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अपना हर दिन ऐसे जियो जैसे कि आखिरी हो !

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अपना हर दिन ऐसे जियो जैसे कि आखिरी हो !
01 Oct 2021
5 min read
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अक्सर गुलाब का फूल हम वैलेंटाइन डे पर देते हैं क्यों कि गुलाब प्रेम का प्रतीक है और प्रेम एक प्रकार का सुख है। हम गुलाब उन्हें देते हैं, जिन्हे हम प्यार करते हैं ,उन्हें सुखी देखना चाहते हैं। अक्सर हमने वेलेनटाइन डे में लोगों को एक-दूसरे को गुलाब का फूल देते सुना है। लेकिन 22 सितम्बर को मिलिंडा रोज़ के याद में उनके किये गए नेक कार्य की दिशा में हम इस दिन कैंसर से पीड़ित मरीज़ों को गुलाब का फूल देकर उनको इस जानलेवा बीमारी से लड़ने के लिए उनका मनोबल बढ़ाते हैं। 

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हम सबको पता है जीवन अनमोल है , लेकिन इस बात से वाकिफ हम तब होते हैं, जब हमें पता चल जाये की हमारी सांसे कभी भी रुक सकती हैं। वैसे तो मौत से अनजान तो कोई भी नहीं फिर भी हर किसी के ज़हन में इसका डर घर किये हुए है। धरती का प्रत्येक व्यक्ति प्राकृतिक मौत से अपनी ज़िंदगी से अलविदा चाहता है। उससे पहले वह अपने ज़िन्दगी को खुशनुमा बनाना चाहता है, उसके लिए वह मानसिक, शारीरीक, एवं वित्तीय हर तरह से खुद का विकास करता है। अब सोचिये अगर ज़िन्दगी के दौरान ही कोई व्यक्ति जानलेवा बीमारी का शिकार बन जाता है, तो उस पर क्या बीतेगी ? पहले इस प्रकार की दयनीय स्थिति का सामना करना हर किसी के लिए कठिन था। आधुनिक युग के मनुष्य ने तो नामुमकिन काम को भी मुमकिन कर दिखाया है। धरती पर भगवान का रूप माने जाने वाले डॉक्टर ने लोगों को मौत के मुँह से बाहर लाकर चमत्कार करके दिखाया है। इसलिए अब जानलेवा बीमारी के बाद भी ज़िन्दगी की उम्मीद आखिरी साँस तक बनी रहती है। जब बात जानलेवा बीमरियों की आती है, तो सबसे पहला नाम खतरनाक कैंसर का आता है। विश्व स्वास्थ्य संस्था के मुताबिक हर साल कैंसर बीमारी से सबसे ज्यादा मौतें दर्ज होती हैं। कैंसर शब्द सुनने के बाद ही इंसान के अंदर मौत का खौफ घर कर लेता है। वैसे तो अनेक बीमरियों के कारण से भी लोगो की जाने जाती है लेकिन कैंसर का दूसरा नाम ही मौत बताया जाता है क्यों कि इसमें ज़िन्दगी बचने की उम्मीद बहुत कम होती है। लेकिन जैसा कि मनुष्य हर नामुमकिन को मुमकिन करने के प्रयास में, कैंसर से निजात पाने के लिए अनेक रास्ते खोज निकाल रहा है। 

जब बात नामुमकिन को मुमकिन करने की हो रही हो तो मौत को 6 महीने तक टाल कर जिन्दा रहने वाली मेलिंडा रोज का नाम आना लाज़िमी है। मिलिंडा खुद ब्लड कैंसर की शिकार थीं, डॉक्टर्स के मुताबिक वह केवल हफ्ते भर जिन्दा बच सकती थीं । लेकिन फिर उनके हौसलें  और मजबूत इरादे के चलते वह 6 महीनों तक कैंसर से लड़ती रहीं और इस दौरान वह तरह-तरह के कैंसर पीड़ित मरीज़ों से मिलती रहीं और उनको जितने भी दिन हैं उसे ख़ुशी से जीने की सीख दी। 22 सितम्बर को उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली। उन्होंने दुनिया से अलविदा लेकर यादों में घर बसा लिया। उनके द्वारा किये गए कामों को सार्थक बनाने की दिशा में, हम आज के दिन कैंसर पीड़ितों को रोज़  देकर, उनके साथ समय बिता कर उनके जीवन में छोटी- छोटी खुशियों से उनको इस बीमारी से लड़ने की ताकत देते हैं। 

कहते हैं कि ज़िन्दगी लम्बी नहीं बड़ी होनी चाहिए, जिसका मतलब यह है कि जीवन का हर पल हमें ऐसे जीना चाहिए जैसे वह हमारे जीवन का आखिरी पल हो। क्यों कि मनुष्य का स्वाभाव है कि जब उसे यह पता चल जाता है कि उसके पास जो भी है वह उससे दूर नहीं जायेगा, तब धीरे-धीरे वह उसकी कदर करना बंद कर देता है और जैसे ही उसे उसके दूर जाने का एहसास होता है फिर से उसे पाने की इच्छा तीव्र हो जाती है। इसलिए हमें इस बात को स्वीकार कर लेना चाहिए कि मौत निश्चित है,और जीवन जो हम जी रहे हैं वह अनमोल है। इसके हर क्षण को हमें उत्स्व की तरह मनाना चाहिए।   

जानलेवा कैंसर हमारे भीतर असामान्य गति से बढ़ते कोशिकाओं , डीएनए में बदलाव का नतीजा है। शरीर में इसका प्रवेश, शरीर के जिस अंग में कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ती हैं उस क्षेत्र को डॉक्टर द्वारा कैंसर का नाम दे दिया जाता है। जैसे यदि ब्लड में कोशिकाएं बढ़ती हैं, तो फिर उसे ब्लड कैंसर या मुँह में कैंसर हो तो उसे माउथ कैंसर का नाम दे दिया जाता है। इसके फैलने के तीन चरण होते हैं - पहले चरण में अगर कैंसर का पता लगा लिया जाये, तो मरीज को इससे निजात मिलना आसान हो जाता है, लेकिन अगर कैंसर अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर जाये तो बड़ी मशक्कत से ही जान बचायी जा सकती है। कैंसर सबसे खतरनाक बीमारी इसलिए ही मानी जाती है क्यों कि उसे जल्दी या प्रथम चरण में भांप पाना मुश्किल है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इसका इलाज सम्भव नहीं। 

कैंसर से बचने के लिए हमें इसके बारे में आवश्यक जानकारी होनी चाहिए। इससे हम खुद को और अपने आस-पास के लोगों को जागरूक कर सकेंगे। ताकि कोई अपने सामने किसी को खोते न देखे। शोधकर्ताओं के मुताबिक कैंसर को जन्म देने वाले प्रमुख कारण धूम्रपान, गुटका ,शराब का बेहद सेवन करना है।

हद से ज़्यादा  कोई भी चीज़ उपयोग करने पर उसका परिणाम सदैव नकारात्मक ही मिलता है। इसलिए यदि आप या आपके जानने वाले इन सब पदार्थों के सेवन के आदि हो चुके हैं, तो उसे कम से कम उपयोग करने की आदत में परिवर्तित कर देना चाहिए। और कहते हैं कि आदत समय के साथ बदली भी जा सकती हैं। तो धीरे-धीरे अपनी इस जानलेवा आदत को छोड़ने का प्रयास करने की कोशिश करनी चाहिए।  

कैंसर बीमारी के उपचार हमने तलाश कर लिए हैं जैसे कि सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, बोन मेरो ट्रांसप्लांट। लेकिन आधुकनिकता वाले इस युग में हम सब एक समान तो नहीं, लेकिन बीमारियां किसी भी प्रकार का कोई भेद-भाव नहीं करती हैं, गरीब हो या अमीर किसी को भी अपने जाल में फँसा सकती हैं। अब कोई वित्तीय रूप से असहाय परिवार इस जानलेवा बीमारी से निजात पाने के लिए, इतने महंगे इलाज का खर्च कैसे उठा पायेगा? कितना कठिन होगा वह पल, जब इस कटु सत्य का आभास होगा कि पैसे की कीमत जान से भी ज्यादा है। इसलिए हमें जरूरत है, ऐसी बीमारीयों से दूर रहने के लिए अपनी तरफ से सावधानी बरतने की। जितना हो सके अपने खान-पान और दैनिक जीवन में पौष्टिक आहार और कसरत करने की। हमें अपने शरीर को इतना तंदरुस्त रखना चाहिए जिससे बीमारियां दूर से ही हाथ जोड़ लें। 

जीवन कि महत्वता को समझने के बाद हम हर कदम फूंक कर चलते हैं। हर एक पल में खुशियां तलाश करते हैं, आखिर ज़िन्दगी जीने का हमारा मकसद ही क्या है? यही न कि हम जीवन के रहस्य को समझ सकें। आखिर क्या है जीवन का रहस्य ? ख़ुशी नहीं तो और क्या है?  हम पदार्थवादी वस्तुओं पर इतना ज़्यादा निर्भर हो चुके हैं कि, अपनी ख़ुशी उस वस्तु में तलाशने लगते हैं। जब कि ख़ुशी स्थायी भावना है, हम पूरी ज़िन्दगी में ख़ुशी की तलाश में भटकते रहते हैं। 

जबकि ख़ुशी हमारे भीतर है और यही ज़िन्दगी का रहस्य भी है, जो इतना सूक्ष्म है कि हम उसे खुद के इतना करीब होते हुए भी नहीं देख पा रहे हैं। हमें कैंसर से पीड़ित या ऐसे अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों को मौत के डर से ज्यादा बची ज़िन्दगी की ख़ुशी के बारे में विचार करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। हमें उन्हें इस बात से अवगत कराना चाहिए कि पदार्थवादी की प्रवृति होती है कि वह कुछ समय तक प्रतीत होगी और फिर गायब हो जाएगी। हमारा शरीर भी पदार्थवादी है, जो जन्म से प्रतीत होता है और मरण   से गायब हो जाता है। 

इसलिए हमें अपने होंठों पर मुस्कान बनाये रखना चाहिए, ज़िन्दगी आज है इसके बारे में विचार कर इसके हर पल का आनंद लेना चाहिए। क्योंकि ज़िन्दगी एक सफर है सुहाना यहां कल क्या हो किसने जाना या यूँ कहें कि - ये ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा। इसलिए खुद भी खुश रहें और अपने आस-पास सबको ख़ुशी बाटतें रहें।