बिजनेस लीडर्स के लिए सर्वश्रेष्ठ एग्जीक्यूटिव कोचिंग मॉडल

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बिजनेस लीडर्स के लिए सर्वश्रेष्ठ एग्जीक्यूटिव कोचिंग मॉडल
22 Oct 2026
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एग्जीक्यूटिव कोचिंग प्रभावी लीडर तैयार करने, कार्यस्थल पर बेहतर संबंध बनाने और कंपनियों को अपने व्यावसायिक लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करने का एक महत्वपूर्ण तरीका बन गई है।

आज बिजनेस की दुनिया तेजी से बदल रही है। कंपनियाँ डिजिटल तकनीक, कर्मचारियों की बदलती अपेक्षाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में लीडर्स के लिए अपने फैसले लेने की क्षमता, बातचीत करने के तरीके, परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलने की योग्यता और टीम को संभालने के कौशल में लगातार सुधार करना जरूरी हो गया है।

एग्जीक्यूटिव कोचिंग लीडर्स को इन क्षमताओं को विकसित करने में मदद करती है। इसके जरिए वरिष्ठ अधिकारी अपनी खूबियों को पहचान सकते हैं, अपनी कमजोरियों को समझ सकते हैं और खुद को बेहतर बनाने के नए अवसर खोज सकते हैं।

सामान्य ट्रेनिंग प्रोग्राम से अलग, एग्जीक्यूटिव कोचिंग किसी व्यक्ति की जरूरतों, चुनौतियों और करियर से जुड़े लक्ष्यों पर ध्यान देती है। इसमें कोच और लीडर के बीच गोपनीय बातचीत होती है। इस प्रक्रिया में आत्ममंथन, व्यावहारिक अभ्यास, फीडबैक और लक्ष्य हासिल करने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने जैसी गतिविधियाँ शामिल होती हैं।

जरूरत के अनुसार, एग्जीक्यूटिव कोचिंग का उपयोग लीडरशिप टीम को मजबूत बनाने, कंपनी में बदलाव लागू करने, भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने और कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है।

हालाँकि, सफल कोचिंग के लिए केवल सही सवाल पूछना या पेशेवर सलाह देना ही पर्याप्त नहीं है। अनुभवी कोच अक्सर कुछ स्थापित कोचिंग मॉडल का इस्तेमाल करते हैं। ये मॉडल बातचीत को सही दिशा देने, समस्याओं के वास्तविक कारणों को समझने, संभावित समाधान खोजने और प्रगति का आकलन करने में मदद करते हैं।

GROW, STEPPA, OSKAR, CLEAR और Action-Centered Leadership जैसे मॉडल इसी उद्देश्य से उपयोग किए जाते हैं। प्रत्येक मॉडल का अपना तरीका है और अलग-अलग नेतृत्व संबंधी परिस्थितियों में इसका उपयोग किया जा सकता है।

इन एग्जीक्यूटिव कोचिंग मॉडल को समझने से कोच यह तय कर सकते हैं कि किसी विशेष स्थिति में कौन-सी तकनीक सबसे अधिक उपयोगी होगी। साथ ही, कंपनियों को भी लीडरशिप डेवलपमेंट में निवेश करते समय बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है।

इस लेख में हम पाँच प्रमुख एग्जीक्यूटिव कोचिंग मॉडल Five Key Executive Coaching Models के बारे में जानेंगे। साथ ही, समझेंगे कि ये मॉडल कैसे काम करते हैं, इनका व्यावहारिक उपयोग कहाँ किया जा सकता है और इनके प्रमुख फायदे तथा सीमाएँ क्या हैं।

नेतृत्व विकास के लिए 2026 के सर्वश्रेष्ठ एग्जीक्यूटिव कोचिंग मॉडल (Best Executive Coaching Models for Leadership Development in 2026)

आधुनिक नेतृत्व में एग्जीक्यूटिव कोचिंग मॉडल क्यों महत्वपूर्ण हैं (Why Executive Coaching Models Matter in Modern Leadership)

एग्जीक्यूटिव कोचिंग मॉडल कोच और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच होने वाली बातचीत को सही दिशा देने में मदद करते हैं। इन मॉडलों के जरिए कोच केवल अपने अनुभव या अनुमान के आधार पर सलाह देने के बजाय, लीडर्स को अपने लक्ष्य तय करने, कार्यस्थल की चुनौतियों को समझने, संभावित समाधान खोजने और अपने विचारों को व्यावहारिक सुधार में बदलने में मदद करते हैं।

संरचित कोचिंग की बढ़ती अहमियत का पता विभिन्न शोधों से भी चलता है। इंटरनेशनल कोचिंग फेडरेशन (International Coaching Federation) की 2025 ग्लोबल कोचिंग स्टडी (2025 Global Coaching Study) के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 1,22,974 पेशेवर कोच थे। इस क्षेत्र से सालाना लगभग 5.34 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व भी प्राप्त हो रहा था। ये आँकड़े बताते हैं कि पेशेवर कोचिंग का क्षेत्र लगातार व्यापक हो रहा है। हालाँकि, ये आँकड़े केवल एग्जीक्यूटिव कोचिंग के क्षेत्र को अलग से नहीं दर्शाते हैं।

वर्ष 2023 में फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी (Frontiers in Psychology) नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में भी एग्जीक्यूटिव कोचिंग के प्रभावों की समीक्षा की गई। इस शोध में 20 अध्ययनों को शामिल किया गया, जिनमें रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल और कोचिंग से पहले तथा बाद के परिणामों का आकलन किया गया था। शोध के निष्कर्षों से पता चला कि एग्जीक्यूटिव कोचिंग का व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। हालाँकि, इसके परिणाम कोचिंग की प्रक्रिया, व्यक्ति की परिस्थितियों और सुधार को मापने के तरीकों के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।

सही कोचिंग मॉडल अपनाने से कंपनियों को अपने लीडर्स की क्षमताओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं।

- निर्णय लेने और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता बढ़ाना। इससे लीडर्स कठिन परिस्थितियों में भी सोच-समझकर फैसले ले सकते हैं।

- भावनात्मक बुद्धिमत्ता और आत्म-जागरूकता विकसित करना। इससे लीडर्स अपनी भावनाओं, व्यवहार और दूसरों पर पड़ने वाले अपने प्रभाव को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।

- कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों के साथ बेहतर संवाद करना। इससे टीम के सदस्यों के बीच तालमेल बढ़ाने और विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में मदद मिलती है।

- कार्यस्थल के विवादों और संगठनात्मक बदलावों को संभालना। इससे लीडर्स समस्याओं का समाधान खोजने और बदलावों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम हो सकते हैं।

- टीम के प्रदर्शन और जवाबदेही को मजबूत बनाना। इससे कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियाँ समझने और निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।

- करियर और पेशेवर विकास के स्पष्ट लक्ष्य तय करना। इससे लीडर्स अपनी प्राथमिकताओं को पहचानकर विकास के लिए सही दिशा में काम कर सकते हैं।

यह समझना जरूरी है कि कोई एक कोचिंग मॉडल हर लीडर के लिए समान रूप से प्रभावी नहीं होता। सही मॉडल का चुनाव व्यक्ति के लक्ष्यों, अनुभव, कार्यस्थल के माहौल और बदलाव अपनाने की उसकी इच्छा पर निर्भर करता है। इसलिए, कोच को लीडर की जरूरतों और परिस्थितियों को समझकर ही उपयुक्त मॉडल का चयन करना चाहिए।

1. GROW कोचिंग मॉडल (The GROW Coaching Model)

GROW कोचिंग मॉडल लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने में मदद करने वाले सबसे लोकप्रिय कोचिंग मॉडलों में से एक है। यह मॉडल सर जॉन व्हिटमोर (Sir John Whitmore) और परफॉर्मेंस कोचिंग के विकास में योगदान देने वाले अन्य विशेषज्ञों से जुड़ा हुआ है। व्हिटमोर की पुस्तक Coaching for Performance, जो पहली बार 1992 में प्रकाशित हुई थी, ने इस मॉडल को व्यापक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

GROW मॉडल एक सरल और व्यवस्थित तरीका प्रदान करता है। इसकी मदद से व्यक्ति अपनी समस्या को पहचानने से लेकर उसका समाधान निकालने और उस पर काम करने तक की प्रक्रिया पूरी कर सकता है। इसका उपयोग एग्जीक्यूटिव कोचिंग, लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम और मैनेजरों द्वारा कर्मचारियों के साथ की जाने वाली रोजमर्रा की बातचीत में किया जा सकता है।

GROW मॉडल का क्या अर्थ है? (What Does GROW Stand For?)

GROW शब्द चार चरणों से मिलकर बना है। प्रत्येक चरण लीडर को अपने लक्ष्य समझने, मौजूदा स्थिति का आकलन करने, समाधान खोजने और आगे की कार्ययोजना तैयार करने में मदद करता है।

G

लक्ष्य (Goal)

इस चरण में कोच व्यक्ति को यह तय करने में मदद करता है कि वह क्या हासिल करना चाहता है। लक्ष्य स्पष्ट, व्यावहारिक और महत्वपूर्ण होना चाहिए, ताकि उसे पूरा करने के लिए सही दिशा में काम किया जा सके। इसके लिए SMART लक्ष्य पद्धति का उपयोग किया जा सकता है। इसमें लक्ष्य विशिष्ट (Specific), मापने योग्य (Measurable), प्राप्त करने योग्य (Achievable), प्रासंगिक (Relevant) और समय-सीमा से बंधा (Time-bound) होना चाहिए।

R

वर्तमान स्थिति (Reality)

इस चरण में व्यक्ति अपनी मौजूदा स्थिति, उपलब्ध संसाधनों, खूबियों और चुनौतियों का आकलन करता है। कोच उससे ऐसे सवाल पूछ सकता है, जैसे “अभी क्या हो रहा है?” और “आपके आकलन के समर्थन में क्या प्रमाण हैं?” इससे तथ्यों और केवल अनुमान के बीच अंतर समझने में मदद मिलती है।

O

विकल्प (Options)

इस चरण में कोच व्यक्ति को समस्या के अलग-अलग समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करता है। उदाहरण के लिए, जिम्मेदारियाँ दूसरे कर्मचारियों को सौंपना, टीम से फीडबैक लेना, बातचीत में सुधार करना या काम करने के मौजूदा तरीके में बदलाव करना।

W

संकल्प या आगे की कार्ययोजना (Will or Way Forward)

अंतिम चरण में व्यक्ति सबसे उपयुक्त समाधान चुनता है और उस पर काम करने की योजना बनाता है। इसमें काम पूरा करने की समय-सीमा तय करना, जरूरी सहायता की पहचान करना और प्रगति को मापने का तरीका निर्धारित करना शामिल है।

एग्जीक्यूटिव कोच GROW मॉडल का उपयोग कैसे कर सकते हैं? (How Executive Coaches Can Apply GROW)

मान लीजिए कि किसी कंपनी के एक विभाग प्रमुख की टीम बार-बार प्रोजेक्ट तय समय पर पूरा नहीं कर पा रही है। ऐसी स्थिति में कोच GROW मॉडल का इस्तेमाल करके उस अधिकारी को समस्या का समाधान खोजने में मदद कर सकता है।

सबसे पहले, लक्ष्य तय किया जाएगा। उदाहरण के लिए, अगले तीन महीनों में समय पर पूरे होने वाले प्रोजेक्ट की संख्या बढ़ाना।

इसके बाद, वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसमें काम का असमान बँटवारा, मंजूरी मिलने में देरी, जिम्मेदारियों का स्पष्ट न होना और टीम के सदस्यों के बीच संवाद की कमी जैसी समस्याओं की पहचान की जाएगी।

विकल्पों के चरण में टीम के काम करने के तरीके में सुधार, जिम्मेदारियों का बेहतर बँटवारा और हर सप्ताह प्रगति की समीक्षा जैसे समाधान तलाशे जाएँगे।

अंत में, विभाग प्रमुख कुछ निश्चित कदम उठाने का संकल्प लेगा। इसके बाद पहले के प्रदर्शन की तुलना में नए परिणामों को मापकर यह देखा जाएगा कि सुधार हुआ है या नहीं।

इस तरह, GROW मॉडल नेतृत्व से जुड़ी सामान्य चर्चाओं को व्यावहारिक कदमों और मापने योग्य परिणामों में बदलने में मदद करता है।

GROW मॉडल के प्रमुख फायदे (Benefits of the GROW Model)

  • समझने और अपनाने में आसान। इसके चार स्पष्ट चरणों को सीखना और व्यवहार में लागू करना आसान है।

  • लक्ष्य पर केंद्रित। यह कोचिंग की बातचीत को स्पष्ट उद्देश्यों से जोड़ता है।

  • लचीला तरीका। इसका उपयोग व्यक्तिगत कोचिंग सत्रों, टीम की बैठकों और नियमित प्रदर्शन समीक्षा में किया जा सकता है।

  • कार्रवाई को बढ़ावा। यह व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझने और तय योजना पर काम करने के लिए प्रेरित करता है।

GROW मॉडल की सीमाएँ (Limitations of GROW)

यदि कोच हर चरण को बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के पूरा करने पर जोर देता है, तो यह मॉडल केवल एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह सकता है। नेतृत्व से जुड़ी कुछ समस्याएँ भावनात्मक चुनौतियों, मूल्यों के बीच टकराव या संगठन के भीतर जटिल संबंधों से जुड़ी होती हैं। ऐसी समस्याओं का समाधान केवल लक्ष्य तय करने से नहीं हो सकता।

इसलिए, कोच को परिस्थिति के अनुसार पर्याप्त समय देना चाहिए, ताकि व्यक्ति अपनी भावनाओं, समस्याओं के वास्तविक कारणों और संभावित समाधानों को गहराई से समझ सके।

किन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है? (Best Suited For)

यह मॉडल उन लीडर्स के लिए उपयोगी है, जो अपने प्रदर्शन में सुधार करना चाहते हैं, काम की प्राथमिकताएँ तय करना चाहते हैं, व्यावसायिक समस्याओं का समाधान खोजना चाहते हैं या नेतृत्व से जुड़े स्पष्ट और व्यावहारिक लक्ष्य बनाना चाहते हैं।

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2. STEPPA कोचिंग मॉडल (The STEPPA Coaching Model)

STEPPA मॉडल एग्जीक्यूटिव कोचिंग का एक ऐसा तरीका है, जिसमें व्यक्ति की भावनाओं को समझने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस मॉडल को एंगस मैकलियोड (Angus McLeod) ने विकसित किया था। उनके कोचिंग संबंधी कार्यों में इस मॉडल का वर्णन मिलता है।

STEPPA मॉडल मानता है कि हमारी भावनाएँ इस बात को प्रभावित करती हैं कि हम किसी स्थिति को कैसे समझते हैं, फैसले कैसे लेते हैं, दूसरों से किस तरह बातचीत करते हैं और दबाव में कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।

कुछ कोचिंग मॉडल मुख्य रूप से लक्ष्य तय करने और उन पर काम करने पर ध्यान देते हैं। इसके विपरीत, STEPPA मॉडल में किसी समस्या का समाधान चुनने से पहले उससे जुड़ी भावनाओं को समझने पर जोर दिया जाता है। यह तरीका उन परिस्थितियों में खास तौर पर उपयोगी हो सकता है, जहाँ लीडर्स को अनिश्चितता, विरोध, निराशा, चिंता या कार्यस्थल पर खराब होते संबंधों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

STEPPA का क्या अर्थ है? (What Does STEPPA Stand For?)

STEPPA मॉडल के छह चरण हैं। ये चरण किसी समस्या की पहचान करने से लेकर भावनाओं को समझने, योजना बनाने और उस पर अमल करने तक लीडर का मार्गदर्शन करते हैं।

S

विषय या समस्या (Subject)

सबसे पहले उस समस्या की पहचान की जाती है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। उदाहरण के लिए, कर्मचारियों को जिम्मेदारियाँ सौंपने में कठिनाई, कंपनी में बदलाव के दौरान टीम को संभालना, आलोचना का सामना करना या वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिका के लिए खुद को तैयार करना।

T

लक्ष्य (Target)

इस चरण में यह तय किया जाता है कि व्यक्ति क्या हासिल करना चाहता है। उदाहरण के लिए, असहमति के दौरान शांत रहकर बातचीत करना या महत्वपूर्ण व्यावसायिक फैसलों को प्रस्तुत करते समय अधिक आत्मविश्वास महसूस करना।

E

भावनाएँ (Emotion)

इस चरण में व्यक्ति यह समझने की कोशिश करता है कि समस्या से जुड़ी परिस्थितियों में उसे कैसा महसूस होता है। कोच उसे उन बातों या घटनाओं की पहचान करने में मदद करता है, जो उसकी भावनाओं को प्रभावित करती हैं। इससे यह समझने में भी मदद मिलती है कि उसकी भावनाएँ उसके व्यवहार को किस तरह बदलती हैं।

P

धारणा या नजरिया (Perception)

इस चरण में व्यक्ति यह देखता है कि वह किसी स्थिति को किस नजरिए से समझ रहा है। दूसरे लोगों के विचारों पर विचार करने से गलत धारणाओं, छूटी हुई जानकारियों और किसी के व्यवहार को समझने के दूसरे तरीकों का पता चल सकता है।

P

योजना (Plan)

समस्या और उसके संभावित समाधानों को समझने के बाद एक व्यावहारिक योजना तैयार की जाती है। इसमें काम के अलग-अलग चरण, जिम्मेदारियाँ, समय-सीमा और जरूरी सहायता तय की जाती है।

A

कार्रवाई (Act)

अंतिम चरण में व्यक्ति बनाई गई योजना पर अमल करता है। इसके बाद परिणामों का आकलन किया जाता है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई के तरीके में बदलाव किया जाता है।

एग्जीक्यूटिव कोचिंग में STEPPA मॉडल कैसे काम करता है? (How STEPPA Works in Executive Coaching)

मान लीजिए कि किसी कंपनी का एक वरिष्ठ मैनेजर अपने फैसलों पर सवाल उठाए जाने पर तुरंत नाराज हो जाता है या अपनी बात का बचाव करने लगता है। इस व्यवहार के कारण टीम के सदस्य खुलकर अपनी राय देने से बच सकते हैं। इससे जरूरी फीडबैक मिलने में कमी आ सकती है और समस्याओं का समय पर पता लगाना मुश्किल हो सकता है।

STEPPA मॉडल के जरिए कोच सबसे पहले इस समस्या को समझेगा और मैनेजर के लिए एक स्पष्ट लक्ष्य तय करने में मदद करेगा। इसके बाद यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दूसरों के सवाल उठाने पर मैनेजर को कैसा महसूस होता है। बातचीत के दौरान उसे यह समझ आ सकता है कि आलोचना को वह अपनी पेशेवर छवि या क्षमता पर सवाल के रूप में देखता है।

इसके बाद कोच मैनेजर को फीडबैक को दूसरे नजरिए से समझने में मदद करेगा। दोनों मिलकर ऐसी योजना तैयार कर सकते हैं, जिससे मैनेजर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत रहकर दूसरों की बात सुने।

उदाहरण के लिए, मैनेजर से सवाल पूछने वाले व्यक्ति की बात स्पष्ट करने के लिए प्रश्न कर सकता है, सही चिंताओं को स्वीकार कर सकता है और समस्या के समाधान के लिए सुझाव माँग सकता है।

समय के साथ, मैनेजर अपनी बातचीत के परिणामों की समीक्षा कर सकता है। इससे उसे पता चलेगा कि किन तरीकों से टीम के साथ संवाद बेहतर हुआ है और किन परिस्थितियों में अभी सुधार की जरूरत है।

STEPPA मॉडल के प्रमुख फायदे (Benefits of the STEPPA Model)

- भावनाओं की बेहतर समझ। यह लीडर्स को यह पहचानने में मदद करता है कि उनकी भावनाएँ उनके व्यवहार और फैसलों को कैसे प्रभावित करती हैं।

- संबंधों में सुधार। यह असहमति और आलोचना के समय सोच-समझकर प्रतिक्रिया देने के लिए प्रोत्साहित करता है।

- दूसरों का नजरिया समझना। इससे व्यक्ति अपनी शुरुआती धारणा से आगे बढ़कर दूसरे लोगों के विचारों और परिस्थितियों को समझने की कोशिश करता है।

- व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार विकास। यह भावनाओं से जुड़ी समझ को नेतृत्व के किसी खास लक्ष्य से जोड़ता है, जिससे सुधार के लिए व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं।

STEPPA मॉडल की सीमाएँ (Limitations of STEPPA)

भावनाओं पर केंद्रित कोचिंग के लिए विश्वास, संवेदनशीलता और खुलकर बातचीत करने का माहौल जरूरी है। कोच को यह नहीं मानना चाहिए कि कार्यस्थल की हर समस्या किसी व्यक्ति की भावनाओं के कारण ही पैदा होती है। कई बार संगठन की व्यवस्था, जरूरत से ज्यादा काम का दबाव या प्रबंधन की खराब नीतियाँ भी समस्याओं की वजह हो सकती हैं।

इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति को गंभीर मानसिक या मनोवैज्ञानिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, तो केवल कोचिंग पर्याप्त नहीं हो सकती। ऐसी स्थिति में उसे उचित योग्यता रखने वाले मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता लेने की जरूरत हो सकती है।

किन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है? (Best Suited For)

STEPPA मॉडल उन लीडर्स के लिए उपयोगी है, जो अपनी भावनात्मक बुद्धिमत्ता बढ़ाना चाहते हैं, कार्यस्थल पर विवादों को बेहतर तरीके से संभालना चाहते हैं, फीडबैक पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देना सीखना चाहते हैं या तनावपूर्ण परिस्थितियों में अपने व्यवहार और फैसलों को बेहतर बनाना चाहते हैं।

3. OSKAR कोचिंग मॉडल (The OSKAR Coaching Model)

OSKAR कोचिंग मॉडल एक ऐसा तरीका है, जो समस्याओं पर बार-बार चर्चा करने के बजाय उनके समाधान खोजने पर ध्यान देता है। इसे मार्क मैककरगो (Mark McKergow) और पॉल जेड. जैक्सन (Paul Z. Jackson) ने विकसित किया था। इस मॉडल का उद्देश्य व्यक्ति को अपने लक्ष्य पहचानने, अपनी मौजूदा खूबियों को समझने और आगे बढ़ने के व्यावहारिक तरीके खोजने में मदद करना है।

यह मॉडल उन वरिष्ठ अधिकारियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, जो कार्यस्थल की बार-बार सामने आने वाली समस्याओं के कारण आगे बढ़ने में कठिनाई महसूस करते हैं। इसमें केवल गलतियों और कमियों पर ध्यान देने के बजाय यह समझने की कोशिश की जाती है कि क्या चीजें पहले से अच्छी तरह काम कर रही हैं और उनका बेहतर उपयोग कैसे किया जा सकता है।

लीडरशिप डेवलपमेंट में OSKAR मॉडल इसलिए उपयोगी है, क्योंकि यह धीरे-धीरे सुधार करने, अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल करने और छोटे-छोटे व्यावहारिक कदम उठाने पर जोर देता है। यह उम्मीद नहीं करता कि कोई लीडर हर संगठनात्मक समस्या का समाधान तुरंत खोज लेगा।

OSKAR का क्या अर्थ है? (What Does OSKAR Stand For?)

OSKAR मॉडल पाँच चरणों पर आधारित है। इन चरणों की मदद से लीडर अपना लक्ष्य तय कर सकता है, अपनी प्रगति का आकलन कर सकता है और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके बेहतर परिणाम हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

O

परिणाम (Outcome)

इस चरण में यह स्पष्ट किया जाता है कि व्यक्ति क्या हासिल करना चाहता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई लीडर अपनी बातचीत करने की क्षमता में सुधार करना चाहता है, तो उसके लक्ष्य को अधिक स्पष्ट बनाया जा सकता है। वह टीम की बैठकों को अधिक उपयोगी और प्रभावी बनाने का लक्ष्य तय कर सकता है।

S

प्रगति का आकलन (Scaling)

इस चरण में व्यक्ति से आमतौर पर 1 से 10 के पैमाने पर अपनी मौजूदा स्थिति को अंक देने के लिए कहा जाता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि वह अपने लक्ष्य के कितने करीब है, उसे अपनी क्षमताओं पर कितना भरोसा है और अगला सुधार किस दिशा में किया जा सकता है।

K

ज्ञान और संसाधन (Know-how and Resources)

इस चरण में व्यक्ति की मौजूदा क्षमताओं, ज्ञान, अनुभवों, पेशेवर संबंधों और उपलब्ध संसाधनों की पहचान की जाती है। इनका उपयोग करके वह अपने लक्ष्य तक पहुँचने के बेहतर तरीके खोज सकता है।

A

क्षमताओं को पहचानना और कार्रवाई करना (Affirm and Action)

इस चरण में व्यक्ति की मौजूदा खूबियों और सफलताओं को पहचाना जाता है। इसके बाद ऐसे व्यावहारिक कदम तय किए जाते हैं, जिनसे इन क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके। OSKAR मॉडल की कुछ व्याख्याओं में खूबियों को पहचानने पर अधिक जोर दिया जाता है, जबकि अन्य में कार्ययोजना बनाने को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया जाता है।

R

समीक्षा (Review)

अंतिम चरण में यह देखा जाता है कि अब तक क्या बदलाव हुए हैं, व्यक्ति ने क्या सीखा है और आगे कौन-से कदम उठाने चाहिए। कोच और लीडर दोबारा 1 से 10 के पैमाने का उपयोग करके प्रगति का आकलन कर सकते हैं।

एग्जीक्यूटिव कोचिंग में OSKAR मॉडल का उपयोग कैसे करें? (How to Use OSKAR in Executive Coaching)

मान लीजिए कि किसी कंपनी का एक वरिष्ठ अधिकारी मानता है कि उसके विभाग में कर्मचारियों की भागीदारी और काम के प्रति रुचि कम हो रही है। ऐसी स्थिति में कोच शुरुआत में केवल समस्याओं और असफलताओं की सूची बनाने के बजाय अधिकारी से पूछ सकता है कि एक अच्छी और सक्रिय टीम कैसी होनी चाहिए।

इसके बाद अधिकारी अपनी टीम की मौजूदा स्थिति को 1 से 10 के पैमाने पर अंक देता है। वह उन मौकों पर भी विचार करता है, जब टीम के सदस्यों ने मिलकर अच्छा काम किया था। इन उदाहरणों से पता चल सकता है कि कर्मचारी स्पष्ट बातचीत, अच्छे काम के लिए प्रशंसा और अपने विचार साझा करने के अवसर मिलने पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

कोच अधिकारी को इन सकारात्मक पहलुओं का उपयोग करने में मदद करता है। इसके लिए नियमित फीडबैक बैठकें आयोजित करना, कर्मचारियों की उपलब्धियों को पहचानना और उचित फैसलों में उन्हें शामिल करना जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

इसके बाद होने वाली बैठकों में अधिकारी इन प्रयासों के परिणामों की समीक्षा करता है। इससे उसे यह समझने में मदद मिलती है कि कौन-से तरीके प्रभावी रहे हैं और आगे किन क्षेत्रों में सुधार किया जा सकता है।

OSKAR मॉडल के प्रमुख फायदे (Benefits of the OSKAR Model)

- मौजूदा क्षमताओं के आधार पर विकास। यह व्यक्ति की खूबियों और अनुभवों का उपयोग करके सुधार करने पर जोर देता है, न कि केवल उसकी कमियों पर ध्यान देता है।

- प्रगति को समझना आसान। 1 से 10 के पैमाने पर आकलन करने से समय के साथ होने वाले बदलावों पर चर्चा करना आसान हो जाता है।

- सकारात्मक सोच और भागीदारी। यह लोगों को अपनी उपलब्धियों पहचानने, आत्मविश्वास बढ़ाने और आगे काम करते रहने के लिए प्रोत्साहित करता है।

- व्यावहारिक समाधान पर ध्यान। यह उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके ऐसे सुधार करने में मदद करता है, जिन्हें वास्तव में लागू किया जा सकता है।

OSKAR मॉडल की सीमाएँ (Limitations of OSKAR)

समाधान पर केंद्रित रहने का मतलब यह नहीं है कि किसी समस्या के वास्तविक कारणों की अनदेखी की जाए। उदाहरण के लिए, यदि कर्मचारी लंबे समय से अपनी नौकरी से असंतुष्ट हैं, तो केवल छोटी-छोटी उपलब्धियों की प्रशंसा करना पर्याप्त नहीं होगा। कंपनी को वेतन, काम के बोझ, कार्यस्थल की नीतियों और प्रबंधन के तरीकों की भी समीक्षा करनी पड़ सकती है।

छोटे सुधारों को पहचानना जरूरी है, लेकिन इससे समस्या की जड़ तक पहुँचने की जरूरत खत्म नहीं हो जाती। इसलिए, कोच और लीडर को सकारात्मक बदलावों के साथ-साथ उन कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए, जो लगातार समस्याएँ पैदा कर रहे हैं।

किन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है? (Best Suited For)

OSKAR मॉडल उन वरिष्ठ अधिकारियों के लिए उपयोगी है, जो अपना आत्मविश्वास दोबारा मजबूत करना चाहते हैं, अपनी मौजूदा क्षमताओं को बेहतर बनाना चाहते हैं, टीम की भागीदारी बढ़ाना चाहते हैं या किसी स्पष्ट व्यावसायिक लक्ष्य की दिशा में लगातार प्रगति करना चाहते हैं।

4. CLEAR कोचिंग मॉडल (The CLEAR Coaching Model)

CLEAR कोचिंग मॉडल को नेतृत्व और कोचिंग विशेषज्ञ पीटर हॉकिन्स (Peter Hawkins) ने 1980 के दशक में विकसित किया था। यह मॉडल कोच और लीडर के बीच होने वाली बातचीत में ध्यान से सुनने, समस्या को गहराई से समझने, सहमति से जिम्मेदारियाँ तय करने और समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करने पर जोर देता है।

CLEAR मॉडल कई सत्रों में चलने वाली एग्जीक्यूटिव कोचिंग के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। इसका कारण यह है कि यह केवल लक्ष्य हासिल करने और काम पूरा करने पर ही ध्यान नहीं देता, बल्कि कोच और लीडर के बीच विश्वासपूर्ण संबंध बनाने को भी महत्वपूर्ण मानता है।

GROW मॉडल में लक्ष्य तय करने से लेकर कार्रवाई करने तक की प्रक्रिया पर अधिक जोर दिया जाता है। इसके विपरीत, CLEAR मॉडल में शुरुआत में ही अपेक्षाएँ स्पष्ट करने, लीडर की परिस्थितियों को समझने और समय के साथ किए गए बदलावों के प्रभाव की समीक्षा करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

CLEAR का क्या अर्थ है? (What Does CLEAR Stand For?)

CLEAR मॉडल पाँच चरणों पर आधारित है। ये चरण कोचिंग की शुरुआत में अपेक्षाएँ तय करने से लेकर समस्या को समझने, समाधान लागू करने और परिणामों की समीक्षा करने तक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

C

समझौता और अपेक्षाएँ तय करना (Contracting)

इस चरण में कोच और लीडर कोचिंग का उद्देश्य, अपेक्षित परिणाम, दोनों की जिम्मेदारियाँ, गोपनीयता से जुड़ी शर्तें और बातचीत की सीमाएँ तय करते हैं। यदि कंपनी इस कोचिंग का खर्च उठा रही है, तो यह भी स्पष्ट किया जाता है कि कंपनी क्या परिणाम चाहती है और उसके साथ कौन-सी जानकारी साझा की जा सकती है।

L

ध्यान से सुनना (Listening)

इस चरण में कोच लीडर को अपनी समस्याओं, अनुभवों और भविष्य की अपेक्षाओं के बारे में खुलकर बात करने का अवसर देता है। ध्यान से सुनने से कोच को स्थिति समझने में मदद मिलती है और वह बिना जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकाले समस्या की वास्तविक प्रकृति को जान सकता है।

E

गहराई से समझना (Exploring)

इस चरण में उन विचारों, मान्यताओं, संबंधों और संगठनात्मक परिस्थितियों पर विचार किया जाता है, जो समस्या को प्रभावित कर सकती हैं। कोच ऐसे सवाल पूछता है, जिनसे लीडर अपने व्यवहार के पुराने तरीकों को पहचान सके और समस्या को दूसरे नजरिए से देखने के लिए प्रेरित हो।

A

कार्रवाई (Action)

इस चरण में बातचीत से मिली सीख को व्यावहारिक कदमों में बदला जाता है। लीडर तय करता है कि उसे क्या बदलना है, बदलाव कब शुरू करना है और यह कैसे पता लगाया जाएगा कि उठाए गए कदम उपयोगी साबित हो रहे हैं या नहीं।

R

समीक्षा (Review)

अंतिम चरण में तय किए गए कदमों और अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की जाती है। कोच और लीडर इस पर चर्चा करते हैं कि क्या सुधार हुआ, क्या सीखने को मिला और आगे क्या बदलने की जरूरत है। नई जानकारी मिलने पर कार्ययोजना में भी बदलाव किया जा सकता है।

CLEAR मॉडल नेतृत्व में बदलाव लाने में कैसे मदद करता है? (How CLEAR Supports Leadership Transformation)

मान लीजिए कि किसी कंपनी में नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति हुई है। वह अनुभवी लीडरशिप टीम के बीच अपनी विश्वसनीयता स्थापित करने में कठिनाई महसूस कर रहा है। इसकी वजह अलग-अलग प्राथमिकताएँ, नए CEO की अपेक्षाओं को लेकर अनिश्चितता या संगठन में लंबे समय से चले आ रहे काम करने के तरीके हो सकते हैं।

सबसे पहले, कोच और CEO मिलकर कोचिंग के उद्देश्य तथा उसकी सीमाएँ तय करते हैं। इसके बाद, कोच CEO की बात ध्यान से सुनता है और उसकी चुनौतियों को समझने की कोशिश करता है। फिर दोनों मिलकर टीम के साथ संवाद करने के तरीकों, नेतृत्व से जुड़ी मान्यताओं और संगठन के भीतर संबंधों का आकलन करते हैं।

इसके बाद कार्रवाई के चरण में कुछ व्यावहारिक कदम तय किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, CEO टीम के सदस्यों के साथ व्यक्तिगत बातचीत कर सकता है, फैसले लेने की जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट कर सकता है और कंपनी की प्राथमिकताओं के बारे में खुलकर जानकारी दे सकता है।

अगली बैठकों में इन बदलावों की समीक्षा की जाती है। इससे पता चलता है कि टीम के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ा है या नहीं।

CLEAR मॉडल में आत्ममंथन और नियमित समीक्षा को महत्व दिया जाता है। इससे CEO को अपनी सफलताओं और गलतियों, दोनों से सीखने का अवसर मिलता है और वह समय के साथ अपनी नेतृत्व क्षमता में सुधार कर सकता है।

CLEAR मॉडल के प्रमुख फायदे (Benefits of the CLEAR Model)

- विश्वास बनाने में मदद। शुरुआत में ही अपेक्षाएँ और जिम्मेदारियाँ स्पष्ट होने से कोच और लीडर के बीच बेहतर संबंध बन सकते हैं।

- गहराई से सोचने का अवसर। यह लीडर्स को अपनी समस्याओं के पीछे मौजूद कारणों और परिस्थितियों को समझने के लिए प्रोत्साहित करता है।

- लंबे समय तक विकास में सहायक। कई कोचिंग सत्रों में इसका उपयोग करके लीडर की प्रगति पर लगातार काम किया जा सकता है।

- जवाबदेही को बढ़ावा। यह विचार-विमर्श को व्यावहारिक कार्रवाई से जोड़ता है और बाद में उसके परिणामों की समीक्षा करने में मदद करता है।

CLEAR मॉडल की सीमाएँ (Limitations of CLEAR)

CLEAR मॉडल में पर्याप्त समय और प्रतिबद्धता की जरूरत हो सकती है। यह विशेष रूप से तब लागू होता है, जब लीडर कई जटिल समस्याओं या एक-दूसरे से टकराती प्राथमिकताओं का सामना कर रहा हो।

इसके अलावा, जब कंपनी कोचिंग का खर्च उठाती है, लेकिन कोचिंग लेने वाला व्यक्ति वरिष्ठ अधिकारी होता है, तो अपेक्षाओं को स्पष्ट रखना जरूरी है। कोच को कंपनी की जरूरतों और अधिकारी के व्यक्तिगत विकास के बीच उचित संतुलन बनाए रखना चाहिए। गोपनीयता की शर्तों और साझा की जा सकने वाली जानकारी को शुरुआत में ही स्पष्ट करना भी आवश्यक है।

किन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है? (Best Suited For)

CLEAR मॉडल उन वरिष्ठ अधिकारियों के लिए उपयोगी है, जो संगठनात्मक बदलावों का नेतृत्व कर रहे हैं, नई नेतृत्वकारी भूमिका में अपनी जगह बना रहे हैं, कार्यस्थल पर संबंधों से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं या लंबे समय तक अपने पेशेवर विकास पर काम करना चाहते हैं।

5. एक्शन-सेंटर्ड लीडरशिप मॉडल (The Action-Centered Leadership Model)

एक्शन-सेंटर्ड लीडरशिप (Action-Centered Leadership या ACL) मॉडल नेतृत्व का एक ढाँचा है, जिसे जॉन एडेर (John Adair) ने 1970 के दशक में विकसित किया था। यह मॉडल केवल किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत विकास पर ध्यान नहीं देता, बल्कि एक अच्छे लीडर की तीन प्रमुख जिम्मेदारियों को एक साथ महत्व देता है। इनमें काम को सफलतापूर्वक पूरा करना, टीम बनाना और उसे मजबूत बनाए रखना तथा कर्मचारियों के व्यक्तिगत विकास में मदद करना शामिल है।

एग्जीक्यूटिव कोचिंग में यह मॉडल उपयोगी है, क्योंकि वरिष्ठ अधिकारियों को व्यावसायिक लक्ष्यों के साथ अपनी टीम और कर्मचारियों की जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है। उदाहरण के लिए, कोई लीडर कम समय में अच्छे व्यावसायिक परिणाम तो हासिल कर सकता है, लेकिन कर्मचारियों के विकास को नजरअंदाज कर सकता है। इसी तरह, वह टीम के साथ अच्छे संबंध बनाए रख सकता है, लेकिन काम की जिम्मेदारियाँ और प्रदर्शन से जुड़ी अपेक्षाएँ स्पष्ट नहीं कर सकता।

ACL मॉडल लीडर्स को इन तीनों जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करता है, ताकि कंपनी के लक्ष्य पूरे होने के साथ-साथ टीम और कर्मचारियों का विकास भी हो सके।

एक्शन-सेंटर्ड लीडरशिप के तीन प्रमुख तत्व (The Three Core Elements of Action-Centered Leadership)

1. कार्यों को पूरा करना (Task Achievement)

इसका मुख्य उद्देश्य निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करना है। इसमें काम की प्राथमिकताएँ तय करना, उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग करना, जिम्मेदारियाँ बाँटना, संभावित जोखिमों को समझना और परिणामों की नियमित समीक्षा करना शामिल है।

कोच इस प्रक्रिया में वरिष्ठ अधिकारियों को यह समझने में मदद करता है कि कर्मचारियों की जिम्मेदारियाँ स्पष्ट हैं या नहीं और बनाई गई कार्ययोजना कंपनी के बड़े व्यावसायिक लक्ष्यों के अनुरूप है या नहीं।

2. टीम बनाना और उसका प्रबंधन करना (Team Building and Management)

एक अच्छे लीडर की जिम्मेदारी ऐसी कार्यसंस्कृति बनाना है, जिसमें कर्मचारी मिलकर प्रभावी ढंग से काम कर सकें। इसके लिए टीम के साझा लक्ष्य तय करना, बेहतर संवाद को बढ़ावा देना, आपसी मतभेदों को सुलझाना, विश्वास कायम करना और सभी के प्रयासों में तालमेल बनाए रखना जरूरी है।

जब टीम के सदस्यों को अपनी जिम्मेदारियाँ स्पष्ट होती हैं और वे एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हैं, तो काम की गुणवत्ता और टीम का प्रदर्शन बेहतर हो सकता है।

3. कर्मचारियों का व्यक्तिगत विकास (Individual Development)

हर कर्मचारी की क्षमताएँ, रुचियाँ और सीखने की जरूरतें अलग-अलग होती हैं। इसलिए, लीडर को कर्मचारियों को उनकी जरूरत के अनुसार फीडबैक देना चाहिए, उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपनी चाहिए और सीखने के नए अवसर उपलब्ध कराने चाहिए।

इसके साथ ही, कर्मचारियों को अपने काम से जुड़े कौशल विकसित करने और भविष्य में बड़ी जिम्मेदारियाँ निभाने के लिए तैयार करना भी जरूरी है। इससे कर्मचारियों का आत्मविश्वास बढ़ सकता है और वे अपने काम में बेहतर योगदान दे सकते हैं।

एग्जीक्यूटिव कोचिंग में ACL मॉडल का उपयोग कैसे करें? (Applying ACL to Executive Coaching)

मान लीजिए कि किसी कंपनी का सेल्स डायरेक्टर लगातार अपने बिक्री लक्ष्य हासिल कर रहा है, लेकिन उसके विभाग में कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर काफी अधिक है। केवल बिक्री के आँकड़ों पर ध्यान देने से यह पता चल सकता है कि विभाग का प्रदर्शन अच्छा है, लेकिन इससे यह स्पष्ट नहीं होगा कि कर्मचारी नौकरी क्यों छोड़ रहे हैं।

ACL मॉडल का उपयोग करके कोच सेल्स डायरेक्टर को तीनों प्रमुख क्षेत्रों का आकलन करने में मदद कर सकता है।

सबसे पहले, कार्यों की समीक्षा की जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि बिक्री के लक्ष्य वास्तविक हैं या नहीं, कर्मचारियों पर काम का बोझ कितना है और जिम्मेदारियाँ उचित तरीके से बाँटी गई हैं या नहीं।

दूसरे चरण में, टीम के प्रबंधन पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें संवाद की कमी, कर्मचारियों के बीच अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा और आपसी सहयोग की कमी जैसी समस्याओं की पहचान की जाएगी।

तीसरे चरण में, कर्मचारियों के व्यक्तिगत विकास का आकलन किया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि कर्मचारियों को उपयोगी फीडबैक, करियर में आगे बढ़ने के अवसर और जरूरी सहायता मिल रही है या नहीं।

इन तीनों क्षेत्रों की समीक्षा करने के बाद सेल्स डायरेक्टर एक ऐसी सुधार योजना तैयार कर सकता है, जो बिक्री के अच्छे प्रदर्शन को बनाए रखने के साथ-साथ कर्मचारियों की जरूरतों को भी पूरा करे।

एक्शन-सेंटर्ड लीडरशिप मॉडल के प्रमुख फायदे (Benefits of Action-Centered Leadership)

- नेतृत्व में संतुलन। यह लीडर्स को व्यावसायिक प्रदर्शन, टीमवर्क और कर्मचारियों के व्यक्तिगत विकास पर समान रूप से ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।

- व्यावहारिक उपयोग। यह नेतृत्व के सिद्धांतों को रोजमर्रा के प्रबंधन से जुड़े कार्यों के साथ जोड़ता है।

- जिम्मेदारियाँ सौंपने में सुधार। इससे लीडर्स कर्मचारियों की क्षमताओं और विकास की जरूरतों के अनुसार काम बाँटना सीख सकते हैं।

- संगठनात्मक लक्ष्यों के साथ तालमेल। यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि व्यक्तिगत और टीम के लक्ष्य कंपनी के व्यापक व्यावसायिक उद्देश्यों में योगदान दें।

एक्शन-सेंटर्ड लीडरशिप मॉडल की सीमाएँ (Limitations of ACL)

ACL मुख्य रूप से नेतृत्व से जुड़ा एक मॉडल है, न कि कोचिंग की बातचीत को चरणबद्ध तरीके से चलाने का संपूर्ण ढाँचा। इसलिए, कोच को व्यक्तिगत कोचिंग सत्रों को व्यवस्थित करने के लिए इसके साथ GROW, CLEAR या किसी अन्य कोचिंग मॉडल का उपयोग करना पड़ सकता है।

इसके अलावा, इस मॉडल के प्रभावी उपयोग के लिए सही निर्णय लेना जरूरी है। हर परिस्थिति में काम, टीम और कर्मचारियों के व्यक्तिगत विकास को समान समय देना संभव नहीं होता। उदाहरण के लिए, किसी आपात स्थिति में काम पूरा करने को प्राथमिकता देनी पड़ सकती है, जबकि लंबे समय की योजना बनाते समय कर्मचारियों के विकास पर अधिक ध्यान देना जरूरी हो सकता है।

इसलिए, लीडर को परिस्थिति और जरूरत के अनुसार इन तीनों तत्वों के बीच उचित संतुलन बनाना चाहिए।

किन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है? (Best Suited For)

यह मॉडल CEO, विभाग प्रमुखों, निदेशकों और मैनेजरों के लिए उपयोगी है, जिन्हें कंपनी के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के साथ-साथ टीम की कार्यक्षमता बढ़ाने और कर्मचारियों के विकास पर भी ध्यान देना होता है।