पीएम गतिशक्ति से बदल रही भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग, जानिए कैसे?
News Synopsis
अक्टूबर 2021 में शुरू की गई पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान (PMGS NMP) का उद्देश्य देश में अलग-अलग क्षेत्रों की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना को एक-दूसरे से जोड़ना है। इसके तहत केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक साझा जियोस्पेशियल यानी भौगोलिक डेटा आधारित व्यवस्था से जोड़ा गया है।
इस व्यवस्था की मदद से सरकारी एजेंसियां एक ही डेटा और डिजिटल जानकारी के आधार पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना बना सकती हैं। इससे परियोजनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने, दोहराव कम करने और निर्माण कार्यों को अधिक प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सरकार के अनुसार, पीएम गतिशक्ति ने बुनियादी ढांचा योजना को अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ आगे बढ़ाने में मदद की है।
जियोस्पेशियल तकनीक बनी योजना का आधार (Geospatial Technology at the Core)
पीएम गतिशक्ति PM GatiShakti आधुनिक डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल करके बुनियादी ढांचे की योजना को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर देता है।
इस प्लेटफॉर्म पर जियोस्पेशियल डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) इंटीग्रेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे सरकारी एजेंसियों को किसी परियोजना से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों को एक साथ देखने और उनका विश्लेषण करने में मदद मिलती है।
निर्माण से पहले चुनौतियों की पहचान (Identifying Challenges Before Construction)
डेटा आधारित योजना से अधिकारियों को परियोजना शुरू होने से पहले संभावित समस्याओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है। अलग-अलग क्षेत्रों की योजनाओं को एक साथ देखने से सड़क, रेलवे, बिजली, बंदरगाह और अन्य परियोजनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।
इसका उद्देश्य ऐसी स्थिति को कम करना है जिसमें एक विभाग द्वारा बनाई गई परियोजना दूसरे विभाग के काम में बाधा पैदा करे या भविष्य में उसी क्षेत्र में दोबारा खुदाई और निर्माण की जरूरत पड़े।
नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप ने 396 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया (Network Planning Group Evaluates 396 Projects)
पीएम गतिशक्ति के तहत नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) ने कुल 396 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मूल्यांकन किया है। इन परियोजनाओं की अनुमानित संयुक्त लागत लगभग ₹18.66 लाख करोड़ यानी करीब 207.39 अरब डॉलर बताई गई है।
इनमें से:
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256 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है।
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198 परियोजनाएं वर्तमान में लागू की जा रही हैं।
इन परियोजनाओं में बुनियादी ढांचे के कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इससे पता चलता है कि देश में बड़े पैमाने पर परियोजनाओं की योजना बनाते समय एकीकृत दृष्टिकोण का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
बड़े स्तर पर लागू हो रहा एकीकृत योजना मॉडल (Integrated Planning Model Being Applied at Scale)
पीएम गतिशक्ति का उद्देश्य केवल परियोजनाओं की संख्या बढ़ाना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नई परियोजनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हों और उनका आर्थिक तथा सामाजिक प्रभाव अधिक हो।
कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा क्षेत्रों को जोड़ा गया (Multiple Infrastructure Sectors Covered)
पीएम गतिशक्ति के तहत कई प्रमुख क्षेत्रों की योजना को आपस में जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इनमें शामिल हैं:
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सड़क और राष्ट्रीय राजमार्ग।
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रेलवे।
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बंदरगाह और जलमार्ग।
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बिजली।
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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस।
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नागरिक उड्डयन।
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औद्योगिक कॉरिडोर।
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दूरसंचार।
विभागों के बीच बेहतर तालमेल (Better Coordination Between Departments)
इन क्षेत्रों को एक साझा योजना व्यवस्था से जोड़ने का फायदा यह है कि किसी एक क्षेत्र में बनाई जा रही परियोजना की जानकारी दूसरे संबंधित विभागों को भी मिल सकती है।
उदाहरण के लिए, किसी औद्योगिक क्षेत्र के विकास के साथ सड़क, रेलवे, बिजली और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की योजना भी पहले से तैयार की जा सकती है। इससे परियोजनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलती है।
सरकार के विभिन्न हिस्सों में पीएम गतिशक्ति का विस्तार (PM GatiShakti Adopted Across Government)
पीएम गतिशक्ति की पहुंच इसकी शुरुआत के बाद लगातार बढ़ी है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, 58 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों ने पीएम गतिशक्ति फ्रेमवर्क को अपनाया है। इसके अलावा सभी 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी इस पहल से जुड़े हैं।
प्लेटफॉर्म पर लगभग 1,800 डेटा लेयर्स, 65 से अधिक सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और 100 से ज्यादा मोबाइल तथा वेब एप्लीकेशन होने की जानकारी दी गई है।
हालांकि, हाल की सरकारी जानकारी में पीएम गतिशक्ति के तहत 1,700 से अधिक डेटा लेयर्स और 57 मंत्रालयों व विभागों के एकीकरण का भी उल्लेख किया गया है। इसलिए अलग-अलग समय के सरकारी अपडेट में आंकड़ों में बदलाव दिखाई दे सकता है।
साझा डेटा से बेहतर योजना (Better Planning Through Shared Data)
इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी एजेंसियों को एक समान सूचना आधार उपलब्ध कराना है। इससे किसी परियोजना की योजना बनाते समय जमीन, परिवहन, कनेक्टिविटी, औद्योगिक क्षेत्र और अन्य जरूरी जानकारियों को एक साथ देखा जा सकता है।
पीएम गतिशक्ति के लिए अलग से बजट नहीं (No Separate Budget for PM GatiShakti)
पीएम गतिशक्ति खुद किसी अलग बजटीय आवंटन के माध्यम से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्त उपलब्ध नहीं कराता है।
इसके तहत पहचानी और मूल्यांकित की गई परियोजनाओं को संबंधित मंत्रालय, विभाग, राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन अपनी मौजूदा योजनाओं और वित्तीय व्यवस्था के माध्यम से मंजूरी और लागू करते हैं।
इसलिए पीएम गतिशक्ति को मुख्य रूप से एक योजना और समन्वय का फ्रेमवर्क माना जा सकता है, न कि अलग से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को फंड करने वाली योजना।
मौजूदा योजनाओं के माध्यम से वित्त (Funding Through Existing Schemes)
इस व्यवस्था का फायदा यह है कि परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है, जबकि वित्तीय जिम्मेदारी संबंधित मंत्रालयों और सरकारों के पास रहती है।
पीएम गतिशक्ति पब्लिक प्लेटफॉर्म से डेटा तक पहुंच बढ़ी (Public Platform Expands Access to Data)
सरकार ने अक्टूबर 2025 में PM GatiShakti Public प्लेटफॉर्म शुरू किया, जिससे चुनिंदा बुनियादी ढांचा और जियोस्पेशियल डेटा तक निजी क्षेत्र, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों की नियंत्रित पहुंच बढ़ी है।
यह प्लेटफॉर्म क्वेरी आधारित व्यवस्था के माध्यम से चयनित गैर-संवेदनशील डेटा उपलब्ध कराता है।
निजी क्षेत्र के लिए उपयोगी जानकारी (Useful Information for the Private Sector)
इस प्लेटफॉर्म के जरिए निजी कंपनियां और अन्य उपयोगकर्ता कनेक्टिविटी, संभावित स्थानों और बुनियादी ढांचा सुविधाओं से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण कर सकते हैं।
सरकार के अनुसार, PM GatiShakti Public में 230 स्वीकृत डेटासेट उपलब्ध कराए गए हैं। इसमें साइट की उपयुक्तता का विश्लेषण, कनेक्टिविटी मैपिंग और अन्य विश्लेषणात्मक सुविधाएं शामिल हैं।
लॉजिस्टिक्स दक्षता सुधारने पर जोर (Improving Logistics Efficiency)
पीएम गतिशक्ति का एक प्रमुख उद्देश्य भारत के लॉजिस्टिक्स सिस्टम को अधिक कुशल बनाना है।
सड़क, रेलवे, बंदरगाह, जलमार्ग और अन्य परिवहन नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल से देश में सामान की आवाजाही अधिक प्रभावी हो सकती है।
सरकारी आकलनों के अनुसार, एकीकृत बुनियादी ढांचा योजनाओं और लॉजिस्टिक्स सुधारों से लॉजिस्टिक्स दक्षता, टर्नअराउंड टाइम और कारोबार करने में आसानी जैसे क्षेत्रों में सुधार हुआ है।
व्यवसायों को मिल सकता है लाभ (Businesses Can Benefit)
बेहतर लॉजिस्टिक्स से कंपनियों को कच्चा माल और तैयार उत्पाद एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में कम समय और लागत लग सकती है।
इससे विनिर्माण, निर्यात, खुदरा कारोबार और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े व्यवसायों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है।
भारत की लॉजिस्टिक्स लागत में सुधार (India’s Logistics Costs Show Improvement)
DPIIT और National Council of Applied Economic Research (NCAER) द्वारा किए गए आकलन के अनुसार, भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 2023-24 में GDP की लगभग 7.97% थी। यह अनुमान पहले बताए जाने वाले 13-14% जैसे आंकड़ों की तुलना में अधिक वैज्ञानिक और डेटा आधारित अध्ययन पर आधारित है।
लॉजिस्टिक्स लागत कम होने का महत्व (Why Lower Logistics Costs Matter)
लॉजिस्टिक्स लागत में कमी से निर्माताओं, निर्यातकों, खुदरा कारोबारियों और उपभोक्ताओं को फायदा हो सकता है।
कम परिवहन और भंडारण लागत से उत्पादों की कुल लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी भारत को वैश्विक विनिर्माण और निवेश के लिए अधिक आकर्षक बना सकती है।
मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा (Supporting Multimodal Connectivity)
पीएम गतिशक्ति में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को विशेष महत्व दिया गया है।
इसका अर्थ है कि सड़क, रेलवे, बंदरगाह, जलमार्ग और अन्य परिवहन साधनों को अलग-अलग विकसित करने के बजाय उनके बीच बेहतर संपर्क बनाया जाए।
परिवहन नेटवर्क को आपस में जोड़ना (Connecting Different Transport Networks)
उदाहरण के लिए, किसी बंदरगाह से जुड़े औद्योगिक क्षेत्र तक सड़क और रेलवे कनेक्टिविटी को एक साथ विकसित किया जा सकता है।
इससे माल की आवाजाही में आने वाली बाधाओं को कम करने और अलग-अलग क्षेत्रों को बाजारों से बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करना (Strengthening Last-Mile Infrastructure)
बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट तभी अधिक प्रभावी होते हैं जब उनका संपर्क छोटे शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों, उत्पादन केंद्रों और स्थानीय बाजारों से भी हो।
पीएम गतिशक्ति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में मौजूद कमियों की पहचान करना और उन्हें बेहतर करना है।
छोटे शहरों और स्थानीय केंद्रों को जोड़ने की कोशिश (Connecting Smaller Cities and Local Economic Centres)
यदि किसी बड़े हाईवे, रेलवे नेटवर्क या बंदरगाह का संपर्क आसपास के उत्पादन केंद्रों और बाजारों से कमजोर है, तो उसका पूरा आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता।
एकीकृत योजना के जरिए ऐसी कमियों की पहचान करके बेहतर कनेक्टिविटी तैयार करने में मदद मिल सकती है।
औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने में मदद (Boosting Industrial Competitiveness)
भारत की विनिर्माण और औद्योगिक विकास की महत्वाकांक्षाओं के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा बेहद जरूरी है।
बेहतर सड़कें, रेलवे, बंदरगाह, बिजली नेटवर्क और दूरसंचार सुविधाएं कंपनियों के संचालन से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकती हैं।
निवेश के लिए बेहतर माहौल (Creating a Better Investment Environment)
एकीकृत बुनियादी ढांचा व्यवस्था घरेलू कंपनियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी अधिक अनुकूल कारोबारी वातावरण बनाने में मदद कर सकती है।
जब कच्चे माल, श्रम, ऊर्जा और तैयार उत्पादों की आवाजाही अधिक आसान होती है, तो उद्योगों के लिए नए स्थानों पर विस्तार करना भी आसान हो सकता है।
तकनीक आधारित हो रही बुनियादी ढांचा योजना (Technology-Driven Infrastructure Planning)
डिजिटल तकनीक पीएम गतिशक्ति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है।
पारंपरिक योजना व्यवस्था में अलग-अलग विभाग अपने-अपने डेटा और योजनाओं के आधार पर निर्णय लेते थे। इसके कारण कभी-कभी सूचनाओं के बीच तालमेल की कमी हो सकती थी।
डेटा और सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल (Use of Data and Satellite Imagery)
पीएम गतिशक्ति में कई तरह के डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल एप्लीकेशन को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है।
इससे अधिकारी किसी क्षेत्र की जरूरतों का अधिक व्यापक विश्लेषण कर सकते हैं और परियोजना शुरू करने से पहले संभावित चुनौतियों को समझ सकते हैं।
सरकार ने पीएम गतिशक्ति को बुनियादी ढांचा योजना में डिजिटल और डेटा आधारित बदलाव के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया है।
पीएम गतिशक्ति की भविष्य में बढ़ती भूमिका (PM GatiShakti’s Future Role)
पीएम गतिशक्ति के लगातार विस्तार से भारत के बुनियादी ढांचा नेटवर्क को और अधिक एकीकृत बनाने की उम्मीद है।
केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, डिजिटल तकनीक का अधिक इस्तेमाल और डेटा आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन को बेहतर बना सकती है।
112 आकांक्षी जिलों के लिए जिला मास्टर प्लान (District Master Plans for Aspirational Districts)
सरकार ने पीएम गतिशक्ति के तहत सभी 112 आकांक्षी जिलों के लिए जिला मास्टर प्लान की दिशा में भी काम आगे बढ़ाया है। इसका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की स्थानीय स्तर पर बेहतर योजना बनाना है।
निजी क्षेत्र और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर (New Opportunities for Private Sector and Researchers)
PM GatiShakti Public जैसे प्लेटफॉर्म से निजी कंपनियों, शोधकर्ताओं और अन्य उपयोगकर्ताओं को चुनिंदा गैर-संवेदनशील डेटा तक पहुंच मिलने से निवेश और परियोजना योजना में डेटा आधारित निर्णय लेने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
पीएम गतिशक्ति भारत में बुनियादी ढांचा विकास को अधिक एकीकृत, डिजिटल और डेटा आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है। यह केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और राज्यों को साझा जियोस्पेशियल जानकारी के आधार पर योजना बनाने में मदद करता है।
सड़क, रेलवे, बंदरगाह, जलमार्ग, बिजली, दूरसंचार और औद्योगिक कॉरिडोर जैसे क्षेत्रों को एक साथ देखने से परियोजनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है। इससे दोहराव कम करने, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी सुधारने और मल्टीमॉडल परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
भारत की लॉजिस्टिक्स लागत का 2023-24 के लिए GDP का लगभग 7.97% आकलन किया गया है। सरकार की अन्य लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी पहलों के साथ पीएम गतिशक्ति को इस क्षेत्र में दक्षता बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आगे चलकर, डिजिटल तकनीक, जियोस्पेशियल डेटा, जिला स्तर की योजना और निजी क्षेत्र की भागीदारी का विस्तार पीएम गतिशक्ति को और उपयोगी बना सकता है। इसका लक्ष्य केवल अधिक परियोजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ऐसी कनेक्टेड, समन्वित और कुशल बुनियादी ढांचा व्यवस्था तैयार करना है जो उद्योग, व्यापार, निवेश और आम नागरिकों के लिए बेहतर अवसर पैदा करे।


