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Anju Nainwal

<p>I am Anju Nainwal. I have qualified B.Sc, M.A, B.Ed from Uttrakhand University.</p>

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Satyendra Nath Bose-एक मह

भारत देश की इस पावन धरती में कई ऐसे महान पुरुष पैदा हुए हैं जिन्होंने अपने अमूल्य योगदान से आने वाली पीढ़ी को धन्य किया है। उन्हीं में से एक हैं सत्येन्द्र नाथ बोस। उन्होंने जो कुछ भी हमें दिया है हम उनके उस योगदान के सदैव ऋणी रहेंगे और उसके लिए उन्हें युगों-युगों तक उन्हें याद किया जायेगा। सत्येन्द्र नाथ बोस एक उत्कृष्ट गणितज्ञ और भारतीय भौतिक वैज्ञानिक Outstanding Mathematician and Indian Physicist थे। उन्हें क्वांटम फिजिक्स quantum physics में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है। गणितज्ञ सत्येन्द्र नाथ बोस (Mathematician Satyendra Nath Bose) का गणित और भौतिकी के क्षेत्र में जाना पहचाना नाम है। सत्येंद्र नाथ बोस स्कूल में अध्ययन के दौरान से ही प्रतिभाशाली थे। सत्येन्द्र नाथ बोस (SATYENDRA NATH BOSE) महान वैज्ञानिक आइन्सटीन Great Scientist Einstein से अत्यंत प्रभावित थे। वे हमेशा आइन्सटीन को अपना गुरु मानते थे। बोस को भारत का आइंस्टीन Einstein of India कहा जाता है। चलिए आज इस लेख में इस महान गणितज्ञ और भौतिक शास्त्री के बारे में विस्तार से जानते हैं। 

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा Early life and Education

सत्येन्द्र नाथ बोस का जन्म 1 जनवरी 1894 को कोलकाता Kolkata में हुआ था। उनके पिता सुरेन्द्र नाथ बोस Surendra Nath Bose ईस्ट इंडिया रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत थे। सत्येन्द्र नाथ बोस अपने सात भाइयों-बहनों में सबसे बड़े थे। 1914 में, 20 साल की उम्र में, सत्येंद्र नाथ बोस ने कलकत्ता चिकित्सक की 11 वर्षीय बेटी उषाबाती घोष से शादी की। उनके नौ बच्चे थे, जिनमें से दो का बचपन में ही देहांत होगया। बोस का पैतृक घर बंगाल प्रेसीडेंसी में, नादिया के तत्कालीन जिले, बारा जगुलिया गाँव में था। उनकी स्कूली शिक्षा पांच साल की उम्र में, उनके घर के पास एक सामान्य स्कूल से शुरू हुई। उसके बाद उन्होंने न्यू इंडियन स्कूल और फिर हिंदू स्कूल Hindu School, में दाखिला लिया। फिर अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसीडेंसी कॉलेज Presidency Colleges of Kolkata में दाखिला लिया और वे कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में इंटरमीडिएट साइंस कोर्स में शामिल हो गए, जहाँ उनके शिक्षकों में जगदीश चंद्र बोस, शारदा प्रसन्न दास और प्रफुल्ल चंद्र रे Jagdish Chandra Bose, Sharda Prasanna Das and Prafulla Chandra Ray शामिल थे। 

बोस ने अपने बीएससी के लिए अनुप्रयुक्त गणित (applied mathematics) को चुना और 1913 में प्रथम स्थान से परीक्षा पास की। उन्होंने इसके बाद सर आशुतोष मुखर्जी Sir Ashutosh Mukherjee के नवगठित साइंस कॉलेज में दाखिला लिया। उन्होंने 1915 में एमएससी अनुप्रयुक्त गणित (applied mathematics) की परीक्षा भी प्रथम स्थान से पास की। एमएससी की परीक्षा में उन्हें बहुत अच्छे मार्क्स मिले थे तब कलकत्ता विश्वविद्यालय के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड बना था। वो अपनी सभी परीक्षाओं में सर्वाधिक अंक पाते थे और उन्हें प्रथम स्थान मिलता था। बचपन से ही उनकी कुशाग्र बुद्धि और प्रतिभा को देख कर हर कोई यही कहता था कि वो आगे जाकर बड़े गणितज्ञ या वैज्ञानिक बनेंगे। एक बार गणित के शिक्षक ने श्री बोस को 100 में से 110 अंक दिये थे। दरअसल इन्होंने सभी सवालों को हल करने के साथ-साथ कुछ सवालों को एक से ज़्यादा तरीक़े से हल किया था। सत्येन्द्र नाथ बोस पढ़ाई में हमेशा से ही अच्छे थे, विशेष तौर से गणित में बहुत कुशाग्र थे।

बहुभाषाविद के रूप में, बोस को कई भाषाओं जैसे बंगाली, अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन और संस्कृत के साथ-साथ लॉर्ड टेनिसन, रवींद्रनाथ टैगोर और कालीदास की कविता में भी पारंगत किया गया था। 

करियर और सत्येन्द्र नाथ बोस का योगदान Career and Contribution of Satyendra Nath Bose

सत्येन्द्र नाथ बोस ने मैथमेटिक्स से एमएससी में सर्वोच्च अंकों के साथ डिग्री हासिल की, जो एक रिकॉर्ड है। इसके बाद कॉलेज के प्रिंसिपल सर आशुतोष मुखर्जी ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें कॉलेज में फिजिक्स का लेक्चरर physics lecturer नियुक्त किया। बाद में वह वर्ष 1921 में ढाका विश्वविद्यालय में भौतिकी विभाग के रीडर Reader of the Department of Physics at Dhaka University के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने यहीं पर प्रयोगशाला विकसित की और कई प्रयोग किए। यह समय भौतिक विज्ञानं में नई-नई खोजों का था। जर्मनी के भौतिकशास्त्री मैक्स प्लैंक ने क्वांटम सिद्धांत German physicist Max Planck developed quantum theory का प्रतिपादन किया था। जर्मनी में ही अल्बर्ट आइंस्टीन ने “सापेक्षता का सिद्धांत” Albert Einstein "Theory of Relativity" in Germany प्रतिपादित किया था। सत्येन्द्रनाथ बोस अपनी कुशाग्र बुद्धि के साथ इन सभी खोजों पर अध्ययन और अनुसन्धान कर रहे थे।

सत्येन्द्रनाथ ने “प्लैंक’स लॉ एण्ड लाइट क्वांटम” "Planck's Law and Light Quantum" नाम का एक शोधपत्र लिखा और जब इस शोधपत्र को उन्होंने एक विदेशी पत्रिका (ब्रिटिश जर्नल) में प्रकाशन हेतु भेजा। विदेशी पत्रिका ने उनके शोध पत्र को प्रकाशित करने से मना कर दिया। लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्हें अपने शोधकार्य पर पूरा भरोसा था। इसके बाद उन्होंने उसे सीधे महान वैज्ञानिक आइंस्टीन को भेज दिया। बस यहीं से उनके जीवन में नया मोड़ आया। आइन्स्टीन उनके कार्य से बहुत ही प्रभावित हुए। आइन्स्टीन ने इसकी अहमियत को समझा और कहा कि यह पत्र गणित के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है और उसका जर्मन भाषा में अनुवाद कर ‘जीट फर फिजिक’ Zeit Fur Physik नामक जर्नल में प्रकाशित कराया। महान वैज्ञानिक आइन्सटीन का नाम उस शोध पत्र से जुड़ते ही विश्व के कई पत्र-पत्रिका में उनका शोधपत्र प्रकाशित हुआ। इसके बाद सत्येन्द्रनाथ बोस का नाम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गया। अपनी विदेश यात्रा के दौरान इन्होंने आइन्सटीन से मुलाकात भी की। इन दोनों महान वैज्ञानिकों ने अनेक सिद्धांतों पर साथ-साथ कार्य किया। इस महान वैज्ञानिक सत्येन्द्रनाथ बोस को मैडम क्यूरी Madam Curie के साथ भी काम करने का मौका मिला। 

बोस और आइंस्टीन का सांख्यिकी सिद्धांत Bose and Einstein Statistical Theory

बोस ने क्वांटम फिजिक्स को एक नई दिशा दी। वैज्ञानिकों के द्वारा पहले यह माना जाता रहा कि परमाणु ही सबसे छोटा कण होता है लेकिन जब इस बात की जानकारी पता चली कि परमाणु के अंदर भी कई सूक्ष्म कण होते हैं जो कि वर्तमान में प्रतिपादित किसी भी नियम का पालन नहीं करते हैं। तब डॉ बोस ने एक नए नियम का प्रतिपादन किया जो “बोस-आइन्स्टाइन सांख्यिकी सिद्धांत” Bose-Einstein Statistical Theory अर्थात बोस-आइंस्टीन स्टेटिस्टिक्स के नाम से जाना जाता है। उच्च कक्षाओं में भौतिकी और गणित का अध्ययन करने वाले सभी विद्यार्थी बोस-आइन्स्टीन सांख्यिकी (Bose-Einstein Statistics) का अध्ययन करते हैं।

इस नियम के बाद वैज्ञानिकों ने सूक्ष्म कणों पर बहुत रिसर्च किया। जिसके बाद यह निष्कर्ष निकाला कि परमाणु के अंदर पाए जाने वाले सूक्ष्म परमाणु कण मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं जिनमें से एक का नाम डॉ बोस के नाम पर ‘बोसॉन’ Boson रखा गया तथा दूसरे का एनरिको फर्मी के नाम पर ‘फर्मीऑन’ 'Fermions' रखा गया। 

आज भौतिकी में कण दो प्रकार के होते हैं एक बोसॉन और दूसरे फर्मियान। बोसॉन यानि फोटॉन, ग्लुऑन, गेज बोसॉन (फोटोन, प्रकाश की मूल इकाई) और फर्मियान यानि क्वार्क और लेप्टॉन एवं संयोजित कण प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन proton, neutron, electron ( चार्ज की मूल इकाई)। यह वर्तमान भौतिकी का आधार the basis of physics हैं।

भारत मे क्रिस्टल विज्ञान की दुनियाँ में बोस का उल्लेखनीय योगदान माना जाता है। उन्होंने शोध कार्य के लिए ढाका विश्वविद्यालय में x ray crystal लैब का निर्माण करवाया। सत्येन्द्र नाथ बोस की खोज गणित के सांख्यिकी पर आधारित था। महान भारतीय वैज्ञानिक मेधनाथ साहा Indian scientist Medhanath Saha के साथ मिलकर गैसों की स्थिति से संबंधित समीकरण विकसित किये। 

सत्येंद्र नाथ बोस की बुद्धिमता को आइंसटाइन जैसे वैज्ञानिक ने न सिर्फ स्वीकारा बल्कि उसके साथ अपना नाम भी जोड़ा यह वास्तव में बहुत बड़ी बात है। 

सम्मान व पुरस्कार Honors and Awards

  • सत्येन्द्र नाथ बोस की स्मृति में भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रत्येक वर्ष “सत्येन्द्र नाथ स्मारक पुरस्कार” Satyendra Nath Memorial Award प्रदान किया जाता है। 

  • सत्येंद्र नाथ बोस के सम्मान में प्रतिवर्ष विज्ञान के छात्रों को एसएन बोस स्कॉलरशिप (SN Bose Scholarship) दिया जाता है।

  • इनके नाम पर एक सूक्ष्म परमाणु कण का नाम “बोसॉन” रखा है

  •  विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुएवर्ष 1954 में उन्हें भारत सरकार ने देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘पद्मविभूषण’ Padma Vibhushan से सम्मानित किया था। 

  • सत्येन्द्र नाथ बोस को लंदन के रॉयल सोसाइटी अपना फैलो(सदस्य) मनोनीत किया। 

  • सन 1959 में उन्हें भारत सरकार ने ‘राष्ट्रीय प्रोफेसर‘ National Professor की उपाधि से अलंकृत किया। 

  • वर्ष 1937 में कवि रबींद्रनाथ टैगोर Poet Rabindranath Tagore ने विज्ञान पर एक पुस्तक लिखी, जो सत्येंद्र नाथ बोस को समर्पित थी, जिसका शीर्षक था – “विश्व परिचय“। 

  • वे “इंडियन फिजिकल सोसाइटी” और “नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस के प्रेसीडेंट” Indian Physical Society” and “President of National Institute of Science भी रहे।

  • सत्येन्द्र नाथ बोस वैज्ञानिक के साथ-साथ राजनेता भी थे। भारत सरकार ने उन्हें राज्य सभा के सदस्य चुना। वे सन 1952 से 1956 तक राज्य सभा के सदस्य रहे। 

  • भारत सरकार ने सत्येन्द्र नाथ बोस के सम्मान में सन 1986 में कलकता में ‘एस अन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज‘ S N Bose National Center for Basic Sciences की स्थापना भी की।

जिस व्यक्ति के साथ आइंसटाइन जैसे वैज्ञानिक का नाम जुड़ा है उस व्यक्ति को नोबेल पुरस्कार न मिलना अपने आप में काफ़ी सवाल खड़े करता है लेकिन उनका योगदान किसी नोबेल प्राप्तकर्ता वैज्ञानिक से कम नहीं था।

अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों से संबंध Relations with International Scientists

सत्येन्द्र नाथ बोस 1924 में यूरोप गए। बोस एक वर्ष पेरिस में भी रहे। बोस ने सोचा कि क्यों न ‘रेडियोधर्मिता’ radioactivity के बारे में ‘मैडम क्यूरी’ Madam Curie' से तथा ‘मॉरिस डी ब्रोग्ली’ से ‘एक्स-रे’ के बारे में बात की जाए। बोस ने मैडम क्यूरी की प्रयोगशाला में कुछ जटिल गणितीय गणनाएँ कीं। बोस ने ब्रोग्ली से इन्होंने एक्स-रे की नई तकनीकों के बारे में सीखा।

फिर अक्टूबर, 1925 में बोस ने बर्लिन जाने का विचार बनाया जिससे वे आइंस्टाइन से मिल सकें। लेकिन उस वक्त आइंस्टाइन से उनकी मुलाकात नहीं हुई। क्योंकि आइंस्टाइन शहर से बाहर गए हुए थे लेकिन कुछ समय के बाद आइंस्टाइन वापस आए और बोस से मुलाकात की। बोस उनसे मिलकर अत्यंत प्रसन्न हुए थे। उन्होंने सत्येन्द्र नाथ बोस से काफी बातें की। उन्होंने पूछा कि आपको एक नई सांख्यिकी का विचार कैसे आया और इसका क्या महत्त्व है आदि। उनसे बोस को कई चीज़ें सीखने को मिली। कुल मिलाकर सत्येन्द्र नाथ बोस के अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों से संबंध काफी अच्छे थे जिनके अनुभव से बोस ने काफी कुछ सीखा और इन सबके साथ बोस का अनुभव अच्छा रहा। 

संगीत प्रेमी और उनकी प्रेरणा Music lovers and their inspiration

सत्येन्द्र नाथ बोस कला और संगीत प्रेमी थे। बोस के संगीत प्रेम का दायरा काफी फैला हुआ था। यह लोक संगीत, भारतीय संगीत से लेकर पाश्चात् संगीत तक फैला हुआ था। जितना उनका मोह विज्ञानं और गणित से था उतना ही संगीत से। उनके कमरे में आइंस्टीन, रमन आदि वैज्ञानिकों के चित्र और किताबों के साथ-साथ एक वाद्य यंत्र इसराज भी होता था। बोस इसराज और बांसुरी को किसी एक्सपर्ट की तरह बजाया करते थे। उन्हें संगीत से खासा लगाव था। 

सत्येन्द्र नाथ बोस की प्रेरणा की बात करें तो आइंस्टाइन ही उनकी प्रेरणा थे। बोस को आइंस्टाइन से आगे बढ़ने के लिए काफी प्रोत्साहन मिलता था। कहा जाता है कि जब बोस को आइंस्टाइन की मृत्यु का समाचार मिला था तो वह काफी भावुक हुए थे और यहाँ तक कि ये समाचार सुनकर रो पड़े थे। आइंस्टाइन को बोस एक ऐसे वैज्ञानिक के रूप में देखते थे जिनकी कोई बराबरी नहीं कर सकता था। उन्हें वो भगवान की तरह पूजनीय मानते थे। 

सत्येंद्र नाथ बोस का निधन

सत्येंद्र नाथ बोस वृद्धावस्था में साधुओं जैसी वेशभूषा में देश के विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों का दौरा करते रहे और अपने विचारों से वैज्ञानिकों को कुछ न कुछ सिखाते रहे। सन 1974 में बोस के सम्मान में कलकत्ता विश्वविद्यालय ने एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया था । उस संगोष्ठी में देश-विदेश के कई वैज्ञानिक सम्मिलित हुए। इस अवसर उन्होंने कहा यदि एक व्यक्ति अपने जीवन के अनेक वर्ष संघर्ष में व्यतीत कर देता है और अंत में उसे लगता है कि उसके कार्य को सराहा जा रहा है तो फिर वह व्यक्ति सोचता है कि अब उसे और अधिक जीने की आवश्यकता नहीं है और उसके बस कुछ दिनों बाद इस महान वैज्ञानिक का निधन 4 फरवरी, 1974 को कोलकाता में हुआ।

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श्रद्धा शर्मा-‘YourStory’

यदि कोई भी इंसान दृढ़ संकल्प और पूरे लगन के साथ कार्य करें तो सफलता जरूर मिलती है। ऐसे ही श्रद्धा शर्मा ने अपनी विवेकशीलता और बुद्धिमता से अपने एक नए आईडिया को अलग पहचान दी। ये बात सच है कि शुरुआत में अपनी अलग पहचान बनाना हमेशा से चुनौतियों से भरा रहा है लेकिन अगर आप अपने लक्ष्य और मंजिल के प्रति समर्पित हैं तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है। यही साबित कर दिखाया YourStory योरस्टोरी की Founder & CEO श्रद्धा शर्मा Shradha Sharma ने। कहते हैं न कि यदि आपके अंदर कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो तो कोई भी राह मुश्किल नहीं है। बस आपके सपने बड़े होने चाहिए फिर देखिये आपकी छोटी सी कंपनी दुनिया की बड़ी कंपनियों में कैसे शामिल होती है। इन्ही मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ी हैं श्रद्धा शर्मा और अपने संघर्षों से आज वह एक जाना माना नाम हैं। वह आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। तो चलिए जानते हैं उनकी सफलता की दास्तां जो आज हर किसी के लिए प्रेरणादायक है। योरस्टोरी.कॉम YourStory.com से आप जानेंगे कि भारतीय उद्योग जगत में कितनी असीम संभावनाएं है। आइडियाज की कोई कमी नहीं है और हर एक के लिए यह क्षेत्र खुला है।

कौन हैं श्रद्धा शर्मा? Who Is Shraddha Sharma Yourstory?

श्रद्धा शर्मा Shradha Sharma, YourStory योर स्टोरी की उद्यमी, संस्थापक, सीईओ और मुख्य संपादक Entrepreneur, Founder, CEO and Editor in Chief हैं, जिसे 2008 में लॉन्च किया गया था। YourStory.com स्टार्टअप, व्यवसायियों, और उद्यमियों startup, business persons and entrepreneurs के लिए digital media platform डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म है और उनकी कंपनी को "स्टार्टअप और उद्यमियों से संबंधित कहानियों, संसाधनों, समाचारों और शोध रिपोर्टों के लिए भारत का सबसे बड़ा और निश्चित मंच" घोषित किया गया है। अपना स्टार्टअप शुरू करने से पहले, उन्होंने CNBC TV18 में सहायक उपाध्यक्ष Assistant Vice President और टाइम्स ऑफ इंडिया Times of India में ब्रांड सलाहकार Brand Adviser के रूप में काम किया है। उन्होंने कट द क्रैप एंड जार्गन: लेसन्स फ्रॉम द स्टार्ट-अप ट्रेंच Cut the Crap and Jargon: Lessons from the Start-up Trenches नामक पुस्तक लिखी। पत्रकार श्रद्धा शर्मा भारत की प्रसिद्ध स्टार्ट-अप न्यूज वेबसाइट ‘YourStory’ की चीफ एडिटर और फाउंडर के साथ पत्रकार और लेखक Journalist, Author हैं। ‘YourStory’ भारत की प्रसिद्ध स्टार्ट-अप न्यूज वेबसाइट start-up news website है। श्रद्धा शर्मा की पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो श्रद्धा शर्मा शादीशुदा married हैं और उनके पति का नाम गौरव Gaurav है, जो एक उद्यमी हैं।

श्रद्धा शर्मा की शिक्षा और करियर | Education and Career of Shraddha Sharma In Hindi

श्रद्धा मूलतः पटना (बिहार) Patna (Bihar) से हैं और यहीं से इन्होंने शुरुआती पढ़ाई पूरी की है। श्रद्धा बचपन से ही पढ़ाई में अच्छी रही थीं।  स्कूलिंग पूरी करने के बाद ही इनका एडमिशन देश के सबसे अच्छे कॉलेज दिल्ली के सेंट स्टीफेंस में हो गया। इस तरह श्रद्धा शर्मा ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज St. Stephen's College,से ग्रेजुएशन और मास्टर्स डिग्री हासिल की है। इसके बाद श्रद्धा ने अहमदाबाद के MICA कॉलेज MICA Ahmedabad से MBA किया। CNBC TV 18 में कार्य करते हुए अपने अच्छे काम और अपनी खुद की काबिलियत के कारण श्रद्धा सबसे कम उम्र में असिस्टेंट वाईस प्रेसिडेंट बनी। फिर उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया में ब्रांड एडवाइजर के रूप में भी काम किया। इस बीच श्रद्धा ऐसे कई लोगों से मिली जो Indian Startup की ओर अपने कदम बढ़ा रहे थे। बस फिर क्या था श्रद्धा का झुकाव इस ओर चला गया। दरअसल उस समय जैसे Flipkart.com, Snapdeal.com जैसी भारतीय कम्पनियाँ तेजी से आगे बढ़ रही थी। इनके अलावा कई छोटी-बड़ी कम्पनियाँ भी अपनी पहचान बनाने में लगी थी। उस समय समाचार और न्यूज़-चैनलों पर स्टार्टअप से संबंधित ख़बरें प्रकाशित तो हो रहीं थी लेकिन इनमें से ज्यादातर कुछ बड़ी कम्पनियों के बारे में ही बताया जा रहा था। ऐसे में श्रद्धा ने छोटे स्टार्टअप small startup पर नजर डाली। बस फिर श्रद्धा शर्मा ने योरस्टोरी.कॉम के बारे में सोचा और इस पर अपना फोकस किया। श्रद्धा शर्मा के Yourstory.com के प्रयासों से ऐसी कई कंपनियों को पहचान मिली जो कि अपने शुरुआती दौर में थी और जिन्हे आगे बढ़ना था। 

श्रद्धा को भी करना पड़ा संघर्ष | Shraddha also had to Struggle

हम सब जानते हैं कि किसी भी नए काम को करने से पहले परेशानियां जरूर आती हैं। ऐसे ही कई समस्याओं का सामना करना पड़ा श्रद्धा को। शुरुआत के दो साल उन्होंने काफी संघर्ष किया लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से सफलता की कहानी लिख डाली। अपने नए आईडिया को एक अलग पहचान दी। दो साल के बाद धीरे-धीरे Yourstory सफल होने लगा और फिर वर्ष 2010 में इसे Villgro Journalist of the Year और Nasscom Ecosystem Evangelist Award से सम्मानित किया गया। पिछले 13 सालों में श्रद्धा ने 200,000 से ज्यादा उद्यमियों के संघर्ष और सफलता की कहानियों को Yourstory.com के माध्यम से एक मंच दिया है। Startup News के साथ ही Yourstory ऐसे लोगों के बारे में बताती है जिन्होंने अपने आत्मविश्वास, मेहनत, दृढ़ संकल्प, सकारात्मक सोच से कई परेशानियाँ आने के बावजूद भी सफलता हासिल कर एक नया मुक़ाम हासिल किया है। धीरे धीरे कई चीज़ें बदल रही हैं जहाँ पहले लोग सिर्फ नौकरी करते थे वहीं लोग अब अपने बिज़नेस के बारे में सोच रहे हैं। बस आपको जरुरत है एक लक्ष्य बनाकर किसी भी नए बिज़नेस को शुरू करने की। क्योंकि ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने छोटा सा Startup शुरूकर देश में ही नहीं विदेश में भी नया कीर्तिमान स्थापित किया है। Yourstory.com में Startup जगत से जुड़े लोगों की यात्रा, उनकी संघर्ष की कहानी, उनके अनुभव, उनके स्टार्टअप के बारे में, इंटरव्यू, आदि के बारे में खबरें आती हैं।

कैसे शुरू हुई योरस्टोरी (YourStory)

श्रद्धा शर्मा कहती हैं कि मैं हमेशा से कहानियों की ताक़त power of stories में विश्वास करती रही हूँ और मुझे लगता है कि कहानियों से हम बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं। वह कहती हैं मैंने अपने करियर की शुरुआत में देखा कि पारंपरिक मीडिया केवल बड़े ब्रांड और सफल लोगों व उद्यमों की कहानियों को दुनिया के सामने लाता है। तब उन्होंने सोचा कि महत्वाकांक्षी उद्यमियों और ऐसे लोगों की कहानियां भी सामने आनी चाहिए, जो हमारे आसपास बदलाव ला रहे हैं। बस फिर क्या था मुझे महसूस हुआ कि मुझे इन कहानियों को कहने की ज़रूरत है और इस तरह श्रद्धा के मन में दूसरों की कहानियों की ब्रांडिंग करने का विचार मन में कौंधा। 

फिर उन्होंने साल 2008 में योरस्टोरी (YourStory) की शुरुआत की, जिससे इन लोगों की कहानियों को लोगों के सामने लाएं और इन कहानियों से हमे कुछ सीखने को मिले। वह आगे कहती हैं मैंने जो कहानियां लोगों के सामने रखीं, वे चेंजमेकर्स, उद्यमियों और इनोवेटर्स Changemakers, Entrepreneurs and Innovators मतलब उन लोगों की कहानियां थीं जिन्हे कुछ नया करना था और उनके अंदर वो पावर भी थी। वो अपनी मेहनत से अपने सपनो को सच करना चाहते थे लेकिन उनके पास संसाधनों की कमी थी। वह कहती हैं तब मैंने उनके माध्यम से देश भर में फैले उन लोगों की प्रेरणादायक कहानियां कहीं, जो आगे बढ़ रहे थे। उस वक्त लोगों ने ये भी कहा कि योरस्टोरी (YourStory) नहीं चल पायेगा। क्योंकि लोगों का मानना था कि ऐसे अनजान लोगों की कहानियों में कौन दिलचस्पी रखेगा, जिनके नाम कोई सफलता नहीं है। सबका यही कहना था कि इस तरह की कहानियों को दुनिया के सामने लाकर आप पैसा कैसे कमाएंगी लेकिन श्रद्धा अपने विश्वास को लेकर अटल थी। उन्हें खुद पर भरोसा था और इस तरह उन्होंने कई कोशिशों और कहानियों को दुनिया के सामने रखा है। ये कहानियां एक उम्मीद और लोगों को कुछ नया करने के लिए प्रेरित करती हैं। उनके दिमाग में एक सवाल था कि आप उन लोगों को आवाज़ कैसे दे सकते हैं, जिनकी कहानियों के बारे में पहले कभी नहीं कहा गया। श्रद्धा कहती हैं बस यही वो सवाल थे, जिन्होंने मुझे योरस्टोरी (YourStory) की शुरूआत करने के लिए प्रेरित किया और आज में जिस मुक़ाम पर हूँ वो सबके सामने है।

योर स्टोरी YourStory के बारे में 

Yourstory.com उन सभी ख़बरों की जानकारी देती है जो भारत के startup दुनिया से जुड़े हैं। Yourstory.com से ऐसी कई कंपनियों और ऐसे कई स्टार्टअप को पहचान मिली जो नयी संभावनाओं से भरी हुई थी। उनमें कुछ कर गुजरने का जज्बा था और मार्केट में एक नयी पहचान प्राप्त करना इनका उद्देश्य था और ऐसी कंपनियों को निवेशकों, कंसलटेंट, सही बाज़ार और ग्राहकों Investors, Consultants, Right Markets and Clients के मध्य पहचान बनाने की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। आज की बात करें तो भारतीय Startup News के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाईट्स में Yourstory.com काफी आगे है। यानि आप नये-नये आइडिया पर काम करने वाले स्टार्टअप, उनकी ग्रोथ, बिज़नेस से संबंधित न्यूज, सामाजिक विषयों पर उत्साहवर्धक आर्टिकल, बेहतरीन खबरें Startups, growth, news related to business, encouraging articles on social topics, great news आदि खबरें पढ़ने के लिए ये बहुत ही अच्छा प्लेटफॉर्म है और इन सभी खबरों के लिए Yourstory.com आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। Yourstory.com वेबसाइट के समाचारों को इंग्लिश के अलावा 13 प्रमुख भारतीय भाषाओं हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बंगाली, मराठी, गुजराती, मलयालम, उड़िया, उर्दू, पंजाबी, असमिया Hindi, Tamil, Telugu, Kannada, Bengali, Marathi, Gujarati, Malayalam, Oriya, Urdu, Punjabi, Assamese में भी पढ़ सकते हैं। यदि आप भी कुछ करने के बारे में सोच रहे हैं यानि कुछ Startup शुरू करना चाहते हैं तो यह वेबसाइट पढ़ सकते हैं। आपके अंदर एक नयी ऊर्जा का संचार होगा क्योंकि यहाँ पर नए आइडियाज की कोई कमी नहीं है। 

श्रद्धा शर्मा महिलाओं के बारे में कहती हैं कि हमने सफलता की ऊंचाईयों को छूने वाली भारतीय महिलाओं की बढ़ती संख्या को देखा है। उनकी कई कहानियों को हमने हर-स्टोरी (HerStory) पर दर्ज किया है और उनकी सफलता का जश्न मनाया है। योरस्टोरी (YourStory) पर इन महिलाओं के लिए एक अलग जगह सुनिश्चित कर और सफलता की इन यात्राओं को बेहद नज़दीक से देखा है। वह कहती हैं कि महिलाओं को केवल बताने की जरुरत है और एक बार अगर वह इन क्षेत्रों में उतर जाती हैं और यदि उनके लिए सही से बुनियादी ढांचा उपलब्ध होता है तो इन सफल महिलाओं की संख्या में वृद्धि होना निश्चित है। 

तकनीकी–उद्यमी (tech-entrepreneur) के रूप में उनकी यात्रा 

श्रद्धा शर्मा का मानना है कि तकनीक और इंटरनेट में कई ताक़तें हैं, जिससे विकास के कई रास्ते बनते हैं और नए-नए अवसर पैदा होते हैं. साथ ही, यह कई तरह की चुनौतियों को भी जन्म दे सकता है। तकनीक और इंटरनेट से जीवन के हर क्षेत्र से जुड़े लोगों की आकांक्षाएं पूरी हो पा रही हैं और नए अवसर पैदा हो रहे हैं। तकनीक ने आम लोगों को उन संभावनाओं और अवसरों को भी एक रास्ता दिया है जो तकनीकी विकास से पहले के युग में संभव नहीं थे। श्रद्धा शर्मा कहती हैं कि मैं भी योरस्टोरी (YourStory) को खड़ा करने में सक्षम नहीं हो पाती, अगर प्रौद्योगिकी की ताक़त हमारे साथ नहीं होती। इसकी उपयोगिता दुनिया भर में फैली कोविड-19 की महामारी के बीच डिजिटल तकनीकों में आए उछाल के द्वारा सबने देखी। प्रौद्योगिकी और डिजिटल मीडिया technology and digital media हमारे जीवन में पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी के कारण देश के अलग-अलग कोनों से अधिक से अधिक संख्या में उद्यमी अपना कारोबार शुरु कर पा रहे हैं। वह कहती हैं कि दुनिया में भौतिक बाधाओं और चुनौतियों को दूर करते हुए तकनीक ने उद्यमियों को उभरने के नए मौके प्रदान किए हैं। 

नेट वर्थ, वेतन, पुरस्कार और उपलब्धि Shradha Sharma Net Worth, Salary, Awards and Achievement

2018 तक, (Shradha Sharma Net Worth) श्रद्धा शर्मा की कुल संपत्ति Net worth 437,000 डॉलर आंकी गई है। Check SitePrice के अनुसार YourStory की अनुमानित मासिक शुद्ध आय/वेतन $4000 है और इसकी अनुमानित कीमत $678K है। 

YourStory.com के संस्थापक और सीईओ के उनके पुरस्कारों और उपलब्धियों की सूची काफी लंबी है, जो नीचे दी गयी है -

  • एक समावेशी स्टार्टअप समुदाय के निर्माण में उनके प्रयासों के लिए NASSCOM Ecosystem Evangelist Award पारिस्थितिकी तंत्र इंजीलवादी पुरस्कार

  • 2010 में स्टार्टअप्स के कवरेज के लिए Villgro Journalist of the Year Award विलग्रो जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर अवार्ड

  • 2015 – ऑनलाइन प्रभाव के लिए लोरियल पेरिस फेमिना अवार्ड’ L’Oreal Paris Femina Award’ for online influence

  • 2015 – दुनिया भर में 500 लिंक्डइन इन्फ्लुएंसर्स में सूचीबद्ध लिस्ट Listed amongst 500 LinkedIn Influencers across the world

  • 2016 – इंटरनेट श्रेणी के तहत लिंक्डइन के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले सीईओ LinkedIn’s most viewed CEOs under Internet category

  • 2016 – पीएटी मेमोरियल उत्कृष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार PAT Memorial Outstanding Alumnus Award

चाई विद लक्ष्मी Chai with Lakshmi एक ऑनलाइन यूट्यूब टॉक शो चैनल ने उन्हें भारत के डिजिटल स्पेस का सबसे महत्वपूर्ण कहानीकार कहा। आज उनके उद्यम को रतन टाटा, वाणी कोला, मोहनदास पाई Ratan Tata, Vani Kola, Mohandas Pai आदि जैसी बड़ी कंपनियों का समर्थन प्राप्त है। Yourstroy की सफलता देखकर, रतन टाटा और कलारी कैपिटल ने करीब 5 मिलियन डॉलर का निवेश भी किया है। 

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मेहनत से खड़ी कर दी 468 अरब की कंपनी

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भारत के सबसे अच्छे इंजीनि

भारत में हर किसी के माता पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर, साइंटिस्ट या प्रोफेसर आदि बने। आज किसी भी सेक्टर में चले जाइये कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा है इसलिए छात्र को गाइडेंस की जरुरत अवश्य पड़ती है। आजकल कॉलेज ही इतने ज्यादा हैं कि छात्र कंफ्यूज हो जाता है कि उसे कौन सा कॉलेज चुनना है मतलब उसके लिए कौन सा कॉलेज बेस्ट रहेगा। क्योंकि हर कोई चाहता है कि वो किसी अच्छे कॉलेज में एडमिशन ले और अपने career (व्यवसाय) में सबसे आगे जाये। उसके लिए उसे सही दिशा-निर्देश, उचित ज्ञान और उस कोर्स या कैरियर से संबंधित पर्याप्त जानकारी होना और सबसे जरुरी है उस कॉलेज के बारे में जानना जिसमे एडमिशन लेना है। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भारत को हमेशा से विश्‍व के टॉप देशों में गिना जाता रहा है इसलिए इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक अच्छे करियर के लिए सबसे महत्वपूर्ण है सबसे अच्छे महाविद्यालय University और कॉलेज College के बारे में जानना। हमारे देश में कई ऐसे इंजीनियरिंग कॉलेज है जिनका नाम विश्व के बेहतरीन कॉलेज की सूची में भी आता है। तो चलिए जानते हैं भारत के बेस्ट इंजीनियरिंग कॉलेज Best engineering colleges in India में किस किस कॉलेज का नाम शुमार है। 

भारत में 10 सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेज

Indian Institute of Technology Madras भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी मद्रास सूची में शीर्ष नंबर पर है। Tamil Nadu में स्थिर, भारतीय इंजीनियरिंग संस्थान,भारत का नंबर 1 Engineering Institute है जो अपने व्यावसायिक शिक्षा के लिए प्रसिद्ध है। आईआईटी मद्रास का निर्माण 1959 में किया गया था। भारत के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियर कॉलेज में शीर्ष स्थान पर आना अपने आप ही आईआईटी मद्रास की सफलता की कहानी कहता है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में इंजीनियरिंग के प्रति शिक्षा को बढ़ावा देना To promote education towards engineering था। इसे सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्व के उच्चतम शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। इस कॉलेज के Chairman Pawan Kumar Goenka चेयरमैन पवन कुमार गोयनका हैं और डायरेक्टर director Kamakoti Veezhinathan कामकोटि वीझीनाथन हैं, इस कॉलेज में कुल 677 शैक्षणिक कर्मचारी ( Academic staff ) हैं। इस कॉलेज में कुल छात्रों की संख्या लगभग 6220 है। आईआईटी मद्रास से निकले छात्र दुनिया भर में अपना झंडा गाड़ रहे हैं। इसमें लगभग 550 फैकल्टी, 8000 छात्र और 1200 प्रशासनिक और सहायक कर्मचारी हैं। यह लगभग 250 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। इस कॉलेज में आपको कैंपस, हॉस्टल, और भी अन्य कई प्रकार की सुविधाए मिल जाती हैं।

Indian Institute of Technology Delhi भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली

इस सूची में Indian Institute of Technology Delhi भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली को भी शीर्ष स्‍थान मिला है। इसका निर्माण 1961 में किया गया था और तब से लेकर आज तक आईआईटी दिल्‍ली ने अपना शीर्ष स्थान कायम रखा है। यह इंस्टिट्यूट New Delhi के Hauz Khas South Delhi में स्थित है। यह भारत के सबसे पुराने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में से एक है। एक से बढ़कर एक रिसर्च इस इंस्टिट्यूट में होते रहे हैं और यही इसकी खासियत भी है। JEE जी एंट्रेंस में टॉप रैंकिंग लाने वाले स्टूडेंट्स की पहली पसंद में आईआईटी दिल्ली निश्चित रूप से सबसे ऊपर है और इसके पीछे इस संस्थान की अथक मेहनत और गौरवशाली इतिहास रहा है। इस कॉलेज में लगभग कुल 700 स्टाफ और 10000 छात्र पढाई करते हैं और इस कॉलेज में कुल 600 विभाग ( Faculty ) उपलब्ध है। अपनी स्थापना के बाद से, कई छात्रों ने इंजीनियरिंग, भौतिक विज्ञान, इंजीनियरिंग और मानविकी और सामाजिक विज्ञान Engineering, Physics, Engineering and Humanities and Social Sciences सहित विभिन्न विषयों में IIT दिल्ली से स्नातक किया है और अपना सवश्रेष्ठ करियर बनाया है। Indian Institute of Technology Delhi इस इंस्टिट्यूट में दाखिला लेने के लिए विद्यार्थियों को एडमिशन लेने से पहले एक एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करना पड़ता है। देश की राजधानी में स्थित आईआईटी दिल्ली निश्चित रूप से ना केवल देश के, बल्कि दुनिया के बेहतरीन इंजीनियरिंग कॉलेज में अपना स्थान रखता है। यदि आप अपनी इंजीनियरिंग पूरी करने के लिए एक बेहतर कॉलेज की तलाश में हैं, तो यह कॉलेज आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। 

Indian Institute of Technology Bombay भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे

आईआईटी बॉम्बे की स्थापना 1958 में की गई थी। Indian Institute of Technology Bombay अपने बेहतरीन शिक्षा और प्लेसमेंट के लिए पूरे भारत में मशहूर है। इस कॉलेज के डायरेक्टर Subhasis Chaudhuri हैं, यह कॉलेज आदि शंकराचार्य मार्ग, पोवाई, मुंबई, 400076 महाराष्ट्र, इंडिया में स्थित है। देश की औद्योगिक राजधानी में स्थित आईआईटी बॉम्बे को इस सूची में शीर्ष स्थान मिला है। यहां से पढ़कर निकलने वाले छात्र देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्‍व में देश का नाम रोशन करते हैं। आईआईटी बॉम्बे विदेशी सहायता के साथ स्थापित होने वाला पहला आईआईटी है। यह इंस्टिट्यूट मुंबई Maharashtra में स्थित है यहां से Engineering करने वाले छात्रों को अन्य इंस्टीट्यूट की तुलना में ज्यादा तवज्जो दी जाती है, जिसका श्रेय यहां के एजुकेशन सिस्टम को जाता है। इसे यूनेस्को UNESCO से आर्थिक मदद तत्कालीन सोवियत संघ के चलन रूबल्स के रूप में मिला था। वर्ष 1961 में संसद ने आईआईटी को ‘राष्ट्रीय महत्वपूर्ण संस्थान’ के रूप में घोषित किया। भारतीय इंजीनियरिंग संस्थान मुंबई में शामिल कुछ महत्वपूर्ण कोर्सेज और प्रोग्राम है, जो इसे भारत का टॉप कॉलेज बनाते हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे अपने प्लेसमेंट के लिए विख्यात है। शोध छात्रों के लिए बेहद मशहूर और लोकप्रिय इंस्टिट्यूट के रूप में आईआईटी बॉम्बे का नाम शामिल है।

Indian Institute of Technology Kanpur भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर

भारत में शीर्ष इंजीनियरिंग की सूची में कानपुर को भी शीर्ष नंबर पर रखा गया है। Indian Institute of Technology Kanpur भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर स्थापना 1959 में की गई थी। इस इंस्टीट्यूट की लोकप्रियता इसकी फैसिलिटी और बेहतर शिक्षा व्यवस्था Facility and better education system से है। इसका मुख्य उद्देश्य कानपुर  के लोगों को इंजीनियरिंग से सम्बंधित बेहतर शिक्षा प्रदान करना था लेकिन आज देश के लगभग सभी छात्र इस कॉलेज से इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल करना चाहते है। साथ ही यदि आप उत्तर प्रदेश,और बिहार जैसे राज्य में रहते हैं और आप अपने लिए एक बेहतर कॉलेज के तलाश में हैं तो इंजीनियरिंग करने के लिए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी कानपुर कॉलेज आपके लिए एक बेहतर कॉलेज साबित हो सकता है। इसे अमेरिका और भारत के सहयोग के रूप में स्थापित किया गया था। यह मुख्य रूप से विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में शोध तथा स्नातक शिक्षा पर केंद्रित एक प्रमुख भारतीय तकनीकी संस्थान बनकर उभरा है। इस कॉलेज में कुल 447 शैक्षणिक कर्मचारी ( Academic staff ) हैं। इस कॉलेज में कुल छत्रो की संख्या 6416 हैं जिसमे से अंडरग्रेजुएट ( Undergraduates ) लगभग 3686 पोस्टग्रेजुएट ( Postgraduates ) 1341 और डॉक्टरेट छात्र ( Doctoral students ) 1389 हैं। इस कॉलेज के डायरेक्टर अभय करंदीकर Director Abhay Karandikar हैं, यह कॉलेज कल्याणपुर, कानपुर, उत्तर प्रदेश, भारत  में स्थित है। 

Indian Institute of Technology Kharagpur भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर

टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में खड़गपुर का नंबर भी आता है। यह काफी पुराना आईआईटी संस्थान है, इसका निर्माण भारत सरकार द्वारा 1951 में किया गया था। भारत सरकार ने इसे आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण संस्थान माना है। इनमें बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बीटेक.ऑनर्स), बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर (बीएआरसी) और 5 वर्षीय एकीकृत मास्टर ऑफ साइंस शामिल हैं। इसकी स्‍थापना आजादी के बाद देश में उच्च कोटि के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने के लिए हुई थी। भारत के सभी आईआईटी संस्थानो में से इसका क्षेत्रफल सबसे ज्‍यादा है। साथ ही यहां के विभाग और छात्रों की संख्या भी सबसे अधिक है। एक कॉलेज को बेहतर बनाने के लिए जो सुविधाएँ  चाहिए वह सारी  सुविधाएँ इस कॉलेज में उपलब्ध है,जैसे कैंपस, प्लेसमेंट, और अन्य कई प्रकार की  सुविधाएँ  जो इस कॉलेज को बेहतर बनाती हैं। इस कॉलेज के डायरेक्टर वीरेंद्र कुमार तिवारी Virender Kumar Tiwari हैं, यह कॉलेज खड़गपुर, पश्चिम बंगाल, 721302 भारत में स्थित है। इस कॉलेज में लगभग कुल 810 शैक्षणिक कर्मचारी ( Academic staff ) हैं, 1500 प्रशासनिक स्टाफ ( Administrative staff ) और इस कॉलेज में कुल छात्रों की संख्या 11,795 हैं जिसमे से अंडरग्रेजुएट ( Undergraduates ) 6210 पोस्टग्रेजुएट ( Postgraduates ) 2770 , और डॉक्टरेट छात्र ( Doctoral students ) 2815 हैं। 

Indian Institute of Technology Roorkee भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की

इसे पहले रुड़की विश्वविद्यालय (1949-2001) और थॉमसन कॉलेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग Thomson College of Civil Engineering (1847-1949) के नाम से जाना जाता था। 2001 में इसका नाम इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रूड़की रखा गया। इस संस्थान को विश्व के टॉप इंजीनियरिंग संस्थानों में गिना जाता है और यह हमेशा से ही टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज में शामिल रहा है। यह संस्थान रुड़की, उत्तराखंड, भारत में स्थित एक सार्वजनिक तकनीकी और अनुसंधान विश्वविद्यालय है। ब्रिटिश भारत में तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर सर जेम्स थॉमसन द्वारा 1847 में स्थापित, यह एशिया का सबसे पुराना तकनीकी Institute है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की या आईआईटी रुड़की के डायरेक्टर अजीत कुमार चतुर्वेदी Director Ajit Kumar Chaturvedi हैं। आईआईटी में शामिल होने से पहले से ही रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम से यह बेहद मशहूर इंस्टीट्यूट था। इस कॉलेज की खूबी इसकी प्लेसमेंट, टीचिंग और दूसरे पैरामीटर्स Teaching and Other Parameters हैं जो इसे दूसरे कॉलेज से बहुत ऊपर रखते हैं। आईआईटी में आने के बाद भी इसने अपनी छवि को ऐसे ही कायम रखा है। 

Indian Institute of Technology Guwahati भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी

Indian Institute of Technology Guwahati भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी की स्‍थापना 1994 में की गई थी। इसका उद्देश्य भारत में अधिक से अधिक शिक्षा को स्थापित करना था। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शीर्ष कॉलेज में सबसे पुराने कॉलेज में आईआईटी गुवाहाटी का नाम भी शामिल है और इस लिस्ट में कई पैरामीटर्स को देखते हुए इसका नाम भी टॉप कॉलेज की सूची में है। भारत के Top engineering colleges में से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी (IIT गुवाहाटी) भारत सरकार द्वारा स्थापित एक सार्वजनिक तकनीकी और अनुसंधान विश्वविद्यालय है, जो भारत में असम राज्य में गुवाहाटी में स्थित है और ये पूर्वोत्तर का एकमात्र आईआईटी संस्‍थान है। यहां पर शैक्षणिक कार्यक्रम 1995 में शुरू हुआ। वर्तमान में इस संस्थान के अंदर सभी प्रमुख इंजीनियरिंग और विज्ञान विषय को शामिल किया गया है। इस संस्‍थान का परिसर 285 एकड़ में फैला हुआ है। 11 जून 2020 को जारी एनआईआरएफ इंडिया रैंकिंग NIRF India Ranking 2020 में आईआईटी गुवाहाटी को इंजीनियरिंग और ओवरऑल कैटेगरी दोनों में 7वां स्थान मिला है। इसके डायरेक्टर T. G. Sitharam टी. जी. सीताराम हैं। 

Indian Institute of Technology Hyderabad भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद

आईआईटी हैदराबाद का नाम भी बेस्ट कॉलेज में गिना जाता है। इसकी स्थापना 2008 में की गई थी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद या IIT हैदराबाद संगारेड्डी जिले, तेलंगाना, भारत में स्थित एक सार्वजनिक तकनीकी और अनुसंधान विश्वविद्यालय है। इसकी नींव अनुसंधान और नवाचार research and innovation पर आधारित है। आज यह संस्‍थान इंजीनियरिंग, विज्ञान, कला और डिजाइन की सभी शाखाओं में कार्यक्रम प्रदान करता है। इसमें लगभग 222 पूर्णकालिक संकायों के साथ 1,155 स्नातक( Undergraduate), 635 परास्नातक (Masters)और 893 पीएचडी(PHD) छात्र हैं। यह कॉलेज एक बेहतर कॉलेज में से एक माना जाता है ,क्योंकि इस में वो सारी  सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जिन्हें पाना हर एक छात्र का सपना होता है। इसमें कैंपस, प्लेसमेंट, टीचिंग और अन्य कई प्रकार की  सुविधाएँ  हैं जो आपके सपनो को साकार करती है। इस कॉलेज के डायरेक्टर Budaraju Srinivasa Murty बुदराजू श्रीनिवास मूर्ति हैं। 

National Institute of Technology Tiruchirappalli राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुचिरापल्ली

यह कॉलेज भी टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में शामिल है। इस कॉलेज का निर्माण 1964 में किया गया था। यह राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है और मानव संसधान विकास मंत्रालय एमएचआरडी Ministry of Human Resource Development (MHRD) के गैर-लाभकारी सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत प्रस्तावित 21 आईआईटी में से एक है। National Institute of Technology Tiruchirappalli भारत के तमिलनाडु में तिरुचिरापल्ली शहर के पास है। यह भारत के सबसे पुराने तकनीकी विश्वविद्यालयों में से एक है। यह छात्रों का बेहतर भविष्य बनाने में योगदान देता है। दक्षिण भारत के एक बेहतरीन कॉलेज में इसकी गिनती होती है। सबसे खास बात यह है कि यह आईआईटी से बाहर का संस्थान है, जिसे इस रैंक पर शीर्ष स्थान मिला है। इसके अलावा इस कॉलेज की एक मुख्य बात यह है कि यह विश्वविद्यालय का संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम United States and United Kingdom सहित भारत और विदेशों में विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों के साथ शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग है। कई कॉलेज के बीच अपना एक अलग स्थान बनाना निश्चित रूप से एक गर्व का विषय है। जाहिर तौर पर बड़ी तेजी से इस संस्थान ने टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज में अपना स्थान सुनिश्चित किया है।

Indian Institute of Technology Indore भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर

आईआईटी के तमाम कॉलेज भारत के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज में अपना स्थान हमेशा से ही बनाए रखते आ रहे हैं। IIT इंदौर को आधिकारिक तौर पर भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। आईआईटी इंदौर की स्थापना 2001 में हुई थी। आरम्भ में इसकी कक्षाएं देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंजीनियरी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में लगीं। फिर 2016 से इसके अपने कैम्पस में लग रहीं हैं जो सिमरौल नामक स्थान में स्थित है। यह केंद्र सरकार द्वारा स्‍थापित 8 नए आईआईटी में से एक है। एनआईआरएफ यानी नेशनल इंस्टिट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क 2020 National Institute Ranking Framework 2020 के अनुसार आईआईटी इंदौर को भी टॉप इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट में शीर्ष दर्जा प्राप्त है। टॉप इंस्टिट्यूट का चयन टीचिंग के अलावा लर्निंग और रिसोर्सेज, रिसर्च और प्रोफेशनल ट्रेनिंग, कैंपस, प्लेसमेंट, मार्किंग आदि कई पैरामीटर्स के आधार पर किया जाता है। भारत में इंजीनियरिंग कॉलेज हर क्षेत्र में कई तरह की विशेषज्ञता प्रदान करते हैं। उनमें से Indian Institute of Technology Indore भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर भी भविष्य की संभावनाओं के आधार पर सबसे पसंदीदा कॉलेज में से एक है। Indian Institute of Technology Indore के डायरेक्टर Professor Suhas S. Joshi प्रोफेसर सुहास एस जोशी हैं। 

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भारत के टॉप 5 MBA कॉलेज

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भारत की उच्च वेतन वाली सर

हर कोई चाहता है कि पढ़ाई करने के बाद उसे हाई सैलरी वाली कोई अच्छी सी जॉब मिले। क्योंकि हर किसी का सपना होता है कि वो एक अच्छी नौकरी करे जिसमे उच्च वेतन high salary हो यानि उसे ऐसी नौकरी मिले जिसमें सैलरी लाख़ों और करोड़ों में हो। ऐसी कई सरकारी नौकरियां है जिसमें बेहद ही शानदार करियर और सैलरी पैकेज Great career and salary package है। चाहे वो किसी भी संकाय का विद्यार्थी हो उसे यह जानने की इच्छा जरुर होती है कि किस नौकरी में सबसे ज्यादा सैलरी मिलेगी और हर किसी को यह जानना जरुरी भी है कि किस सरकारी नौकरी में कितनी शुरुआती सैलरी मिलती है Which Government job has highest Starting Salary?। आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे TOP 15 सैलरी देने वाले नौकरी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी। देखा जाये तो एक परेशानी मुक्त जीवन और नौकरी की सुरक्षा के साथ आने वाली सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण भारत में सरकारी नौकरियां government jobs सबसे अधिक आकर्षित करती हैं। प्रतिष्ठा reputation के साथ-साथ प्रत्येक सरकारी कर्मचारी Government employee को और भी कई लाभ प्राप्त होते हैं जिसमें मकान किराया भत्ता और यात्रा भत्ता आदि शामिल होते हैं। आज भी सबसे पहले हर किसी की प्राथमिकता होती है कि उसे कोई सरकारी नौकरी मिले। प्राइवेट सेक्टर में लाखों का पैकेज मिलने के बाद भी भारत में युवाओं के बीच गवर्नमेंट जॉब पहली पसंद होती है। इसका मुख्य कारण जॉब सिक्योरिटी होती है, साथ में मिलने वाली बहुत सारी सुविधाएं और अच्छा पे स्केल। आज हम आपको टॉप 15 ऐसी गवर्नमेंट जॉब के बारे में बताएंगे, जिसमें बेहद शानदार करियर और सैलरी पैकेज है।

12वीं और Graduation के बाद उच्च वेतन वाली सरकारी नौकरियां

डिफेंस सर्विसेज Defense Services

डिफेंस सर्विसेज बहुत ही सम्म्मानित और प्रतिष्ठित जॉब मानी जाती है। इसके अंतर्गत आने वाले सभी पद बहुत ही सम्मानजनक होते हैं। डिफेंस में जॉब करना हर किसी का सपना होता है। डिफेंस में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स तीनों शामिल होते हैं। इस जॉब के लिए अलग-अलग एग्जाम होते हैं जैसे- एनडीए, सीडीएस आदि। डिफेंस सर्विसेज में सैलरी भी काफी अच्छी होती है। समय-समय पर इसमें प्रमोशन भी होता रहता है। डिफेंस में ऑफिसर्स की सैलरी 50 हजार से लेकर 2.50 लाख तक होती है। सबसे बड़ी बात इसमें तरह-तरह के भत्ते भी मिलते हैं और साथ ही डिफेंस में जॉब करने वालों को कई सुविधाएं भी मिलती हैं इसलिए आप भी डिफेंस सर्विसेज में जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं। 

इंडियन सिविल सर्विसेज Indian Civil Services

इंडियन सिविल सर्विसेज, जिसमें जाने का ख्वाब हर कोई देखता है। सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे पुरानी प्रवेश परीक्षा है, जिसकी शुरुआत अंग्रेजों ने देश में एक प्रशासनिक वर्ग की स्थापना के लिए की थी। शीर्ष नौकरियों की बात करें तो उनमे सबसे पहले सिविल सर्विसेज का नाम जरूर आता है। ये इंडिया की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण नौकरी होती है। इसके अंतर्गत आईएएस, आईपीएस और आईएफएस आते हैं। एक देश को चलाने में इनका अहम रोल होता है। बात इनकी सैलरी की की जाये तो लगभग 60000 से लेकर 2.50 लाख रूपये तक होती है। सैलरी के अलावा इन्हें अन्य कई सुविधाएं और भत्ते भी मिलते हैं। इनको गाड़ी, बंगला, सिक्‍योरिटी, ड्राइवर, बिजली और पानी जैसी कई अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। 

मर्चेंट नेवी Merchant Navy

मर्चेंट नेवी की जॉब आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। इसमें आपको शारीरिक रूप से फिट होना होता है। आपको समुद्र में 6-9 महीनों के साथ रहना होता है और शारीरिक रूप से यह काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है लेकिन वेतन की बात करें तो यह शुरुआती वेतन के साथ भारत में सबसे अधिक भुगतान करने वाली नौकरियों में से एक है और सबसे ज्यादा सैलरी वाली सरकारी नौकरी में से एक मानी जाती है। डेक ऑफिसर को लगभग 1.5 लाख रुपये मासिक सैलरी मिलती है और अनुभवी उम्मीदवारों का वेतन 55,000 रुपये से 8 लाख रुपये प्रति माह के बीच हो सकता है। 

डॉक्टर Doctor

यदि आप अपना करियर मजबूत और सुरक्षित बनाना चाहते हैं तो आप इस क्षेत्र में जा सकते हैं जिसके लिए आपको कड़ी मेहनत के साथ-साथ पढ़ाई के प्रति जिम्मेदार बनना होगा। पढ़ाई के लिए एक निश्चित टाइम बनाना होगा। एमबीबीएस के दौरान आपको पूरी तरह तरह पढ़ाई के प्रति समर्पित होना होगा। इसके लिए आपको बायोलॉजी का स्टूडेंट होना जरुरी है इसलिए यदि आप बायोलॉजी या फार्मा सेक्टर में रुचि रखते हैं तो एक मेडिकल प्रोफेशनल होने पर आप अच्छी सैलरी प्राप्त कर सकते हैं। वैसे भी भारतीयों को पीढ़ियों से अपने बच्चों को चिकित्सा पेशे में लाने का जुनून है। ये एक ऐसा सेक्टर है जिसकी मांग कभी भी कम नहीं हो सकती है। क्योंकि स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता बढ़ती रहती है और इस चीज को कोरोना महामारी के दौरान हर किसी ने महसूस किया है। 

वकील Lawyer

वकील का पेशा भी एक ऐसा पेशा है जिसकी हमेशा  डिमांड रहती है। यह कानून से संबंधित पेशा है। कॉर्पोरेट कानून वह शाखा है जो किसी कंपनी में कानून की आवश्यकताओं को लागू करती है, जिससे बेहतर पैकेज बनते हैं। एक कॉर्पोरेट वकील लगभग प्रति वर्ष 7 लाख रुपये कमाता है। यदि आप अच्छे लॉ स्कूलों से पढ़ाई करते हैं तो आपका पैकेज बहुत अधिक होता है। भारत में कई ऐसे लॉयर है जो एक कोर्ट पेशी के लिए 5 लाख से 1 करोड़ तक चार्ज करते हैं। लॉ के प्रोफेसर को शुरुआती सैलरी तीस हज़ार रुपये तक मिल सकती है जो आगे चलकर 1-2 लाख रु. महीने तक होती है।

यूनिवर्सिटी प्रोफेसर University professor

प्रोफेसर का औहदा बहुत ही उच्च माना जाता है। गवर्नमेंट कॉलेज में प्रोफेसर की जॉब सबसे अच्छी जॉब मानी जाती है। एक प्रोफेसर की सैलरी अलग-अलग चीजों पर निर्भर करती हैं। आप यूनिवर्सिटी में , किसी कॉलेज में, आइआइटी कॉलेज के प्रोफेसर हो सकते हैं। एक प्रोफेसर की सैलरी की बात करें तो इन कॉलेज में पढ़ाने पर आपकी सैलरी लगभग 80 हजार से 1.50 हजार रूपये तक हो सकती है। इसके साथ ही एक प्रोफेसर को मेडिकल, हाउस भत्ते और अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। 

बैंकिंग Banking

बैंकिंग की जॉब पाने के लिए भी लोग काफी मेहनत करते हैं। इस जॉब में भी आपको काफी सम्मान मिलता है और साथ ही प्रमोशन भी आसानी से मिल जाता है। यदि आप बैंकिंग में जाने के लिए पीओ क्लियर कर देते हैं तो आप 50 हजार से 1.50 लाख रुपये प्रतिमाह की सैलरी पा सकते हैं। इसके अलावा अन्य सुविधाएं जैसे कई भत्ते, बाहर घूमने का मौका आदि भी दिया जाता है। 

कंपनी सचिव Company Secretary

कम्पनी सचिव (Company Secretary) निजी क्षेत्र की कम्पनियों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान का एक उच्च पद है। दरअसल कम्पनी सचिव का दायित्व कम्पनी का दक्षतापूर्वक प्रबन्धन करना होता है। कंपनी सचिव का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना होता है कि संस्था कम्पनी कानूनों का पालन करते हुए प्रगति करे। सचिव एक संगठन की रीढ़ की हड्डी होता है। यदि आपको किसी सरकारी कंपनी में कंपनी सेक्रेटरी की पोस्ट पर नियुक्त होते हैं है तो आपकी महीने की सैलरी ₹1,00000 से ऊपर होगी‌। 

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग Computer Science Engineering

कंप्यूटर साइंस आज के समय में काफी डिमांड में है और यह सबसे ज्यादा सैलरी वाली सरकारी नौकरी में से एक है। आज तकनीकी प्रगति की गति के कारण इसकी जरुरत आज हर क्षेत्र में है। अधिकांश अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी कैंपस में अच्छी भर्तियां होती हैं। कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग आपके करियर को एक सही दिशा देने के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। शुरुआती सैलरी 3 से 5 लाख रुपए प्रति वर्ष तक रह सकती है और कुछ वर्षों के अनुभव के बाद एक कंप्यूटर इंजीनियर की सैलरी 15 से 20 लाख रुपए प्रति वर्ष या उससे भी ज्यादा तक जा सकती है।

कमर्शियल पायलट Commercial Pilot

यह सबसे अधिक भुगतान वाली नौकरियों में से एक मानी जाती है। इस क्षेत्र में नौकरी करने वालों की अपनी अलग ही एक ख्याति होती है। इसमें शुरुआती वेतन 1.5-2 लाख प्रति माह है। ग्राउंड ट्रेनिंग के साथ-साथ उड़ान के 200 घंटे की आवश्यकता के साथ प्रशिक्षण है। इसमें मैथ्स और फिजिक्स के साथ 12 वीं कक्षा पास करना जरुरी है। 12 वीं के बाद उच्च सैलरी सरकारी जॉब High Salary Government Jobs After 12th का ये बेहतर विकल्प हो सकता है। 

तेल एवं प्राकृतिक गैस सेक्टर Oil and Natural Gas Sector Professionals

इस सेक्टर में भी आप अच्छा पैसा कमा सकते हैं। क्योंकि इसमें काम करने वाले लोगो की सैलरी काफी अच्छी होती है। इस क्षेत्र में काम करने वालों में भूविज्ञानी, समुद्री इंजीनियर आदि कार्य शामिल हैं। भारत में इस क्षेत्र में अधिकतर सरकारी कंपनी काम कर रही हैं इसलिए यह एक तरह से सरकारी नौकरी है। कुछ प्राइवेट कंपनी भी हैं जो तेल एवं प्राकृतिक गैस सेक्टर में काम कर रही हैं। इसमें करियर की शुरुआत में सैलरी 3.5 लाख से 6 लाख तक होती है। वहीं अनुभव होने के बाद भूविज्ञानी, समुद्री इंजीनियर की सैलरी 15 से 20 लाख प्रति वर्ष होती है। 

पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग Public Sector Undertaking

इसके अंतर्गत कई बड़ी बड़ी कंपनियां आती हैं। ये गवर्नमेंट की बड़ी-बड़ी कंपनियां जैसे-पीएचईएल, ओ. एन. जी. सी. आदि कंपनियां हैं। इसमें आपको जॉब करने के लिए गेट यानि ग्रेजुएट अपटीट्युड टेस्ट इन इंजीनियरिंग Graduate Aptitude Test in Engineering का एग्जाम क्लियर करना पड़ता है। सैलरी की बात करें तो इस तरह की जॉब में आप  महीने का 50 हजार से डेढ़ लाख रूपये तक कमा सकते हैं। इसके अलावा आपको भत्‍ते व अन्‍य सुविधाएं भी मिलती हैं जैसे खाने पीने और ट्रेवल करने के लिए कई तरह के भत्ते मिलते हैं। 

चार्टर्ड एकाउंटेंट Chartered accountant

एक स्टार्टअप से लेकर बहु-राष्ट्रीय तक हर कंपनी को accounting skills लेखांकन कौशल की आवश्यकता होती है। चार्टर्ड एकाउंटेंट को टैक्स मैनेजमेंट, वित्तीय लेखा और बैंकिंग और परामर्श जैसे काम करने पड़ते हैं। चार्टर्ड एकाउंटेंट को भारत के चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) का सदस्य होना चाहिए। एक फ्रेशर प्रति वर्ष 10 लाख तक कमा सकता है, जबकि एक अनुभवी चार्टर्ड एकाउंटेंट करोड़ों तक कमा सकता है। डेलॉइट, पीडब्ल्यूसी और आईसीआईसीआई बैंक भारत में चार्टर्ड एकाउंटेंट को अच्छा वेतन देने वाली कम्पनियाँ है। 

विदेश मंत्रालय Foreign Ministry

विदेश मंत्रालय में जॉब करना मतलब एक रेपूटेटेड reputed जॉब का मिलना। इसे एक बहुत ही अच्छी सैलरी वाली सरकारी नौकरी में से एक माना जाता है। विदेश मंत्रालय में नौकरी करने के लिए आपको SSC CGL परीक्षा की तैयारी करनी होती है। एक्सटर्नल अफेअर ऑफिसर्स External Affair officers का वेतन 1.25 लाख से 1.8 लाख तक होता है। विदेश मंत्रालय में जॉब करने वालों को मुफ्त चिकित्सा और बड़े अस्पतालों में बेहतरीन चिकित्सा सुविधा, अच्छी और उत्कृष्ट आवास सुविधाएं आदि मिलती हैं। 

मैनेजमेंट कंसलटेंट Management Consultant

एक व्यावसायिक चुनौती को हल करने के लिए मैनेजमेंट कंसलटेंट कंपनियों या संस्थानों द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। क्योंकि रिस्क आजकल हर क्षेत्र में हैं, चाहे कोई बिजनेस हो या फिर कोई उद्योग या कंपनी। क्योंकि चुनौती किसी भी उद्योग में हो सकती है, बहुत सारे विशेषज्ञ प्रबंधन परामर्शदाताओं द्वारा काम पर रखे जाते हैं। प्रबंधन परामर्श में आपको 8-10 लाख रुपये के उच्च वेतन का पैकेज आसानी से मिल जाता है। 

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सीसीसी 2022 - प्रमाण पत्र, ऑनलाइन टेस्ट, एडमिट कार्ड, परीक्षा प्रणाली

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Better.com के संस्थापक और

अभी हाल ही में एक वाकिया ऐसा था जो बहुत चर्चित रहा था। दरअसल मामला था विशाल गर्ग द्वारा दिसंबर 2021 में जूम कॉल पर 900 से अधिक कर्मचारियों को फायर करने का। उसके बाद विशाल गर्ग और उनकी कंपनी बेटर डॉट कॉम Better.com मीडिया में छा गए थे। विशाल गर्ग इतने में ही नहीं रुके और अभी हाल ही में 8 मार्च 2022 को Better.com के 3,000 कर्मचारियों को फिर से फायर करने का मामला सामने आया है। इस तरह से 3 महीने के भीतर 3,900 कर्मचारियों को निकालने के बाद एक बार फिर से यह कंपनी चर्चा में है। चलिए आज इस आर्टिकल में इस चर्चित शख्स विशाल गर्ग Vishal Garg के बारे में, जो कि एक लोकप्रिय अमेरिकी व्यवसायी American businessman हैं, विस्तार से चर्चा करेंगे। जानते हैं कि आखिर कैसे यह सफलता के इतने ऊँचे पायदान पर पहुँचे हैं। 

कौन हैं Vishal Garg?

विशाल गर्ग प्रसिद्ध व्यक्तित्व media personality, बेटर डॉट कॉम के संस्थापक और सीईओ Founder and CEO of Better.com हैं। यह पहली और एकमात्र डिजिटल-फर्स्ट होम ओनरशिप कंपनी Digital-First Home Ownership Company है जिसका लक्ष्य सभी अमेरिकियों और सभी के लिए घर को और अधिक किफायती, अधिक सुलभ और स्पष्ट रूप से बेहतर बनाना है। बेटर डॉट कॉम Better.com में अपनी भूमिका के अलावा, वह वन ज़ीरो कैपिटल One Zero Capital के संस्थापक भागीदार के रूप में कार्य करते हैं, जो एक निवेश होल्डिंग कंपनी investment holding company है जो उपभोक्ता वित्त, प्रौद्योगिकी और डिजिटल मार्केटिंग के भीतर व्यवसायों को बनाने और निवेश करने पर केंद्रित है। 21 साल की उम्र में, विशाल ने मॉर्गन स्टेनली में निवेश बैंकिंग विश्लेषक कार्यक्रम को छोड़ दिया और MyRichUncle की शुरुआत की, जो संयुक्त राज्य में दूसरा सबसे बड़ा निजी छात्र ऋणदाता private student lender बन गया। यह 2005 में सार्वजनिक हुआ और बाद में मेरिल लिंच Merrill Lynch द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया, जिसे बाद में बैंक ऑफ अमेरिका Bank of America द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया। 2021 में, उन्होंने न्यूयॉर्क सिटी पब्लिक स्कूल के कमजोर बच्चों के लिए दान भी दिया था।

Vishal Garg का जीवन परिचय 

विशाल गर्ग का जन्म 1978 में अमेरिका के न्यूयॉर्क New York of America में हुआ था। वह भारतीय मूल के हैं। विशाल गर्ग का पालन-पोषण उनके माता-पिता ने न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका में किया था। विशाल गर्ग वर्तमान में फोर्ट न्यूयॉर्क, न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका में रह रहे हैं। उनके माता-पिता भारतीय थे। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा अमेरिका के मैनहट्टन के स्टुवेसेंट हाई स्कूल Stuyvesant High School in Manhattan, USA से पूरी की है। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय वित्त में स्नातक की पढ़ाई की। पढ़ाई के दिनों से ही, विशाल का मन बिज़नेस की तरफ था। उनका ध्यान पैसा कमाने में था। पढ़ाई के दौरान उन्होंने MyRichUncle नाम की अपनी पहली इन्वेस्टमेंट कंपनी शुरू की थी जो छात्रों को ऋण प्रदान करता है। उनके वैवाहिक जीवन की बात करें तो उन्होंने सरिता जेम्स (Vishal Garg Wife: Sarita James) से शादी की जिन्होंने एम्बार्क के अध्यक्ष के रूप में काम किया है और दिसंबर 2021 तक इसके सीईओ रहे, उनके तीन बच्चे हैं। 

बेटर.कॉम (Better.com) के बारे में 

जनवरी 2000 में, उन्होंने अपने हाई स्कूल के सहपाठी रज़ा खान Raza Khan के साथ ऑनलाइन छात्र ऋण प्रदाता कंपनी MyRichUncle (माता पिता की कंपनी MRU होल्डिंग्स) की सह-स्थापना की। प्रारंभिक पूंजी निवेश रज़ा के भाई द्वारा किया गया था। जब 2007-09 में अमेरिका में आर्थिक संकट Economic Crisis आया तो विशाल की कंपनी माई रिच अंकल दीवालिया हो गई। इसके बाद रजा खान और विशाल गर्ग ने EIFC नाम का एक नया प्रोजेक्ट शुरू किया। यह कंपनी भी माई रिच अंकल की तरह ही मकान मालिकों को कर्ज लेने के लिए बैंक की शर्ताें की जानकारी देती थी। फिर बाद में रजा खान के साथ विशाल गर्ग का विवाद बढ़ा। इस तरह विशाल गर्ग ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर दूसरी कंपनी खोलने का मन बनाया। 

मार्च 1999 में, उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित निवेश होल्डिंग कंपनी 'वन ज़ीरो कैपिटल' की सह स्थापना भी की और जनवरी 2014 तक फर्म के साथ जुड़े रहे। 

विशाल गर्ग ने 2014 में बैटर डॉट कॉम कंपनी शुरू की। वह बैटर डॉट कॉम (Better.com) के फाउंडर और सीईओ हैं, जो मकान मालिकों को होम लोन home loan समेत अन्य कई प्रकार की सेवाएं देती है। बैटर डॉट कॉम एक ऑनलाइन मॉर्गेज ब्रोकर है जिसे वेंचर कैपिटल venture capital का समर्थन प्राप्त है। सरल भाषा में समझें तो यह होम लोन देने वाली कंपनी है। साथ ही इंश्योरेंस प्रोडक्ट ,insurance product भी उपलब्ध कराती है। अगस्त 2021 में, डेली बीस्ट ने अनुमान लगाया कि व्यवसाय में उसकी इक्विटी कम से कम 1 बिलियन डॉलर होगी। विशाल गर्ग अब बेटर के संस्थापक और सीईओ होने के कारण काफी लोकप्रिय हैं। फर्म विभिन्न वित्तीय संस्थानों जैसे सॉफ्टबैंक, एल कैटरटन, क्लेनर पर्किन्स, गोल्डमैन सैक्स, एली बैंक, अमेरिकन एक्सप्रेस, सिटी SoftBank, L Catterton, Kleiner Perkins, Goldman Sachs, Alley Bank, American Express, Citi और अन्य निवेशकों द्वारा समर्थित है। वह वन जीरो कैपिटिल (One Zero Capital) के फाउंडिग पार्टनर भी हैं, जो एक इन्वेस्टमेंट होल्डिंग कंपनी है। विशाल गर्ग की बेटर कंपनी का लक्ष्य घरों को अधिक किफ़ायती, अधिक सुलभ और सीधे सादे बेहतर बनाना है। भारत और अमेरिका में फिलहाल इस कंपनी में कुल 8,000 स्टाफ काम करते हैं। भारत में बेटर डॉट कॉम के कर्मचारियों का अनुपात दिसंबर 2021 में बढ़कर 44% हो गया था जो फायरिंग से पहले जून 2021 में 38% था। भारत में इस कंपनी के हेड भवेश शर्मा Company head Bhavesh Sharma हैं। 

बचपन से ही थे बिज़नेसमाइंड 

2019 में एक पॉडकास्ट में विशाल ने बताया था कि हाईस्कूल में ही उनका लगाव बिजनेस से हो गया था। बिज़नेसमाइंड businessmind होने की वजह से विशाल गर्ग ने स्कूल में पढ़ाई के समय से ही पैसा कमाना शुरू कर दिया था। मैनहट्टन में पढ़ाई के दौरान वह अपनी पुरानी किताबों, नोट्स क्लिप और स्टडी गाइड्स को दोबारा बेच देते थे। विशाल ने सस्ते दामों में कपड़े लेकर ई-वे पर बेचा था।

कैसी जिंदगी जीते हैं Vishal Garg

विशाल गर्ग बहुत ही आलीशान जिंदगी जीते हैं। इसका अंदाजा तो आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वो न्यूयॉर्क की सबसे महंगी जगह ट्रेबेका में रहते हैं। बताया जा रहा है कि उनके तीन बेडरूम वाले घर का किराया 17000 डॉलर (करीब 13 लाख रुपये) प्रति महीना तक है। वह उस घर में अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ रहते हैं। वैसे विशाल गर्ग का सही एड्रेस किसी को सही से पता नहीं है। विशाल गर्ग की कंपनी के पास अभी करीब 1 अरब डॉलर होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। इन सबके बावजूद रिकॉर्ड्स के हिसाब से उनके खुद के नाम पर कोई भी प्रॉपर्टी नहीं है।

संपत्ति और आय के स्रोत | Vishal Garg Net Worth

विशाल गर्ग की अनुमानित कुल संपत्ति $4 बिलियन है। विशाल गर्ग के पास आय के कई स्रोत हैं। वह एक भारतीय-अमेरिकी उद्यमी Indian-American Entrepreneur और एक अरबपति billionaire हैं जिनकी वार्षिक आय $ 100 मिलियन है। वह मुख्य रूप से अपनी कंपनी बेटर डॉट कॉम के साथ पैसा कमाते हैं, जो अरबों वार्षिक बिक्री और व्यापार उत्पन्न करने में सक्षम है। विशाल ने 1/10 कैपिटल और MyRichUncle जैसी अन्य कंपनियों की भी स्थापना की है। इसके अलावा वह शेयर बाजार में भी निवेश करते हैं और इस तरह वह कमाई के मामले में काफी आगे हैं। उन्होंने न्यूयॉर्क में कई रियल एस्टेट संपत्तियों real estate properties में निवेश किया है। यानि वह कई अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भी निवेश करते हैं जो धन का एक स्रोत भी है और वह अपने शेयरों के लाभांश के माध्यम से अर्जित करते हैं।

कैसे आये चर्चा में और क्या थी वजह?

सोशल मीडिया पर Better.com के सीईओ विशाल गर्ग की खूब चर्चा हुई। विशाल गर्ग ने जूम कॉल पर मीटिंग के दौरान एक ही झटके में 900 कर्मचारियों की छटनी का ऐलान Announcement of layoff of 900 employees किया था और उनका मीटिंग के दौरान का वो वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ जिसमें वो कर्मचारियों की छटनी की बात कह रहे थे। दरअसल उनका यह वीडियो मीटिंग में शामिल किसी कर्मचारी ने रिकॉर्ड कर लिया था और उस वीडियो को इंटरनेट पर लीक कर दिया गया था। उस वर्चुअल इंटरेक्शन virtual interaction के दौरान कर्मचारियों की छंटनी करने के बाद लोग विशाल गर्ग (Vishal Garg) के बारे में जानने के लिए काफी उत्सुक रहते हैं। जूम कॉल (Zoom Call) के दौरान एक साथ नौकरी से निकालने के बाद बेटर डॉट कॉम के सीईओ विशाल गर्ग (Vishal Garg) सुर्खियों में हैं। यहाँ तक कि विशाल गर्ग को एक खड़ूस बॉस की उपाधि तक दे दी गई थी। दुनिया भर में आलोचना के बाद बोर्ड ने उन्हें कुछ दिन के लिए छुट्टी पर भेज दिया था। जूम कॉल पर भारत के साथ-साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के लोग भी शामिल थे। कर्मचारियों को इस तरह से बाहर का रास्ता दिखाने वाले उनके फैसले की सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हुई है। इस वीडियो के सामने आने के बाद से विशाल गर्ग की सर्चिंग बढ़ गई है। सोशल मीडिया यूजर्स उनके बारे में सर्च कर रहे हैं कि आखिर विशाल गर्ग कौन हैं, कहां के रहने वालें हैं उन्होंने कर्मचारियों की छटनी का फैसला क्यों लिया?

कर्मचारियों को निकालने के बाद विशाल गर्ग को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा। इसके बाद विशाल गर्ग ने कहा- "यह मेरे करियर में दूसरी बार है जब मैं ऐसा कर रहा हूं। हालांकि,मैं ऐसा नहीं करना चाहता था। उन्होंने ये भी कहा कि पिछली बार जब मैंने ऐसा किया था तब मैं रोया था। उनका कहना है कि हम कई कारणों से कंपनी के लगभग 15 प्रतिशत की छंटनी कर रहे हैं। विशाल गर्ग ने इसके लिए बाजार, प्रोडक्टविटी और प्रोडक्शन Market, Productivity and Production को जिम्मेदार ठहराया है। सार्वजनिक आक्रोश के बाद गर्ग ने माफ़ी भी मांगी और एक पत्र में लिखा कि वह प्रभावित व्यक्तियों के लिए उचित मात्रा में सम्मान और प्रशंसा दिखाने में विफल रहे। वैसे तो विशाल गर्ग ने कहा था कि उन्हें ऐसा करना बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा, लेकिन सच क्या है ये बस वही जानते हैं। 

कोरोना काल में दयालुता के लिए आये थे चर्चा में

कोरोना काल में भी विशाल गर्ग खूब चर्चा में थे, लेकिन तब वजह काफी अच्छी थी। 2021 में, विशाल ने New York City में पब्लिक स्कूलों के लिए फंड fund for public schools के साथ एक साझेदारी की, जिसमें कम आय वाले पृष्ठभूमि के 20,000 से अधिक न्यू यॉर्क शहर के पब्लिक स्कूल के छात्रों के लिए क्रोमबुक, आईपैड, वाईफाई हॉटस्पॉट, किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए लगभग 2 मिलियन डॉलर का दान $2 million donation दिया था। इस नेक कार्य के लिए तब उनकी काफी सराहना हुई थी। यह उन्होंने न्यूयॉर्क सिटी पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों की ऑनलाइन लर्निंग को बेहतर करने के लिए दिया था। विशाल गर्ग अलग अलग रूप की वजह से चर्चा में रहते हैं। कभी परोपकार के लिए चर्चा तो कभी एक सख्त फैसले की वजह से। 

2020 में Better.com की लोन वैल्यू और ब्रांड वैल्यू 

बेटर डॉट कॉम के मुताबिक कंपनी की लोन वैल्यू loan value 2020 में 24 अरब डॉलर यानी 1.8 लाख करोड़ से अधिक थी। अगर बात करें ब्रांड वैल्यू brand value की तो ब्रांड वैल्यू 4,000 करोड़ रूपए की थी। सोशल मीडिया लिस्टिंग में लिंक्डइन पर 2020 और 2021 के टॉप स्टार्टअप्स में कंपनी को पहला स्थान मिला था। देखा जाये तो आज के समय में तेजी से उभरती स्टार्टअप कंपनियों startup companies में से यह एक बड़ी कंपनी है और यह कंपनी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जून 2021 में गर्ग ने दावा किया था कि आज उनकी कंपनी इस स्तर पर पहुंच चुकी है जहां लोन के लिए प्री-अप्रूवल सिर्फ 3 मिनट में मिलता है।

3 हजार स्टाफ को निकालकर फिर से चर्चा में विशाल गर्ग 

विशाल गर्ग पिछली बार की तरह एक बार फिर से चर्चा में हैं। दरअसल 8 मार्च 2022 को अमेरिकी कंपनी बेटर डॉट कॉम (Better.com) के 3,000 कर्मचारियों को पेरोल ऐप पर एक मैसेज आया। यह मैसेज था कंपनी के Ceo Vishal Garg का। जैसे ही इन कर्मचारियों ने मैसेज पढ़ा वे हैरान हो गए। क्योंकि इस मैसेज में उन्हें कंपनी से फायर किए जाने की जानकारी थी। विशाल गर्ग के लिए ये कोई नयी बात नहीं है। इससे पहले भी वह जूम मीटिंग के दौरान 900 कर्मचारियों को फायर कर चुके हैं। ऐसा करके वह 3 महीने के अंतर्गत 3,900 कर्मचारियों को निकाल चुके हैं। 

Vishal Garg Social Accounts

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जानिए 26 साल की एंटरप्रेन्योर अरुणा चावला की कहानी

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Non Profit Organisation:

ये सच है कि आज हर संस्था Organization लाभ कमाने की होड़ में है। उनका बस एक ही उद्देश्य होता है कि कैसे अधिक से अधिक लाभ कमाया जाए। यानि वो आय को अधिकतम करने के लिए निरंतर प्रयास करते हैं लेकिन कुछ संस्थाएं ऐसी होती हैं जिनका उद्देश्य सिर्फ समाज का कल्याण करना होता है। ये संगठन स्वतंत्र और स्वयं के माध्यम से समाज हित में निस्वार्थ भाव से सदैव कार्य करते हैं। भारत में या पूरे विश्व में ऐसे कई गैर सरकारी संगठन हैं जो समाज में कई अच्‍छे कार्य कर रहे हैं। ये संगठन वंचित समुदायों के जीवन का ख़ास हिस्सा बन रहे हैं, जिसकी वजह से इन लोगों के जीवन में बदलाव आ रहा है। तो आज इस आर्टिकल में गैर लाभकारी संगठन Non Profit Organisation क्या है और ये संगठन कैसे काम करते हैं विस्तारपूर्वक जानेंगे। 

गैर-लाभकारी संगठन क्या है? What Is Non Profit Organisation In Hindi

बिना लाभ कमाने के उद्देश्य without profit motive से स्थापित की गयी संस्था अलाभकारी संस्था या गैर-लाभकारी संगठन कहलाते हैं। यानि कोई भी ऐसी संस्था या संगठन जिसकी स्थापना लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं की जाती है बल्कि समाज का कल्याण व समाज सेवा Social welfare and social service के लिए की जाती है, गैर लाभकारी संगठन कहलाते हैं। गैर-लाभकारी संगठन को कई नामों से जाना जाता है जैसे -गैर लाभकारी संस्था, लाभ न कमाने वाली संस्था, गैर व्यापारिक संस्था, NGO तथा अलाभकारी संस्था आदि। इन सबके अर्थ और कार्य लगभग एक होते हैं। गैर-लाभकारी संगठन, सार्वजनिक संगठनों के विकल्प के रूप में उभरे हैं। इस तरह के संगठनों के कार्यक्रमों में नि:शुल्क कानूनी सलाह और कानूनी समर्थन के कार्य होते हैं। ये संगठन स्वतंत्र और स्वयं के माध्यम से लोगों और समाज हित में निस्वार्थ भाव से सदैव कार्य करने के लिए बनाये जाते हैं। यह एक स्वैच्छिक और गैैर लाभ की संस्थाऐं होती हैं। इसका निर्माण कोई भी साधारण व्यक्ति कर सकता है। ये संगठन बिना किसी प्रति फल की इच्छा से कार्य करते हैं। सामाजिक हित के उद्देश्य से इसमें कोई भी व्यक्ति सरलता से सदस्य बन सकता है। इनकी प्रकृति के अनुसार ये संस्थाऐं अनेकों सामाजिक कार्य समाज के उत्थान और एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए To build a healthy society करती हैं। इसकी मूल भावना के कार्य सामाजिक उत्थान, स्वच्छता, पर्यावरण, जल संरक्षण, शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक कुरीतियों को दूर कर सभ्य एवम्ं शिक्षित समाज और जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण कर उच्च समाज का निर्माण करना है। 

गैर सरकारी संगठन के उद्देश्य Objectives of NGO

गैर सरकारी संगठन के उद्देश्य निम्न हैं -

  • गैर सरकारी संगठन का उद्देश्य निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद करना है।

  • गैर-लाभकारी संगठन का मुख्य उद्देश्य समाज का कल्याण, समाज की सेवा, अपने सदस्यों का कल्याण और लाभ पहुंचाना होता है।

  • ऐसी संस्था का उद्देश्य बिना लाभ के लोक कल्याण में वृद्धि करना, धर्म, शिक्षा, स्वास्थ्य, साहित्य आदि के उन्नयन एवं चेतना में वृद्धि Upgradation of religion, education, health, literature etc. and increase in consciousness करना होता है।

  • इसका प्राथमिक उद्देश्य लाभ कमाने के बजाय जनता की भलाई को बढ़ावा देना, आर्थिक उन्नति करना और उनकी समस्याओं को हल करना है।

  • एक अद्भुत और समर्पित समूह के नेतृत्व में, गैर सरकारी संगठन देश के विभिन्न हिस्सों में सेवा करते हैं। 

  • उनके विकास कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, बच्चों और महिलाओं के लिए आजीविका, संसाधनों की कमी से परेशान होने वाले लोगों की मदद करना है।

  • साथ ही स्वालम्बन व आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक प्रचार प्रसार, स्वच्छता, प्रकृति की रक्षा, पर्यावरण की सुरक्षा, जल संरक्षण, भूमि संरक्षण, वनो का संरक्षण Self-reliance, cultural promotion, cleanliness, protection of nature, protection of environment, water conservation, land conservation, conservation of forests करना है।

  • इनका मुख्य उद्देश्य किसी विशिष्ट समूह या समस्त जनता को सेवाएँ प्रदान करना होता है। यह किसी प्रकार का उत्पादन , क्रय - विक्रय और उधार लेन - देन नहीं करती है। 

  • इनका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, बचपन के संरक्षण हेतु, कुपोषण का उन्मूलन, जीवन स्तर को सुधारने हेतु, स्वास्थ्य की सुरक्षा, सामाजिक बुराईयों के उन्मूलन Eradication of poverty, Protection of childhood, Eradication of malnutrition, To improve the standard of living, Protection of health, Eradication of social evils हेतु कार्य करना है। 

  • लोगों का दुख-दर्द दूर करना, निर्धनों के हितों का संवर्द्धन करने और पर्यावरण की रक्षा करना भी इनका मुख्य उद्देश्य होता है। 

  • इस संगठन का उद्देश्य बुनियादी सामाजिक सेवाएँ प्रदान करने अथवा सामुदायिक विकास के लिये गतिविधियाँ चलाना है। 

  • इन संस्थाओं के उद्देश्य प्रमुखता से सामाजिक हित की दृष्टि से ही होते हैं। 

  • इनका मकसद धार्मिक, सांस्कृतिक या शैक्षिक उद्देश्यों को बढ़ावा देना है। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना promote women empowerment भी इनका मुख्य उद्देश्य है। 

गैर-लाभकारी संगठन की विशेषता | Characteristics Of A Non-profit Organization

गैर-लाभकारी संगठन की विशेषता निम्न है -

  • संगठन की मुख्य विशेषता लाभ कमाना नहीं है। सबसे पहली विशेषता गैर-लाभकारी संगठन की स्थापना समाज को लाभ पहुंचाने, अपने सदस्यों का कल्याण तथा सेवा प्रदान करना होता है।

  • खेल से संबंधित संस्थाएं – खेल से संबंधित संस्थाओं के अंतर्गत खेल, क्लब ,व्यामशाला आदि आते हैं। इसके अलावा शिक्षा देने वाली संस्थाएं – विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय और सामाजिक संस्थाएं – जिसमें पुस्तकालय, औषधालय, अस्पताल आदि आते हैं।

  • गैर-लाभकारी संस्थाएं धर्म, शिक्षा (स्कूल,कॉलेज) खेलकूद, कला, संस्कृति के प्रचार-प्रसार promotion of culture एवं प्रोत्साहन के लिए कार्य करते हैं। इनकी स्थापना ट्रस्ट (प्रन्यास) धर्मार्थ सोसायटी, क्लब Trust Charitable Societies, Clubs आदि के रूप में की जाती है।

  • गैर-लाभकारी संगठन भी लाभ कमाते हैं लेकिन वे सदस्यता, दान, सरकारी अनुदान, सदस्यता शुल्क, प्रवेश शुल्क, विरासत, donations, government grants, membership fees, entrance fees, inheritances आदि से धन जुटाते हैं। यानि अलाभकारी संगठनों की आय का मुख्य स्रोत दान, चन्दा, सरकार से सहायता main source of income is donations,assistance from the government. आदि होता है। गैर-लाभकारी संगठन कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे -सार्वजनिक संगठन,धार्मिक संगठन, विभिन्न फंड, स्वायत्त गैर-लाभकारी संगठन, संस्था के मालिक द्वारा वित्त पोषित आदि।

कर में छूट Tax Exemption

गैर-लाभकारी संस्था कर-मुक्त स्थिति के लिए आवेदन कर सकती है। कई देशों में इसे लागू किया गया है। जिससे संगठन को आयकर और अन्य करों से छूट मिल सके। हालांकि सभी गैर-लाभकारी संस्थाएं कर-मुक्त होने के योग्य नहीं हैं। जैसे संयुक्त राज्य में, संघीय आय करों से मुक्त होने के लिए, संगठन को आंतरिक राजस्व संहिता में निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। इसी तरह यूके में पंजीकृत गैर-लाभकारी संगठनों को कुछ राहत और छूट का फायदा हो जाता है। 

गैर-लाभकारी संगठन का महत्व | Importance Of Non-profit Organization

  • समाज की सेवा को सर्वोपरि मानते हुए समाज सेवा को सदैव तत्पर रहते हैं।

  • नागरिकों में सकारात्मक भावना का प्रसार कर जीवन में स्वालम्बन की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करना। 

  • बिना स्वार्थ के समाज एवं देश के हितों के बारे में सोचना।

  • देश के बेहतर भविष्य के लिए समाज के लोगों का कल्याण करना।

  • वंचित समुदायों के जीवन का ख़ास हिस्सा बनकर इन लोगों के जीवन में बदलाव लाना 

  • आज हर व्यक्ति किसी भी काम को केवल लाभ कमाने के लिए ही करता हैं लेकिन गैर-लाभकारी संगठन ऐसा नहीं करते हैं। 

  •  इनकी स्थापना ऐसे लोगों के समूह द्वारा की जाती है, जो सदस्यों और लोगों को सेवा प्रदान करने के लिए एक सामान्य उद्देश्य के लिए एक साथ आते हैं।

  • इसका एक अहम् महत्व यह भी है कि यह खेल-कूद, शिक्षा जैसे क्षेत्र पर कार्य करती हैं।

  • यह संस्थाऐं अनेकों सामाजिक कार्य समाज के उत्थान और एक स्वस्थ समाज के निर्माण हेतु करती हैं।

  • धार्मिक संस्थाओं का मूल मुख्यतः धर्म और संस्कृति का प्रचार-प्रसार और धर्म संरक्षण प्रमुख उद्देश्य रहता है।

लाभ संगठन और गैर-लाभ संगठन के बीच महत्वपूर्ण अंतर (Key Differences Between Profit Organization and Non-Profit Organization)

लाभ और गैर-लाभ संगठन के बीच के अंतर को जानना जरुरी है। क्योंकि कई लोग इस अंतर को समझ नहीं पाते हैं। चलिए जानते हैं लाभ संगठन और गैर-लाभ संगठन के बीच के अंतर को। 

लाभ संगठन एक कानूनी इकाई है, जो मालिक के लिए लाभ कमाने के लिए काम करती है, इसे प्रॉफिट आर्गेनाईजेशन के रूप में जाना जाता है। यानि इसका मकसद लाभ कमाना है। एक गैर-लाभकारी संगठन एक कानूनी इकाई है, जो सम्पूर्ण समाज को सेवा देने के लिए तत्पर रहता है और इसका मकसद सिर्फ सेवा करना होता है। 

प्रॉफिट आर्गेनाईजेशन का प्रबंध एकमात्र मालिक या एकल स्वामित्व, निर्देशक,साझेदारी या एक निकाय कॉर्पोरेट मतलब कंपनी हो सकता है। नॉन प्रॉफिट आर्गेनाईजेशन का प्रबंध ट्रस्टी, समितियां या शासी निकाय द्वारा होता है। यानि यह एक संघ है, जो एक क्लब, ट्रस्ट, सार्वजनिक अस्पताल, सहकारी समिति, आदि होता है। 

लाभ संगठन द्वारा लाभ के ऊपर अर्जित धन, पूंजी खाते में स्थानांतरित कर दिया जाता है। वहीं नॉन प्रॉफिट आर्गेनाईजेशन सरप्लस को कैपिटल फंड में ट्रांसफर किया जाता है यानि वह पूंजी कोष में स्थानांतरित हो जाता है।

सबसे बड़ी बात प्रॉफिट आर्गेनाईजेशन या लाभ संगठन के राजस्व का स्रोत माल और सेवाओं की बिक्री है। वहीं गैर-लाभ संगठन का दान, सदस्यता, सदस्यता शुल्क आदि से है।

प्रॉफिट आर्गेनाईजेशन का वित्तीय विवरण आय स्टेटमेंट, बैलेंस शीट और कैश फ्लो स्टेटमेंट से है। गैर-लाभकारी संगठन अपनी वित्तीय स्थिति जानने के लिए लेखांकन वर्ष के अंत में तैयार रसीद और भुगतान / ए, आय और व्यय ए / सी और बैलेंस शीट तैयार करते हैं।

ट्रस्ट क्या है? (What is Trust?)

कोई भी धर्मार्थ ट्रस्ट जो किसी भी अच्छे काम को करने के लिए अपनी सम्पत्ति या आय से कोई संगठन का निर्माण करता है ट्रस्ट कहलाता है। इसमें कोई व्यक्ति अकेला या फिर कई लोग पैसा लगाकर समाज के लिए कुछ भी अच्छा कार्य करके लोगों की मदद करते हैं। ये एक कानून का ही हिस्सा है। इसे एक प्रकार से NGO से भी जोड़ा जा सकता है। किसी भी NGO को ट्रस्ट नहीं कह सकते हैं लेकिन किसी भी ट्रस्ट को NGO कह सकते हैं। 

NGO क्या है?

गैर सरकारी संगठन (NGO) जिसमे किसी प्रकार की सरकारी भागीदारी नहीं होती है। हालांकि प्राकृतिक या कानूनी व्यक्तियों के द्वारा किये गए विधि पूर्वक संगठित गैर सरकारी संगठनों को संदर्भित करने के लिए कुछ व्यापक रूप से कार्य कर स्वीकृति दी जाती है। इनमे सरकार का किसी प्रकार का कोई साझा नहीं होता है और कुछ में आंशिक रूप से सरकार का साझा होता है लेकिन इन्हे गैर सरकारी संगठन (NGO) ही माना जाता है। गैर सरकारी संगठन (NGO) के कुछ अपने नियम हैं जिसके हिसाब से ये कार्य करता है और इसमें किसी भी सरकारी प्रतिनिधियों को सदस्यता नहीं दी जाती है। इन्हे कई कोर्ट में “नागरिक समाज संगठन” भी कहा जाता है। NGO को आप ट्रस्ट के नाम में रजिस्टर करा सकते हैं लेकिन ट्रस्ट को NGO के नाम में नहीं। NGO के रजिस्टर के लिए तीन ऑप्शन होते हैं कि आप अपने NGO को किस कैटगरी में रखना चाहते हैं जैसे सोसाइटी, ट्रस्ट या फिर कम्पनी।

सोसाइटी Society और Trust

सोसाइटी Society में रक्त संबंध की अनुमति नहीं है यानि कि आप परिवार के व्यक्ति को नहीं रख सकते हैं। ट्रस्ट में रक्त संबंध की अनुमति होती है यानि आप अपने परिवार के कई लोगों को मेम्बर बना सकतें हैं। 

चैरिटी और फाउंडेशन (Charity and Foundation)

चैरिटी और फाउंडेशन सार्वजनिक कल्याणकारी कार्यक्रमों में शामिल हैं। चैरिटी में कार्यक्रमों का संचालन करते हैं, जबकि फाउंडेशन उन्हें धन के साथ प्रदान करते हैं। निजी फाउंडेशन के पास धन के एक निश्चित स्रोत होते हैं और वे अन्य दानदाताओं को अपने स्वयं के बजाय अच्छे कार्यों को पूरा करने के लिए पैसे प्रदान करते हैं। निजी फाउंडेशन को एक परिवार या एक व्यक्ति द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है, जैसे बिल गेट्स फाउंडेशन। 

प्रमुख गैर लाभकारी संगठनों के नाम

  • समाजसेवी संस्थाओं के नाम-

राष्ट्र की कुछ प्रमुख समाजसेवी संस्थाओं के नाम जो समाज की सेवा को सर्वोपरि मानते हुए समाज सेवा को सदैव तत्पर रहते हैं निम्न हैं -

नारायण सेवा संस्थान

गौरी गोपाल वृद्धाश्रम ट्रस्ट

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ

श्री गौ गौरी गोपाल सेवा संस्था समिति

रिलायंस फाउंडेशन

सेवा भारती

  • महिला सशक्तिकरण के लिए काम करने वाले संगठन -

स्नेहालया

एनईएन: उत्तर पूर्व नेटवर्क

आज़ाद फाउंडेशन Azad Foundation

विमोचाना

स्वनीति

द सेल्फ एमप्लाइड वुमेंस एसोसिएशन(एसईडब्ल्यूए) सेवा

जनोदया

सेंटर फॉर सोशल रिसर्च (सीएसआर)

  • कुछ प्रमुख NGO's जो समाज में बेहतरीन कार्य कर रहे हैं-

नन्ही कली

स्माइल फाउंडेशन Smile Foundation 

गूंज

हेल्पएज इंडिया HelpAge India

गिवइंडिया भारत

कुछ सबसे धनी फाउंडेशन Wealthiest foundations-

  • Novo Nordisk Foundation नोवो नॉर्डिस्क फाउंडेशन
  • Bill & Melinda Gates Foundation बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन
  • Azim Premji Foundation अजीम प्रेमजी फाउंडेशन
  • Church Commissioners for England चर्च कमिशनर्स फॉर इंग्लैंड 
  • William and Flora Hewlett Foundation विलियम और फ्लोरा हेवलेट फाउंडेशन
  • Children's Investment Fund Foundation चिल्ड्रेन इन्वेस्टमेंट फंड फाउंडेशन
  • Wellcome Trust वेलकम ट्रस्ट

कुछ मुख्य चैरिटी के नाम -

  • Doctors Without Borders, USA डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स, यूएसए
  • DAV (Disabled American Veterans) Charitable Service Trust डीएवी (डिसेबल्ड अमेरिकन वेटरन्स) चैरिटेबल सर्विस ट्रस्ट
  • World Wildlife Fund वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड
  • American Red Cross अमेरिकन रेडक्रॉस
  • ALSAC - St. Jude Children's Research Hospital ALSAC - सेंट जूड चिल्ड्रेन रिसर्च हॉस्पिटल
  • The Nature Conservancy द नेचर कन्जर्वेंसी 
  • UNICEF USA यूनिसेफ यूएसए
  • Save the Children सेव द चिल्ड्रेन

कुछ धर्मार्थ फाउंडेशन charitable foundations

  • The Alliance for Safe Children द अलायन्स फॉर सेफ चिल्ड्रेन 
  • American Academy in Rome अमेरिकन अकडेमी इन रोम
  • Belarus Solidarity Foundation बेलारूस सॉलिडैरिटी फाउंडेशन 
  • Sir Dorabji Tata and Allied Trusts सर दोराबजी टाटा एंड एलाइड ट्रस्ट्स
  • Best Friends Animal Society बेस्ट फ्रेंड्स एनिमल सोसाइटी
  • The Canadian International Learning Foundation कैनेडियन इंटरनेशनल लर्निंग फाउंडेशन
  • Children's Miracle Network Hospitals
  • Heal the World Foundation हील द वर्ल्ड फाउंडेशन
  • George S. and Dolores Doré Eccles Foundation जॉर्ज एस. और डोलोरेस डोर एक्ल्स फाउंडेशन

गैर-लाभकारी संगठन के कार्य

  • गरीबी उन्मूलन के लिए प्रयासरत

 ये तो हम सब जानते हैं कि गरीबी मानव समाज के लिए एक अभिशाप की तरह है। इसका उन्मूलन करना आवश्यक है। ये संगठन गरीबी के दुष्प्रभाव को खत्म करने के लिए ये प्रयासरत हैं। 

  • शिक्षा के प्रति नागरिकों को जागरूक करना और शिक्षा को बढ़ावा देना 

गैर लाभकारी संस्थाओं का यह प्रमुख उद्देश्य रहता है कि समाज में शिक्षा के प्रति नागरिकों को जागरूक करना और शिक्षा को बढ़ावा देना। पूरे समाज में फैली अशिक्षा को मिटा कर एक शिक्षित समाज का निर्माण करना जिससे लोग आत्मनिर्भर बन सकें। ये निशुल्क शिक्षा के माध्यम से छोटे छोटे विद्यालयों को भी चलाते हैं। 

  • सामाजिक बुराईयों को जड़ से खत्म करना 

समाज में फैली बुराईयाँ अपने पैर बहुत तेजी से पसार रही हैं। इन्ही कुरीतियों और बुराईयों का उन्मूलन करने के लिए ये हर संभव कोशिश करते हैं।

  • जल संरक्षण अत्यंत ही महत्वपूर्ण कार्य

जल ही जीवन है ये तो आपने सुना ही होगा। यह इंसान की एक मूलभूत आवश्यकता है इसलिए इसका संरक्षण बेहद आवश्यक है। जल का उपयोग सही रूप से करना और बेवजह इसको बर्बाद न करना इनका महत्वपूर्ण कार्य है। लोगों को जल संरक्षण के प्रति प्रेरित करने का यह महत्वपूर्ण कार्य इन संगठनों के द्वारा किया जाता है। 

  • भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देना

भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए ये सांस्कृतिक प्रचार प्रसार करते हैं। क्योंकि भारतीय संस्कृति विश्व पटल पर बहुत आगे है इसलिए इसका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। ये इसके लिए विशेष प्रयास करते हैं। 

  • वनों का संरक्षण

इंसान यदि जीवित है तो वो इन्ही वनों के कारण। क्योंकि इन्हीं से हमें प्राण वायु मिलती है। इनके बिना हम जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं इसलिए इन संगठनों द्वारा इनका संरक्षण किया जाता है। 

  • जीवन स्तर सुधारने के लिए

ये लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए पूरी तरह प्रयासरत रहते हैं। ये समाज में फैली नफरत की भावना को मिटाकर सकारात्मक विचारों का प्रचार प्रसार करते हैं। 

  • पर्यावरण का संरक्षण 

ये इकाईयां पर्यावरण के संरक्षण के लिए कई कार्यक्रम करते हैं। लोगों को पर्यावरण और प्रदूषण के प्रति सजग रहने के लिए और वृक्षारोपण करने के लिए प्रेरित करते हैं। 

  • सामाजिक उत्थान

एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना इनका मुख्य कार्य होता है क्योंकि एक स्वस्थ समाज ही एक स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। इसके लिए समाज के प्रति गम्भीर और जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण करना जरुरी है। 

  • अच्छे स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करना 

इस बात से तो हम सब वाकिफ हैं कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण होता है इसलिए नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक और सजग करने का ये प्रयास करते हैं। सरकार द्वारा भी कई योजनाएं इस दिशा में चलायी जा रही हैं। 

  • आत्मनिर्भरता के लिए जागरुकता

आत्मनिर्भरता के लिए जागरुकता फैलाना इनके कार्यों में सर्वोपरि होता है। जब हर व्यक्ति आत्मनिर्भर बनेगा तभी तो देश प्रगति करेगा। 

  • स्वच्छता के प्रति जागरुकता

स्वच्छता के अभियान को आगे बढ़ाना और इसके लिए निरंतर प्रयास करना ये इनका मुख्य कार्य होता है। वैसे भी सरकार के द्वारा भी स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से कई प्रयास और कार्यक्रम किये जाते हैं लेकिन इन संस्थाओं के द्वारा ये कार्य करना प्रत्येक दृष्टि से एक बेहद सराहनीय कदम है।

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बुजुर्गों की खुशियाँ और सम्मान वापस दिलाती ये संस्थाएं  

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Solid Waste Management क्

पूरे विश्व में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन Solid Waste Management गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। जनसंख्या बढ़ने से अपशिष्ट की मात्रा बढ़ती है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन चर्चा में इसलिए है क्योंकि भारत सहित कई देश बढ़ते कचरे के कुशलतापूर्वक निपटान की चुनौती का सामना कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत प्रतिवर्ष 960 मिलियन टन अपशिष्ट उत्पन्न करता है। देखा जाये तो हमारे पास ठोस अपशिष्ट के निपटान की कोई उचित व्यवस्था भी नहीं है। कुशल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली efficient solid waste management system का मुख्य उद्देश्य कूड़े-करकट से अधिकतम मात्रा में उपयोगी संसाधन प्राप्त करना और produce energy ऊर्जा का उत्पादन करना है ताकि कम-से-कम मात्रा में अपशिष्ट पदार्थों को लैंडफिल क्षेत्र में फेंकना पड़े। इसका कारण यह है कि लैंडफिल में फेंके जाने वाले कूड़े का भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। एक तो इसके लिए काफी जमीन की आवश्यकता होती है जो लगातार कम होती जा रही है, और दूसरा कूड़ा वायु, मिट्टी और जल-प्रदूषण का सम्भावित कारण भी है। ठोस अपशिष्ट को फेंक देने से जमीन तो खराब होती ही है, लेकिन उसको जलाने से वायु प्रदूषण भी बढ़ता है। साथ ही लोगों को कई बीमारियाँ अपनी चपेट में ले रही हैं। इसलिए आज के समय को देखते हुए ठोस अपशिष्ट का सही प्रबंधन करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। तो चलिए आज Solid Waste Management ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानते हैं। 

Solid Waste Management क्या है? What Is Solid Waste Management In India

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) इस समय सुर्ख़ियों में बना हुआ है। क्योंकि वर्तमान समय में बढ़ता हुआ ठोस कचरा, चिंता के प्रमुख विषयों में से एक है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का अर्थ सामान्यतः उस प्रक्रिया से है जिसके अंतर्गत घरों से, फैक्ट्रियों से तथा अन्य कई स्रोतो से निकले ठोस अपशिष्ट से है जो मनुष्य जीव-जंतुओ और पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक होता है। समाज की गतिविधियों के परिणामस्वरूप प्राप्त ठोस अवस्था में बेकार और गैर-वांछित उत्पाद Waste and undesired products ही ठोस अपशिष्ट कहलाता है। यानि मनुष्य द्वारा उपयोग के बाद त्याग दिये जाने वाले ठोस तत्वों अथवा पदार्थों को ठोस अपशिष्ट कहते हैं। ठोस अपशिष्ट Solid Waste वे पदार्थ होते हैं जो उपयोग के बाद निरर्थक एवं बेकार हो जाते हैं तथा जिनका कोई आर्थिक उपयोग नहीं होता है। जैसे-डिब्बे, काँच के सामान, अखबार, बोतल, पाॅलिथिन बैग, प्लास्टिक सामान , राख, घरेलू कचरा, लौहा-लक्कड़, आवासीय कचरा Cans, Glassware, Newspaper, Bottle, Polythene Bag, Plastic Goods, Ash, Household Garbage, Iron, Residential Garbage आदि। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन भारत में भी बहुत बड़ी समस्या का रूप ले चुका है क्योंकि शहरीकरण, औद्योगिकरण और आर्थिक विकास Urbanization, Industrialization and Economic Development के परिणाम स्वरूप शहरी कूड़े-करकट की मात्रा बहुत बढ़ गई है। ठोस कूड़े-करकट का समुचित निस्तारण सही से नहीं हो पा रहा है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से सम्बन्धित मसलों के लिए व्यापक समाधान होना जरुरी है। ठोस अपशिष्ट को फेंक देने से जमीन तो खराब होती ही है, लेकिन उसको जलाने से वायु प्रदूषण air pollution भी बढ़ता है। देखा जाये तो भारत प्रतिवर्ष 960 मिलियन टन अपशिष्ट उत्पन्न करता है और हमारे पास ठोस अपशिष्ट के निपटान की कोई उचित व्यवस्था भी नहीं है इसीलिए हमें वर्तमान में ठोस अपशिष्ट का सही प्रबंधन करना बहुत जरूरी है। अपशिष्ट प्रबंधन का आशय पर्यावरण तथा जीव जंतुओ के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को रोकना उनको कम करना होता है।

ठोस अपशिष्ट को सामान्य भाषा में कई शब्दों के रूप में प्रयोग किया जाता है। जैसे -

कचरा (Garbage)- यह मुख्य रूप से खाद्य अपशिष्ट और सड़ने योग्य जैविक अपशिष्ट शामिल होते हैं। 

लिटर (Litter) - यह सार्वजनिक स्थानों पर इधर उधर फेंका गया सामान, कागज़, बॉटल आदि होते हैं। 

रबिश (Rubbish)- खाद्य कचरे को छोड़कर, दहनशील और गैर-दहनशील ठोस अपशिष्ट शामिल होते हैं। 

रेफ्यूज़ (Refuse) -इसके अंतर्गत कचरा और रबिश दोनों शामिल होते हैं।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रकार Types of Solid Waste

पुनरावर्तन अपशिष्ट - इन्हे रीसाइक्लिंग अपशिष्ट (Recycling waste) कहा जाता है। पुनरावर्तन अपशिष्ट में उन अपशिष्ट को रखा गया है, जिनको उपयोग करने के बाद फिर से प्रोसेसिंग करके उपयोग में लाया जाता है। इन अपशिष्ट के अंतर्गत एलमुनियम के डिब्बे, रद्दी कागज,प्लास्टिक आदि को शामिल किया गया है।

जैव निम्नीकरण अपशिष्ट - जैव निम्नीकरण अपशिष्ट वह अपशिष्ट होते हैं, जिनको सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) के द्वारा निम्नीकरण अथवा विघटित किया जा सकता है। इन अपशिष्टों के अंतर्गत सब्जियों के छिलके फसलों के अवशेष फेंके गये खाद्य पदार्थों के कवच आदि को शामिल किया गया है।

अनिम्नीकरण अपशिष्ट - ये वे अपशिष्ट होते हैं, जिनका निम्नीकरण करना बिल्कुल आसान नहीं  या फिर असंभव होता है। ये अपशिष्ट वातावरण तथा जीव जंतुओं के लिए बहुत ही हानिकारक होते हैं। इस अपशिष्टों के अंतर्गत पॉलीथिन, प्लास्टिक, सेरेमिक कांच, एस्बेस्टोज आदि आते हैं। 

ठोस अपशिष्ट के स्रोत 

ठोस अपशिष्ट के मुख्य स्रोत निम्न हैं - Main Sources Of Solid Waste

औद्योगिक अपशिष्ट Industrial waste

औद्योगिक अपशिष्ट बड़े और छोटे उद्योगों से विभिन्न प्रकार की वस्तुओं को निर्मित करने के फलस्वरूप उत्पन्न होता है। इस अपशिष्ट में विभिन्न प्रकार का रासायनिक कचरा, भट्टी का लावा, धातु स्क्रैप, पैकेजिंग अपशिष्ट, गाद, राख आदि शामिल होते हैं। यानि औद्योगिक इकाइयों द्वारा अनेक प्रकार के अपशिष्ट त्यागे जाते है, जो भूमि या मृदा प्रदूषण के मुख्य कारक है। 

घरेलू व नगरपालिका अपशिष्ट Domestic and municipal waste

इसके अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाला विभिन्न प्रकार का अपशिष्ट, होता है, जो प्रमुख रूप से घरों से निकला हुआ कचरा, कार्यालय, व्यावसायिक ठिकानों, अस्पतालों से निकलने वाला कचरा, सड़क को साफ़ करके निकलने वाला कूड़ा होता है। 

इनमें कूड़ा कचरा,रसोई घर का कचरा, कांच, कागज, टायर, बैटरी, प्लास्टिक, चिकित्सा सामग्री जैसे दस्ताने,पट्टी आदि अन्य चीज़ें जैसे पॉलीथिन, चमड़ा, आदि शामिल हैं। यह कचरा, नगर पालिकाओं के द्वारा इकट्ठा किया जाता है। 

खनन अपशिष्ट Mining waste

पृथ्वी में खनन करके कई धातुओं और कोयला को निकाला जाता है इसलिए यहाँ से निकलने वाले अपशिष्ट खनन अपशिष्ट होते हैं। इनके अतर्गत खान की धूल, चट्टानों के अवशेष धातु मल कोयले का चूरा आदि आते हैं। खनन के लिए भू-पृष्ठ को तोड़ा या खोदा जाता है और इससे मलबे का ढेर लग जाता है। इसमें निम्न श्रेणी के खनिज को ऐसे छोड़ दिया जाता है। मलबा भी इधर उधर फैला हुआ होता है। 

इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट Electronic waste

इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रिकल स्रोतों से निकले हुए कंप्यूटर, मोबाइल लेपटॉप आदि से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होते हैं। 

कृषिजनित अपशिष्ट Agricultural waste

फसल के बाद खेतों मे बचे डण्ठल, पत्ते, घास-फूस आदि कृषि अपशिष्ट कहलाते हैं। ये कृषि अपशिष्ट खेतों मे पड़े रहते हैं और अधिक मात्रा मे होने पर ये समस्या पैदा करते हैं। विकसित देशों मे इनका निष्पादन एक कठिन समस्या है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तरीके Solid Waste Management Methods

पुनर्चक्रण Recycling

पर्यावरण की दृष्टि से यह प्रक्रिया अत्यंत उपयोगी है। इस प्रक्रिया में उपयोग के बाद जो वस्तुएँ उपयोग के लिए नहीं होती हैं उन वस्तुओं को फिर से उपयोग में लाने के लिए उनको पुनर्चक्रण किया जाता है। एक साधारण सा उदाहरण ले लेते हैं। जैसे किसी कागज को उपयोग करने के बाद फिर से अन्य उपयोगी उत्पाद बनाना। इस क्रिया के अंतर्गत ऊर्जा की हानि कम होती है और गड्ढों की भराई भी कम होती है। अपशिष्ट का पुनः चक्रण का मतलब है कचरे को उपयोगी माल के रूप में प्रयोग करना। अगर हम ठोस अपशिष्ट को किसी उत्पाद में कच्चे माल के तौर पर उपयोग करे तो बहुत हद तक हम ठोस अपशिष्ट का निपटान कर सकते है। 

सफाई हेतु गड्ढों की भराई Filling of pits for cleaning

यह आजकल प्रयोग की जाने वाली सबसे लोकप्रिय ठोस अपशिष्ट निपटान विधि है। इसमें कचरा मूल रूप से पतली परतों में फैला दिया जाता है। फिर उसे ऊपर से मिट्टी और प्लास्टिक फोम से दबा दिया जाता है। इसके बाद गड्ढों की तली को मोटी प्लास्टिक तथा बालू की कई परतों से ढक देते हैं और और गड्डा भर जाने के बाद उसे बालू, चिकनी मिट्टी एवं बजरी से ढक देते हैं। 

भस्मीकरण Incineration

 इस विधि में उच्च तापमान पर ठोस कचरे को जलाया जाता है जब तक कि कचरा राख में बदल नहीं जाता। दाहक इस तरह से बनाए जाते हैं कि ठोस अपशिष्ट के जलने पर वे अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा नहीं देते हैं। इस विधि के लिए बड़े-बड़े भट्टियों का निर्माण किया जाता है। इस प्रक्रिया से मीथेन गैस उत्पन्न होती है, जो वायु को प्रदूषित करती है इसलिए भस्मीकरण प्रक्रिया का उपयोग थोड़ा कम किया जाता है।

खाद के रूप में As fertilizer

लैंडफिल के लिए पर्याप्त जगह की कमी के कारण, बायोडिग्रेडेबल कचरे biodegradable waste को विघटित किया जाता है। इस प्रक्रिया में खाद बनाने में केवल बायोडिग्रेडेबल अपशिष्ट पदार्थों का ही उपयोग किया जाता है।

कृमि संवर्धन Worm culture

कृमि संवर्धन को केंचुआ फार्मिंग के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रक्रिया काफी उपयोगी है। इस तकनीक में केंचुआ की सहायता से मल, कीचड़ एवं घरेलू अपशिष्ट को अपघटित करके कंपोस्ट खाद में बदल दिया जाता है। 

पायरोलिसिस

यह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की एक विधि है। इस प्रक्रिया में ठोस अपशिष्ट को उच्च तापमान पर विखंडित किया जाता है।इसमें अपशिष्ट का दहन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में किया जाता है। जिस वजह से ठोस अपशिष्ट ऑक्सीजन की उपस्थिति के बिना गर्मी से रासायनिक रूप से विघटित हो जाते हैं। इस प्रक्रिया में वायु प्रदूषण बिल्कुल नहीं होता है।

कंपोस्टिंग Composting

इसमें जैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों को सूक्ष्म जीवों के द्वारा ऑक्सीजन की उपस्थिति में अपघटन कराया जाता है। इस प्रक्रिया में उच्च गुणवत्ता वाली खाद बन जाती है और फिर इस खाद का उपयोग आप विभिन्न कृषि कार्यों में कर सकते हैं। इससे कार्बनिक खाद का निर्माण होता है। शहर वाले क्षेत्रों में निकलने वाले ठोस अपशिष्ट को जैव प्रौद्योगिकी आधारित अनाक्सीकारक पाचन क्रिया द्वारा भी अपघटित किया जा सकता है। 

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के दुष्प्रभाव Side Effects Of Solid Waste Management

  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के कई दुष्प्रभाव हैं। औद्योगिक इकाइयों (Industrial waste) से जो अपशिष्ट निकलता है वह पर्यावरण के लिए हानिकारक होता है। उद्योगों से निकलने वाला ठोस अपशिष्ट, जहरीली धातुओं, खतरनाक कचरे और रसायनों का एक स्रोत है। जब यह पर्यावरण में उत्सर्जित होते हैं, तो ठोस अपशिष्ट पर्यावरण के लिए जैविक और भौतिक रासायनिक समस्याओं का कारण बनते हैं जिससे ये उस क्षेत्र में मिट्टी की उत्पादकता को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ उद्योगो के द्वारा वातावरण में बिजली, धातु तत्व छोड़ दिए जाते हैं, जो जैविक और अजैविक भौतिक समस्याएँ biotic and abiotic physical problems उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी होते हैं।

  • कई प्रकार का रासायनिक कचरा, इलेक्ट्रॉनिक कचरा, सीसा, जिंक, बैटरीयाँ, रेडियोधर्मी पदार्थ, इलेक्ट्रॉनिक अवशिष्ट आदि के द्वारा खतरनाक किरणे निकलती है, जो विभिन्न प्रकार के कैंसर जैसी घातक बीमारियाँ पैदा करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। 

  • खतरनाक और जहरीली गैसों का उत्सर्जन होता है और ये जहरीली गैसों काफी हानिकारक होती हैं। 

  • पर्यावरण प्रदूषित होने के कारण मनुष्यों में स्वांस, ह्रदय, फेफड़े सम्बन्धी कई रोग हो जाते हैं। पेड़ पौधों तथा अन्य जंतुओ के साथ-साथ मनुष्यों में भी कई रोग उत्पन्न होने लगते हैं और मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

  • उद्योगो का रासायनिक जल (Chemical Water) नदी और नालों में बहा दिया जाता है, जिससे नदी नालों के विभिन्न प्रकार के जीव जंतु मर जाते हैं, तथा पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाता है। 

  • हमारे द्वारा उत्पादित कचरे के प्रति हमारी लापरवाही जानवरों को भी प्रभावित करती है और वे कचरे के अनुचित निपटान के कारण होने वाले प्रदूषण के प्रभावों से बच नहीं पाते हैं। 

  • जल प्रदूषण Water Pollution होता है। खतरनाक पदार्थ और रसायन मिट्टी में मिलकर भूजल को प्रदूषित कर सकते हैं। अक्सर खतरनाक कचरे को साधारण कचरा और अन्य ज्वलनशील कचरे के साथ मिलाया जाता है। जिस वजह से निपटान की प्रक्रिया में भी कठिनाई होती है। 

  •  नगर पालिका अपशिष्ट की अनियंत्रित डंपिंग (uncontrolled dumping) के कारण मनुष्य के साथ पशु पक्षियों, जीव जंतु तथा पेड़ पौधों पर भी विपरीत प्रभाव देखने को मिलता है। क्योंकि इस डंपिंग में विभिन्न प्रकार के जैव निम्नीकरण पदार्थ होते हैं, जो कुछ समय बाद सड़ने गलने लगते हैं और कुछ समय के बाद विभिन्न प्रकार की विषैली दुर्गंध पैदा करते हैं।

  •  जब औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला ठोस पदार्थ खेतों में डाल दिया जाता है, इनसे निकली हुई राख और कचरा खेतों में डाल दिया जाता है जिससे वहां की मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है।

अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली के मुद्दे और चुनौतियाँ Waste Management System Issues and Challenges

  • अधिकतर नगरपालिकाएँ बिना किसी विशेष उपचार के ही ठोस अपशिष्ट को खुले डंप स्थलों पर एकत्रित करती हैं। इस प्रकार के स्थलों से काफी बड़े पैमाने पर रोगों के जीवाणु पैदा होते हैं और आस-पास रहने वाले लोग भी इससे काफी प्रभावित होते हैं। इस प्रकार के स्थलों से जो दूषित रसायन, मिट्टी और भूजल में मिलता है तो वह कई बीमारियाँ पैदा करने में सहायक होते हैं। आम लोगों की सेहत पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। 

  • शहरीकरण में तीव्रता के साथ ही ठोस अपशिष्ट उत्पादन में भी वृद्धि हुई है जिसने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को काफी हद तक बाधित किया है।

  • भारत में अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र का गठन अधिकतर अनौपचारिक श्रमिकों द्वारा किया जाता है जो मुख्यतः गरीब होते हैं। इन लोगों को कार्यात्मक और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल पाती है।

  • प्रबंधन की उदासीनता और कम सामुदायिक जुड़ाव भी भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का एक प्रमुख अवरोध है।

  • अपशिष्ट प्रबंधन के लिये जो वित्त आवंटित किया जाता है उसका अधिकांश हिस्सा संग्रहण और परिवहन को मिलता है। प्रसंस्करण तथा निपटान हेतु बहुत कम हिस्सा बचता है जो कि एक चुनौती बन जाता है।

  • अधिकांश ठोस अपशिष्ट प्रबंधन निधि, कचरे के संग्रह और परिवहन के लिए आरक्षित की जाती है, जिसके परिणामस्वरूप प्रसंस्करण और संसाधन रिकवरी और निपटान के लिए बहुत कम राशि शेष रह जाती है।

  • कचरे के अपर्याप्त पृथक्करण के कारण अधिकांश अपशिष्ट का पुनर्चक्रण नहीं होता है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 में अपशिष्ट के अलगाव को अनिवार्य किया गया है, लेकिन इस नियम का पालन नहीं किया जाता है।

  • भारत में अधिकांश शहरी स्थानीय निकाय वित्त, बुनियादी ढाँचे और प्रौद्योगिकी की कमी के कारण कुशल अपशिष्ट प्रबंधन सेवाएँ प्रदान करने के लिये संघर्ष करते हैं।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन SWM के लिए सरकारी नियम और नीतियां

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम Solid waste management rules, 2016: MoEFCC ने अप्रैल 2016 में SWM ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को संशोधित और अधिसूचित किया, जिसने नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन और हैंडलिंग) नियम, 2000 को प्रतिस्थापित किया है। नए नियम नगरपालिका क्षेत्राधिकार से आगे जिम्मेदारी सुनिश्चित करते हैं।

यह बताया गया है कि अपशिष्ट उत्पादक को स्रोत पर ही कचरे को अलग करना चाहिए। रीसाइक्लिंग एवं पुन: उपयोग के लिए कागज, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसे सूखे कचरे का प्रयोग करना चाहिए, साथ ही खाद या बायोमीथेनेशन के लिए रसोई से गीले कचरे का भी उपयोग करना चाहिए। 

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 ए (जी) भारत के प्रत्येक नागरिक को वनों, झीलों, नदियों और वन्य जीवन सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और वृद्धि करने और जीवित प्राणियों के प्रति दया रखने का मौलिक कर्तव्य देता है।

मॉडल शहरों का विकास Development of Model Cities एक बेहतरीन पहल 

इन शहरों ने मॉडल शहर बनने के लिए कूड़ा फेंकने से खराब हुए स्थानों को सही करने की विधियों को अपनाकर उन्हें सही किया है और जमीन को फिर से उपयोगी बनाया है। पुणे (महाराष्ट्र), इंदौर (मध्य प्रदेश) और अम्बिकापुर (छत्तीसगढ़) Pune (Maharashtra), Indore (Madhya Pradesh) and Ambikapur (Chhattisgarh) को मॉडल शहरों के रूप में विकसित किया गया है। इन शहरों ने कूड़े का संग्रह करने, छंटाई और प्रसंस्करण की सुविधाएँ विकसित की हैं। 

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Bio-fuel- पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा का एक टिकाऊ तंत्र

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Naveen Jain- संघर्ष और सफ

यदि आज का युवा नवीन जैन की तरह दृढ़ संकल्प और पूरी लगन के साथ कार्य करे तो हर कदम पर सफलता जरूर मिलेगी और हर जीत आपकी होगी। नवीन जैन Naveen Jain सफलता की एक जीती जागती मिसाल हैं। नवीन जैन का मानना है कि यदि आपके भीतर खुद पर भरोसा करने की हिम्मत है, तो अपने आइडिया के साथ आगे बढ़ें और अपने द्वारा किए गए प्रयासों को कभी भी बेकार नहीं होने दें बस मेहनत करते रहें। नवीन जैन उन लोगों में से हैं जो कहते हैं कि हर समस्या का समाधान किया जा सकता है। आपको बस इसकी कल्पना करनी है। सपना देखो और उसे पूरा कर दिखाओ। सफलता इस बात में नहीं है कि हमारे पास बैंक में कितना पैसा है, बल्कि इस बात में है कि हमने इसके माध्यम से कितने लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। एक बेहद जिज्ञासु उद्यमी और परोपकारी Curious Entrepreneur and Philanthropist, नवीन जैन उन विचारों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो मानवता को आगे बढ़ाते हैं। नवीन जैन ने अपनी काबिलियत के आधार पर वैश्विक मंच पर भारत का कद काफी ऊँचा किया है और भारत को आज वैश्विक महाशक्ति global superpower बनने की ओर अग्रसर किया है। चलिए जानते हैं अमेरिका America के सबसे सफल भारतीय लोगों में गिने जाने वाले नवीन जैन की सफलता की कहानी, एक ऐसी कहानी जो आज सबके लिए एक मिसाल बन कर उभरी है।

नवीन जैन का जीवन परिचय और शिक्षा | Biography and Education of Naveen Jain

नवीन जैन का जन्म 6 सितंबर, 1959 को यूपी के शामली जिले Shamli district of UP में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। नवीन जैन के परिवार पर उस वक़्त अचानक से विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा जब इनके पिता ने भारतीय निर्माण परियोजनाओं में धांधली करने के बदले में रिश्वत लेने से इनकार कर दिया। बड़े लोगों ने रिश्वत स्वीकार न करने के परिणामस्वरूप उन्हें अपने ही देश में शरणार्थी बना दिया। उन्हें अक्सर दूर-दराज के क्षेत्रों में भेजा जाने लगा। नवीन जैन के जीवन का शुरुआती दौर बेहद मुश्किलों में बीता लेकिन इसके बावजूद भी नवीन और उनके भाई-बहनों ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है। जैन कम उम्र से ही बहुत प्रतिभाशाली very talented थे, और नए विषयों में उनकी रुचि हमेशा रहती थी। उनका परिवार बहुत कुलीन था और शिक्षा के महत्व को जानता था। नवीन ने आईआईटी और एमबीए किया है, उनकी बहन ने मैथेमैटिक्स में पोस्ट डॉक्टोरल स्टडीज की है और भाई ने स्टैटिस्टिक्स व कंप्यूटर साइंस में पीएचडी है। नवीन जैन ने अपने बचपन से ही कई मुश्किलों का सामना करते हुए अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया। आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग की डिग्री

और उसके बाद व्यापार और मानव संसाधन में एक्सएलआरआई से एमबीए किया। उन्होंने व्यावसायिक विचारों की तलाश की। उन्होंने हमेशा सफल लोगों का अनुसरण किया और सोचा कि वे अपने जीवन को कैसे सफल बना सकते हैं। उन्होंने बिल गेट्स Bill Gates का सबसे अधिक अनुसरण किया और कैसे अपने भाग्य को बदला जा सकता है इसका विश्लेषण करके अपने जीवन में हमेशा आगे बढ़ने की कोशिश की। जैन ने 1988 में शादी की और उनके तीन बच्चे हैं। नवीन जैन वर्तमान में देश के सबसे लोकप्रिय व्यक्तियों most popular persons में से एक हैं। 

इन्फोस्पेस Infospace नाम से की कंपनी की शुरुआत | Naveen Jain started a company named Infospace

नवीन जैन कहते हैं आगे बढ़ने के लिए दो चीज़ों की ज़रूरत होगी। एक तो ये कि इतना बड़ा ख़्वाब देखो कि लोग तुम्हें पागल समझें और दूसरा नाकामी से कभी मत डरो। एमबीए करने के बाद नवीन को एक मल्टी-नेशनल कंपनी में जॉब मिल गई और उन्हें ट्रेनिंग के लिए अमेरिका जाने का मौका मिला। कुछ सालों तक कंपनी में काम करने के पश्चात नवीन जैन ने अपने अनुभव का सही इस्तेमाल करके मार्च 1996 में छह कर्मचारियों के साथ इन्फोस्पेस Infospace की स्थापना की, इनमें अधिकतर माइक्रोसॉफ्ट Microsoft से थे। इन्फोस्पेस वेबसाइटों और मोबाइल डिवाइस निर्माताओं को सामग्री और सेवाएं प्रदान करता है। दो साल तक अपने इस आइडिया के साथ काम करने के बाद यह 15 दिसंबर, 1998 को सार्वजनिक हुआ और कंपनी ने इस पेशकश में 75 मिलियन डॉलर जुटाए। सार्वजनिक करने के एक साल के भीतर ही कंपनी की वैल्यूएशन 35 बिलियन डॉलर हो गई। नवीन जैन का यह आइडिया उस समय के कुछ उद्योग विश्लेषकों को उनका पागलपन लगा था, लेकिन नवीन जैन की सफलता में सबसे बड़ा हाथ उनके आत्म-विश्वास का ही था। उन्होंने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया और न किसी की फिक्र नही की बस काम करते रहे। उन्होंने इस बात को साबित कर दिखाया कि उनका यह यह आइडिया वास्तव में एक बड़ा आइडिया था। उनके पास महंगे घर और याच हैं। जैन के पास इंफोस्पेस के 47 फीसदी शेयर हैं। 

नवीन जैन द्वारा इन्तेलियस Intelius कंपनी की स्थापना

नवीन जैन का नाम आज सबसे नामचीन उद्योगपति और परोपकारी लोगों की लिस्ट में शामिल है। एक आशावादी व्यक्ति कठिनाइयों को ही अपनी ताकत बनाकर नए अवसर की तलाश कर लेता है। नवीन जैन मेहनत को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। इन्फोस्पेस नवीन जैन द्वारा स्थापित पहला सफल उद्यम था जिसने उन्हें एक अरबपति बना दिया था। अपनी इस सफलता के बाद नवीन ने अपनी जिंदगी में कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वो नए-नए मुकाम हासिल करते रहे। साल 2002 में इनकी कंपनी के भीतर बोर्ड के साथ इनके कुछ मतभेद होने लगे जिसके कारण नवीन ने अपनी खुद की कंपनी छोड़ दी और अगले साल 2003 में अमेरिका आधारित सार्वजनिक रिकॉर्ड व्यापार इन्तेलियस (Intelius) की स्थापना की। यह 2004 तक राजस्व में 18.1 मिलियन डॉलर और 2007 में 22.5 मिलियन डॉलर के मुनाफे के साथ बढ़कर 88.5 मिलियन डॉलर हो गया। वर्तमान समय में इनकी कंपनी उपभोक्ताओं के साथ-साथ बड़ी-बड़ी कंपनियों को भी सिक्यूरिटी सूचना से संबंधित सेवाएं Security Information Services प्रदान करती है। नवीन जैन ने सिलिकॉन वैली Silicon Valley में कई सॉफ़्टवेयर कंपनियां खड़ी कीं और अरबों डॉलर भी कमाए हैं। 

टैलेंटवाइज TalentWise

नवीन जैन ने टैलेंटवाइज TalentWise की भी स्थापना की, जो इंटेलियस का एक स्पिन-ऑफ है, जिसे 2016 में बेचा गया था। नवीन भारत के एक ऐसे पिछड़े हुए राज्य से ताल्लुक रखते हैं जहाँ से हर साल करोड़ों की तादात में रोजगार की तलाश में लोगों का पलायन होता रहा है लेकिन इसके बावजूद नवीन जैन ने खुद की काबिलियत से शानदार मुक़ाम हासिल करने में सफल हुए हैं। 

कंपनी मून एक्सप्रेस Moon Express

नवीन जैन ने अगस्त 2010 में मून एक्सप्रेस की सह-स्थापना की और इसके अध्यक्ष हैं। वह सांस्कृतिक और तकनीकी परिवर्तन को बढ़ावा देते हैं। उनका चुंबकीय व्यक्तित्व magnetic personality असंभव को प्रेरित करता है। नवीन जैन के शून्य से शिखर तक के इस सफ़र से हर किसी को प्रेरणा लेनी चाहिए। इन्फोस्पेस के बाद, जैन ने फिर से परिभाषित किया कि उनकी कंपनी मून एक्सप्रेस ने नए आयाम हासिल किये, जो चंद्रमा पर रोबोटिक अंतरिक्ष यान robotic spacecraft भेजने के लिए अमेरिकी सरकार US government की मंजूरी पाने वाली पहली कंपनी बन गई। नवीन जैन की कंपनी मून एक्सप्रेस चांद पर खुदाई करके गोल्ड, प्लेटिनम, कोबाल्ट जैसे मटेरियल धरती पर लाने की कोशिश में लगी है। उन्हें अमेरिकन स्पेस एजेंसी नासा American space agency Nasa का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है। कंपनी चंद्रमा से सोना, कोबाल्ट, प्लेटिनम और हीलियम-3 (परमाणु ऊर्जा ईंधन) जैसी खनन सामग्री के लिए मशीन से चलने वाले अंतरिक्ष यान का निर्माण कर रही है। यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की भी संभावना बनाएगा, जिसका उपयोग मंगल और उससे आगे के मिशन के लिए रॉकेट ईंधन बनाने के लिए किया जा सकता है। जैन का दावा है कि मून एक्सप्रेस के लिए उनका लक्ष्य 2022 तक चंद्रमा पर मानव कालोनियों का पता लगाना है। बड़ी बड़ी समस्याओं को हल करना और बड़े सपनों को अमल में लाते हैं नवीन जैन। 

केरोस सोसाइटी Kairos Society नाम का एक सामाजिक संगठन

वह कैरोस सोसाइटी के बोर्ड में भी हैं, जो उनके बेटे द्वारा स्थापित स्नातक उद्यमियों का एक गैर-लाभकारी नेटवर्क है। नवीन केरोस सोसाइटी Kairos Society नाम की एक सामाजिक संगठन के माध्यम से उद्यमियों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और डिजाइनरों को 35 देशों में आर्थिक एवं अन्य जरुरी मदद भी उपलब्ध करवाते हैं। नवीन को हमारी आबादी का एक छोटा हिस्सा आज भी नहीं जानता है लेकिन उन्होंने अपनी काबिलियत के आधार पर वैश्विक मंच पर भारत का कद ऊँचा किया है। 

ब्लूडॉट Bluedot और व्योम Viome 

नवीन जैन ब्लूडॉट के संस्थापक और सीईओ founder and CEO of Bluedot हैं। 2015 में शुरू किया गया, Bluedot व्यावसायीकरण के लिए यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ़ एनर्जी नेशनल लैब्स United States Department of Energy national labs से अनुसंधान को लाइसेंस देता है। साथ ही नवीन जैन Bluedot के स्पिनऑफ Viome व्योम जो कि 2016 में स्थापित हुआ था, उसके संस्थापक और सीईओ founder and CEO of Bluedot's spinoff Viome हैं। व्योम Viome पोषण संबंधी जीनोमिक्स परीक्षण और विश्लेषण सेवाएं nutritional genomics testing and analysis services प्रदान करता है। यह आहार संबंधी सलाह dietary advice प्रदान करता है। आहार परीक्षण स्टार्टअप diet test startup वायोम पुरानी बीमारियों को खत्म करने और एक रोग-मुक्त दुनिया बनाने के मिशन पर है। जैन ने अपने पूरे करियर में बहुत सफलता और पहचान हासिल की है, और उनका मानना ​​है कि उनका जीवन इस सब के माध्यम से उनका सबसे बड़ा शिक्षक रहा है।

अन्य एक्टिविटी 

उन्होंने भारत में नए आविष्कारों और आइडियाज़ को बढ़ावा देने के लिए उद्योगपति रतन टाटा Industrialist Ratan Tata के साथ मिलकर एक इंसेटिव फ़ंड की भी शुरुआत की है। वह कैरोस सोसाइटी के अलावा एक्सप्राइज फाउंडेशन और सिंगुलैरिटी यूनिवर्सिटी Xprize Foundation and Singularity University के बोर्ड में भी हैं। उनकी पत्नी के सहयोग से, अनु और नवीन जैन महिला सुरक्षा एक्सप्राइज Anu and Naveen Jain Women's Safety Xprize को अक्टूबर 2016 में लॉन्च किया गया था। वह Award-winning book अवार्ड विनिंग बुक, मूनशॉट्स Moonshots: क्रिएटिंग ए वर्ल्ड ऑफ एबंडेंस Creating a World of Abundance, क्रिएटर ऑफ़ माइंडवैली the creator of Mindvalley, मास्टरक्लास प्रोग्राम्स Masterclass programs के लेखक हैं। नवीन जैन उन विचारों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो मानवता को आगे बढ़ाते हैं। नवीन जैन का मानना है कि कोई भी व्यक्ति जो अपनी फ़ील्ड का माहिर हो वो उसी दायरे में रहकर शायद कुछ नई चीज़ें सोच सके लेकिन सही मायने में क्रांतिकारी आइडियाज़ उन्हीं से आते हैं जो उस क्षेत्र के एक्सपर्ट नहीं होते।

नवीन जैन नेट वर्थ Naveen Jain Net Worth

उनके पास अपने सभी व्यवसायों से पर्याप्त आय है, जो वर्तमान में बहुत चर्चा में है। 2022 के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति Naveen Jain's Net Worth $ 100 मिलियन से अधिक है। नवीन जैन एक भारतीय अमेरिकी व्यापार कार्यकारी और उद्यमी Indian American business executive and entrepreneur हैं। उन्हें इन्फोस्पेस के संस्थापक और पूर्व सीईओ founder and former CEO of InfoSpace के रूप में जाना जाता है, जो डॉट-कॉम बबल dot-com bubble से पहले सबसे बड़ी इंटरनेट कंपनियों में से एक थी। इसके अलावा, वह कई अन्य कंपनियों से भी जुड़े हुए हैं, जिन्होंने उनकी वर्तमान स्थिति को बहुत उन्नत शिखर पर पहुँचाया है। 1979 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की Indian Institute of Technology Roorkee से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद वह संयुक्त राज्य अमेरिका United States चले गए। माइक्रोसॉफ्ट के लिए काम करने से पहले सिलिकॉन वैली में कई स्टार्टअप के लिए काम किया जहां उन्हें थ्री पेटेंट Three Patents से सम्मानित किया गया। उन्होंने 2010 में मून एक्सप्रेस की सह-स्थापना की और कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उनके पास उल्कापिंडों का एक संग्रह a collection of meteorites है, जिसके बारे में कहा जाता है कि उनकी कीमत 5 मिलियन डॉलर थी। नवीन जैन ने 2016 में कंपनी Viome की स्थापना की और CEO के रूप में कार्य किया। जैन ने Intelius, TalentWise, Moon Express और Bluedot कंपनियों की स्थापना भी की है। 

सफलता के लिए नवीन जैन की शीर्ष सलाह | Naveen Jain's Top Advice for Success

सफलता के लिए उनके द्वारा दी गयी कुछ सलाह निम्न हैं - 

  • पैसे से ज्यादा सेवा को प्राथमिकता दें।

  • आप जो नियंत्रित नहीं कर सकते, उस पर ध्यान दें, बजाय इसके कि आप क्या नियंत्रित कर सकते हैं।

  • अपने आप से प्यार करो।

  • हर चीज को सूचना के रूप में लें और फिर अपनी राय बनाएं।

  • अन्य लोगों की स्वीकृति प्राप्त न करें।

  • सही सवाल पूछें। आप जो प्रश्न पूछते हैं वह समस्या है जिसे आप हल करते हैं।

  • सफलता इस बात में नहीं है कि हमारे पास बैंक में कितना पैसा है, बल्कि यह है कि हमने इसके माध्यम से कितने लोगों के जीवन को प्रभावित किया है।

  • असंभव कुछ भी नहीं है। 

  • नवीन जैन मानते हैं कि सफलता के लिए आत्म-विश्वास और मेहनत अत्यंत आवश्यक है। इसे वह हमेशा सबसे अधिक प्राथमिकता देते हैं।

  • जब आप किसी को बताते हैं कि आप क्या कर रहे हैं और उन्हें नहीं लगता कि यह एक क्रेजी विचार crazy idea है, तो आप बहुत छोटा सोच रहे हैं। यानि इतना बड़ा ख़्वाब देखो कि लोग तुम्हें पागल समझें 

  • अगर इस अविश्वसनीय यात्रा में मैंने एक चीज सीखी है तो वह है, सफल व्यक्ति की निशानी विनम्रता I

  • सफलता प्राप्त करने के लिए नाकामी से कभी मत डरो।

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Consumer Awareness क्या ह

हम अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं की पूर्ति के लिए विभिन्न प्रकार की चीज़ों को खरीदते और सेवाएं प्राप्त करते हैं। मतलब प्रत्येक मनुष्य एक स्वाभाविक उपभोक्ता है। आपने अक्सर महसूस किया होगा कि वस्तुओं की कीमत चुकाने के बाद वस्तु की जो गुणवत्ता है उसके लिए अदा की गई कीमत उसके अनुरूप नहीं है। इसके अलावा वस्तु की मात्रा, बताई गई मात्रा से कम होती है। साथ ही आपने कई बार ऐसी सेवाओं या वस्तुओं का भी मूल्य अदा किया होगा जो विज्ञापन में तो आकर्षक दिखाई देते हैं लेकिन वास्तविकता कुछ और होती है। यानि प्रस्तुत की गई छवि और वास्तविक रूप से उस वस्तु में काफी भिन्नता होती है। जब आपके सामने ऐसी स्थिति आती है तो आप क्या करते हैं। निःसंदेह आपने बहुत निराशा का अनुभव किया होगा। ऐसा होने पर आप अपने आपको ठगा सा महसूस करते हैं। ऐसे होने पर क्या आपने कोई कार्यवाही की या अपने कोई उपाय किया। आपको शायद उस धोखे के बारे में पता ही नहीं है जो आपके साथ हुआ है। बस यही वह समस्या है जिसमें उपभोक्ता consumer को उसकी शिकायत करने का पूरा अधिकार होता है। इसके बारे में हर नागरिक को जानना जरुरी है। एक उपभोक्ता के रूप में आपके पास कई अधिकार प्राप्त हैं जिनके बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए। हर किसी को उपभोक्ता जागरूकता Consumer Awareness या उपभोक्ता शिक्षा consumer education के बारे में जानकारी होनी चाहिए। तभी आप एक नागरिक के रूप में अपने साथ न्याय कर पाएंगे। चलिए आज इसी Consumer Awareness के बारे में जानते हैं कि उपभोक्ता जागरूकता क्या है और क्यों इसका इतना महत्व है। सबसे पहले उपभोक्ता के बारे में जानते हैं।

उपभोक्ता किसे कहते है ? (What do consumers call it?)

उपभोक्ता उस व्यक्ति को कहते हैं, जो विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं का या तो उपभोग करता है अथवा उनको उपयोग में लाता है। यानि यदि कोई व्यक्ति, वस्तुओं एवं सेवाओं का चयन करता, उन्हें प्राप्त करने के लिए पैसा खर्च करता है और अपनी जरूरतों की की पूर्ति करने के लिए उनका उपयोग करता है उसे उपभोक्ता कहते हैं। 

उपभोक्ता जागरूकता क्या है? (What Is Consumer Awareness)

उपभोक्ता जागरूकता एक उपभोक्ता के रूप में अपने अधिकारों के बारे में जानना Knowing about your rights as a consumer है। यानि उपभोक्ता जागरूकता का मतलब उपभोक्ता को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता रखना है। 

उपभोक्ता अधिकारों की घोषणा सबसे पहले अमेरिका America में 1962 में स्थापित की गयी थी। जब उपभोक्ता बहुत अधिक कीमत पर सामान की खरीददारी करता है या फिर मिलावटी और कम गुणवत्ता का सामान खरीदता है तो उपभोक्ता को इस धोखे के बारे में जानना जरूरी है। यह सब देखते हुए उपभोक्ता को चौकस रहने की आवश्यकता है। क्योंकि निर्माता अपने उत्पादों की बिक्री को बढ़ाने के लिए mislead consumers उपभोक्ताओं को गुमराह करके उनका शोषण करते हैं। इसलिए यह हर व्यक्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है कि वो जागरूक रहे। उपभोक्ता जागरूकता का तात्पर्य है कि खरीदार वस्तुओं, सेवाओं, उत्पादों, व्यवस्थाओं और खरीदारों के विशेषाधिकारों Goods, services, products, arrangements and privileges of the buyers के डेटा और जानकारी के बारे में जानता है। उपभोक्ता जागरूकता महत्वपूर्ण है ताकि खरीदार सही निर्णय ले सकें और सही समय पर सही चुनाव कर सकें। यदि खरीदी गई वस्तुएँ या सेवाएँ खराब गुणवत्ता की हों या कम मात्रा में पायी जाती हो तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उत्पाद की गुणवत्ता और उत्पाद की कीमत के बारे में उपभोक्ताओं को शिक्षित करने की आवश्यकता Consumers need to be educated महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर उपभोक्ता जागरूकता एक प्रक्रिया है जिसमें उपभोक्ता को उनके अधिकारों और नियमों Consumer rights and rules के बारे में बताया जाता है जिससे कि वह जागरूक होकर किसी भी सेवा और वस्तु को खरीद कर उपभोग कर सके।

उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण का महत्त्व Importance of consumer education and protection

आज हमारे आस-पास चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण दोनों बाजारों में ही उत्पादों का निर्माण और बिक्री निरंतर बढ़ती जा रही है। निर्माता उपभोक्ताओं को अनदेखा नहीं कर सकते। उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या तथा वस्तुओं और सेवाओं के उपयोग की मात्रा बढ़ती जा रही है। उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण के अंतर्गत उपभोक्ता का सम्मान और उन्हें संतुष्ट करना महत्वपूर्ण है। आज के उपभोक्ता के लिए सतर्क, जागरूक और पूरी जानकारी रखने वाला उपभोक्ता बनना आवश्यक है। इसलिए उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण आज के उपभोक्ता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

आज भारतीय उपभोक्ता के पास चयन करने के लिए विदेशी कंपनियों के भी अनेक विकल्प हैं और वह प्रतिस्पर्धी कीमतों में से बेहतर उत्पादों को चुन सकता है। लेकिन साथ ही साथ सही उत्पाद का चयन करना अब अधिक कठिन हो गया है, चूँकि उपभोक्ता को नयी प्रौद्यौगिकी, नए उत्पादों और नयी विशेषताओं New technology, new products and new features को समझना पड़ता है। इसके अलावा उपभोक्ता को कीमत और गुणवत्ता की भी तुलना करनी पड़ती है। उपभोक्ता को बेकार गुणवत्ता, बेईमान विक्रेताओं द्वारा शोषण, भ्रामक विज्ञापनों Poor quality, exploitation by unscrupulous sellers, deceptive advertisements जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता पड़ता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को एक समझदार और जागरूक उपभोक्ता बनना महत्वपूर्ण हो जाता है।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम Consumer Protection Act

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 भारत में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए भारत की संसद में अधिनियमित 1986 का एक अधिनियम है। यह उपभोक्ता विवादों के निपटारे और संदिग्ध मामलों के लिए उपभोक्ता परिषदों और अन्य प्राधिकरणों की स्थापना का प्रावधान करता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम उपभोक्ता के हित में एक महत्वपूर्ण कानून है और हर उपभोक्ता को अपने अधिकार जानने चाहिए। इस अधिनियम का मुख्य कार्य उपभोक्ताओं की बाजार में मौजूद कपटपूर्ण बाज़ार नीतियों से सुरक्षा करना और उनकी शिकायतों का निवारण उपलब्ध कराना है। इसके द्वारा उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए उन्हें सरल, शीघ्र और सस्ता निवारण उपलब्ध कराना है। भारत सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (सी.पी.ए.) 1986 के अंतर्गत छह उपभोक्ता अधिकारों को स्वीकृत किया है। 

इनमें चार मौलिक अधिकार है -

(1) सुरक्षा का अधिकार, 

(2) सूचित किए जाने का अधिकार, 

(3) चयन का अधिकार और 

(4) सुने जाने का अधिकार 

दो अतिरिक्त अधिकार हैं- निवारण का अधिकार और शिक्षा का अधिकार।

उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार Right to consumer education

उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार का महत्व काफी अधिक है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को एक जानकार उपभोक्ता होने के लिए ज्ञान और कौशल अर्जित करने का अधिकार है, जिससे वह वस्तुओं को खरीदते समय अथवा सेवाओं को प्राप्त करते समय सही और विवेकपूर्ण निर्णय ले सके और वह अपने अधिकारों की रक्षा कर सके। यानि उपभोक्ता को इतना शिक्षित होना चाहिए कि वह अपनी समस्या का समाधान स्वयं कर सके। यदि कोई समस्या हो तो उपभोक्ता को उसकी शिकायत करने का अधिकार पता हो। हम सभी प्रतिदिन किसी न किसी चीज को खरीदते हैं और इसका इस्तेमाल करते हैं लेकिन कभी-कभी हमारे साथ धोखा होता है और अधिक कीमतों पर काफी सस्ती वस्तु हमें दे दी जाती है इस परिस्थिति में हम अपने उपभोक्ता शिक्षा के अधिकारों का इस्तेमाल कर अपना हक प्राप्त कर सकते हैं।

उपभोक्ता सशक्तिकरण सप्ताह 

उपभोक्ता मामले विभाग Consumer affairs department ने प्रगतिशील भारत के 75 साल और लोगों की संस्कृति और उनकी उपलब्धियों के गौरवशाली इतिहास का जश्न मनाने के लिए 14 मार्च, 2022 को "उपभोक्ता सशक्तिकरण सप्ताह" Consumer Empowerment Week शुरू किया। उपभोक्ता जागरूकता पैदा करने के लिए 23 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के 85 से अधिक गांवों में ग्रामीण लोगों की बड़ी भागीदारी के साथ ग्राम पहुंच कार्यक्रम आयोजित किए। साथ ही ग्राम पहुंच कार्यक्रमों के जरिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, भारतीय मानक चिह्नों, हॉलमार्क वाले आभूषण, सीआरएस चिह्न की विशेषताओं और डिब्बाबंद वस्तुओं पर देखे जाने वाले विवरण, सही वजन और सही माप के बारे में जागरूकता पैदा की है और इससे लोग जागरूक हो रहे हैं। इसके अलावा उपभोक्ताओं को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 14404 या 1800-11-4000 पर उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने के बारे में जानकारी दी।

उपभोक्ता जागरूकता से होने वाले फायदे

उपभोक्ता जागरूकता से होने वाले फायदे निम्न हैं -

  • उपभोक्ता जागरूकता से उपभोक्ता को कम कीमत पर सही वस्तु या उत्पाद प्राप्त हो जाते हैं। 

  • उपभोक्ता को इससे आर्थिक लाभ होता है। यह जागरूकता उपभोक्ताओं को पैसे बचाने के लिए प्रोत्साहित करता है। 

  • उपभोक्ता जागरूकता से उपभोक्ता को अपने अधिकार के बारे में पता चलता है और इस वजह से वह सतर्क रहता है।

  • उपभोक्ता जागरूकता उपभोक्ताओं को विक्रेताओं और उत्पादकों द्वारा शोषण से भी बचाता है।

  • उपभोक्ता को हानिकारक उत्पादों के अत्यधिक सेवन से भी बचाता है और उनकी सेहत पर गलत असर नहीं पड़ता है। 

  • उपभोक्ता उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद और सेवाएं खरीदने में सक्षम होंगे। 

  • उपभोक्ता हर समय सर्वोत्तम निर्णय और सही चुनाव कर सकते हैं। 

  • उपभोक्ता जागरूकता से एक उपभोक्ता किसी उत्पाद या सेवा के बारे में सभी विवरण प्राप्त करने में सक्षम हो जायेगा। 

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