FSSAI का बड़ा फैसला: वेगन फूड पर ‘V’ लोगो अनिवार्य, 2027 से लागू नियम
News Synopsis
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शाकाहारी खाद्य उत्पादों के लिए एक मानकीकृत लोगो की घोषणा की है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को बाजार में ऐसे उत्पादों की आसानी से पहचान करने में मदद करना है। यह नया नियम 1 जुलाई 2027 से लागू होगा, जिसके तहत सभी अनुमोदित वेगन उत्पादों पर यह लोगो पैकेजिंग पर लगाना अनिवार्य होगा।
FSSAI का नया वेगन लेबलिंग नियम
FSSAI ने भारत में वेगन खाद्य पदार्थों के लिए एक समान पहचान प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी प्रमाणित वेगन खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर एक विशेष ‘V’ लोगो लगाना आवश्यक होगा।
यह नियम इस वर्ष अधिसूचित किए गए Food Safety and Standards (Vegan Foods) Regulations में संशोधन के माध्यम से लाया गया है।
इस नियम को 1 जुलाई 2027 से अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा, जिससे कंपनियों को अपने पैकेजिंग और लेबलिंग सिस्टम को अपडेट करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
‘V’ लोगो लागू करने का उद्देश्य
FSSAI के अनुसार इस पहल का मुख्य उद्देश्य वेगन उत्पादों के लिए एक समान और आसानी से पहचानने योग्य पहचान तैयार करना है। बढ़ती शाकाहारी और वेगन डाइट की लोकप्रियता के बीच यह कदम उपभोक्ताओं की भ्रम की स्थिति को कम करेगा।
कई पैकेज्ड फूड उत्पादों में पशु-आधारित सामग्री या एडिटिव्स हो सकते हैं, जिन्हें पहचानना आम उपभोक्ता के लिए मुश्किल होता है। नया लोगो इस समस्या को हल करने में मदद करेगा।
इससे लेबलिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत होगा।
नए वेगन लोगो का डिजाइन और संरचना
FSSAI ने इस लोगो के डिजाइन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं ताकि सभी उत्पादों में एकरूपता बनी रहे।
लोगो में शामिल होंगे:
- हरे रंग का “V” चिन्ह
- ऊपर की ओर एक पौधे या अंकुर (sprout) का प्रतीक
- नीचे “VEGAN” शब्द
- पूरी डिजाइन को घेरता हुआ हरा चौकोर बॉर्डर
इसके अलावा FSSAI ने आकार, दूरी, फॉन्ट और अनुपात जैसे तकनीकी मानकों को भी निर्धारित किया है, ताकि सभी ब्रांड्स एक समान लोगो का उपयोग करें।
वेगन प्रमाणन के लिए पात्रता मानदंड
FSSAI के अनुसार केवल वही उत्पाद इस लोगो को प्रदर्शित कर सकेंगे जो पूरी तरह से वेगन की परिभाषा पर खरे उतरते हैं।
वेगन उत्पादों में निम्न शामिल नहीं होना चाहिए:
- किसी भी प्रकार की पशु-आधारित सामग्री
- डेयरी उत्पाद जैसे दूध, मक्खन आदि
- शहद या मधुमक्खी से प्राप्त पदार्थ
- पशु-आधारित एडिटिव्स या प्रोसेसिंग सहायक
यह सख्त परिभाषा उपभोक्ताओं को सही और भरोसेमंद जानकारी प्रदान करने के लिए बनाई गई है।
उपभोक्ता जागरूकता और विश्वास में वृद्धि
वेगन उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच यह पहल उपभोक्ता जागरूकता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लोग अब स्वास्थ्य, पर्यावरण और नैतिक कारणों से पौध-आधारित आहार को अधिक अपनाने लगे हैं।
इस नियम से:
- पैकेज्ड फूड में पारदर्शिता बढ़ेगी
- गलत या भ्रमित करने वाले दावों में कमी आएगी
- उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प चुनने में मदद मिलेगी
- वेगन उत्पादों पर भरोसा बढ़ेगा
खाद्य उद्योग पर प्रभाव
इस नए नियम के लागू होने से खाद्य कंपनियों और ब्रांड्स को अपनी पैकेजिंग और लेबलिंग प्रणाली में बदलाव करना होगा। उन्हें FSSAI के दिशानिर्देशों के अनुसार अपने उत्पादों को अपडेट करना होगा।
हालांकि नियम 2027 से लागू होगा, लेकिन कंपनियों से उम्मीद की जाती है कि वे अभी से तैयारी शुरू कर दें ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी न हो।
पौध-आधारित खाद्य नियमों की बढ़ती प्रवृत्ति
वैश्विक स्तर पर पौध-आधारित आहार की मांग तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर जागरूकता ने इस प्रवृत्ति को और तेज किया है।
भारत में भी वेगन और शाकाहारी उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे नियामक संस्थाएं लेबलिंग को अधिक स्पष्ट और मानकीकृत बनाने पर ध्यान दे रही हैं।
लागू होने के बाद संभावित लाभ
इस नियम के लागू होने के बाद कई लाभ देखने को मिल सकते हैं:
- वेगन उत्पादों की आसान पहचान
- उपभोक्ताओं में कम भ्रम
- उद्योग में बेहतर अनुपालन
- वेगन ब्रांड्स में बढ़ता विश्वास
- पैकेजिंग में मानकीकरण
निष्कर्ष:
FSSAI का यह नया निर्णय भारत में खाद्य पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 2027 से लागू होने वाला यह ‘V’ लोगो सिस्टम न केवल उपभोक्ताओं को बेहतर जानकारी देगा, बल्कि वेगन फूड मार्केट को भी अधिक संगठित और भरोसेमंद बनाएगा।


