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Startup Business Expansion

जानिये इंडियन यूनिकॉर्न लैंडस्केप के बारे में

Startup Business Expansion

जानिये इंडियन यूनिकॉर्न लैंडस्केप के बारे में

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Post Highlights

आज जिस तरह से स्टार्टअप कंपनियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, यह भारत की प्रगति के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। एक छोटे स्तर से शुरू हुई कंपनियां आज के दिन अरबों डॉलर का बिज़नेस कर रही हैं। रिकॉर्ड लिस्टिंग भारतीय यूनिकॉर्न स्टार्टअप कंपनियां और भारतीय मार्केट के लिए यह एक नए युग की शुरुआत है। भारत अब यूनिकार्न्स के मामले में पूरे विश्व में तीसरे नंबर पर आ चुका है। इस लेख के माध्यम से आप यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स से जुड़ी खास बातों को समझ सकते हैं।

आज देश में स्टार्टअप कंपनियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। हमारे देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। समय-समय पर नयी-नयी प्रतिभाएं उभर कर सामने आ रही हैं और ऐसी प्रतिभाएं ही सफलता की नई कहानी लिख रही हैं। कुछ वर्षों में अच्छे शासन और अच्छे सिस्टम के कारण भारत में भी बहुत कुछ बदल चुका है। आज भारत भी उस मुकाम पर पहुँच चुका है जिसके बारे में कुछ समय पहले कोई सोच भी नहीं सकता था। देखा जाये तो पिछले कुछ सालों में भारत यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स Unicorn Startups के क्षेत्र में एक अलग ही मुकाम हासिल कर रहा है और ये सचमुच बहुत ही काबिल-ए-तारीफ है। यूनिकॉर्न स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत एक साल में चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। यह अपने आप में एक बहुत ही बड़ी उपलब्धि है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से आप भारतीय यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स के बारे में विस्तार से जानेंगे। 

क्या होता है यूनिकॉर्न?

सबसे पहले जानते हैं कि यूनिकॉर्न क्या होता है। दरअसल यूनिकॉर्न (Unicorn) 1 बिलियन डॉलर से अधिक की वैल्यू के साथ किसी निजी स्टार्टअप कंपनी के बारे में बताने के लिए वेंचर कैपिटल इंडस्ट्री में प्रयोग किया जाने वाला एक शब्द है। यह शब्द पहली बार कैलिफोर्निया के पालो अल्टो में स्थित एक सीड-स्टेज वेंचर कैपिटल फंड ‘काउबॉय वेंचर्स’ के संस्थापक ‘वेंचर कैपिटलिस्ट ऐलीन ली’ Venture Capitalist Eileen Lee द्वारा प्रयोग किया गया था। यानि यूनिकॉर्न वित्तीय दुनिया में ऐसे निजी स्टार्टअप को कहते हैं जिनकी वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर से अधिक होती है। एलन ली के अनुसार, पहले यूनिकॉर्न की स्थापना 1990 के दशक में हुई। एक यूनिकॉर्न, स्टार्टअप कंपनी से ही बनती है। जब कुछ लोग मिलकर एक कंपनी चालू करते हैं और उसमे धीरे-धीरे पैसा बढ़ने लगता है तब वह कंपनी नाम कमाने लगती है और बढ़ने लगती है। जब आगे बढ़ते-बढ़ते किसी प्राइवेट स्टार्टअप की वैल्यूएशन एक बिलियन डॉलर या फिर उससे ज्यादा हो जाती है तो वह यूनिकॉर्न बन जाती है। अगर देखा जाये तो यूनिकार्न्स को लेकर भारत की प्रगति सचमुच एक सराहनीय और अन्य लोगों के लिए भी एक प्रोत्साहन की तरह है। हुरून रिसर्च रिपोर्ट्स Hurun Research Reports के अनुसार भारत अब यूनिकार्न्स के मामले में पूरे विश्व में तीसरे नंबर पर आ चुका है। आज के समय में किसी इंसान अथवा किसी समूह के पास यदि किसी भी समस्या का एक इनोवेटिव समाधान होता है तो फिर वो किसी बिजनेस को स्टार्ट करता है और फिर उसे वो आगे जाकर अपनी स्किल्स से एक बड़े बिजनेस में बदल देता हैं, ऐसी कंपनी या किसी भी नए वेंचर या प्रोडक्ट को हम स्टार्टअप कहते हैं। यह एक ऐसी कंपनी होती है जो प्राइवेट होती है और इसको एक इनोवेटिव तरीके से बहुत बड़े टर्नओवर का बिजनेस बना देते हैं। भारत में स्टार्ट अप कल्चर ने काफी तीव्र गति भी पकड़ ली है। यही वजह है कि यूनिकॉर्न स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत आज बहुत आगे निकल चुका है और महज एक साल में वह चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है।

भारत दुनिया के टॉप 3 देशों में शामिल

भारत विश्व में यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स के मामले में तीसरे नंबर पर आ चुका है। जहाँ पहले नम्बर पर संयुक्त राज्य अमेरिका United States of America, दूसरे नम्बर पर चीन China और तीसरे नम्बर पर भारत India है। पहले तीसरे नम्बर पर इंग्लैंड था, लेकिन भारत ने इंग्लैंड को पछाड़ कर यह स्थान हासिल कर लिया है। महज एक साल में चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंचना एक बहुत बड़ी बात है। यूनिकॉर्न कम्पनियां इस बात की प्रतीक हैं कि विश्व में किस देश की कम्पनियां कितनी अधिक समृद्ध हैं। भारत में छोटे से आईडिया से शुरू हुई कम्पनियां आज के दिन अरबों डॉलर का बिज़नेस कर रही हैं और ये यूनिकॉर्न स्टार्टअप में अपनी जगह बना रही हैं। यूनिकॉर्न स्टार्टअप भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र ने कुछ वर्षों 2015 से 2021 में बहुत अच्छी वृद्धि देखी है। 2021 में भारत ने 94.77 अरब डॉलर के कुल मूल्यांकन के साथ 44 यूनिकॉर्न बनते देखे हैं। मतलब वर्ष 2021, 2020 और 2019 में प्रत्येक वर्ष क्रमशः 44, 10 और 9 यूनिकॉर्न के साथ भारतीय यूनिकॉर्न बने। बेंगलुरू, दिल्ली एनसीआर, और मुंबई 2021 में यूनिकॉर्न मुख्यालय के रूप में पसंद किए जाने वाले शीर्ष शहर हैं। भारत ने अपरंपरागत क्षेत्रों और उप-क्षेत्रों ने यूनिकॉर्न स्पेस में प्रवेश किया, जिसमें एनबीएफसी, कन्वर्सेशनल मैसेजिंग, क्रिप्टोकुरेंसी एक्सचेंज, डी 2 सी, क्लाउड किचन NBFCs, Conversational Messaging, Cryptocurrency Exchanges, D2C, Cloud Kitchens आदि शामिल हैं। इंटरनेट ऑफ थिंग्स internet of things, (आईओटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के नैसकॉम सेंटर ऑफ एक्सिलेंस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) संजीव मल्होत्रा Sanjeev Malhotra ने बताया है कि ज्यादातर स्टार्टअप कंपनियां एप्लिकेशन के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं और वही बहुत सारी स्टार्टअप कंपनियां सॉफ्टवेयर सेवा पर आधारित हैं। उनका कहना है कि देश में स्टार्टअप कंपनियों की संख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि हो रही है। देखा जाये तो हर साल 10 प्रतिशत नयी कंपनियां जुड़ रही है। भारत पूरी दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र startup ecosystem है और नयी स्टार्टअप कंपनियों की संख्या 2021-22 में बढ़कर 14,000 से अधिक हो गई है। वर्ष 2016-17 में यह केवल 733 की थी। भारत में और यूनिकॉर्न (एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन) बन रही हैं। 2021 में 44 भारतीय स्टार्टअप ने यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल किया है। इस तरह देश में यूनिकॉर्न की संख्या 94 हो गई है। भारत 21 मार्च 2022 तक देश के 642 जिलों में 66,359 से अधिक डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप के साथ वैश्विक स्तर पर स्टार्टअप के लिए तीसरे सबसे बड़े पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में उभर कर आया है। आज भारत में नवाचार केवल कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह बड़े स्तर पर फ़ैल चुका है।

इंडिया के कई स्टार्टअप यूनिकॉर्न क्लब में शामिल

भारतीय यूनिकॉर्न आज की तेज-तर्रार और गतिशील अर्थव्यवस्था में फल-फूल रहे हैं। ये स्टार्टअप न केवल नवीन समाधान और प्रौद्योगिकियां विकसित कर रहे हैं बल्कि बहुत बड़े पैमाने पर रोजगार employment भी पैदा कर रहे हैं। कोरोना जैसी महामारी में भी स्टार्टअप कंपनियों के लक्ष्य रुके नहीं हैं और इन्वेस्टर्स से भी भारतीय स्टार्टअप्स के लिए रिकॉर्ड रेस्पॉन्स देखने को मिला है। यूनिकॉर्न क्लब में शामिल होने की क्षमता रखने वाले भारतीय स्टार्टअप की सफलता वाकई सराहनीय है। हम कह सकते हैं कि देश में प्रतिभा की कमी नहीं है। भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम अब काफी विकसित हुआ है। भारत सरकार ने भी स्टार्टअप इंडिया को बढ़ावा और मदद करने के लिए 19 एक्शन प्लांस बनाए हैं। साथ ही भारत सरकार द्वारा स्टार्टअप कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए 10 हजार करोड़ का फंड बनाया गया है। 25 मार्च 2022 तक, भारत 94 यूनिकॉर्न का घर है, जिसका कुल मूल्यांकन 319.67 अरब डॉलर है। यह उपलब्धि भारत के लिए बहुत बड़ी है। टेक कंपनियां, जो घरेलू ब्रांड बन गई हैं, भारत में यूनिकॉर्न क्लब में योगदान दे रही हैं, क्योंकि महामारी के दौरान स्मार्टफोन की पैठ और जीवन के हर पहलू में वाणिज्य का डिजिटलीकरण कई गुना बढ़ गया है। फिनटेक के अलावा, ई-कॉमर्स किराना, मार्केटप्लेस खिलाड़ी यूनिकॉर्न में सबसे अधिक योगदान दे रहे हैं। भारत के उच्च-तकनीकी उद्योग का केंद्र center of high-tech industry, बेंगलुरु Bangalore भारत की यूनिकॉर्न राजधानी है, जिसके बाद दिल्ली (एनसीआर) और मुंबई सबसे अधिक यूनिकॉर्न मुख्यालय हैं।

यूनिकॉर्न भारत में अलग-अलग सेक्टर्स में आ रहे हैं। ऐसी कुछ यूनिकॉर्न क्लब की स्टार्टअप कंपनियां जो आज प्रसिद्धि के शिखर पर हैं और भारत में बहुत आगे बढ़ चुकी हैं- Zomato, Paytm, Quikr, Swiggy, Ola, Flipkart, BYJU’s, Justdial, जोमैटो, पेटीएम, क्विकर, स्विग्गी, ओला, बायजूस, जस्ट डायल आदि। इसके अलावा डिजिटल पेमेंट कंपनी बिलडेस्क BillDesk, जिसका इस्तेमाल भुगतान करने के लिए किया जाता है। ओयो oyo, जो एक ऐप है जिसके माध्यम से आप ऑनलाइन होटल बुक कर सकते हैं। स्विग्गी Swiggy जिस ऐप के जरिये आप ऑनलाइन रूप से पसंदीदा फूड आर्डर कर सकते हैं। अब ये कंपनियां भी भारत के स्टार्टअप के यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो गई हैं जैसे-लॉजिस्टिक सर्विसेज प्रोवाइडर Xpressbees एक्सप्रेसबीज, किराना कॉमर्स प्लेटफॉर्म ElasticRun इलास्टिक रन और होम इंटीरियर और रिनोवेशन से जुड़ी स्टार्टअप कंपनी Livspace लिवस्पेस, इन कंपनियों का वैल्यूएशन एक बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। अब देश का यूनिकॉर्न क्लब बढ़ रहा है। भारतीय स्टार्टअप्स जमकर पूंजी लुटा रहे हैं। अभी हाल की ही बात करें तो फरवरी में 5 स्टार्टअप्स और जनवरी में 4 स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हुए हैं। PwC की रिपोर्ट के अनुसार इस साल 50 से अधिक स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न में शामिल हो सकते हैं। इस तरह से अगर देखा जाये तो दुनियाभर के निवेशकों का विश्वास भारतीय कंपनियों में बढ़ रहा है। भारत में Healthcare हेल्थकेयर HealthTech बाजार 2023 तक $ 5 Bn तक पहुंचने का अनुमान है, जो महामारी के प्रभाव के बाद 39% की CAGR से बढ़ रहा है। इस साल की शुरुआत में, Pharmeasy, एक ऑनलाइन फ़ार्मेसी और डायग्नोस्टिक्स ब्रांड, एक यूनिकॉर्न बन गया, जिसका मूल्यांकन $ 1.5 Bn के करीब था। ऑनलाइन फ़ार्मेसी अब जल्द ही सार्वजनिक होने की योजना बना रही है। नोएडा स्थित हेल्थटेक स्टार्टअप Innovaccer स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पहला भारतीय यूनिकॉर्न बन गया है, जिसका मूल्य वर्तमान में $1.3 Bn है। 2022 के पहले महीने में ही 4.6 अरब डॉलर भारतीय स्टार्टअप्स में लगाए गए हैं। भारत से बाहर भी भारतीय मूल के लोगों द्वारा स्थापित यूनिकॉर्न की संख्या भी काफी अधिक है। अमेरिका में आईटी कंपनियों का गढ़ माने जाने वाले सिलिकॉन वैली silicon Valley में भी 50 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियों के संस्थापक भारतीय हैं। भारतीय समुदाय द्वारा विदेशों में स्थापित यूनिकॉर्न का कुल मूल्यांकन 99.6 अरब डॉलर है।

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स्टार्टअप में एम्प्लॉयर ब्रैंडिंग की भूमिका

आज देश में स्टार्टअप कंपनियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। हमारे देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। समय-समय पर नयी-नयी प्रतिभाएं उभर कर सामने आ रही हैं और ऐसी प्रतिभाएं ही सफलता की नई कहानी लिख रही हैं। कुछ वर्षों में अच्छे शासन और अच्छे सिस्टम के कारण भारत में भी बहुत कुछ बदल चुका है। आज भारत भी उस मुकाम पर पहुँच चुका है जिसके बारे में कुछ समय पहले कोई सोच भी नहीं सकता था। देखा जाये तो पिछले कुछ सालों में भारत यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स Unicorn Startups के क्षेत्र में एक अलग ही मुकाम हासिल कर रहा है और ये सचमुच बहुत ही काबिल-ए-तारीफ है। यूनिकॉर्न स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत एक साल में चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। यह अपने आप में एक बहुत ही बड़ी उपलब्धि है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से आप भारतीय यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स के बारे में विस्तार से जानेंगे। 

क्या होता है यूनिकॉर्न?

सबसे पहले जानते हैं कि यूनिकॉर्न क्या होता है। दरअसल यूनिकॉर्न (Unicorn) 1 बिलियन डॉलर से अधिक की वैल्यू के साथ किसी निजी स्टार्टअप कंपनी के बारे में बताने के लिए वेंचर कैपिटल इंडस्ट्री में प्रयोग किया जाने वाला एक शब्द है। यह शब्द पहली बार कैलिफोर्निया के पालो अल्टो में स्थित एक सीड-स्टेज वेंचर कैपिटल फंड ‘काउबॉय वेंचर्स’ के संस्थापक ‘वेंचर कैपिटलिस्ट ऐलीन ली’ Venture Capitalist Eileen Lee द्वारा प्रयोग किया गया था। यानि यूनिकॉर्न वित्तीय दुनिया में ऐसे निजी स्टार्टअप को कहते हैं जिनकी वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर से अधिक होती है। एलन ली के अनुसार, पहले यूनिकॉर्न की स्थापना 1990 के दशक में हुई। एक यूनिकॉर्न, स्टार्टअप कंपनी से ही बनती है। जब कुछ लोग मिलकर एक कंपनी चालू करते हैं और उसमे धीरे-धीरे पैसा बढ़ने लगता है तब वह कंपनी नाम कमाने लगती है और बढ़ने लगती है। जब आगे बढ़ते-बढ़ते किसी प्राइवेट स्टार्टअप की वैल्यूएशन एक बिलियन डॉलर या फिर उससे ज्यादा हो जाती है तो वह यूनिकॉर्न बन जाती है। अगर देखा जाये तो यूनिकार्न्स को लेकर भारत की प्रगति सचमुच एक सराहनीय और अन्य लोगों के लिए भी एक प्रोत्साहन की तरह है। हुरून रिसर्च रिपोर्ट्स Hurun Research Reports के अनुसार भारत अब यूनिकार्न्स के मामले में पूरे विश्व में तीसरे नंबर पर आ चुका है। आज के समय में किसी इंसान अथवा किसी समूह के पास यदि किसी भी समस्या का एक इनोवेटिव समाधान होता है तो फिर वो किसी बिजनेस को स्टार्ट करता है और फिर उसे वो आगे जाकर अपनी स्किल्स से एक बड़े बिजनेस में बदल देता हैं, ऐसी कंपनी या किसी भी नए वेंचर या प्रोडक्ट को हम स्टार्टअप कहते हैं। यह एक ऐसी कंपनी होती है जो प्राइवेट होती है और इसको एक इनोवेटिव तरीके से बहुत बड़े टर्नओवर का बिजनेस बना देते हैं। भारत में स्टार्ट अप कल्चर ने काफी तीव्र गति भी पकड़ ली है। यही वजह है कि यूनिकॉर्न स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत आज बहुत आगे निकल चुका है और महज एक साल में वह चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है।

भारत दुनिया के टॉप 3 देशों में शामिल

भारत विश्व में यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स के मामले में तीसरे नंबर पर आ चुका है। जहाँ पहले नम्बर पर संयुक्त राज्य अमेरिका United States of America, दूसरे नम्बर पर चीन China और तीसरे नम्बर पर भारत India है। पहले तीसरे नम्बर पर इंग्लैंड था, लेकिन भारत ने इंग्लैंड को पछाड़ कर यह स्थान हासिल कर लिया है। महज एक साल में चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंचना एक बहुत बड़ी बात है। यूनिकॉर्न कम्पनियां इस बात की प्रतीक हैं कि विश्व में किस देश की कम्पनियां कितनी अधिक समृद्ध हैं। भारत में छोटे से आईडिया से शुरू हुई कम्पनियां आज के दिन अरबों डॉलर का बिज़नेस कर रही हैं और ये यूनिकॉर्न स्टार्टअप में अपनी जगह बना रही हैं। यूनिकॉर्न स्टार्टअप भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र ने कुछ वर्षों 2015 से 2021 में बहुत अच्छी वृद्धि देखी है। 2021 में भारत ने 94.77 अरब डॉलर के कुल मूल्यांकन के साथ 44 यूनिकॉर्न बनते देखे हैं। मतलब वर्ष 2021, 2020 और 2019 में प्रत्येक वर्ष क्रमशः 44, 10 और 9 यूनिकॉर्न के साथ भारतीय यूनिकॉर्न बने। बेंगलुरू, दिल्ली एनसीआर, और मुंबई 2021 में यूनिकॉर्न मुख्यालय के रूप में पसंद किए जाने वाले शीर्ष शहर हैं। भारत ने अपरंपरागत क्षेत्रों और उप-क्षेत्रों ने यूनिकॉर्न स्पेस में प्रवेश किया, जिसमें एनबीएफसी, कन्वर्सेशनल मैसेजिंग, क्रिप्टोकुरेंसी एक्सचेंज, डी 2 सी, क्लाउड किचन NBFCs, Conversational Messaging, Cryptocurrency Exchanges, D2C, Cloud Kitchens आदि शामिल हैं। इंटरनेट ऑफ थिंग्स internet of things, (आईओटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के नैसकॉम सेंटर ऑफ एक्सिलेंस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) संजीव मल्होत्रा Sanjeev Malhotra ने बताया है कि ज्यादातर स्टार्टअप कंपनियां एप्लिकेशन के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं और वही बहुत सारी स्टार्टअप कंपनियां सॉफ्टवेयर सेवा पर आधारित हैं। उनका कहना है कि देश में स्टार्टअप कंपनियों की संख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि हो रही है। देखा जाये तो हर साल 10 प्रतिशत नयी कंपनियां जुड़ रही है। भारत पूरी दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र startup ecosystem है और नयी स्टार्टअप कंपनियों की संख्या 2021-22 में बढ़कर 14,000 से अधिक हो गई है। वर्ष 2016-17 में यह केवल 733 की थी। भारत में और यूनिकॉर्न (एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन) बन रही हैं। 2021 में 44 भारतीय स्टार्टअप ने यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल किया है। इस तरह देश में यूनिकॉर्न की संख्या 94 हो गई है। भारत 21 मार्च 2022 तक देश के 642 जिलों में 66,359 से अधिक डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप के साथ वैश्विक स्तर पर स्टार्टअप के लिए तीसरे सबसे बड़े पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में उभर कर आया है। आज भारत में नवाचार केवल कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह बड़े स्तर पर फ़ैल चुका है।

इंडिया के कई स्टार्टअप यूनिकॉर्न क्लब में शामिल

भारतीय यूनिकॉर्न आज की तेज-तर्रार और गतिशील अर्थव्यवस्था में फल-फूल रहे हैं। ये स्टार्टअप न केवल नवीन समाधान और प्रौद्योगिकियां विकसित कर रहे हैं बल्कि बहुत बड़े पैमाने पर रोजगार employment भी पैदा कर रहे हैं। कोरोना जैसी महामारी में भी स्टार्टअप कंपनियों के लक्ष्य रुके नहीं हैं और इन्वेस्टर्स से भी भारतीय स्टार्टअप्स के लिए रिकॉर्ड रेस्पॉन्स देखने को मिला है। यूनिकॉर्न क्लब में शामिल होने की क्षमता रखने वाले भारतीय स्टार्टअप की सफलता वाकई सराहनीय है। हम कह सकते हैं कि देश में प्रतिभा की कमी नहीं है। भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम अब काफी विकसित हुआ है। भारत सरकार ने भी स्टार्टअप इंडिया को बढ़ावा और मदद करने के लिए 19 एक्शन प्लांस बनाए हैं। साथ ही भारत सरकार द्वारा स्टार्टअप कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए 10 हजार करोड़ का फंड बनाया गया है। 25 मार्च 2022 तक, भारत 94 यूनिकॉर्न का घर है, जिसका कुल मूल्यांकन 319.67 अरब डॉलर है। यह उपलब्धि भारत के लिए बहुत बड़ी है। टेक कंपनियां, जो घरेलू ब्रांड बन गई हैं, भारत में यूनिकॉर्न क्लब में योगदान दे रही हैं, क्योंकि महामारी के दौरान स्मार्टफोन की पैठ और जीवन के हर पहलू में वाणिज्य का डिजिटलीकरण कई गुना बढ़ गया है। फिनटेक के अलावा, ई-कॉमर्स किराना, मार्केटप्लेस खिलाड़ी यूनिकॉर्न में सबसे अधिक योगदान दे रहे हैं। भारत के उच्च-तकनीकी उद्योग का केंद्र center of high-tech industry, बेंगलुरु Bangalore भारत की यूनिकॉर्न राजधानी है, जिसके बाद दिल्ली (एनसीआर) और मुंबई सबसे अधिक यूनिकॉर्न मुख्यालय हैं।

यूनिकॉर्न भारत में अलग-अलग सेक्टर्स में आ रहे हैं। ऐसी कुछ यूनिकॉर्न क्लब की स्टार्टअप कंपनियां जो आज प्रसिद्धि के शिखर पर हैं और भारत में बहुत आगे बढ़ चुकी हैं- Zomato, Paytm, Quikr, Swiggy, Ola, Flipkart, BYJU’s, Justdial, जोमैटो, पेटीएम, क्विकर, स्विग्गी, ओला, बायजूस, जस्ट डायल आदि। इसके अलावा डिजिटल पेमेंट कंपनी बिलडेस्क BillDesk, जिसका इस्तेमाल भुगतान करने के लिए किया जाता है। ओयो oyo, जो एक ऐप है जिसके माध्यम से आप ऑनलाइन होटल बुक कर सकते हैं। स्विग्गी Swiggy जिस ऐप के जरिये आप ऑनलाइन रूप से पसंदीदा फूड आर्डर कर सकते हैं। अब ये कंपनियां भी भारत के स्टार्टअप के यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो गई हैं जैसे-लॉजिस्टिक सर्विसेज प्रोवाइडर Xpressbees एक्सप्रेसबीज, किराना कॉमर्स प्लेटफॉर्म ElasticRun इलास्टिक रन और होम इंटीरियर और रिनोवेशन से जुड़ी स्टार्टअप कंपनी Livspace लिवस्पेस, इन कंपनियों का वैल्यूएशन एक बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। अब देश का यूनिकॉर्न क्लब बढ़ रहा है। भारतीय स्टार्टअप्स जमकर पूंजी लुटा रहे हैं। अभी हाल की ही बात करें तो फरवरी में 5 स्टार्टअप्स और जनवरी में 4 स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हुए हैं। PwC की रिपोर्ट के अनुसार इस साल 50 से अधिक स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न में शामिल हो सकते हैं। इस तरह से अगर देखा जाये तो दुनियाभर के निवेशकों का विश्वास भारतीय कंपनियों में बढ़ रहा है। भारत में Healthcare हेल्थकेयर HealthTech बाजार 2023 तक $ 5 Bn तक पहुंचने का अनुमान है, जो महामारी के प्रभाव के बाद 39% की CAGR से बढ़ रहा है। इस साल की शुरुआत में, Pharmeasy, एक ऑनलाइन फ़ार्मेसी और डायग्नोस्टिक्स ब्रांड, एक यूनिकॉर्न बन गया, जिसका मूल्यांकन $ 1.5 Bn के करीब था। ऑनलाइन फ़ार्मेसी अब जल्द ही सार्वजनिक होने की योजना बना रही है। नोएडा स्थित हेल्थटेक स्टार्टअप Innovaccer स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पहला भारतीय यूनिकॉर्न बन गया है, जिसका मूल्य वर्तमान में $1.3 Bn है। 2022 के पहले महीने में ही 4.6 अरब डॉलर भारतीय स्टार्टअप्स में लगाए गए हैं। भारत से बाहर भी भारतीय मूल के लोगों द्वारा स्थापित यूनिकॉर्न की संख्या भी काफी अधिक है। अमेरिका में आईटी कंपनियों का गढ़ माने जाने वाले सिलिकॉन वैली silicon Valley में भी 50 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियों के संस्थापक भारतीय हैं। भारतीय समुदाय द्वारा विदेशों में स्थापित यूनिकॉर्न का कुल मूल्यांकन 99.6 अरब डॉलर है।

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