facebook-pixel

Tata Airlines से Air India तक का सफर

Share Us

1088
Tata Airlines से Air India तक का सफर
02 Mar 2022
8 min read
TWN In-Focus

Post Highlight

भारत सरकार दो दशकों से एयर इंडिया Air India को बेचने की कोशिश कर रही थी। हालांकि एक समय ऐसा था जब एयर इंडिया को दुनिया की बेहतरीन एयरलाइंस में गिना जाता था। अब एयर इंडिया को टाटा समूह द्वारा खरीदा जा चुका है, वही टाटा समूह जिससे सालों पहले सरकार ने एयर इंडिया को खरीदा था। इन बीते सालों में कई एयरलाइंस आईं और कई बंद भी हुईं, पर एयर इंडिया के प्रति टाटा समूह का लगाव बार-बार सामने आता रहा।

Podcast

Continue Reading..

देश के विकास में योगदान देने वाला सबसे बड़ा समूह है टाटा ग्रुप। वर्ष 1868 में जमशेदजी टाटा द्वारा टाटा समूह की स्थापना की गयी थी। यह एक ऐसा संगठन है जो देश को उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करने के लिए लगातार योगदान देता रहता है।  टाटा ग्रुप ने हमें कई उद्योग, कॉलेज दिए हैं और साथ ही देश में कई विश्व-प्रसिद्ध ब्रांड लाए हैं। आज दुनिया के 140 से भी अधिक देशों में टाटा ग्रुप फैला हुआ है। टाटा ग्रुप ने देश में लगभग 6.60 लाख लोगों को रोजगार दिया है। आज ये समूह नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बना रहा है।

फ़िलहाल अगर बात करें एयर इंडिया की तो एयर-इंडिया Air India, एयरलाइन अब 68 साल बाद फिर से टाटा समूह Tata Group के पास आ गयी। एक कहावत है कि देर आए दुरुस्त आए। आपको बता दें कि एयर इंडिया की स्थापना 1932 में टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन जहांगीर रतनजी दादाभाई (जेआरडी) टाटा J.R.D. Tata ने दो लाख रुपये से की थी और तब इसका नाम टाटा एयरलाइंस Tata Airlines था। जहांगीर रतनजी दादाभाई ने 15 अक्टूबर 1932 को ने कराची से मुंबई के लिए पहली उड़ान भरी थी, तब वे वहां से डाक लेकर आए थे। कमर्शियल पायलट का लाइसेंस Commercial Pilot Licence पाने वाले जेआरडी पहले भारतीय थे। 

इसकी शुरुआत कराची, अहमदाबाद, बॉम्बे (मुंबई), बेल्लारी और मद्रास (चेन्नई) के बीच हुई थी। 1939 तक इन मार्गों को त्रिवेंद्रम, दिल्ली, कोलंबो, लाहौर और मध्यवर्ती बिंदुओं तक बढ़ा दिया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध Second World War के बाद, 1946 में, टाटा एयरलाइंस को एक सार्वजनिक कंपनी में बदल दिया गया और इसका नाम बदलकर एयर-इंडिया लिमिटेड Air India Limited कर दिया गया। 8 जून 1948 को एयर इंडिया इंटरनेशनल Air India International ने पहली उड़ान First Flight भरी थी। तब महाराजा मस्कट के साथ यह उड़ान यूरोप पहुंची थी। 

इन  उड़ानों का सिलसिला चलता रहा और जल्दी ही एयर इंडिया इंटरनेशनल अपनी सेवाओं की बदौलत दुनिया की सर्वश्रेष्ठ एयरलाइंस में गिनी जाने लगी। 1953 में उस समय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण Nationalization Of Air India किया। तब जेआरडी इसके पक्ष में नहीं थे, क्योंकि सरकार द्वारा उस समय 11 एयरलाइंस का राष्ट्रीयकरण किया गया था और एयर इंडिया को छोड़कर बाकी सब एयरलाइन्स घाटे में थे। हालांकि उन सबको एयर इंडिया में मिला दिया गया। जब 1990 के दशक में एविएशन सेक्टर Aviation Sector को निजी कंपनियों के लिए खोला गया तो टाटा समूह ने 1994 में सिंगापुर एयरलाइंस Singapore Airlines के साथ साझीदारी में इस क्षेत्र में उतरने की कोशिश की लेकिन उनके टाटा समूह के उस प्रस्ताव को सरकार ने खारिज कर दिया क्योंकि उस समय किसी विदेशी एयरलाइन International Airline को घरेलू एयरलाइन Indian Airline में हिस्सेदारी लेने की अनुमति नहीं थी।  वर्ष 2000 में भी टाटा और सिंगापुर एयरलाइंस ने एयर इंडिया को खरीदने की खूब कोशिश की पर उनकी ये कोशिश भी नाकाम हुई। हालांकि इस बीच टाटा समूह ने एविएशन क्षेत्र में उतरने की कोशिश जारी रखी। 

इसके उपरांत वर्ष 2012 में जब विदेशी निवेश की अनुमति दी गई तो टाटा समूह ने 5 नवंबर 2013 को सिंगापुर एयरलाइंस के साथ मिलकर टाटा एसआईए एयरलाइंस लिमिटेड Tata SIA Airlines Limited नाम से साझा कंपनी का गठन किया और विस्तारा Vistara नाम से एयरलाइंस शुरू की। इस एयरलाइन में  टाटा संस की 51 फ़ीसदी हिस्सेदारी और सिंगापुर एयरलाइंस की 49 फ़ीसदी हिस्सेदारी है। 9 जनवरी 2015 को विस्तारा ने पहली उड़ान भरी। इसके अलावा विस्तारा की उड़ान शुरू होने से एक साल पहले ही टाटा समूह ने मलेशिया की एयर एशिया AirAsia के साथ मिलकर एयर एशिया इंडिया AirAsia India की स्थापना भी की थी। एयर एशिया इंडिया ने जून 2014 में पहली उड़ान भरी। इसमें भी टाटा समूह की 51 फीसदी और एयर एशिया की 49 फीसदी हिस्सेदारी थी। हालांकि, पिछले साल दिसंबर में टाटा संस ने 32.67 फीसदी इक्विटी Equity खरीदकर एयर एशिया में अपनी हिस्सेदारी 83.67 फीसदी कर ली। 

जब एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण किया गया उसके बाद भी सरकार ने कई वर्षों तक जेआरडी को 25 वर्षों तक एयरलाइन का चेयरमैन बना कर रखा था। ऐसा कहा जाता है कि उन दिनों टाटा समूह के अधिकारी आपस में चर्चा करते थे कि टाटा समूह से ज्यादा जेआरडी को हमेशा एयर इंडिया की फिक्र लगी रहती है। हालांकि उस समय सभी अच्छी तरह जानते थे कि जेआरडी के लिए एयर इंडिया चेयरमैन का पद केवल एक नौकरी नहीं, अपितु एयरलाइन के प्रति उनका प्रेम था। यही कारण है कि जब टाटा समूह Tata Group द्वारा एयर इंडिया को दोबारा खरीदने के लिए 18,000 करोड़ रुपये की बोली लगाने पर किसी को भी आश्चर्य नहीं हुआ। अब 68 साल बाद एयर इंडिया एक बार फिर टाटा समूह के नियंत्रण में आगयी है। यह 153 साल पुराने उस औद्योगिक घराने के लिए भी खुशी का मौका है जिसे भारत का सबसे भरोसेमंद नाम माना जाता है। लेकिन अब यह देखना है कि विस्तारा, एयर एशिया इंडिया और एयर इंडिया तीन एयरलाइंस के साथ Tata Group की आगे की रणनीति क्या होती है।

जानिए संक्षेप में पूरी कहानी

टाटा एयरलाइंस की शुरुआत:

एयर इंडिया के इतिहास History of Air India की चर्चा करें तो इसकी शुरुआत अप्रैल 1932 में हुई थी जिसकी स्थापना उद्योगपति जेआरडी JRD Tata ने की थी. उस वक्त इस एयरलाइन का नाम टाटा एयरलाइंस हुआ करता था। आपको बता दें कि जेआरडी टाटा ने महज 15 की उम्र में यानि साल 1919 में पहली बार शौकिया तौर पर हवाई जहाज उड़ाया था, लेकिन उनका शौक जुनून बन गया और उन्होंने अपना पायलट pilot का लाइसेंस भी ले लिया। 

25 किलो चिट्ठियां ले जाने वाला पहला प्लेन:

15 अक्टूबर को एयरलाइन की पहली व्यावसायिक उड़ान Commercial aviation भरी गई थी और तब सिर्फ सिंगल इंजन वाला 'हैवीलैंड पस मोथ' Havilland Puss Moth हवाई जहाज था, जो अहमदाबाद-कराची के रास्ते मुंबई गया था। आपको बता दें कि उस समय प्लेन में एक भी यात्री नहीं था केवल 25 किलो चिट्ठ‍ियां थीं.

1933 में पहली बार यात्रियों के साथ सफर:

वर्ष 1933 में टाटा एयरलाइन्स Tata Airlines ने यात्रियों को लेकर अपनी पहली उड़ान भरी। JRD Tata ने दो लाख रुपए की लागत से टाटा एयरलाइन्स स्थापित की थी, जिसमें उन्होंने 155 यात्रियों और करीब 11 टन चिट्ठियों को भी सफर कराया. 

मैदान बना 'रनवे' और मिट्टी का मकान ऑफिस:

एयर इंडिया Air India (टाटा एयरलाइंस) ने कई बार लगातार चिट्ठियां पहुंचाने का काम किया। उस वक्त की अंग्रेजी हुकूमत ने एयरलाइंस को कोई आर्थिक मदद Financial Aid भी नहीं की क्योंकि एयर इंडिया पूरी तरह भारतीय एयरलाइन Indian Airline थी। उस वक़्त एयरलाइन से चिट्ठियां ले जाने पर टाटा को हर चिट्ठी पर सिर्फ चार आने मिलते थे। टाटा एयरलाइंस कंपनी के लिए मुंबई के जुहू में मिट्टी के मकान में ऑफिस तो बनाया गया और प्लेन के उड़ान भरने के लिए 'रनवे' के लिए पास के ही एक मैदान का प्रयोग होता था। 

टाटा एयरलाइंस कैसे बना एयर इंडिया:

जब दूसरे विश्व युद्ध के बाद इंडिया से फ्लाइट्स शुरू की गईं तब इसका नाम Air India रखा गया। वर्ष 1947 में आजादी के बाद भारत में एक नेशनल एयरलाइंस National Airline की जरूरत थी और तब भारत सरकार ने एयर इंडिया Air India में 49% हिस्सेदारी अधिग्रहण कर ली। इसके उपरांत भारत सरकार ने 1953 में एयर कॉरपोरेशन एक्ट पास किया और टाटा ग्रुप Tata Group से इस कंपनी में अधिक हिस्सेदारी खरीद ली, और इसी तरह Air India पूरी तरह से एक सरकारी एयरलाइन Government Airline बन गयी। 

एयरलाइन की खास पहचान एयर इंडिया का लोगो (Air India logo) यानि लाल रंग का उड़ता हुआ हंस जिसमें नारंगी रंग में कोणार्क चक्र है। हालांकि प्लेन के पिछले हिस्से पर एयर इंडिया के लोगो को जगह दी जाती है।

इसी विषय से सम्बंधित एक अन्य लेख को पढ़ने के लिए कृपया नीचे  दिए लिंक को क्लिक करे-

https://www.thinkwithniche.in/blogs/details/ratan-tata-a-person-not-a-personality