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Sustainability Technology Advancement and Wellness

National Technology day- प्रौघोगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ता भारत 

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National Technology day- प्रौघोगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ता भारत 

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Post Highlights

तकनीकी क्षेत्र में भारत शुरुआत से ही आगे रहा है। भारत में टेक्नोलॉजी (Technology) का प्रयोग प्राचीन समय से होता आ रहा है। अगर भारत के इतिहास पर नज़र डाले तो यहाँ विज्ञान का उदय 3000 ईसा पूर्व में ही हो गया था। हड़प्पा और मोहेंजोदड़ो (harappa and mohenjo-daro) की खुदाई से यह प्रमाण मिलते है की उन लोगो में वैज्ञानिक समझ थी। प्राचीन काल में भारत के अनेक क्षत्रो में विज्ञान (Science) में कई खोज की गयी। आज विज्ञान और प्रौघोगिकी (science and technology) का स्वरूप काफी विकसित हो चुका है। 

आज राष्ट्रीय प्रौघोगिकी दिवस (National Technology day) पर हम बात करेंगे कि भारत में कैसे टेक्नोलॉजी क्षेत्र का दायरा बढ़ता चला गया। 

आज पूरे भारत में तेजी से वैज्ञानिक खोजें हो रही हैं। इन आधुनिक वैज्ञानिक खोजों और प्रौघोगिकी की सफलता में भारत के जगदीश चंद्र बसु, प्रफुल्ल चंद्र राय, सी. वी. रमन, सत्येंद्रनाथ बोस, मेघनाथ साहा, प्रशांतचंद्र महाललोबिस, श्रीनिवास रामानुजन, हरगोविंद खुराना (Jagdish Chandra Basu, Prafulla Chandra Rai, C.V. Raman, Satyendranath Bose, Meghnath Saha, Prasantachandra Mahallobis, Srinivasa Ramanujan, Hargovind Khurana) आदि का वनस्पति, भौतिकी, गणित, रसायन, यांत्रिकी, चिकित्सा विज्ञान, खगोल विज्ञान (Botany, Physics, Mathematics, Chemistry, Mechanics, Medical Science, Astronomy) आदि क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान है।  

अगर प्राचीन समय की बात करें तो सिन्धु सभ्यता (Indus Valley Civilisation) के दौर में भवन-निर्माण, धातु-विज्ञान, वस्त्र-निर्माण, परिवहन-व्यवस्था (building construction, metallurgy, textile manufacturing, transportation) आदि कार्य विकसित हो चुके थे। इसके बाद आर्यों के साथ भारत में विज्ञान की परंपरा और भी विकसित हो गई। इस दौर में गणित, रसायन, खगोल, चिकित्सा, धातु (Mathematics, Chemistry, Astronomy, Medicine, Metals) आदि क्षेत्रों में विज्ञान ने खूब उन्नति की। विज्ञान और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल ईसा के जन्म से लगभग 200वर्ष पूर्व से शुरू हुआ और ईसा के जन्म के बाद लगभग 11वीं सदी तक काफी विकसित हुआ। 

भारत की आजादी के बाद, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु (Prime Minister Jawaharlal Nehru) जी ने ऐसे कदम उठाये जिनके कारण उच्च शिक्षा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Higher Education and Science & Technology) को बढावा मिला। भारत में भारतीय प्रोधोगिकी संस्थान (Indian Institute of Technology-IIT) की स्थापना की गयी जिसमें 22 सदस्यों की समिति बनी जिनमें उस समय के प्रसिद्ध विज्ञानिको का समावेश था। आपको बता दें कि आईआईटी (IIT) का शुभारम्भ 18 अगस्त 1951 को खड़गपुर, पश्चिम बंगाल में उस समय के शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आज़ाद (Education Minister Abul Kalam Azad) के द्वारा किया गया था। सन 1960 तक आईआईटी (IIT) बड़े शहर जैसे बॉम्बे, कानपुर और दिल्ली में खोले जा चुके थे। सन 1960 की शुरुवात में सोवियत संघ (the Soviet Union) ने भारत में भारतीय अन्तरिक्ष संस्थान (ISRO) की स्थापना में सहयोग देते हुए भारत के अन्तरिक्ष अनुसन्धान कार्यक्रम (space research program) को एक नयी दिशा प्रदान की। भारत में परमाणु शक्ति का परिचय देते हुए 18 मई 1974 को पोखरण में पहला सफल परिक्षण किया।   

26 सितंबर 1942 को सर ए. रामास्वामी मुदालियर और डॉ॰ शांतिस्वरूप भटनागर (Sir A. Ramaswamy Mudaliar and Dr. Shantiswarup Bhatnagar) के प्रयासों के फलस्वरूप वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् कॉउन्सिल ऑफ़ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (Council of Scientific and Industrial Research-CSIR) की स्थापना, नई दिल्ली में एक स्वायत्त संस्था (autonomous body) के रूप में हुई।   

भारत की तीसरी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Prime Minister Indira Gandhi) के अथक प्रयासों से आज भारत विज्ञान के किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। विकास की इस कड़ी में दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री (Prime Minister Lal Bahadur Shastri) के ‘अधिक अन्न उपजाओ’ अभियान ने जहाँ हरित क्रांति के द्वारा खोले, वहीं अन्य क्षेत्रों में भी वैज्ञानिक प्रगति हुई। परिणामस्वरूप, आजादी के बाद के इन वर्षों में कृषि, चिकित्सा, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिकी, संचार, अंतरिक्ष, परिवहन और रक्षा विज्ञान (Agriculture, medicine, nuclear energy, electronics, communications, space, transportation and defense science) के क्षेत्र में हुई प्रगति के कारण आज भारत देश विकासशील देशों की श्रेणी में अग्रणी है।  

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) का मुख्य अंग रही है। देश की कुल आबादी के लगभग 70 प्रतिशत व्यक्ति कृषि व्यवसाय से जुड़े हैं। डॉ॰ बी. पी. पाल, डॉ॰ एस.एम. स्वामीनाथन और डॉ॰ नॉरमन बोरलॉग (Dr. B. P. Pal, Dr. SM. Swaminathan and Dr. Norman Borlaug) के प्रयासों से भारत में आई हरित क्रांति (green Revolution) के फलस्वरूप आज भारत खाद्यान्न उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर हैं। वर्गीज कुरियन (Verghese Kurien) ने श्वेत क्रांति (White Revolution) द्वारा हमें दुग्ध उत्पादन में भी शीर्ष स्थान पर पहुँचा दिया है, तो पशु-पालन, मछली-पालन, कुक्कुट पालन (animal husbandry, fish farming, poultry farming) में भारत स्वावलंबी बन चुका है। वर्ष 1905 में पूसा, बिहार में इम्पीरियल एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (Imperial Agricultural Research Institute) की स्थापना से लेकर वर्तमान 'भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद’ (Indian Council of Agricultural Research) तक देश ने लंबा सफर तय करके कम समय में अधिक उपज देने वाली नई-तकनीकें विकसित कर ली हैं।

आपको बता दें कि सन् 1970 में भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिकी विभाग (electronics department) की स्थापना की। यह विभाग इलेक्ट्रॉनिकी उद्योग के प्रत्येक क्षेत्र में नीतियाँ (Policies) तैयार करता है। सूचना प्रौद्योगिकी ने विशेष रूप से कंप्यूटर तथा संचार की दिशा में हो रहे विकास ने दूरसंचार तथा कंप्यूटर उद्योग (telecommunications and computer industry) में क्रांति ला दी है। डिजि‍टल प्रौद्योगिकी (digital technology) पर आधरित मोबाइल, सेलुलर, रेडियो, और इंटरनेट (mobile, cellular, radio, internet) के आने से सूचना और संचार के क्षेत्र में काफ़ी परिवर्तन आया है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण आज हमारे सामने हैं।  

इसके साथ ही, चिकित्सा के क्षेत्र में कैट-स्कैनर (CT scan), रक्षा विज्ञान के क्षेत्र में मिसाइलें, राडार और परमाणु अस्त्र (Missiles, Radars and Nuclear Weapons), सूचना जगत में उपग्रहों (satellites), परिवहन के क्षेत्र में मोटर कारों व वायुयानों (motor cars and aircraft) तथा कृषि के क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों और कृषि उपकरणों (chemical fertilizers and agricultural equipment) का विकास भी मिश्रित वैज्ञानिक उपलब्धियाँ हैं। 

आज भारत न सिर्फ दूसरे देशों से तकनीक (Technology) लेकर अद्भुत कार्य कर रहा है बल्कि मौलिक स्तर पर भी अपना योगदान कर रहा है। भारत हर प्रकार से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी विकास में अग्रणी है। आधुनिक युग में भारत में विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में नए-नए प्रयोग लगातार होते रहे, किंतु कुछ भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियों (Indian Scientific Achievements) के कारण पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन हुआ। 

राष्ट्रीय प्रौघोगिकी दिवस:

11 मई को हर साल राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस (National Technology Day) देश भर में मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) जी द्वारा की गयी थी, राष्ट्रीय प्रौघोगिकी दिवस पहली बार 11 मई 1999 को मनाया गया था। यह दिन देश के परमाणु संपन्न (nuclear rich) होने के गर्व का प्रतीक है, इसके साथ ही यह हमें भारत की तकनीकी उपलब्धियों (technical achievements) की भी याद दिलाता है। आज भारत ने टेक्नोलोजी के क्षेत्र में अपना अलग ही मुकाम बना लिया है। भारत के पास आज अत्याधुनिक हथियार और परमाणु ताकत (weapons and nuclear power) है, जो भारत को शक्तिशाली देशों में से एक बनाता है। 

भारत में परमाणु परीक्षण का इतिहास:

भारत का पहला परमाणु परीक्षण (first nuclear test) इंदिरा गाँधी जी की सरकार में पोखरण में 18 मई 1974 को किया गया था, इस ऑपरेशन का कोड-नाम ‘स्माइलिंग बुद्धा’ (smiling buddha) था। इसके बाद मई 1998 को दूसरी बार पोखरण टेस्ट रेंज में भारतीय सेना (Indian Army) ने पांच परमाणु बमों का परीक्षण किया इस ऑपरेशन को पोखरण-2 और ऑपरेशन शक्ति (Pokhran-2 and Operation Shakti) के नाम से जाना जाता है। उस समय भारत के लिए यह न्यूक्लियर टेस्ट करना आसान नहीं था, क्योंकि तब कई देशों का दबाव भारत पर था, दरअसल यह मिशन पूरी तरह से सेटेलाइट (satellite) और जासूसों से बचकर किया गया था।  जब अमेरिकी सेटेलाइट भारत से कुछ समय के लिए हटती थी तब रात को उस थोड़े से समय में काम किया जाता था। क्योंकी सेटेलाइट के जरिए ही अमेरिका, जापान और अन्य देश भारत पर नज़र रखा करते थे। बाकी देश नहीं चाहते थे कि भारत एक परमाणु सम्पन्न देश बने। हालांकि, इसके बावजूद में भारत में परीक्षण हुए और उसमे सफलता भी प्राप्त हुई। 

National Technology Day 2022 की थीम:

प्रति वर्ष 11 मई को National Technology Day एक विशेष थीम (Theme) के साथ मनाया जाता है, इस साल राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2022 की थीम ‘प्रगति: तकनीकी नवाचारों के माध्यम से विकास के रास्ते को बढ़ावा देना‘ (PRAGATI: Promoting Avenues for Growth through Technological Innovations) है। पिछली साल 2021 की थीम “एक सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी” (Science and technology for a sustainable future) रखी गयी थी, तो वहीं 2020 की थीम ‘रीबूटिंग द इकोनॉमी विद साइंस, टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च ट्रांसलेशन‘ (Rebooting the Economy with Science, Technology and Research Translation) थी।

Think with Niche पर आपके लिए और रोचक विषयों पर लेख उपलब्ध हैं एक अन्य लेख को पढ़ने के लिए कृपया नीचे  दिए लिंक पर क्लिक करे-

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आज पूरे भारत में तेजी से वैज्ञानिक खोजें हो रही हैं। इन आधुनिक वैज्ञानिक खोजों और प्रौघोगिकी की सफलता में भारत के जगदीश चंद्र बसु, प्रफुल्ल चंद्र राय, सी. वी. रमन, सत्येंद्रनाथ बोस, मेघनाथ साहा, प्रशांतचंद्र महाललोबिस, श्रीनिवास रामानुजन, हरगोविंद खुराना (Jagdish Chandra Basu, Prafulla Chandra Rai, C.V. Raman, Satyendranath Bose, Meghnath Saha, Prasantachandra Mahallobis, Srinivasa Ramanujan, Hargovind Khurana) आदि का वनस्पति, भौतिकी, गणित, रसायन, यांत्रिकी, चिकित्सा विज्ञान, खगोल विज्ञान (Botany, Physics, Mathematics, Chemistry, Mechanics, Medical Science, Astronomy) आदि क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान है।  

अगर प्राचीन समय की बात करें तो सिन्धु सभ्यता (Indus Valley Civilisation) के दौर में भवन-निर्माण, धातु-विज्ञान, वस्त्र-निर्माण, परिवहन-व्यवस्था (building construction, metallurgy, textile manufacturing, transportation) आदि कार्य विकसित हो चुके थे। इसके बाद आर्यों के साथ भारत में विज्ञान की परंपरा और भी विकसित हो गई। इस दौर में गणित, रसायन, खगोल, चिकित्सा, धातु (Mathematics, Chemistry, Astronomy, Medicine, Metals) आदि क्षेत्रों में विज्ञान ने खूब उन्नति की। विज्ञान और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल ईसा के जन्म से लगभग 200वर्ष पूर्व से शुरू हुआ और ईसा के जन्म के बाद लगभग 11वीं सदी तक काफी विकसित हुआ। 

भारत की आजादी के बाद, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु (Prime Minister Jawaharlal Nehru) जी ने ऐसे कदम उठाये जिनके कारण उच्च शिक्षा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Higher Education and Science & Technology) को बढावा मिला। भारत में भारतीय प्रोधोगिकी संस्थान (Indian Institute of Technology-IIT) की स्थापना की गयी जिसमें 22 सदस्यों की समिति बनी जिनमें उस समय के प्रसिद्ध विज्ञानिको का समावेश था। आपको बता दें कि आईआईटी (IIT) का शुभारम्भ 18 अगस्त 1951 को खड़गपुर, पश्चिम बंगाल में उस समय के शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आज़ाद (Education Minister Abul Kalam Azad) के द्वारा किया गया था। सन 1960 तक आईआईटी (IIT) बड़े शहर जैसे बॉम्बे, कानपुर और दिल्ली में खोले जा चुके थे। सन 1960 की शुरुवात में सोवियत संघ (the Soviet Union) ने भारत में भारतीय अन्तरिक्ष संस्थान (ISRO) की स्थापना में सहयोग देते हुए भारत के अन्तरिक्ष अनुसन्धान कार्यक्रम (space research program) को एक नयी दिशा प्रदान की। भारत में परमाणु शक्ति का परिचय देते हुए 18 मई 1974 को पोखरण में पहला सफल परिक्षण किया।   

26 सितंबर 1942 को सर ए. रामास्वामी मुदालियर और डॉ॰ शांतिस्वरूप भटनागर (Sir A. Ramaswamy Mudaliar and Dr. Shantiswarup Bhatnagar) के प्रयासों के फलस्वरूप वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् कॉउन्सिल ऑफ़ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (Council of Scientific and Industrial Research-CSIR) की स्थापना, नई दिल्ली में एक स्वायत्त संस्था (autonomous body) के रूप में हुई।   

भारत की तीसरी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Prime Minister Indira Gandhi) के अथक प्रयासों से आज भारत विज्ञान के किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। विकास की इस कड़ी में दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री (Prime Minister Lal Bahadur Shastri) के ‘अधिक अन्न उपजाओ’ अभियान ने जहाँ हरित क्रांति के द्वारा खोले, वहीं अन्य क्षेत्रों में भी वैज्ञानिक प्रगति हुई। परिणामस्वरूप, आजादी के बाद के इन वर्षों में कृषि, चिकित्सा, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिकी, संचार, अंतरिक्ष, परिवहन और रक्षा विज्ञान (Agriculture, medicine, nuclear energy, electronics, communications, space, transportation and defense science) के क्षेत्र में हुई प्रगति के कारण आज भारत देश विकासशील देशों की श्रेणी में अग्रणी है।  

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) का मुख्य अंग रही है। देश की कुल आबादी के लगभग 70 प्रतिशत व्यक्ति कृषि व्यवसाय से जुड़े हैं। डॉ॰ बी. पी. पाल, डॉ॰ एस.एम. स्वामीनाथन और डॉ॰ नॉरमन बोरलॉग (Dr. B. P. Pal, Dr. SM. Swaminathan and Dr. Norman Borlaug) के प्रयासों से भारत में आई हरित क्रांति (green Revolution) के फलस्वरूप आज भारत खाद्यान्न उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर हैं। वर्गीज कुरियन (Verghese Kurien) ने श्वेत क्रांति (White Revolution) द्वारा हमें दुग्ध उत्पादन में भी शीर्ष स्थान पर पहुँचा दिया है, तो पशु-पालन, मछली-पालन, कुक्कुट पालन (animal husbandry, fish farming, poultry farming) में भारत स्वावलंबी बन चुका है। वर्ष 1905 में पूसा, बिहार में इम्पीरियल एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (Imperial Agricultural Research Institute) की स्थापना से लेकर वर्तमान 'भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद’ (Indian Council of Agricultural Research) तक देश ने लंबा सफर तय करके कम समय में अधिक उपज देने वाली नई-तकनीकें विकसित कर ली हैं।

आपको बता दें कि सन् 1970 में भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिकी विभाग (electronics department) की स्थापना की। यह विभाग इलेक्ट्रॉनिकी उद्योग के प्रत्येक क्षेत्र में नीतियाँ (Policies) तैयार करता है। सूचना प्रौद्योगिकी ने विशेष रूप से कंप्यूटर तथा संचार की दिशा में हो रहे विकास ने दूरसंचार तथा कंप्यूटर उद्योग (telecommunications and computer industry) में क्रांति ला दी है। डिजि‍टल प्रौद्योगिकी (digital technology) पर आधरित मोबाइल, सेलुलर, रेडियो, और इंटरनेट (mobile, cellular, radio, internet) के आने से सूचना और संचार के क्षेत्र में काफ़ी परिवर्तन आया है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण आज हमारे सामने हैं।  

इसके साथ ही, चिकित्सा के क्षेत्र में कैट-स्कैनर (CT scan), रक्षा विज्ञान के क्षेत्र में मिसाइलें, राडार और परमाणु अस्त्र (Missiles, Radars and Nuclear Weapons), सूचना जगत में उपग्रहों (satellites), परिवहन के क्षेत्र में मोटर कारों व वायुयानों (motor cars and aircraft) तथा कृषि के क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों और कृषि उपकरणों (chemical fertilizers and agricultural equipment) का विकास भी मिश्रित वैज्ञानिक उपलब्धियाँ हैं। 

आज भारत न सिर्फ दूसरे देशों से तकनीक (Technology) लेकर अद्भुत कार्य कर रहा है बल्कि मौलिक स्तर पर भी अपना योगदान कर रहा है। भारत हर प्रकार से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी विकास में अग्रणी है। आधुनिक युग में भारत में विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में नए-नए प्रयोग लगातार होते रहे, किंतु कुछ भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियों (Indian Scientific Achievements) के कारण पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन हुआ। 

राष्ट्रीय प्रौघोगिकी दिवस:

11 मई को हर साल राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस (National Technology Day) देश भर में मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) जी द्वारा की गयी थी, राष्ट्रीय प्रौघोगिकी दिवस पहली बार 11 मई 1999 को मनाया गया था। यह दिन देश के परमाणु संपन्न (nuclear rich) होने के गर्व का प्रतीक है, इसके साथ ही यह हमें भारत की तकनीकी उपलब्धियों (technical achievements) की भी याद दिलाता है। आज भारत ने टेक्नोलोजी के क्षेत्र में अपना अलग ही मुकाम बना लिया है। भारत के पास आज अत्याधुनिक हथियार और परमाणु ताकत (weapons and nuclear power) है, जो भारत को शक्तिशाली देशों में से एक बनाता है। 

भारत में परमाणु परीक्षण का इतिहास:

भारत का पहला परमाणु परीक्षण (first nuclear test) इंदिरा गाँधी जी की सरकार में पोखरण में 18 मई 1974 को किया गया था, इस ऑपरेशन का कोड-नाम ‘स्माइलिंग बुद्धा’ (smiling buddha) था। इसके बाद मई 1998 को दूसरी बार पोखरण टेस्ट रेंज में भारतीय सेना (Indian Army) ने पांच परमाणु बमों का परीक्षण किया इस ऑपरेशन को पोखरण-2 और ऑपरेशन शक्ति (Pokhran-2 and Operation Shakti) के नाम से जाना जाता है। उस समय भारत के लिए यह न्यूक्लियर टेस्ट करना आसान नहीं था, क्योंकि तब कई देशों का दबाव भारत पर था, दरअसल यह मिशन पूरी तरह से सेटेलाइट (satellite) और जासूसों से बचकर किया गया था।  जब अमेरिकी सेटेलाइट भारत से कुछ समय के लिए हटती थी तब रात को उस थोड़े से समय में काम किया जाता था। क्योंकी सेटेलाइट के जरिए ही अमेरिका, जापान और अन्य देश भारत पर नज़र रखा करते थे। बाकी देश नहीं चाहते थे कि भारत एक परमाणु सम्पन्न देश बने। हालांकि, इसके बावजूद में भारत में परीक्षण हुए और उसमे सफलता भी प्राप्त हुई। 

National Technology Day 2022 की थीम:

प्रति वर्ष 11 मई को National Technology Day एक विशेष थीम (Theme) के साथ मनाया जाता है, इस साल राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2022 की थीम ‘प्रगति: तकनीकी नवाचारों के माध्यम से विकास के रास्ते को बढ़ावा देना‘ (PRAGATI: Promoting Avenues for Growth through Technological Innovations) है। पिछली साल 2021 की थीम “एक सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी” (Science and technology for a sustainable future) रखी गयी थी, तो वहीं 2020 की थीम ‘रीबूटिंग द इकोनॉमी विद साइंस, टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च ट्रांसलेशन‘ (Rebooting the Economy with Science, Technology and Research Translation) थी।

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