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हरित क्रांति: भारत का विकास की तरफ पहला कदम

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हरित क्रांति: भारत का विकास की तरफ पहला कदम
13 Aug 2021
5 min read

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जीवन की ज़रूरत में सबसे पहले अन्न है, किसानों की ही मेहनत से भारत संपन्न है....  भारत संसाधनों का धनी देश है, जिसका मुख्य आधार कृषि है। कृषि भारत की पहचान है, कृषि ही देश की अर्थव्यवस्था की मूल जड़ है। विश्व में भारत एक कृषि प्रधान देश के नाम से जाना जाता है। देश ने सबसे पहले कृषि के दम पर ही समाज से गरीबी को दूर करने का कार्य शुरू किया था, जिसमें हम काफी हद तक कामयाब भी हुए। कृषि ने किसानों को जीने का मकसद दिया है।

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जीवन की ज़रूरत में सबसे पहले अन्न है,

किसानों की ही मेहनत से भारत संपन्न है.... 

प्रकृति एक अद्भुत संरचना है। प्रकृति खुद को हरा-भरा रखने के लिए खुद ही संसाधनों को उपलब्ध कराती है। प्रकृति एक शिल्पकार है, जो उत्कृष्ठ रचनाएं करती है। मनुष्य के जीवन को सुगमता से चलाने का आधार, प्रकृति अपने हिस्से से ही देती है। भारत देश के परिपेक्ष में भी प्रकृति ने बहुत कुछ दिया है। भारत संसाधनों का धनी देश है, जिसका मुख्य आधार कृषि है। कृषि भारत की पहचान है, कृषि ही देश की अर्थव्यवस्था की मूल जड़ है। विश्व में भारत एक कृषि प्रधान देश के नाम से जाना जाता है। देश ने सबसे पहले कृषि के दम पर ही समाज से गरीबी को दूर करने का कार्य शुरू किया था, जिसमें हम काफी हद तक कामयाब भी हुए। कृषि ने किसानों को जीने का मकसद दिया है। इन सबके बावजूद, इतने संसाधन होने के बावजूद भी देश इसका उपयोग पूरी तरह से नहीं कर पा रहा था। इस कमी को पूरा करने का कार्य किया 1960 में भारत में आयी हरित क्रांति ने। देश में हरित क्रांति ने सूरज की पहली किरण की तरह दस्तक दी, जिसकी रोशनी समय के साथ अधिकाधिक बढ़ती और फैलती रही। रोशनी की इस किरण ने देश के सबसे बड़े इलाके को प्रभावित किया। साथ में औद्योगिक क्षेत्र में भी इसने उत्कृष्ठ योगदान दिया। 

विश्व में हरित क्रांति का जन्म 

हरित क्रांति का जन्म 1960 में नार्मन अर्नेस्ट बोरलॉग ने की थी। इन्हें हरित क्रांति का पिता भी कहा जाता है। इस 1970 में इन्हें गेहूं के ज्यादा उत्पादन वाले बीजों का अविष्कार करने के लिए विश्व के सबसे श्रेष्ठ पुरस्कार नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया। जबकि भारत में हरित क्रांति का श्रेय एम एस स्वामीनाथन को जाता है। हरित क्रांति के माध्यम से गेहूं, दाल, चावल के उत्पादन में किस तरह से वृद्धि की जाए, यह बताया जाता है। हरित क्रांति को कई देशों ने अपनाया और इससे कृषि को बेहतर करने का प्रयत्न किया, जिसमें वो सफल भी रहे। 

भारत में हरित क्रांति का प्रवेश 

भारत में हरित क्रांति को एम एस स्वामीनाथन के द्वारा लाया गया। इसे लाने का मुख्य उद्देश्य था कि जिस नाम से देश जाना जाता है, वह सच में उसकी पहचान बन सके। हरित क्रांति को देश में विकसित करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखा गया। हरित क्रांति को लॉन्च करते समय इस बात का ध्यान रखा गया कि देश को 5 साल के अंदर ही भुखमरी से बाहर निकला जा सके। इसके साथ ही उत्पादन वृद्धि से कृषि और औद्योगिक क्षेत्र को लम्बे समय तक प्रभावी बनाया जा सके। देशवासियों को रोजगार उपलब्ध कराना भी हरित क्रांति का एक मुख्य उद्देश्य था। ऐसे तरीकों का अध्ययन जिसके माध्यम से पौधों को जलवायु परिवर्तन और कीटों के वार से बचाया जा सके यह भी हरित क्रांति किउद्देश्य में शामिल था। हरित क्रांति का मुख्य उद्देश्य कृषि को व्यवसाय के तौर पर विश्व स्तर पर ले जाना था। हरित क्रांति के अंतर्गत गेहूं, चावल, दाल,ज्वर,बाजरा और मक्का जैसे अनाज आते हैं, जो प्रत्येक मनुष्य के भोजन का आधार हैं। इस तथ्य से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि कृषि उत्पादन की वृद्धि से देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता।  

फसलों की उपज में हुई वृद्धि 

हरित क्रांति का असर भारत में दिखा। भारत जिस उद्देश्य की आपूर्ति के लिए इस क्रांति को देश में लेकर आया था, वो उसमें सफल हुआ। देश में फसलों की पैदावार बढ़ी और इतनी बढ़ी कि अब भारत अपने खाने के लिए, भविष्य सुरक्षा में संरक्षित करने के आलावा दूसरे देशों को अनाज का निर्यात करने में भी सक्षम हो गया। यह वह दौर था जब देश का कृषि क्षेत्र उद्योग का क्षेत्र बन गया। भारत में नयी तकनीकियों और नए उर्वरकों जैसे और तरीकों के इस्तेमाल से उद्योग के क्षेत्र में बढ़ने लगा। कृषि अब किसानों के लिए आय का जरिया बन गयी। क्रांति के आने से तकनीकी के क्षेत्र में भी विकास हुआ। ट्रैक्टर, उर्वरक, कीटनाशक, पम्पिंग सेट जैसी वस्तुओं की मांग बढ़ने से इनका भी औद्योगिक क्षेत्र में निर्माण शुरू हुआ। जिसने विकास की राह में अहम किरदार निभाया। हरित क्रांति से आज हमारा देश भारत विश्व में अनाज का बहुत बड़ा निर्यातक देश है। 

सारांश - 

हरित क्रांति ने पूरे देश की रूप रेखा बदल दी। गरीबी की मार झेल रहा देश अपने पैरों पर खड़ा हो गया और दूसरों को भी सहारा देने के काबिल हो गया। किसानों की मुश्किलें आसान हो गयीं और वो दिल से मुस्कुराने लगा। देश की अर्थव्यवस्था कृषि का हाथ पकड़कर विकास को अपना लक्ष्य मानते हुए लगातार आगे की ओर बढ़ रही है। कई मुश्किलों को पार करके विश्व में अपनी पहचान बनाता देश नयी दिशा की ओर निकल पड़ा। आज देश विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसमें कृषि के विकास ने मुख्य भूमिका अदा की है।