अपने ग्राहकों से फीडबैक लें और उनकी जरूरत के हिसाब से चीजें बनाएं। ग्राहकों को किस समय क्या चाहिए, इसे समझने की कोशिश करें। शुरुआत में, किसी एक ही प्रोडक्ट पर फोकस करें और कम से कम निवेश में काम शुरू करें। 

 सोशल मीडिया: मार्केटिंग के लिए सोशल मीडिया सबसे बेहतरीन जगह है। अगर आपको सोशल मीडिया अच्छे से इस्तेमाल करना आता है, तो आप अपने व्यवसाय के लिए इसका अच्छा उपयोग कर सकते हैं। फेसबुक या इंस्टाग्राम पर अपना अकाउंट बनाकर, अपने उत्पादों के बारे में पोस्ट करें और अलग-अलग ग्रुप्स में इन्हें साझा करें। 

 नया आविष्कार:  इस सेक्टर में आगे बढ़ने की सबसे बड़ी कुंजी है कि आप अपने ग्राहकों को हमेशा कुछ न कुछ नया दें। जिस तरह मार्केट का ट्रेंड बदलता है, वैसे ही आपको भी कचरे से नयी-नयी बेहतरीन चीजें ग्राहकों को बनाकर देनी होंगी, तभी ग्राहक आपसे जुड़े रहेंगे।