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क्या अध्यापन और अध्यापक का स्वरुप बदला है?

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क्या अध्यापन और अध्यापक का स्वरुप बदला है?
05 Sep 2021
6 min read

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समय बहुत बदल गया है। लोगों की विचारधारा बदल गयी है। व्यक्ति नए-नए ढंग से कुछ सिखने की कोशिश करता है। पुराने तरीकों में थोड़ा संसोधन करके उसे शिक्षा क्षेत्र में प्रस्तुत किया जा रहा है ताकि यह क्षेत्र पीछे न रह जाये। इन बदलावों से बच्चे के सिखने की क्षमता बढ़ रही है, परन्तु कुछ पहलू से वह अनजान रह जा रहे हैं। नई तकनीकी और नियमों के आधार पर शिक्षा दुनिया में नए रूप से पैर पसार रही है। जिसके कारण हो रहे बदलाव और विकास को हर कोई देख पा रहा है।

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ज्ञान एक ऐसा प्रकाश है, जिससे मनुष्य के मन के भीतर मौजूद अँधेरा हमेशा के लिए ख़त्म हो जाता है। ज्ञान के आधार पर एक सभ्य समाज की नींव रखी जाती है। अर्जित ज्ञान के आधार पर ही मनुष्य के चरित्र का निर्माण होता है। यही कारण है कि मनुष्य बचपन से ही अपने बच्चों को ऐसी शिक्षा देने का प्रयास करने लगते हैं, जिससे बच्चे के ज्ञान की नींव मजबूत बनें। उसके अंदर अच्छा-ख़राब समझने की समझ का जन्म हो। शिक्षा की सहायता से ही मनुष्य प्राचीन काल से निकलकर आधुनिक काल में प्रवेश कर या है। ज्ञान वह बीज है जिसे व्यक्ति अपने मन में रोपित करके अपने जीवन में संतुष्टि, खुशी और शांति का फल ऊगा सकता है। कोई मनुष्य अपने जीवन में ज्ञान या तो किसी के मार्गदर्शन से पाता है या आत्मचिंतन से। बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले उसके लिए समय-समय पर हम बच्चों के लिए मार्गदर्शक ढूंढते हैं, जिन्हें हम अध्यापक कहते हैं। अध्यापक बच्चों को संसार के प्रत्येक ज्ञान से अवगत कराते हैं तथा उसे सफल और शालीन मनुष्य बनाते हैं। अध्यापन का कार्य आपके जीवन में मौजूद कोई भी व्यक्ति कर सकता है। अध्यापन केवल मनुष्य करे यह जरूरी नहीं, संसार में मौजूद प्रत्येक वस्तु हमें कुछ न कुछ सिखाती है। अगर देखा जाये तो बदलते समय के साथ अध्यापक का बच्चों को पढ़ाने का तरीका परिवर्तित हुआ है। बच्चों को सब आसानी से समझ आ जाए इसके लिए अध्यापक अपने पढ़ाने के तरीके में बदलाव करते रहते हैं।

 

"शिक्षक वह नहीं जो तथ्यों को विद्यार्थी के दिमाग में जबरन ठूंसे, बल्कि वह है जो उसे आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करता है।" 

                                                                                                                                                                    - डॉक्टर सर्वपल्ली राधकृष्णन  

पहले और अब के समय में सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि पहले शिक्षा व्यवसाय का माध्यम नहीं थी बल्कि मनुष्य के सर्वांगीण विकास का एक मात्र माध्यम थी। मानवीय व्यवहार को समझने के लिए भी शिक्षा को ग्रहण करना एक मूल कारण मानते थे। आज के परिपेक्ष में शिक्षा प्राप्त करने की मुख्य वजह एक अच्छी नौकरी पाना, और सुविधाजनक जीवन जीना है। हालाँकि आज भी कई ऐसे अध्यापक और छात्र हैं जिनके लिए शिक्षा का महत्व केवल अच्छी नौकरी पाने तक सीमित नहीं है।    

पहले के समय से यदि आज की तुलना की जाये तो, अध्यापन के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। हालाँकि आज भी उद्देश्य बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान करना है। हमेशा से कोशिश यही रही है कि किस तरह बच्चे सब कुछ आसानी से समझ पाएं। बदलती मानसिकता और उपलब्धिताएं इसका मुख्य कारण बनी हैं। आज के समय में बच्चों का मानसिक विकास बचपन से ही अलग रूप में होता है। यही कारण है कि अध्यापन में भी बदलाव किया गया है।

प्रयोग से विषय में समझ 

अगर बहुत पीछे न जाते हुए इस तथ्य को समझने का प्रयास करें तो पहले के समय में बच्चों को प्रायोगिक तरीकों से कम सिखाया जाता था, अब कोशिश यह रहती है कि बच्चा केवल किताब से नहीं प्रयोग के माध्यम से भी ज्ञान अर्जित करे। क्योंकि कई तरह के किये गए शोधों के मुताबिक देखा गया है कि कोई भी चीज प्रयोग के माध्यम से आसानी से समझी जा सकती है। पहले के समय में अध्यापक विषय की शिक्षा देते थे और मौखिक रूप से व्यावहारिक ज्ञान भी देते थे।

विद्यालय में किये गए बदलाव 

विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के तरीके में बदलाव किया गया। आवश्यकतानुसार कुछ विषयों को बढ़ाया गया, जिनकी जरूरत पहले महसूस नहीं की गयी। जिसमें अध्यापन की मदद से बच्चों को जागरूक किया जा सके। विद्यालय में टेक्नोलॉजी को भी शिक्षा प्राप्त करने का जरिया बनाया गया। आज के समय में प्रोजेक्टर, कम्प्यूटर आदि की मदद से बच्चों को पढ़ाया जाता है। उन विषयों को भी बच्चों की शिक्षा में सम्मिलित किया गया, जो पहले केवल मनोरंजन के रूप में देखे जाते थे। समय-समय पर शिक्षक और माता-पिता के बीच मीटिंग से बच्चे के विकास का आंकलन किया जाता है। ऑनलाइन क्लास की भी सुविधा बच्चों को दी जाने लगी है। 

 बच्चों पर न बनाये मानसिक दबाव 

शिक्षक से यह उम्मीद की जाती है कि वह बच्चों पर मानसिक दबाव न बनाये। अब तो कई विद्यालयों में अध्यापक के लिए कुछ नियम बनाये गए हैं। जिसके आधार पर अध्यापक किसी बच्चे को मार नहीं सकते और ना ही उन्हें कुछ ऐसा बोल सकते हैं, जिसका उनके मन पर बुरा प्रभाव पड़ने की गुंजाईश हो। कुछ समय पहले अध्यापक के लिए ऐसे कोई नियम निर्धारित नहीं रहते थे,वह अपने तरीके से विद्यार्थियों को पढ़ाते। बच्चों का कक्षा में पढ़ाई में मन लगे इसका भी ध्यान शिक्षक को रखना पड़ता है।

तकनीकी रूप से बच्चों को पढ़ने की सुविधा 

आज पढ़ने और पढ़ाने दोनों तरीकों में बदलाव हुआ है। एक समय था जब केवल विद्यालय जाकर बच्चे अध्यापक से शिक्षा प्राप्त करते थे। परन्तु आज वह समय है कि बच्चे घर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में अध्यापक को भी पढ़ाने के लिए विद्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होती है। यदि वह चाहे तो घर से ही बच्चों को शिक्षा दे सकते हैं। इस कार्य में टेक्नोलॉजी की बहुत भूमिका रही है। इसके माध्यम से कोई व्यक्ति ऑनलाइन इंटरनेट के माध्यम से जिस विषय को पढ़ाना चाहता है, वीडियो बनाकर पढ़ा सकता है। कई बच्चे अपनी रूचि वाले विषय इन्हीं अध्यापकों की मदद से पढ़ते हैं। 

बदलते समय और विचारधारा के साथ शिक्षा प्रावधानों में बदलाव जरूरी है। तभी शिक्षा की गुणवत्ता में अधिक सुधार किया जा सकता है।