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डॉ भीमराव अंबेडकर - युवाओं की प्रेरणा

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डॉ भीमराव अंबेडकर - युवाओं की प्रेरणा
13 Apr 2022
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ये तो हम सभी जानते हैं कि डॉ भीमराव अंबेडकर (Dr Bhimrao Ambedkar) संविधान (constitution) निर्माता के तौर पर प्रसिद्ध हैं, लेकिन हर कोई उनके जीवन की उपलब्धियों के बारे में नहीं जनता। पूरे देश में हर साल 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के रूप में मनाया जाता है। डाॅ. भीमराव अंबेडकर जी का पूरा जीवन संघर्षरत रहा है। जनहित में किये गए उनके प्रयासों और देश के गरीबों और दलितों के लिए किये गए उनके कार्यों के लिए उन्हें मरणोपरांत ‘भारत-रत्न’ (Bharatratan) का सम्मान दिया गया था। अंबेडकर जयंती के अवसर पर आज इस आर्टिकल में हम उनके जीवन के कुछ एहम पहलुओं पर चर्चा करेंगे, ताकि हम सभी उनके जीवन से प्रेरणा ले सकें। 

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‘मैं ऐसे धर्म को मानता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है।’- डॉ भीमराव अंबेडकर

देश में आज लगभग सभी नेता, दलितों को वोट बैंक यानि वोटों का जरिया तो मानते हैं पर उनकी दशा सुधारने के लिए कुछ खास नहीं करते, और आखिर करेंगे भी कैसे? क्योंकि एक गरीब दलित की व्यथा वही समझ सकता है जिसने गरीबी को पास से देखा हो और जिया हो। आज उन सभी नेताओं का शुक्रिया जिन्होंने देश की आजादी से पहले और बाद में देश के दलितों और असहायों को कुछ विशेष अधिकार दिए और आज उन्हें सर उठाकर जीने का मौका दिया। भारतीय इतिहास के पन्नो में जब भी दलितों के कल्याण की बात की  गयी तो पहला नाम बाबा साहेब अंबेडकर का ही पहले आया। 

डॉ भीमराव अंबेडकर जी ने भारत की आजादी के बाद देश के संविधान के निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दिया। इसके अलावा उन्होंने कमजोर और पिछड़े वर्ग के लोगों के अधिकारों के लिए पूरा जीवन संघर्ष किया। हम कह सकते हैं कि डॉ अंबेडकर सामाजिक नवजागरण के अग्रदूत और समतामूलक समाज के निर्माणकर्ता थे। वे हमेशा से समाज के कमजोर, मजदूर, महिलाओं और पिछड़े वर्ग को शिक्षित करके सशक्त बनाना चाहते थे। यही कारण है की डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती को भारत में समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

आइए जानते हैं बाबा साहेब के जीवन से जुड़ी कुछ प्रेरणादायी और रोचक बातें 

भीमराव अंबेडकर का जीवन (Life of Bhimrao Ambedkar):

14 अप्रैल 1891 को डाॅ. भीमराव अंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश (MP) के एक छोटे से गांव महू (Mhow) में हुआ था। हालांकि, मूल रूप से उनका परिवार रत्नागिरी (Ratnagiri) जिले से ताल्लुक रखता था। अंबेडकर के पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और उनकी माता का नाम भीमाबाई था। डॉ. अंबेडकर महार जाति के थे जिसके चलते उन्हें बचपन से ही भेदभाव का सामना करना पड़ा। यही कारण है कि उन्होंने अपने पूरे जीवन भेदभाव का विरोध किया और गरीबों व पिछड़ों के हक़ की बात कही।  

बी. आर. अंबेडकर बचपन से ही बुद्धिमान, गुणी और पढ़ाई में अच्छे थे। हालांकि, उस समय छुआछूत जैसी समस्याएं व्याप्त होने के कारण उनकी शुरुआती शिक्षा में काफी परेशानी आयी, लेकिन उन्होंने जात-पात की बातों को पीछे छोड़कर अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके पश्चात् 1913 में डॉ. अंबेडकर ने अमेरिका के कोलंबिया यूनिवर्सिटी (Columbia University) से आगे की शिक्षा प्राप्त की। साल 1916 में उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की जब उन्हें शोध (research) के लिए सम्मानित किया गया। बाबा साहेब के गुरु कृष्ण केशव आम्बेडकर जी ने जिन्होंने बचपन में ही बाबा साहेब की प्रतिभा को पहचान लिया था। इसके अलावा, सयाजीराव गायकवाड़ जी ने उनकी पढ़ाई में बहुत सहायता की। 

लंदन में पढ़ाई पूरी होने पर अपनी स्कॉलरशिप खत्म होने के बाद वह 1917 में स्वदेश यानि भारत वापस आ गए और यहाँ मुंबई के सिडनेम कॉलेज (Sydenham College) में प्रोफेसर के तौर पर नौकरी करने लगे। 1923 में उन्होंने एक शोध (रिसर्च) पूरा किया था, जिसके लिए डॉ अंबेडकर को लंदन यूनिवर्सिटी द्वारा डॉक्टर ऑफ साइंस (Doctor of Science) की उपाधि दी गयी थी। इसके बाद, साल 1927 में अंबेडकर जी ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से अपनी पीएचडी भी पूरी की। अपनी शिक्षा से उन्होंने कभी कोई समझौता नहीं किया। और एक समय ऐसा आया जब उन्होंने भारत का संविधान लिख दिया। 

डॉ भीमराव अंबेडकर से सीखने वाली बातें (Lessons from Dr Ambedkar's life)

बाबासाहेब ने शिक्षा को सबसे जरूरी बताया, शिक्षा के जरिये अपने आप को ऊपर उठाने और उन्होंने शिक्षा के जरिये ही आधुनिक भारत के महान नेता बनने की सीख दी। उन्होंने बताया कि जातिवाद और भेदभाव से ग्रस्त समाज में आवाज उठाने के लिए शिक्षित होना कितना महत्वपूर्ण है। न्यायविद, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक के रूप में उनका जीवन हम सभी के लिए एक उदाहरण है। 

डॉ भीमराव अंबेडकर जी अपने जीवन के हर पड़ाव पर डट कर खड़े रहे और सभी परेशानियों का सामना किया। उन्होंने युवाओं के लिए कई उदहारण पेश किये, आइए जानते है कुछ उनसे मिली कुछ अहम  सीख… 

  • शिक्षा ही सफलता की कुंजी है (Education is the key to success):

डॉ भीमराव अंबेडकर एक मेधावी छात्र रहे और शिक्षित होने के अपने दृढ़ संकल्प के रास्ते में उन्होंने कुछ भी नहीं आने दिया। जिस समाज में दलितों या 'अछूतों' को शिक्षा से वंचित कर दिया गया था, वहां डॉ अंबेडकर कॉलेज खत्म करने वाले पहले दलित बने। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और अमेरिका में कोलंबिया विश्वविद्यालय में अध्ययन किया, और अर्थशास्त्र से पीएचडी की पढ़ाई भी खत्म की। उन्होंने बड़ौदा राज्य में रक्षा सचिव के रूप में कार्य किया। डॉ अंबेडकर भारत के पहले कानून मंत्री और संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष थे। 

  • किसी से डरो मत (Don’t be daunted):

बाबा साहेब के दौर में जाति व्यवस्था इस समय से कहीं अधिक जटिल थी। उस समय चारों तरफ केवल जात-पात और भेदभाव देखने को मिलता था। युवा अम्बेडकर को ऊंची जाती के लोगों के साथ एक ही कक्षा में बैठने की अनुमति नहीं थी, और न ही उस कुएं से पानी पीने की अनुमति थी जहाँ बाकी बच्चे या लोग पानी पीते थे। उन्होंने इस भेदभाव को शिक्षा प्राप्त करने और इस देश के इतिहास में एक अग्रणी व्यक्ति बनने के अपने दृढ़ संकल्प के रास्ते में नहीं आने दिया और किसी से भी नहीं डरे क्योंकि उन्हें पता था कि वह कुछ गलत नहीं कर रहे। 1990 में, उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। 

  • यदि समाज ने आपको अधिकार दिया है, तो समाज को उनका अधिकार दिलाने में मदद करें (Give back to society):

अम्बेडकर ने समानता, बंधुत्व और स्वतंत्रता जैसे मुद्दों का नेतृत्व करने के लिए अपनी शिक्षा का इस्तेमाल किया। उनका मानना ​​​​था कि समाज तभी आगे बढ़ेगा जब महिलाएं सशक्त होंगी और उनके पास रोजगार होगा और इसीलिए महिलाओं के उच्च शिक्षा के अधिकार को बरकरार रखा जाएगा। उन्होंने सभी लोगों के मौलिक और मानवाधिकारों पर प्रकाश डालते हुए कई किताबें और कॉलम लिखे। दलितों पर सदियों से चली आ रही असमानता की जंजीरों को तोड़ने के लिए, उन्होंने दलितों के लिए शिक्षा और रोजगार में आरक्षण के लिए प्रचार किया और जीत भी हासिल की। डॉ अम्बेडकर, जो स्वयं अधिकारों से वंचित रहे लेकिन उन्होंने संविधान में मौलिक अधिकारों को अंकित किया, जिससे आने वाली पीढ़ियों को लाभ हो।  

बाबा साहेब द्वारा लिखी गयी किताबें:

बाबा साहेब ने कई ऐसी किताबें लिखी जिन्हे आपको जरूर पढ़ना चाहिए। आपको बता दें कि बाबासाहेब के निजी पुस्तकालय “राजगृह” में 50,000 से भी अधिक उनकी किताबें थी और यह विश्व का सबसे बडा निजी पुस्तकालय था। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को 64 विषयों का अच्छा ज्ञान था।  डॉ अम्बेडकर हिन्दी, पाली, संस्कृत, अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, मराठी, पर्शियन और गुजराती जैसे 9 भाषाओँ के अच्छे जानकार थे। इसके साथ ही, उन्होंने लगभग 21 साल तक विश्व के सभी धर्मों की तुलनात्मक रूप से पढाई की थी। आपको बता दें कि डॉक्टर अम्बेडकर की किताबें वर्तमान में भारत में अबसे अधिक बिकने वाली किताबों में गिनी जातीं हैं। 

नीचे उनकी लिखी हुई कुछ प्रसिद्द किताबों के नाम दिए गए हैं। 

किताबें  
भारत का राष्ट्रीय अंश 
भारत में जातियां और उनका मशीनीकरण  
भारत में लघु कृषि और उनके उपचार 
मूल नायक (साप्ताहिक) 
ब्रिटिश भारत में साम्राज्यवादी वित्त का विकेंद्रीकरण 
रुपये की समस्या: उद्भव और समाधान 
ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्त का अभ्युदय 
बहिष्कृत भारत (साप्ताहिक)   
जनता (साप्ताहिक) 
जाति का उच्छेद  
संघ बनाम स्वतंत्रता 
पाकिस्तान पर विचार   
श्री गाँधी एवं अछूतों की विमुक्ति 
रानाडे, गाँधी और जिन्ना  
कांग्रेस और गाँधी ने अछूतों के लिए क्या किया  
शूद्र कौन और कैसे 
महाराष्ट्र भाषाई प्रान्त  
भगवान बुद्ध और उनका धर्म   

यदि हम बाब साहेब भीमराव अंबेडकरऔर उनके द्वारा लिखी गयी किताबों को ध्यान से पढ़ें और समझें तो हम जानेंगे की उनका व्यक्तित्व कितना प्रेरणादायी है। आज के परिवेश में बाबा साहेब जैसे व्यक्तित्व की बहुत आवश्यकता है, जो ऊंच-नीच  और भेद-भाव के विद्रोह को खत्म कर देश को विकास के पथ पर अग्रसर कर सके।

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