IPO क्या है और इसमें कैसे निवेश करें? शुरुआती निवेशकों के लिए आसान गाइड

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IPO क्या है और इसमें कैसे निवेश करें? शुरुआती निवेशकों के लिए आसान गाइड
08 Jan 2026
5 min read

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IPO (Initial Public Offering) किसी भी कंपनी के लिए एक बड़ा और अहम कदम होता है। जब कोई निजी (प्राइवेट) कंपनी पहली बार आम लोगों के लिए अपने शेयर बाजार में बेचती है, तो उसे IPO कहा जाता है।

IPO के बाद कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टेड) हो जाती है और आम निवेशक भी उसमें हिस्सेदारी खरीद सकते हैं। इससे निवेशकों को शेयर की कीमत बढ़ने और भविष्य में डिविडेंड मिलने का मौका मिलता है।

भारत में IPO निवेश का एक लोकप्रिय तरीका बनता जा रहा है, खासकर लंबी अवधि के निवेश के लिए। आजकल लोगों में शेयर बाजार को लेकर जागरूकता बढ़ी है और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए IPO में आवेदन करना भी काफी आसान हो गया है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत दुनिया के सबसे सक्रिय IPO बाजारों में शामिल हो गया है, जहां सैकड़ों कंपनियों ने निवेशकों से अरबों रुपये जुटाए हैं।

हालांकि, पहली बार निवेश करने वालों को IPO की प्रक्रिया थोड़ी जटिल लग सकती है। इसमें कई नए शब्द सामने आते हैं, जैसे प्रॉस्पेक्टस, बुक बिल्डिंग, ASBA, लॉट साइज और अलॉटमेंट।

लेकिन अगर आप सेबी (SEBI – भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) द्वारा तय किए गए नियमों और प्रक्रिया को समझ लें, तो IPO में निवेश करना काफी आसान हो जाता है।

यह लेख आपको IPO की पूरी जानकारी सरल भाषा में देगा। इसमें बताया गया है कि IPO क्या होता है, कंपनियां IPO क्यों लाती हैं What is an IPO, and why do companies launch IPOs?, IPO में निवेश करने के लिए कौन योग्य होता है, किन दस्तावेजों की जरूरत होती है और एक शुरुआती निवेशक भारत में IPO के लिए कैसे आवेदन कर सकता है।

साथ ही, इसमें आसान उदाहरण और उपयोगी टिप्स भी शामिल हैं, ताकि आप IPO में सोच-समझकर और भरोसे के साथ निवेश की शुरुआत कर सकें।

पहली बार IPO में निवेश कैसे करें How to Invest in an IPO for the First Time

IPO क्या होता है What Is an IPO

IPO की परिभाषा और उद्देश्य IPO Definition and Purpose

IPO यानी Initial Public Offering वह प्रक्रिया है, जिसमें कोई निजी कंपनी पहली बार आम लोगों को अपने शेयर बेचती है और शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो जाती है। इसके बाद कंपनी के शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदे और बेचे जा सकते हैं।

कंपनियां IPO लाने के पीछे आमतौर पर ये कारण होते हैं।

  • कारोबार बढ़ाने, कर्ज चुकाने या रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए पूंजी जुटाना।

  • ज्यादा निवेशकों तक पहुंच बनाना और कंपनी की पहचान बढ़ाना।

  • शुरुआती निवेशकों और प्रमोटरों को अपने शेयर बेचने का मौका देना।

  • सार्वजनिक कंपनी बनने के लिए जरूरी नियमों और खुलासों का पालन करना।

जब कोई कंपनी IPO लाती है, तो उसे एक विस्तृत दस्तावेज जारी करना होता है, जिसे प्रॉस्पेक्टस या रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) कहा जाता है। इसमें कंपनी का बिजनेस मॉडल, वित्तीय स्थिति, भविष्य की योजनाएं, जोखिम और IPO से जुटाए गए पैसों के इस्तेमाल की जानकारी होती है।

अंडरराइटर्स और सेबी की भूमिका The Role of Underwriters and SEBI

IPO बाजार में आने से पहले कंपनी निवेश बैंकों को नियुक्त करती है, जिन्हें लीड मैनेजर भी कहा जाता है। ये विशेषज्ञ कंपनी के मूल्यांकन और कानूनी प्रक्रिया को संभालते हैं।

लीड मैनेजर ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार करते हैं, जिसे सेबी यानी Securities and Exchange Board of India के पास जमा किया जाता है। सेबी इस दस्तावेज की जांच करता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कंपनी से जुड़ी सभी अहम जानकारियां, जैसे वित्तीय आंकड़े, जोखिम और प्रमोटरों का रिकॉर्ड, निवेशकों के सामने साफ-साफ रखी गई हों।

जुटाई गई पूंजी का उद्देश्य The Purpose of the Capital

IPO में निवेश करने से पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि कंपनी आपके पैसे का इस्तेमाल किस लिए करना चाहती है। आमतौर पर IPO दो तरह के होते हैं।

  • फ्रेश इश्यू Fresh Issue
    इसमें नए शेयर जारी किए जाते हैं। इससे मिलने वाला पैसा सीधे कंपनी के पास जाता है, जिसे वह अपने विस्तार या कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करती है।

  • ऑफर फॉर सेल (OFS) Offer for Sale (OFS)
    इसमें मौजूदा शेयरधारक, जैसे प्रमोटर या प्राइवेट इक्विटी निवेशक, अपने शेयर बेचते हैं। इस स्थिति में पैसा कंपनी को नहीं, बल्कि शेयर बेचने वालों को मिलता है।

कंपनियां IPO क्यों लाती हैं Why Companies Go Public

IPO के जरिए सार्वजनिक होने से कंपनी में कई बड़े बदलाव आते हैं।

  • कंपनी को बड़ी मात्रा में पूंजी मिलती है, जिससे वह तेजी से आगे बढ़ सकती है।

  • शेयर बाजार में लिस्ट होने से ब्रांड की पहचान और भरोसा बढ़ता है।

  • शेयरों की तरलता बढ़ती है, यानी निवेशक अपने शेयर आसानी से खरीद और बेच सकते हैं।

  • बाजार के आधार पर कंपनी का सही मूल्य तय होता है।

हालांकि, IPO के बाद कंपनियों पर नियमों का पालन करने का दबाव भी बढ़ जाता है। उन्हें नियमित रूप से अपने वित्तीय नतीजे और जरूरी जानकारियां सार्वजनिक करनी होती हैं।

Also Read: शेयर बाजार में सुरक्षित निवेश कैसे करें? जानें गोल्डन रूल और जरूरी टिप्स

भारत में IPO में आवेदन कौन कर सकता है Who Can Apply for an IPO in India

IPO में निवेश करने से पहले कुछ जरूरी पात्रताएं पूरी करना जरूरी होता है।

निवेशक की पात्रता Investor Eligibility

  • निवेशक भारतीय नागरिक होना चाहिए या उसके पास OCI यानी ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया का दर्जा होना चाहिए।

  • पहचान और टैक्स से जुड़े कामों के लिए वैध पैन कार्ड होना जरूरी है।

  • निवेशक के खाते में उतनी राशि होनी चाहिए, जितनी IPO के लिए बोली लगाने पर ब्लॉक की जाएगी।

जरूरी खाते Account Requirements

  • शेयर रखने के लिए डीमैट खाता होना अनिवार्य है।

  • बैंक खाता ASBA सुविधा या UPI से जुड़ा होना चाहिए, जिससे IPO में आवेदन किया जा सके।

  • यदि लिस्टिंग के बाद शेयर बेचने की योजना है, तो ट्रेडिंग अकाउंट भी होना जरूरी है।

भारत में IPO में आवेदन करने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया Step-by-Step IPO Application Process in India

नीचे IPO की घोषणा से लेकर शेयरों की लिस्टिंग तक की पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझाया गया है।

1. IPO रजिस्ट्रेशन और प्रॉस्पेक्टस दाखिल करना (कंपनी की ओर से) IPO Registration and Prospectus Filing (Company Side)

IPO लाने की प्रक्रिया कंपनी द्वारा मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने से शुरू होती है। इसके बाद कंपनी ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार करती है और उसे सेबी के पास मंजूरी के लिए जमा करती है।

इस दस्तावेज में कंपनी की वित्तीय स्थिति, संभावित जोखिम और भविष्य की योजनाओं की पूरी जानकारी होती है। सेबी द्वारा जांच और मंजूरी मिलने के बाद अंतिम प्रॉस्पेक्टस जारी किया जाता है, जिसमें शेयर का प्राइस बैंड भी शामिल होता है।

2. मार्केटिंग और रोडशो Marketing and Roadshows

IPO खुलने से पहले कंपनी और उसके लीड मैनेजर निवेशकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए रोडशो आयोजित करते हैं। इसका उद्देश्य बड़े संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करना और IPO को लेकर भरोसा बनाना होता है।

3. बोली लगाने की अवधि शुरू होना Bidding Window Opens

IPO आमतौर पर 3 से 5 कार्यदिवस के लिए खुला रहता है। इस दौरान निवेशक तय प्राइस बैंड के भीतर बोली लगा सकते हैं, जैसे ₹95 से ₹100 प्रति शेयर।

रिटेल और अन्य निवेशक श्रेणियां Retail vs Other Categories

  • रिटेल व्यक्तिगत निवेशक (RII) Retail Individual Investors (RIIs)
    आमतौर पर ₹2 लाख तक का निवेश करने वाले निवेशक।

  • नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशक (NII) Non-Institutional Investors (NIIs)
    आमतौर पर हाई नेटवर्थ निवेशक।

  • क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) Qualified Institutional Buyers (QIBs)
    जैसे म्यूचुअल फंड और अन्य संस्थागत निवेशक।

आमतौर पर सेबी रिटेल निवेशकों के लिए करीब 35 प्रतिशत शेयर आरक्षित रखता है। हालांकि, हालिया प्रस्तावों में बहुत बड़े IPO के लिए इस हिस्सेदारी को 25 प्रतिशत तक लचीला करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि मांग का संतुलन बेहतर किया जा सके।

4. ASBA प्रक्रिया क्या है Application Supported by Blocked Amount (ASBA)

भारत में IPO आवेदन के लिए ASBA प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसमें आपके खाते से पैसा कटता नहीं है, बल्कि केवल ब्लॉक किया जाता है। इससे निवेशकों के पैसे सुरक्षित रहते हैं और रिफंड की प्रक्रिया आसान हो जाती है।

ASBA कैसे काम करता है How ASBA Works

  • IPO में आवेदन करने पर तय राशि आपके बैंक खाते में ब्लॉक हो जाती है।

  • अगर आपको शेयर मिलते हैं, तो उतनी ही राशि खाते से काट ली जाती है।

  • अगर शेयर नहीं मिलते हैं, तो ब्लॉक की गई राशि अपने आप रिलीज हो जाती है।

5. ऑनलाइन IPO आवेदन कैसे करें Placing Your Bid Online (UPI/Banking/Trading Platforms)

आजकल ज्यादातर निवेशक IPO के लिए ऑनलाइन आवेदन करते हैं। इसके लिए आप इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं।

  • नेट बैंकिंग के जरिए ASBA सुविधा।

  • ब्रोकरेज ऐप्स जैसे Zerodha, Groww, Upstox, Angel One।

  • UPI से जुड़े IPO आवेदन विकल्प।

आवेदन करते समय आपको पैन नंबर, डीमैट अकाउंट की जानकारी, कितने लॉट लेने हैं, प्राइस बैंड और भुगतान की पुष्टि करनी होती है। UPI या ASBA के जरिए भुगतान को मंजूरी देने के बाद आवेदन पूरा हो जाता है।

6. शेयर अलॉटमेंट और रिफंड प्रक्रिया Allotment and Refunds

बोली लगाने की अवधि बंद होने के बाद IPO की अलॉटमेंट प्रक्रिया शुरू होती है।

  • रजिस्ट्रार सभी निवेशकों की मांग की गणना करता है और शेयरों का आवंटन करता है।

  • यदि रिटेल श्रेणी में IPO अधिक सब्सक्राइब हो जाता है, तो लॉटरी सिस्टम या अनुपातिक अलॉटमेंट के जरिए शेयर दिए जाते हैं।

  • आमतौर पर तीन कार्यदिवस के भीतर शेयर निवेशकों के डीमैट अकाउंट में जमा कर दिए जाते हैं।

  • जिन निवेशकों को शेयर नहीं मिलते हैं, उनके लिए रिफंड की राशि इलेक्ट्रॉनिक तरीके से अपने आप वापस कर दी जाती है।

7. स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग Listing on Stock Exchange

शेयर डीमैट अकाउंट में आने के बाद IPO एनएसई या बीएसई जैसे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होता है।

लिस्टिंग डे पर शेयर का प्रदर्शन काफी अहम माना जाता है। यदि शेयर इश्यू प्राइस से ऊपर खुलता है, तो इससे निवेशकों में सकारात्मक भावना बनती है।

IPO की समयसीमा, फीस और अलॉटमेंट IPO Fees, Timelines & Allotment

  • समयसीमा Timeline
    IPO आमतौर पर 3 से 5 दिनों के लिए खुला रहता है। अलॉटमेंट करीब एक सप्ताह के भीतर हो जाता है और उसके कुछ ही दिनों बाद शेयर लिस्ट हो जाते हैं।

  • फीस Fees
    कुछ ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म अपनी ऐप के जरिए आवेदन करने पर मामूली शुल्क ले सकते हैं।

IPO में निवेश से पहले शुरुआती निवेशकों के लिए जरूरी टिप्स Tips for Beginners Before Applying investing in an IPO

 प्रॉस्पेक्टस को ध्यान से समझें Understand the Prospectus

रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) जरूर पढ़ें। इसमें कंपनी का बिजनेस मॉडल, वित्तीय स्थिति, जोखिम और IPO से जुटाए गए पैसों के इस्तेमाल की जानकारी होती है।

प्राइस बैंड का अनुमान लगाने से बचें Avoid Price Band Guessing

अगर आपके पास कोई ठोस वजह न हो, तो कट-ऑफ प्राइस पर ही आवेदन करें। इससे अलॉटमेंट की संभावना बेहतर रहती है।

UPI और ASBA की मंजूरी सुनिश्चित करें UPI/ASBA Authorization

यह जरूर जांच लें कि आपका UPI एक्टिव है और सही तरीके से लिंक है। भुगतान की मंजूरी में गलती होने पर आवेदन रिजेक्ट हो सकता है।

एक से ज्यादा आवेदन न करें Don’t Apply Multiple Times

सेबी के नियमों के अनुसार एक पैन नंबर से एक ही श्रेणी में सिर्फ एक आवेदन किया जा सकता है। एक से ज्यादा आवेदन करने पर सभी आवेदन रद्द हो सकते हैं।

अलॉटमेंट स्टेटस जांचें Check Allotment Status

आप रजिस्ट्रार की वेबसाइट या अपने ब्रोकरेज ऐप के जरिए अलॉटमेंट की स्थिति देख सकते हैं।

IPO में निवेश के फायदे और नुकसान Pros and Cons of Investing in IPOs

फायदे Advantages

  • अगर मांग ज्यादा हो, तो लिस्टिंग गेन मिलने की संभावना रहती है।

  • उभरती हुई कंपनियों में शुरुआती निवेश का मौका मिलता है।

  • लंबी अवधि में पूंजी बढ़ने की संभावना होती है।

जोखिम Risks

  • कुछ IPO महंगे हो सकते हैं और लिस्टिंग के समय कीमत गिर भी सकती है।

  • नई कंपनियों का ट्रेडिंग इतिहास सीमित होता है।

  • बाजार में उतार-चढ़ाव का असर शॉर्ट टर्म प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

2025 का केस स्टडी: टाटा कैपिटल और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स से सीख 2025 Case Study: Lessons from Tata Capital & LG Electronics

रिकॉर्ड बनाने वाला साल 2025, 2026 के निवेशकों के लिए कई अहम सबक छोड़ गया।

टाटा कैपिटल (₹15,512 करोड़)
2025 का सबसे बड़ा IPO होने के बावजूद इसमें लिस्टिंग के दिन केवल लगभग 1% का ही फायदा मिला।
सीख: सिर्फ बड़ा IPO होने से लिस्टिंग गेन की गारंटी नहीं मिलती। अक्सर बड़े IPO पूरी वैल्यू पर प्राइस किए जाते हैं, जिससे तुरंत मुनाफे की गुंजाइश कम रह जाती है।

मीशो और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स
इन IPO में ब्रांड की पहचान के कारण रिटेल निवेशकों की भागीदारी काफी ज्यादा रही।
सीख: जानी-पहचानी ब्रांड वैल्यू से सब्सक्रिप्शन का दबाव बढ़ता है। इससे अलॉटमेंट लॉटरी जैसा हो जाता है और शेयर मिलने की संभावना कम हो जाती है।

IPO में निवेश की आम गलतियां और उनसे बचने के तरीके  Common Pitfalls and How to Avoid Them

ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के पीछे भागना
GMP पूरी तरह अनुमान पर आधारित होता है। 2025 में कई ऐसे IPO देखे गए जिनका GMP ऊंचा था, लेकिन ग्लोबल बाजार में अचानक आई गिरावट के कारण लिस्टिंग के दिन शेयर टूट गए।

निवेश के लिए कर्ज लेना
IPO फाइनेंसिंग काफी जोखिम भरी होती है। अगर शेयर डिस्काउंट पर लिस्ट होता है, तो निवेशक को नुकसान होता है और साथ ही लोन का ब्याज भी चुकाना पड़ता है।

एग्जिट स्ट्रैटेजी को नजरअंदाज करना
लिस्टिंग से पहले ही तय कर लें कि आप 20% के लिस्टिंग गेन के लिए आए हैं या 5 साल के लिए निवेश करना चाहते हैं। लिस्टिंग के दिन सुबह भावनाओं में लिया गया फैसला अक्सर नुकसान करवा देता है।

निष्कर्ष Conclusion

IPO सिर्फ एक चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि यह कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने और निवेशकों के लिए उभरते बिजनेस की ग्रोथ में हिस्सेदारी का एक व्यवस्थित और नियंत्रित तरीका है।

भारत में सेबी के सुधारों और ASBA व UPI जैसे आसान सिस्टम के चलते, आज शुरुआती निवेशकों के लिए भी IPO में आवेदन करना सरल हो गया है।

अगर आप पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, अलॉटमेंट सिस्टम और निवेशक श्रेणियों को सही से समझ लेते हैं, तो आप समझदारी से निवेश कर सकते हैं और आम गलतियों से बच सकते हैं। चाहे आपका लक्ष्य लंबी अवधि में संपत्ति बनाना हो या शॉर्ट टर्म लिस्टिंग गेन पाना, IPO की प्रक्रिया को समझना आपको भारत के सक्रिय प्राइमरी मार्केट में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद करता है।

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