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Robert Baden Powell और World Scout Day 2022

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Robert Baden Powell और World Scout Day 2022
22 Feb 2022
8 min read
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जब भी बात आती बालकपन में सेवा भाव good service in childhood की बात फिर वह चाहे सामाजिक सेवा हो या देश की सेवा ,एक दो नाम जरूर सुनाई देते हैं जैसे NSS (नेशनल सर्विस स्कीम) National Service Scheme, national cadet core (NCC) और स्काउटिंग जिसकी हम आपसे चर्चा कर रहे हैं। जैसा कि आप जानते ही हैं प्रत्येक वर्ष 22 फरवरी को विश्व स्काउट दिवस world scout day मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन इसके जनक यानी रॉबर्ट बैडेन पॉवेल Robert Baden Powell की वर्षगांठ भी होती है। आइये जानते हैं क्यों इसको विश्व स्तर world wide पर मनाया जाता है?

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आप की उम्र क्या है? आप पूछेंगे इस सवाल के पीछे क्या कारण है जो उम्र पूछी जा रही है। चलिए इस सवाल को थोड़ा बदल कर पूछ लेते हैं, तो बताइये कि आप स्कूल में पढ़ते हैं या कॉलेज में। यदि आप स्कूल में हैं तो आपने एक का नाम बहुत अच्छे से सुना होगा जिसको हम आप स्काउट एवं गाइड Scouts & Guides कहते हैं और यदि आप कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं तब फिर आपने इसी से जुड़ा नाम रोवर्स-रेंजर्स rovers-rangers सुना होगा। अब यदि आपकी उम्र स्कूल वाली है या कॉलेज वाली है, तो आप इन दोनों नामों से परिचित जरूर होंगे। इन  दोनों नामों से जुड़े काम, सेवा-भाव आप जानते ही होंगे कि स्काउटिंग के यह सब अंदर आता है। परन्तु इसमें क्या होता, किसने इसको शुरू किया और आज हम इसकी बात क्यों कर रहें हैं।  इसके बारे में, इसके जनक के बारे में, इसके नियम, इसकी प्रतिज्ञा के बारे में, और इससे जुड़े कई पहलुओं  के बारे में हम इस लेख में चर्चा करेंगे।  क्यों इसको विश्व स्तर world wide पर मनाया जाता है? तथा इसकी शुरुआत कहाँ से हुई। अंत में कि क्यों स्काउटिंग हमारे जीवन की शिक्षा scouting education or training में अति आवश्यक है? आइये  एक-एक कर सारे विषयों पर चर्चा करते हैं think with niche के साथ। 

जब भी बात आती बालकपन में सेवा भाव good service in childhood की बात फिर वह चाहे सामाजिक सेवा हो या देश की सेवा ,एक दो नाम जरूर सुनाई देते हैं जैसे NSS (नेशनल सर्विस स्कीम) National Service Scheme, national cadet core (NCC) और स्काउटिंग जिसकी हम आपसे चर्चा कर रहे हैं। जैसा कि आप जानते ही हैं प्रत्येक वर्ष 22 फरवरी को विश्व स्काउट दिवस world scout day मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन इसके जनक यानी रॉबर्ट बैडेन पॉवेल Robert Baden Powell की वर्षगांठ भी होती है।आइये जानते हैं थोड़ा इनके बारे में,

Robert Baden Powell 

स्कूलिंग से ही हर कोई इनका नाम जानता है, क्योंकि इनकी दी हुई शिक्षाएं हर किसी छोटे हों या बड़े हों दोनों तरीके के लोगों को दी जाती हैं। बच्चों में साहस की परिभाषा भरने वालों में इनका नाम जरूर रखा जाता है। रॉबर्ट स्टीफेंसन स्मिथ पॉवेल Robert Stephenson Smith Powell के नाम से जाने जाने वाले पावेल जी का जन्म 22 फरवरी, 1857 को लंदन के पैडिंगटन Paddington of London इलाके में हुआ था। उनका नाम उनके ग्रान्डफादर रॉबर्ट स्टीफेंसन Grandfather Robert Stephenson के नाम पर रखा गया था, जो एक प्रसिद्ध रेलवे इंजीनियर थे और इनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उनको स्टीफ़ के नाम से हर कोई जानता था। उनके पिता, बाडेन पॉवेल, एक प्रसिद्ध गणितज्ञ रहे, एक पुजारी रहे और एक प्रमुख धर्मविज्ञानी theologian भी थे। उनकी माँ हेनरिकेटा ग्रेस बेडेन पावेल नी स्मिथ Henrietta Grace Baden Powell née Smith, उनके पिता पावेल की तीसरी पत्नी थीं। पावेल के नौं भाई बहन थे इनको मिलाकर दस लोग थे। रॉबर्ट  उन सबसे न तो बड़े थे न ही सबसे छोटे बल्कि वे आठवें नम्बर पर थे।

पिता की मृत्यु के समय स्टीफ़ केवल तीन वर्ष के थे। अपने बच्चों को उनके सौतेले भाई-बहनों से अलग करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उन्हें अपने पिता की जायदाद  विरासत में मिली थी, हेनरीट्टा ने अपना उपनाम बदलकर बाडेन पावेल कर दिया। इसके बाद, स्टीफ़ को रॉबर्ट Stephenson Smyth Baden Powell के नाम से जाना जाने लगा। पावेल को जंगल जाना काफी पसंद था जिसकी वजह से उनकी माँ उनको डांटती भी थी डर की वजह से, पर यहीं से उनके भीतर प्रकृति प्रेमी होने का भी प्रमाण मिलता है। 

स्टीफ़ बचपन से ही संवेदनशील थे और अक्सर गुड़िया के साथ खेलना पसंद करते थे। स्टीफ ने अपनी शिक्षा केंसिंगटन kensington के डेम स्कूल में शुरू की। 1868 में, उन्होंने केंट के टुनब्रिज वेल में रोज हिल स्कूल में दाखिला लिया। दो साल बाद वह सरे के चार्टरहाउस स्कूल गए और वहाँ से पास आउट हुए। यहां भी वह अक्सर अपने शिक्षकों की आंखों को दरकिनार करते हुए पास के जंगल में घुस जाते थे। स्कूल से पास आउट होने पर, उन्हें बॉलिओल कॉलेज में प्रवेश से वंचित कर दिया गया। इसलिए, उन्होंने सेना आयोग की परीक्षा में बैठने का फैसला किया, जो सभी के लिए खुला था। उन्होंने घुड़सवार सेना में दूसरा और पैदल सेना में चौथा स्थान हासिल किया, उन्होंने घुड़सवार सेना का विकल्प चुना।

सन 1876 को बैडेन पावेल 13 वें हुसर में लेफ्टिनेंट के रूप में शामिल हुए, यह रेजिमेंट तब भारत में तैनात थी। अपनी कार्य कुशलता के चलते वे छह साल के भीतर कप्तान बन गए। कुछ समय बाद 13 वें हुसर का काफिला इंग्लैंड England लौट गया।  इंग्लैंड में रहने के दौरान, पावेल को जर्मनी, ऑस्ट्रिया और रूस Germany, Austria and Russia की यात्रा करने के लिए प्रस्तावित किया गया ताकि वे वहां गुप्त तरीके से रह कर खुफिया जानकारी एकत्र कर सकें और अपने सैन्य विकास के बारे में जान सकें। उन्होंने इसी अवधि के दौरान 'टोही और स्काउटिंग' Reconnaissance and Scouting नामक पुस्तक भी प्रकाशित की। 

1887 में, उनके मामा जनरल हेनरी स्मिथ Uncle General Henry Smith को दक्षिण अफ्रीका South Africa में गवर्नर और कमांडर इन चीफ के रूप में नियुक्त किया गया था। बेडन पावेल को उनके अधीन सेवा देने के लिए प्रतिनियुक्त किया गया था। यहाँ इन्होंने कुछ गैर-जुझारू अभियानों में भी कार्य किया। बहुत जल्द ये ब्रेवेट मेजर बन गए। 

ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने एक ख़ुफ़िया सैनिक के रूप में विभिन्न स्थानों की यात्रा की। इसके बाद उन्होंने तितलियों के रेखाचित्रों में जानकारी को शामिल किया, जिसे वे कथित रूप से इकट्ठा करने के लिए गए थे। पावेल ने कुछ समय बाद इस मुख्य पद से इस्तीफा दे दिया और अपनी रेजिमेंट में वापस लौट गए। 1896 में, बेडन पावेल को जनरल कैरिगटन के चीफ ऑफ स्टाफ Carrington's Chief of Staff के रूप में माटाबेलेलैंड को सौंपा गया था। यहां उन्हें दुश्मन के इलाकों में टोही मिशन की कमान संभालने का मौका मिला। बाद में उन्होंने अपने अनुभवों को एक पुस्तक wrote द मैटाबेल अभियान  wrote The Matabelle Campaign में लिखा। 

कैसे शुरू हुई स्काउटिंग यात्रा 

इसकी शुरुआत हम ये जानते हुए कर सकते हैं जैसे स्काउट का शाब्दिक अर्थ होता है- गुप्तचर, भेदिया, जासूस, या डिटेक्टिव। मलतब की वह व्यक्ति जो फौज में चुस्त, चालाक और साहसी हो रास्ता बनाने में नदी नालों पर पुल  बनाने में, घायलों की प्राथमिक चिकित्सा करने तथा शत्रु की गतिविधियों का पता अपने अधिकारियों को देने का काम करते हैं उन्हें " स्काउट " कहा जाता है। जैसा की हम सभी इस बात से परिचित ही हो चुके हैं कि स्काउटिंग आंदोलन के जन्मदाता लार्ड रॉबर्ट स्टीफेन्सन स्मिथ बेडन पावेल थे।

लार्ड बेडन पावेल ने फौजी स्काउट को बालोपयोगी स्वरूप प्रदान कर उनका चरित्र-निर्माण और व्यक्तित्व का विकास करने वाली संस्था बनाया ,ताकि वे एक सामाजिक और देशभक्त नागरिक social and patriotic citizens बन सकें।

स्काउटिंग विश्व स्तर पर 

स्काउटिंग का कार्य पूरे  विश्व भर के बच्चों को शिक्षा प्रदान करना रहा जिसका उद्देश्य बालकों में नवीन तरीके से सोचने और संघर्ष रुपी परिस्थिति में जीवन जीने की कला को सिखाना है। यही कार्य विश्व स्तर पर scouting को बहुत खास बनाती है। इस दिन को दुनिया भर में बॉय स्काउट्स एंड गर्ल गाइड्स / गर्ल स्काउट्स और वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ गर्ल गाइड्स एंड गर्ल स्काउट्स World Association of Girl Guides and Girl Scouts (WAGGGS) द्वारा विश्व सोच दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। 22 फरवरी स्काउटिंग एंड गाइडिंग लॉर्ड और लेडी बेडेन-पॉवेल के संस्थापकों का साझा जन्मदिन है और इसे गर्ल गाइड / गर्ल्स स्काउट वर्ल्ड में थिंकिंग डे और बॉय स्काउट वर्ल्ड में संस्थापक दिवस के रूप में मनाया जाता है। विश्व चिंतन दिवस विश्व स्तर पर मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम का विषय "हमारी दुनिया: हमारा समान भविष्य: पर्यावरण और लैंगिक समानता" "Our World: Our Common Future: Environment and Gender Equality" है। स्काउटिंग का प्रशिक्षण पूरे विश्व के लगभग प्रत्येक स्कूल में कराया जाता है आप को बता दें कि भारत स्काउटिंग 1913 में ऐनी बेसेन्ट द्वारा प्रारम्भ करायी थी। अब भारत स्काउट व गाइड संस्था है। 

आइये जानते हैं स्काउट के नियम के बारे में 

प्रत्येक बालक जोकि स्काउट गाइड का प्रशिक्षण ले रहा है उसको इसके नियम के बारे में जानकारी जरूर होनी चाहिए आइये जाते हैं वो नियम कौन से हैं। 

स्काउट  नियम एक है लेकिन इसके खण्ड या भाग नौ (09) हैं।

1.) स्काउट विश्वसनीय होता है।

2.) स्काउट वफादार होता है।

3.) स्काउट सबका मित्र और प्रत्येक दूसरे स्काउट का भाई होता है।

4.) स्काउट विनम्र होता है।

5.) स्काउट पशु-पक्षियों का मित्र और प्रकृति प्रेमी होता  है।

6.) स्काउट अनुशासनशील होता है और सार्वजनिक सम्पति की रक्षा करने में सहायता करता है।

7.) स्काउट साहसी होता है।

8.) स्काउट मितव्ययी (कम खर्चीला) होता है।

9.) स्काउट मन, वचन और कर्म से शुद्ध होता है।

स्काउट की प्रतिज्ञा क्या है आइये जानते हैं 

मैं मर्यादापूर्वक प्रतिज्ञा करता हूं कि / करती हूं कि मैं यथाशक्ति ईश्वर और अपने देश के प्रति अपने कर्त्तव्य का पालन करूंगा / करूगीं। दूसरों की सहायता करूंगा/करूंगी, और स्काउट /गाइड नियमों का पालन करूंगा/करूंगी।

कार्य क्षेत्र- स्काउट/गाइड शिक्षा के प्रमुख क्षेत्र निम्नांकित हैः-

स्काउट/गाइड कौशल-  पायनियरिंग Pioneering (गाँठ-बन्धन, तम्बू तानना, गैजेट्स बनाना, झोपड़ी-मचान-पुल बनाना, वृक्ष कटाई व औजारों का प्रयोग आदि), अनुमान लगाना, प्राथमिक चिकित्सा शिविर जीवन बिताना, भोजन बनाना इत्यादि कौशलों का प्रशिक्षण व अभ्यास स्काउट/गाइड क्राफ्ट के अंतर्गत कराया जाता है।

उददेश्य:- स्काउट/गाइड आन्दोलन का उददेश्य है नवयुवक/ नवयुवतियों का शारिरिक, मानसिक, सामाजिक और अध्यात्मिक विकास कर उन्हें उत्तरदायी नागरिक बनाना ताकि वे स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिये उपयोगी सिद्ध हो सकें।

सिद्धान्तः-  स्काउट/गाइड आन्दोलन के निम्नलिखित तीन आधार -भूत सिद्धान्त हैः-

( 1.) ईश्वर के प्रति कर्तव्य ( 2.)   दूसरों के प्रति कर्तव्य ( 3.)  स्वयं के प्रति कर्तव्य