Truecaller ने भारत में ‘Family Protection’ फ़ीचर लॉन्च किया

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Truecaller ने भारत में ‘Family Protection’ फ़ीचर लॉन्च किया
14 Mar 2026
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News Synopsis

बढ़ते फोन स्कैम और फ्रॉड से आपके परिवार को सुरक्षित रखने के लिए Truecaller ने एक नया और पूरी तरह फ्री 'फैमिली सेफ्टी' फीचर पेश किया है। अब घर का कोई भी टेक-सेवी सदस्य एडमिन बनकर परिवार के बुजुर्गों और अन्य सदस्यों को संदिग्ध कॉल्स से बचा सकता है।

क्या आपके घर में भी बुजुर्ग या ऐसे सदस्य हैं, जो स्मार्टफोन की तकनीक को कम समझते हैं, और अक्सर स्कैम कॉल्स के जाल में फंस जाते हैं? अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। कॉलर आइडेंटिफिकेशन एप ट्रूकॉलर ने एक नया फीचर लॉन्च किया है। जो परिवार के ऐसे लोगों को ऑनलाइन और फोन कॉल फ्रॉड से बचाने में बड़ी भूमिका निभाएगा जो तकनीक से ज्यादा रूबरू नहीं हैं। आइए समझते हैं, कि यह नया फीचर क्या है, और आपके लिए कैसे मददगार साबित हो सकता है।

यह फीचर कैसे काम करता है?

इस फीचर की मदद से आप अपने परिवार या दोस्तों का एक सेफ्टी ग्रुप बना सकते हैं। घर का जो भी सदस्य स्मार्टफोन और तकनीक को अच्छी तरह समझता है, वो इस ग्रुप का एडमिन बन सकता है, और अपने साथ अधिकतम 5 सदस्यों को जोड़ सकता है। ग्रुप बनने के बाद, जब भी किसी सदस्य को कोई संदिग्ध या स्कैम कॉल आती है, तो एडमिन के फोन पर तुरंत एक अलर्ट पहुंच जाता है। अलर्ट मिलने पर अगर एडमिन को लगता है, कि कॉल करने वाला कोई ठग हो सकता है, तो वह अपने फोन से ही रिमोटली उस कॉल को बीच में काट सकता है। हालांकि यहां यह ध्यान रखना जरूरी है, कि कॉल को रिमोटली कट करने की सुविधा फिलहाल सिर्फ एंड्रॉयड यूजर्स के लिए ही उपलब्ध है, जबकि फ्रॉड कॉल का अलर्ट एंड्रॉयड और आईओएस दोनों तरह के डिवाइस पर मिलेगा।

इस फीचर की अन्य खास बातें

इस फीचर की सबसे अच्छी बात यह है, कि इसके इस्तेमाल के लिए आपको ट्रूकॉलर का कोई पेड या प्रीमियम प्लान लेने की जरूरत नहीं है, ये 100% फ्री है। एंड्रॉयड यूजर्स के मामले में एडमिन को ग्रुप मेंबर्स के फोन का रियल-टाइम स्टेटस भी दिखता है। जैसे फोन साइलेंट पर है या नहीं, बैटरी कितनी है, या फिर कोई सदस्य चल या ड्राइव तो नहीं कर रहा। इस जानकारी की मदद से आप उन्हें सही और सुरक्षित समय पर कॉल कर सकते हैं। इसके साथ ही एडमिन को किसी भी संदिग्ध नंबर या विदेशी (इंटरनेशनल) कॉलिंग कोड को ब्लॉक करने की पावर भी दी गई है, और इस तरह तैयार की गई ब्लॉकलिस्ट को पूरे ग्रुप के साथ शेयर भी किया जा सकता है। इतनी सारी सेटिंग्स होने के बावजूद हर सदस्य की प्राइवेसी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी क्योंकि ट्रूकॉलर ने स्पष्ट किया है, कि एडमिन को किसी भी सदस्य की सामान्य कॉल या SMS हिस्ट्री देखने की बिल्कुल इजाजत नहीं होगी।

एआई करेगा स्कैमर्स की छुट्टी

ट्रूकॉलर एक ऐसे एआई सिस्टम पर भी काम कर रहा है, जो लाइव कॉल के दौरान स्कैमर्स के शब्दों को पकड़ सकेगा। अगर कॉल पर स्कैम में इस्तेमाल होने वाले शब्द जैसे- 'डिजिटल अरेस्ट' बोले जाते हैं, तो सिस्टम खतरे को भांपकर कॉल को खुद ही डिस्कनेक्ट कर देगा।

इस फीचर की जरूरत क्यों पड़ी?

भारत में स्कैम कॉल्स की समस्या बहुत बड़ी हो चुकी है। ट्रूकॉलर के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल उन्होंने 7.7 अरब (770 करोड़) से ज्यादा फ्रॉड कॉल्स की पहचान की थी। हालांकि सरकार सिम बाइंडिंग जैसे नियमों से इस पर नकेल कस रही है, लेकिन यह नया फीचर सीधे तौर पर आम लोगों को कंट्रोल देता है। इसे दुनिया भर में (भारत सहित) रोलआउट किया जा रहा है, जबकि पहले इसे स्वीडन, मलेशिया जैसे देशों में टेस्ट किया जा चुका है।

ट्रूकॉलर के सामने क्या हैं, चुनौतियां?

यूजर्स के लिए भले ही ये नया फीचर बहुत बेहतरीन हो लेकिन बिजनेस के नजरिए से देखा जाए तो ट्रूकॉलर अभी काफी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। 2025 की चौथी तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के मुनाफे में 49% और विज्ञापन से होने वाली कमाई में 31% की भारी गिरावट आई है। साथ ही पिछले एक साल में इसका शेयर भी 80% तक गिर चुका है। आर्थिक चुनौतियों के अलावा भारत में कॉलर का असली नाम दिखाने वाले सरकारी सिस्टम (CNAP) के लागू होने से भी कंपनी को कड़ी टक्कर मिल रही है। हालांकि इन सबके बावजूद ट्रूकॉलर का मानना है, कि उनका कम्युनिटी-आधारित स्पैम रिपोर्टिंग सिस्टम उन्हें केवल नाम दिखाने वाले फीचर से कहीं आगे रखता है।

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