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केएफसी की सफलता की कहानी

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केएफसी की सफलता की कहानी
02 Feb 2022
8 min read
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एक ऐसा शख्स जिसने अपनी जिंदगी में असफलता और दुखों का दौर देखा लेकिन फिर भी हार नहीं मानी और आज उनकी शोहरत उनकी कठिनाइयों से कहीं आगे है। ये हैं kentucky fried chicken (KFC) के संस्थापक Colonel Harland David Sanders कर्नल हार्लैंड सैंडर्स। उनके हाथों में वो जादू था जिस जादू ने 65 साल की उम्र में उनका नाम दुनिया के बड़े रेस्टोरेंट में शामिल कर दिया। आज KFC के दुनिया में लगभग 150 से भी अधिक देशों में 22 हजार से भी अधिक स्टोर हैं। आज इनके फ्राई चिकेन को काफी पसंद किया जाता है शायद ही कोई ऐसा होगा जो इसे खाना पसंद नहीं करता होगा। कर्नल हार्लैंड सैंडर्स से हमें एक प्रेरणा मिलती है कि अगर दिल में कुछ हासिल करने की ख्वाइश हो तो तमाम मुश्किलों के बावजूद भी सफलता success अवश्य प्राप्त होती है।

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आमतौर पर कोई भी इंसान एक उम्र तक मेहनत करता है और एक उम्र के बाद वो थक जाता है और फिर सोचता है कि बस अब आराम करना है लेकिन हम आज एक ऐसे शख्स की बात करेंगे जिसने उम्र के उस पड़ाव पर भी संघर्ष किया है जिस उम्र में लोग अपने काम से रिटायरमेंट ले लेते हैं। उनकी संघर्षमय कहानी को सुनकर हर कोई हैरान हो जायेगा। जी हाँ वो शख्स हैं, 65 साल की उम्र में KFC यानी केंटुकी फ्रायड चिकन (Kentucky Fried Chicken) की नींव रखने वाले (Colonel Harland Sanders) कर्नल हार्लैंड सैंडर्स। आज के वक्त में केएफसी के 150 से भी अधिक देशों में 22 हजार से भी अधिक स्टोर हैं। उनकी इस संघर्षमय कहानी से हमें लगता है कि प्रेरणा और प्रोत्साहन जिंदगी का एक ऐसा पहलू है जो किसी भी उम्र में कही से भी मिल सकता है और उस पर अमल करके हम अपनी जिंदगी को बदल सकते हैं। चलिए जानते हैं आज उनकी संघर्ष की कहानी कि उन्होंने कैसे कई बार हारने के बावजूद भी सफलता हासिल की। 

कर्नल हरलैंड सैंडर्स का व्यक्तिगत जीवन

कर्नल हार्लैंड सैंडर्स का जन्म 1890 में अमेरिका के Henryville हेनरीविले (इंडियाना) Indiana में हुआ था। हार्लैंड सैंडर्स तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। वह जब सिर्फ 6 साल के थे तब उनके पिता की मृत्य हो गई। बस यहीं से इनकी ज़िंदगी में मुश्किलों की शुरुआत हो गयी थी लेकिन उनकी माँ ने उन्हें ईमानदारी से मेहनत करना और भगवान पर विश्वास करना सिखाया था। उनकी माँ ने बच्चों को पालने के लिए के लिए एक टमाटो-कैनिंग फैक्ट्री में नौकरी करनी शुरू की। सैंडर्स घर पर अपने भाई बहनों की देखरेख भी करते और खाना भी बनाते। जब वह सिर्फ 7 साल के थे तो उन्होंने रोटी सब्जी बनाना सीख लिया था। साथ ही कई क्षेत्रीय व्यंजन बनाने में भी वह दक्ष हो गए थे। कुछ समय के बाद उनकी मां ने दूसरी शादी कर ली। फिर वे सब सौतेले पिता के घर Greenwood ग्रीनवुड (इंडियाना) आ गए थे। इस कारण उन्हें स्कूल भी छोड़ना पड़ा। सौतेले पिता से परेशान होकर वह खेतों में मजदूरी करने लगे। इतनी सी उम्र में उन्होंने बहुत मुश्किलें झेली। वह कभी यहाँ और कभी वहाँ भटकते रहे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद वह 16 साल की उम्र में अमेरिकन आर्मी United State Army में भर्ती हो गए। 

लगातार मिली असफलताएं 

उनके जीवन में असफलताओं का दौर जारी था। 1 साल बाद ही आर्मी से निकलकर रेलवे इंजन में कोयला झोंकने वाले इंजन स्ट्रोकर की नौकरी की। इसके बाद उन्होंने 19 साल की उम्र मे जोसेफाइन किंग Josephine King से शादी की। कुछ समय बाद ही रेलवे की नौकरी भी छूट गई। इस घटना के बाद उनकी पत्नी भी उन्हें छोड़कर चली गई और अपने साथ बच्चों को भी ले गयी। जीवन में इतनी परेशानियों के बाद भी कर्नल सैंडर्स टूटे नहीं। रेलवे में नौकरी के साथ-साथ वे law का correspondence course भी कर रहे थे, जो अब उनके काम आया। उन्होंने law Practice शुरू कर दी लेकिन एक दिन कोर्ट रूम में अपने ही एक क्लाइंट के साथ झगड़े के बाद उनके लॉ का यह कॅरिअर भी खत्म हो गया। फिर इसके बाद जॉब के लिए वो भटकते रहे कभी कहीं तो कभी कहीं। उन्होंने salesman का काम भी किया और इंश्योरेंस एजेंट बनकर पॉलिसी भी बेची। इसके बाद भी उन्होंने बहुत काम किये लेकिन ज्यादा समय तक किसी भी काम में टिक नहीं पाये। ओहायो नदी में steam-boat से सवारियां ढोने का व्यवसाय किया। कुछ समय के बाद उन्हें लगा ये काम उनके लायक नहीं है। इस काम को छोड़ने के बाद एसीटिलीन लैंप बनानी की फैक्ट्री खोली लेकिन ये भी भी बंद हो गयी और उनकी सारी जमा-पूंजी खत्म हो गयी। 

Kentucky में फिर से restaurant की शुरूआत

इतनी असफलताओं के बावजूद भी सैंडर्स ने हार नहीं मानी। 40 वर्ष की उम्र में केंटुकी आकर उन्हें तेल कंपनी से हाईवे किनारे सर्विस स्टेशन चलाने के लिए एक कमरे की जगह मिली। उन्होंने सोचा कि इसी के साथ क्यों न पेन-फ्राइड चिकन भी बनाया जाये। उन्होंने service station के पीछे बने कमरे में एक टेबल और कुछ कुर्सियां डाल दी और वहाँ आने-जाने वाले ड्राइवरों और यात्रियों को पेन-फ्राइड चिकन व अन्य चीज़ें भी बनाकर खिलाने लगे। धीरे धीरे लोगों को उनके बनाये खाने का स्वाद अच्छा लगने लगा। चिकन फ्राई के इस काम में उनका मन लगने लगा। उन्हें वह काम मिल गया था जिस काम को वह मन से चाहते थे। उनके लजीज भुने मुर्ग (फ्राइड चिकन) fried chicken लोगों को बहुत पसंद आए। अब वह इस काम में और मेहनत करने लगे। जिससे यह काम उनकी पहचान बन जाये। आख़िरकार बहुत सारे herbs और spices से भरपूर Pan Fried Chicken की recipe पूरी बन गयी। अब वह अपने Pan Fried Chicken के कारण मशहूर हो गए और उनका बनाया चिकन केन्टकी के गवर्नर को इतना पसंद आया कि उन्होंने 1935 में हरलेन सैंडर्स को ‘कर्नल’ colonel की उपाधि दे दी। लेकिन उनकी मुसीबत अभी भी खत्म नहीं हुई थी। दुर्भाग्यवश जहां पर सैंडर्स का रेस्टोरेंट था, वहां से एक हाईवे निकलने के चलते उनका रेस्टोरेंट टूट गया। बस फिर संघर्षों का एक और दौर शुरू हुआ।

65 साल की उम्र में केएफसी शुरू कर हो गये मशहूर

अब कर्नल सैंडर्स का नया संघर्ष शुरू हो चुका था। वे अब 65 वर्ष के हो चुके थे। जिंदगी भर इतना काम करने के बाद भी उनके पास कुछ भी नहीं बचा था। अब उन्होंने सोचा क्यों ना रेस्टोरेंट को अपनी रेसिपी दी जाए और बिक्री पर मुनाफा कमाया जाए। क्योंकि उनकी secret recipe ‘सीक्रेट रेसिपी’ Fried Chicken की recipe अब भी उनके साथ थी। उन्हें अपनी recipe के स्वाद पर पूरा भरोसा था। इसके लिए उन्होंने अलग - अलग रेस्तराओं restaurants में जाकर इस बारे में चर्चा की। वह जगह-जगह जाकर कई होटलों के मैनेजमेंट से मिले और उन्हें अपनी रेसिपी के बारे में बताया। अमेरिका भर में होटलों में जाते-जाते उन्हें हर जगह से ना ही सुनने को मिला। लोंगों ने उनका मजाक भी उड़ाया लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अंत में कहीं जाकर एक बड़ा रेस्तरां चलाने वाले पीट हर्मन Pete Herman ने इस सीक्रेट रेसिपी का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और Fried Chicken की पहली franchisee sign कर ली। फिर कर्नल सैंडर्स को जब इस रेस्टोरेंट ने हां कर दी तो वह अपना चिकन वहां बेचने लगे और मुनाफे पर कुछ फायदा लेने लगे। उस रेस्तरां की सेल इस फ्राइड चिकन के कारण कई गुना बढ़ गयी। जिसे देखकर अन्य रेस्तरां मालिकों ने भी कर्नल सैंडर्स से franchisee लेना शुरू कर दिया। इस रेसिपी का नाम ‘केंटुकी फ्राइड चिकन’ KFC रखा गया। इसके बाद जो भी हुआ वो आज सबके सामने है। आज उनकी सफलता से हर कोई प्रेरणा ले रहा है। अब आज कर्नल सैंडर्स दुनिया में नहीं हैं लेकिन आज भी वे KFC के Star Icon के रूप में जीवित हैं। आज KFC के दुनिया में लगभग 150 से भी अधिक देशों में 22 हजार से भी अधिक स्टोर हैं। केएफसी पर खास दाढ़ी और वेस्टर्न टाई के साथ उनका चेहरा आज भी केएफसी का चिकन KFC Chicken खाने वालों को उनकी याद दिला देता है।