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Success Motivation

डॉ. एस. जयशंकर- भारत को गौरवान्वित करने वाले कैबिनेट मंत्री

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डॉ. एस. जयशंकर- भारत को गौरवान्वित करने वाले कैबिनेट मंत्री

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Post Highlights

कुछ लोग होते हैं जो सिर्फ राष्ट्र हित में काम करते हैं। राष्ट्र की सेवा के लिए वो हर वक्त मौजूद रहते हैं और अपने कार्यों द्वारा समाज, विश्व के उत्थान तथा विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसी महान हस्तियां किसी परिचय की मोहताज नही होती हैं। महान व्यक्तियों को सिर्फ अपने देश में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में भी सम्मान प्राप्त होता है। ऐसे ही भारत को विकास की ओर ले जाने वाले एक श्रेष्ठ विचारक, महान व्यक्तित्व, एक समृद्ध अनुभव और पूरे भारत को गौरवान्वित करने वाले डॉ. एस. जयशंकर सबसे सक्षम कैबिनेट मंत्रियों में से एक हैं। विदेश मंत्री बनने से पहले एस जयशंकर, विदेश सचिव, कई देशों में भारत के राजदूत के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। एस जयशंकर भारत सरकार के एक होनहार और भरोदेमंद ऑफिसर भी रहे हैं। उन्होंने कई अलग-अलग क्षेत्रों में अपना विशेष योगदान दिया है। 

महान व्यक्ति वह व्यक्ति होते हैं, जिनका समाज में कोई विशेष योगदान होता है। ऐसे कई महान लोग हुए हैं जिन्होंने अपने कार्यों द्वारा ना सिर्फ अपने देश को बल्कि पूरे विश्व को भी प्रभावित किया है। वे अपने प्रत्येक क्षण को सृजनात्मक तरीके से जीते हैं। महान लोग अपने कार्यों के प्रति लगन की वजह से ही महान बनते हैं। ऐसे ही महान व्यक्तित्व और विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं कैबिनेट मंत्री डॉ. एस. जयशंकर Cabinet Minister Dr. S. Jaishankar जिन्होंने कई क्षेत्रों में देश के विकास में भागीदार बनकर अपना योगदान दिया है। उनके कार्यों की वजह से हम सब उन पर गर्व करते हैं। वह भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए किसी भी मंच पर अत्यंत परिश्रम, विशिष्टता और कुशलता के साथ हमारे राष्ट्र के हितों की रक्षा कर रहे हैं। चलिए जानते हैं उनके और उनके कार्यों के बारे में कि कैसे उन्होंने अपने कार्यों द्वारा समाज या देश के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 

एस जयशंकर का जीवन परिचय 

एस जयशंकर S. Jaishankar का पूरा नाम सुब्रह्मण्यम जयशंकर Subrahmanyam Jaishankar है। एस जयशंकर का जन्म 15 जनवरी 1955 को देश की राजधानी नई दिल्ली New Delhi में हुआ था। उनकी माता का नाम सुलोचना Sulochana तथा पिता का नाम के. सुब्रह्मणयम K.Subrahmanyam है। एस जयशंकर के पिता के. सुब्रह्मणयम एक आईएएस ऑफिसर IAS officer थे और माता ने म्यूजिक में पीएचडी किया था। उनके पिता को ‘फॉदर ऑफ इंडियन स्ट्रेटजिक थॉट्स’ Father of Indian Strategic Thought भी कहा जाता है। के. सुब्रह्मणयम भारत के प्रमुख रणनीतिक विश्लेषकों Chief Strategic Analysts में से एक थे। उनकी पत्नी का नाम क्योको जयशंकर Kyoko Jaishankar है और उनके दो पुत्र तथा एक पुत्री हैं। जयशंकर देश के अकेले ऐसे अधिकारी हैं जिनके पास विदेश मंत्रालय में बतौर विदेश सचिव सेवा करने का चार दशकों का अनुभव है। सुब्रमण्यम जयशंकर काफी तेज-तर्रार अफसर माने जाते हैं। 

एस जयशंकर की शिक्षा और करियर 

नई दिल्ली में जन्मे एस जयशंकर की शिक्षा एयरफोर्स स्कूल और सेंट स्टीफेंस कॉलेज Air Force School and St. Stephen's College में हुई। फिर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफ़न्स कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की। इसके बाद एस जयशंकर ने जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) Jawaharlal Nehru University, से राजनीतिशास्त्र politics में एमए की शिक्षा हासिल की और फिर JNU से ही एस जयशंकर ने अंतर्राष्ट्रीय संबंध में एमफिल और पीएचडी MPhil and PhD की। एस जयशंकर ने कई अहम पदों पर देश की सेवा की है। शिक्षा प्राप्त करने के बाद एस जयशंकर 1977 में भारतीय विदेश सेवा यानि आईएफएस अधिकारी IFS officer बने थे। बतौर आईएफएस अफसर उन्होंने कई अहम पदों पर देश की सेवा की है। एस जयशंकर ने कई देशों में भारत के राजदूत Ambassador of India के रूप में अपनी सेवाएं दी। चीन में भारत के सबसे लंबे समय तक राजदूत रहने का रिकॉर्ड एस जयशंकर के नाम है इसलिए चीन से जुड़ी रणनीति बनाने में एस जयशंकर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जनवरी 2015 में एस जयशंकर को विदेश सचिव Foreign Secretary नियुक्त किया गया। यह एक रोचक तथ्‍य है कि 2015 में सेवानिवृत्त होने के दो दिन पहले, जयशंकर को भारत का विदेश सचिव नियुक्त किया गया था। करीब 4 साल तक विदेश सचिव के रूप में कार्य करने के बाद साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एस जयशंकर को अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया और उन्हें देश का विदेश मंत्री Foreign Minister बना दिया। जयशंकर को एक ऐसे अधिकारी के तौर पर जाना जाता है जिन्होंने पीएम मोदी की विदेश नीति को एक सही आकार देने का काम किया।

अनेक क्षेत्रों में उनका योगदान

विदेश मंत्री बनने से पहले एस जयशंकर विदेश सचिव के रूप में भी काम कर चुके हैं। तकरीबन तीन दशक के लंबे कार्यकाल में एस. जयशंकर विदेश सचिव रहने के साथ ही अमेरिका, चीन, चेक गणराज्य America, China, Czech Republic में भारत के राजदूत और सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त पद India's High Commissioner to Singapore पर काम कर चुके हैं। एस जयशंकर भारत सरकार के एक होनहार और भरोदेमंद ऑफिसर रहे हैं। अनुभवी नौकरशाह एवं पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में विदेश मंत्रालय का महत्वपूर्ण प्रभार दिया गया है। जयशंकर को चीन एवं अमेरिका मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। चीन और अमेरिका के साथ बातचीत में वह भारत के प्रतिनिधि भी रह चुके हैं। उन्हें हिंदी के अलावा तमिल, अंग्रेजी, रूसी, मंदारिन, जापानी Tamil, English, Russian, Mandarin, Japanese सहित कई भाषाओं का ज्ञान है। 

एस. जयशंकर ऐतिहासिक भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के लिए बातचीत करने वाली भारतीय टीम के एक प्रमुख सदस्य थे। 1977 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी जयशंकर ने लद्दाख के देपसांग और डोकलाम गतिरोध Depsang and Doklam standoff in Ladakh के बाद चीन के साथ संकट को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जयशंकर परमाणु डील के हीरो Hero of Nuclear Deal माने जाते हैं। साल 2007 में जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तो उनके कार्यकाल में अमेरिका के परमाणु डील हुई। इस डील की शुरुआत साल 2005 में हो गई थी लेकिन इसे अंजाम तक पहुंचने में काफी टाइम लग गया था। जब डील सील हुई तो इसे एक मील का पत्थर माना गया और इसका श्रेय जयशंकर को दिया गया। जयशंकर जनवरी 2015 से जनवरी 2018 तक विदेश सचिव रहे हैं और अपने कार्यकाल के दौरान एस. जयशंकर ने महत्वाकांक्षी नरेंद्र मोदी के विचार पर आधारित नीतियां बनाईं थी। इसमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इज़राइल जैसे पश्चिम एशियाई देशों तक पहुंच बनायी और जापान के साथ परमाणु समझौते का रास्ता तैयार करने के साथ डोकलाम को लेकर चीन से कूटनीतिक बातचीत और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के साथ बेहतर संबंध बनाना शामिल था। उन्होंने अपनी पहचान एक कुशल वार्ताकार के रूप में बनायी है। उन्हें पद्मश्री Padma Shri से भी सम्मानित किया गया है, जो देश का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। जयशंकर पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा के प्रेस सेक्रेटरी भी रह चुके हैं। 

एस जयशंकर S. Jaishankar ने बतौर प्रथम सचिव और भारतीय पीसकीपिंग मिशन के साथ एक राजनीतिक सलाहकार के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी हैं। विदेश सेवा से रिटायरमेंट के बाद वह साल 2018 में टाटा ग्रुप के साथ जुड़े और यहां पर उन्हें ग्लोबल कॉरपोरेट अफेयर्स Global Corporate Affairs का जिम्मा सौंपा गया। 

उनके कामों की समय-समय पर तारीफ होती रहती है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ Russian Foreign Minister Sergey Lavrov ने अभी मंगलवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की जमकर तारीफ़ की है। लावरोफ़ ने एस जयशंकर को 'मंझा हुआ कूटनीतिज्ञ' और 'सच्चा देशभक्त' 'True Patriot' क़रार दिया है। सर्गेई लावरोफ़ ने भारत के विदेश मंत्री की तारीफ़ उनके हालिया अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए बयानों और सख़्त रुख़ को लेकर की है। अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल इंडिया टुडे India Today को दिए एक ख़ास इंटरव्यू में उन्होंने ये बातें कही है। अमेरिका में दोनों देशों के बीच पिछले हफ़्ते हुए रक्षा और विदेश मंत्रियों के बीच की बातचीत के बाद एस जयशंकर ने साफ़ कर दिया था कि भारत किसी के दबाव में आए बिना अपने हितों के अनुसार फ़ैसले करेगा। दरअसल पिछले हफ़्ते अमेरिका के दौरे के दौरान एस जयशंकर अपने जवाबों के कारण काफ़ी चर्चा में रहे हैं। उनकी न केवल भारत के सोशल मीडिया में बल्कि पूरी दुनिया में काफ़ी तारीफ़ हुई है।

Think with Niche पर आपके लिए और रोचक विषयों पर लेख उपलब्ध हैं एक अन्य लेख को पढ़ने के लिए कृपया नीचे  दिए लिंक पर क्लिक करे-

भारतीय अर्थव्यवस्था की सारथी-निर्मला सीतारमण 

महान व्यक्ति वह व्यक्ति होते हैं, जिनका समाज में कोई विशेष योगदान होता है। ऐसे कई महान लोग हुए हैं जिन्होंने अपने कार्यों द्वारा ना सिर्फ अपने देश को बल्कि पूरे विश्व को भी प्रभावित किया है। वे अपने प्रत्येक क्षण को सृजनात्मक तरीके से जीते हैं। महान लोग अपने कार्यों के प्रति लगन की वजह से ही महान बनते हैं। ऐसे ही महान व्यक्तित्व और विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं कैबिनेट मंत्री डॉ. एस. जयशंकर Cabinet Minister Dr. S. Jaishankar जिन्होंने कई क्षेत्रों में देश के विकास में भागीदार बनकर अपना योगदान दिया है। उनके कार्यों की वजह से हम सब उन पर गर्व करते हैं। वह भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए किसी भी मंच पर अत्यंत परिश्रम, विशिष्टता और कुशलता के साथ हमारे राष्ट्र के हितों की रक्षा कर रहे हैं। चलिए जानते हैं उनके और उनके कार्यों के बारे में कि कैसे उन्होंने अपने कार्यों द्वारा समाज या देश के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 

एस जयशंकर का जीवन परिचय 

एस जयशंकर S. Jaishankar का पूरा नाम सुब्रह्मण्यम जयशंकर Subrahmanyam Jaishankar है। एस जयशंकर का जन्म 15 जनवरी 1955 को देश की राजधानी नई दिल्ली New Delhi में हुआ था। उनकी माता का नाम सुलोचना Sulochana तथा पिता का नाम के. सुब्रह्मणयम K.Subrahmanyam है। एस जयशंकर के पिता के. सुब्रह्मणयम एक आईएएस ऑफिसर IAS officer थे और माता ने म्यूजिक में पीएचडी किया था। उनके पिता को ‘फॉदर ऑफ इंडियन स्ट्रेटजिक थॉट्स’ Father of Indian Strategic Thought भी कहा जाता है। के. सुब्रह्मणयम भारत के प्रमुख रणनीतिक विश्लेषकों Chief Strategic Analysts में से एक थे। उनकी पत्नी का नाम क्योको जयशंकर Kyoko Jaishankar है और उनके दो पुत्र तथा एक पुत्री हैं। जयशंकर देश के अकेले ऐसे अधिकारी हैं जिनके पास विदेश मंत्रालय में बतौर विदेश सचिव सेवा करने का चार दशकों का अनुभव है। सुब्रमण्यम जयशंकर काफी तेज-तर्रार अफसर माने जाते हैं। 

एस जयशंकर की शिक्षा और करियर 

नई दिल्ली में जन्मे एस जयशंकर की शिक्षा एयरफोर्स स्कूल और सेंट स्टीफेंस कॉलेज Air Force School and St. Stephen's College में हुई। फिर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफ़न्स कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की। इसके बाद एस जयशंकर ने जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) Jawaharlal Nehru University, से राजनीतिशास्त्र politics में एमए की शिक्षा हासिल की और फिर JNU से ही एस जयशंकर ने अंतर्राष्ट्रीय संबंध में एमफिल और पीएचडी MPhil and PhD की। एस जयशंकर ने कई अहम पदों पर देश की सेवा की है। शिक्षा प्राप्त करने के बाद एस जयशंकर 1977 में भारतीय विदेश सेवा यानि आईएफएस अधिकारी IFS officer बने थे। बतौर आईएफएस अफसर उन्होंने कई अहम पदों पर देश की सेवा की है। एस जयशंकर ने कई देशों में भारत के राजदूत Ambassador of India के रूप में अपनी सेवाएं दी। चीन में भारत के सबसे लंबे समय तक राजदूत रहने का रिकॉर्ड एस जयशंकर के नाम है इसलिए चीन से जुड़ी रणनीति बनाने में एस जयशंकर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जनवरी 2015 में एस जयशंकर को विदेश सचिव Foreign Secretary नियुक्त किया गया। यह एक रोचक तथ्‍य है कि 2015 में सेवानिवृत्त होने के दो दिन पहले, जयशंकर को भारत का विदेश सचिव नियुक्त किया गया था। करीब 4 साल तक विदेश सचिव के रूप में कार्य करने के बाद साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एस जयशंकर को अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया और उन्हें देश का विदेश मंत्री Foreign Minister बना दिया। जयशंकर को एक ऐसे अधिकारी के तौर पर जाना जाता है जिन्होंने पीएम मोदी की विदेश नीति को एक सही आकार देने का काम किया।

अनेक क्षेत्रों में उनका योगदान

विदेश मंत्री बनने से पहले एस जयशंकर विदेश सचिव के रूप में भी काम कर चुके हैं। तकरीबन तीन दशक के लंबे कार्यकाल में एस. जयशंकर विदेश सचिव रहने के साथ ही अमेरिका, चीन, चेक गणराज्य America, China, Czech Republic में भारत के राजदूत और सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त पद India's High Commissioner to Singapore पर काम कर चुके हैं। एस जयशंकर भारत सरकार के एक होनहार और भरोदेमंद ऑफिसर रहे हैं। अनुभवी नौकरशाह एवं पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में विदेश मंत्रालय का महत्वपूर्ण प्रभार दिया गया है। जयशंकर को चीन एवं अमेरिका मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। चीन और अमेरिका के साथ बातचीत में वह भारत के प्रतिनिधि भी रह चुके हैं। उन्हें हिंदी के अलावा तमिल, अंग्रेजी, रूसी, मंदारिन, जापानी Tamil, English, Russian, Mandarin, Japanese सहित कई भाषाओं का ज्ञान है। 

एस. जयशंकर ऐतिहासिक भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के लिए बातचीत करने वाली भारतीय टीम के एक प्रमुख सदस्य थे। 1977 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी जयशंकर ने लद्दाख के देपसांग और डोकलाम गतिरोध Depsang and Doklam standoff in Ladakh के बाद चीन के साथ संकट को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जयशंकर परमाणु डील के हीरो Hero of Nuclear Deal माने जाते हैं। साल 2007 में जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तो उनके कार्यकाल में अमेरिका के परमाणु डील हुई। इस डील की शुरुआत साल 2005 में हो गई थी लेकिन इसे अंजाम तक पहुंचने में काफी टाइम लग गया था। जब डील सील हुई तो इसे एक मील का पत्थर माना गया और इसका श्रेय जयशंकर को दिया गया। जयशंकर जनवरी 2015 से जनवरी 2018 तक विदेश सचिव रहे हैं और अपने कार्यकाल के दौरान एस. जयशंकर ने महत्वाकांक्षी नरेंद्र मोदी के विचार पर आधारित नीतियां बनाईं थी। इसमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इज़राइल जैसे पश्चिम एशियाई देशों तक पहुंच बनायी और जापान के साथ परमाणु समझौते का रास्ता तैयार करने के साथ डोकलाम को लेकर चीन से कूटनीतिक बातचीत और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के साथ बेहतर संबंध बनाना शामिल था। उन्होंने अपनी पहचान एक कुशल वार्ताकार के रूप में बनायी है। उन्हें पद्मश्री Padma Shri से भी सम्मानित किया गया है, जो देश का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। जयशंकर पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा के प्रेस सेक्रेटरी भी रह चुके हैं। 

एस जयशंकर S. Jaishankar ने बतौर प्रथम सचिव और भारतीय पीसकीपिंग मिशन के साथ एक राजनीतिक सलाहकार के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी हैं। विदेश सेवा से रिटायरमेंट के बाद वह साल 2018 में टाटा ग्रुप के साथ जुड़े और यहां पर उन्हें ग्लोबल कॉरपोरेट अफेयर्स Global Corporate Affairs का जिम्मा सौंपा गया। 

उनके कामों की समय-समय पर तारीफ होती रहती है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ Russian Foreign Minister Sergey Lavrov ने अभी मंगलवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की जमकर तारीफ़ की है। लावरोफ़ ने एस जयशंकर को 'मंझा हुआ कूटनीतिज्ञ' और 'सच्चा देशभक्त' 'True Patriot' क़रार दिया है। सर्गेई लावरोफ़ ने भारत के विदेश मंत्री की तारीफ़ उनके हालिया अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए बयानों और सख़्त रुख़ को लेकर की है। अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल इंडिया टुडे India Today को दिए एक ख़ास इंटरव्यू में उन्होंने ये बातें कही है। अमेरिका में दोनों देशों के बीच पिछले हफ़्ते हुए रक्षा और विदेश मंत्रियों के बीच की बातचीत के बाद एस जयशंकर ने साफ़ कर दिया था कि भारत किसी के दबाव में आए बिना अपने हितों के अनुसार फ़ैसले करेगा। दरअसल पिछले हफ़्ते अमेरिका के दौरे के दौरान एस जयशंकर अपने जवाबों के कारण काफ़ी चर्चा में रहे हैं। उनकी न केवल भारत के सोशल मीडिया में बल्कि पूरी दुनिया में काफ़ी तारीफ़ हुई है।

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भारतीय अर्थव्यवस्था की सारथी-निर्मला सीतारमण 







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